For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

आध्यात्मिक चिंतन

Information

आध्यात्मिक चिंतन

इस समूह मे सदस्य गण आध्यात्मिक विषयों पर चिंतन एवं स्वस्थ चर्चायें कर सकतें हैं ।

Location: world
Members: 72
Latest Activity: Oct 4

Discussion Forum

PAIN .. PRAYER.. AND GRATITUDE … a perspective 2 Replies

                              PAIN .. PRAYER.. AND  GRATITUDE … a perspective So true. .... sometimes  people come close to you, nay, very close to you, not necessarily because their affection for…Continue

Started by vijay nikore. Last reply by vijay nikore Oct 4.

TIME "IS" and TIME is "NOT"

Time "IS" and Time is "NOT.... this is the greatest philosophic discovery by our sages as well as by scientists like Einstein.Given the undue importance to TIme, it envelopes every person, every…Continue

Started by vijay nikore Oct 4.

गति और प्रगति

197 गति और प्रगतिकहा जाता है कि यह व्यक्त जगत देश, काल और पात्र (अर्थात् टाइम, स्पेस और पर्सन) के अनुसार गतिशील है। अव्यक्त स्थिति में देश, काल और पात्र न होने से गतिशीलता भी नहीं है । प्रत्येक…Continue

Started by Dr T R Sukul Jun 7.

DEVOTION ... HERE AND NOW 1 Reply

                                   An event in life can be life changing. It can steer us towards devotion for God.On the other hand, devotion to God, if already present, can help us steer through…Continue

Started by vijay nikore. Last reply by KALPANA BHATT ('रौनक़') Sep 2, 2016.

Comment Wall

Comment

You need to be a member of आध्यात्मिक चिंतन to add comments!

Comment by ajay yadav on February 19, 2013 at 11:42pm

अपने आपको वह चीज करते या होते या पाते सोंचे या कल्पना करें जिसके लिए आप मेहनत कर रहें हैं |सभी विवरण भरें |महसूस करें ,देंखे ,चंखे ,स्पर्श करें ,सुने !अपनी नई स्थिति पर दूसरे लोगों की प्रतिक्रियाओ पर ध्यान दें |चाहें उनकी प्रतिक्रियाएं जों
भी हों ,कहें की आपके लिए सब ठीक हैं |
***************************************
जब आप रात को सोने जातें हैं तो अपनी आँखे बंद किजीयें और फिर से अपने जीवन की सभी अच्छी बातों के लिए आभार जताएं |इससे और भी अच्छी बातें होंगी |
***************************************
शान्ति से सोने जाएँ |भरोसा रखें की जीवन की प्रक्रिया आपके पक्ष में हैं और वह आपकी बेहतरी तथा खुशियों का ध्यान रख रही हैं|
*********************************************
आपके हृदय में इतना प्रेम हैं की आप पूरी पृथ्वी का उपचार कर सकते है|लेकिन फ़िलहाल चलो इस प्रेम को केवल अपने उपचार के लिए इस्तेमाल के लिए इस्तेमाल करें |अपने हृदय के केन्द्र में एक गर्माहट ,एक सौम्यता ,एक नरमी आतें देखे |इस भावना को अपने सोचने और बोलने के तरीको को बदलनें दें |

Comment by ajay yadav on February 19, 2013 at 11:39pm

आप गहरे विश्वास के साथ जों भी अपेक्षा करते हैं ,वह स्वयं पूरी होने वाली भविष्यवाणी बन जाती हैं[self fulfilling prophecy]|आपको जिंदगी में वही मिलता हैं जिसकी आप अपेक्षा करते हैं |
आपकी जों खुद से अपेक्षाएं होती हैं ,आप उनसे ऊँचे कभी नही उठ
सकतें |चूँकि वे पूरी तरह से आपके नियंत्रण में होंती हैं इसलिए यह सुनिश्चित करना हैं की आपकी अपेक्षाएं उस जीवन के अनुरूप हों,जिसे आप भविष्य में सच होने की आशा रखतें हैं |खुद से हमेशा सर्वश्रेष्ठ की अपेक्षा रखें |
सिर्फ सकारात्मक अपेक्षाओ की शक्ति ही आपके पूरे व्यक्तित्व को बदल सकती हैं …..साथ ही आपकी जिंदगी को |

Comment by vijay nikore on February 17, 2013 at 1:53pm

प्रिय मित्रो,

 

इस समूह पर नए सदस्यों का हार्दिक  स्वागत है,

और अन्य सदस्यों को भी मेरा सादर अभिनन्दन!

 

इस समूह को आरम्भ हुए अभी केवल ११ दिन हुए  हैं,

और अब हम १९ सदस्य हैं। स्पष्ट है कि इस चिंतन-क्षेत्र

में obo पर पर्याप्त रूचि है।

 

यह समूह बनाने के लिए obo admin को धन्यवाद।

आशा है कि अब आगे बढ़ने के लिए  हम सभी यहाँ

अपने योगदान से एक-दूसरे के चिंतन को समृद्ध करेंगे।

 

इस पर ४ लेख post हो चुके हैं.. उन पर भी शीघ्र अपने

अमूल्य दार्शनिक विचार दें, और नए लेख लिख कर

अपने विचारों का रसास्वादन कराएँ।

 

सादर और सस्नेह,

विजय निकोर

Comment by sanjiv verma 'salil' on February 15, 2013 at 6:15pm

जब ज्ञान दें / गुरु तभी  नर/ निज स्वार्थ से/ मुँह मोड़ता।

      तब आत्म को / परमात्म से / आध्यात्म भी / है जोड़ता।।

( छंद विधान: हरिगीतिका X 4 = 11212 की चार बार आवृत्ति)

Comment by vijay nikore on February 14, 2013 at 11:24am

Welcome to new members of this Group ... Deepti Sharma ji and Dinesh Pareek Ji.

Looking forward to your active participation.

Vijay Nikore

Comment by vijay nikore on February 8, 2013 at 12:03pm
प्रिय सदस्यगण:
हिन्दी भाषा मुझको बहुत प्यारी है। इसीलिए मेरी कविताएँ ९०% हिन्दी में ही हैं।
 
मैं और मेरी जीवन साथी, नीरा जी, आपस में हिन्दी में ही वार्तालाप करते हैं। परन्तु, आध्यात्मिक क्षेत्र में मेरी शिक्षा अंग्रेज़ी में हुई है क्यूँ कि रामाकृष्ण मिश्न और चिन्मया मिश्न के सभी स्वामी जिनसे हमें आध्यात्मिक शिक्षा मिली, वह अन्ग्रेज़ी में ही मिली। इतना ही नहीं, इस विषय पर अच्छी पुस्तकें बहुधा अन्ग्रेज़ी में ही उपलब्ध हैं। मेरे निजी पुस्तकालय में आध्यात्मिक्ता पर लगबघ १०० से अधिक पुस्तकें हैं, और इनमें केवल एक ही हिन्दी में है, और उसमें व्याख्या  इतनी अच्छी नहीं दी गई। अन्ग्रेज़ी में यह शिक्षा होने का नुक्सान यह रहा कि इस विषय पर हमें हमारे विचार अन्ग्रेज़ी में ही आते हैं।
अत: मैं आपसे वायदा करता हूँ कि कुछ समय के बाद मैं लेख हिन्दी में भी भेजूँगा।
 
सादर और सस्नेह,
 
आपके संग सहविद्यार्थी,
विजय निकोर
 
Comment by vijay nikore on February 7, 2013 at 4:17am

My  "dear"  friends:

I just saw that we now have 10 members. The last I saw was a number "6".

Every member is going to add more enrichment and fun for us all. Thank you and congratulations. You may wish to offer this " enrichment" to your friends of  "like mind", by extending to them an invitation to join this आध्यातमिक चिंतन group.

With regards and care,

Vijay Nikore

Comment by Anwesha Anjushree on February 4, 2013 at 10:27pm

Shukriya mujhe aamantrit karne ka...thodi samay ki asuvida hai...parantu aane ki koshish karungi...main jyada samay nahi de paati...chhama prarthi....naman


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on February 4, 2013 at 4:41pm

अध्यात्म पर पहली पोस्ट पढ़ी अच्छी लगी धीरे धीरे समझने कि कोशिश करूँगी हार्दिक आभार आदरणीय 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on February 4, 2013 at 3:50pm

आध्यात्मिक चिंतन समूह.. .

आध्यात्म क्या है, जानना अच्छा लगा.. .

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

amod shrivastav (bindouri) posted a blog post

बहुत पछतायेगा वो मेरा पता पा कर - ग़ज़ल

बह्र - 1222-122-2212-22कोई यूँ खुश हुआ हो अपना खुदा पाकर।।बहुत पछताएंगे वो मेरा पता पाकर।।सफर चलना…See More
1 minute ago
narendrasinh chauhan commented on V.M.''vrishty'''s blog post जलती मुस्कुराहटें
"लाजवाब"
34 minutes ago
narendrasinh chauhan commented on रकमिश सुल्तानपुरी's blog post ग़ज़ल-वक्त आने दो जरा फ़िर
"खुब सुन्दर रचना"
34 minutes ago
narendrasinh chauhan commented on Anita Maurya's blog post नज़्म - कहाँ जाऊँ के तेरी याद का
"लाजवाब"
38 minutes ago
Surkhab Bashar commented on Sushil Sarna's blog post अनकहा ...
"जनाब  सुशील  सरना  जी आदाब, बहुत अच्छी रचना हुई, मुबारक पेश करता हूँ"
3 hours ago
Profile IconSurkhab Bashar and Bahorik Ram Sahu joined Open Books Online
4 hours ago
V.M.''vrishty'' commented on V.M.''vrishty'''s blog post जलती मुस्कुराहटें
"आदरणीय बृजेश कुमार जी,सादर अभिनंदन! बहुत बहुत हार्दिक धन्यवाद!"
4 hours ago
V.M.''vrishty'' commented on V.M.''vrishty'''s blog post जलती मुस्कुराहटें
"आदरणीय समर कबीर सर, सादर नमन! आपके स्नेहिल शब्दो के लिए हृदय से आभार!"
4 hours ago
V.M.''vrishty'' commented on V.M.''vrishty'''s blog post जलती मुस्कुराहटें
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी,प्रणाम! बहुत बहुत धन्यवाद!"
4 hours ago
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post पढ़ो तो इसको’ फाड़ो मत- गजल
"आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी सादर नमस्कार, सही कहा आपने , वाकई हम…"
7 hours ago
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post पढ़ो तो इसको’ फाड़ो मत- गजल
"आदरणीय  Samar kabeer जी सादर नमस्कार, हमेशा की तरह आपकी शानदार इस्लाह को सादर नमन, आपसे…"
7 hours ago
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post पढ़ो तो इसको’ फाड़ो मत- गजल
"आदरणीय बृजेश कुमार 'ब्रज'   जी सादर नमस्कार, आपकी हौसलाफजाई का…"
7 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service