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Sushil Sarna
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Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post तीन क्षणिकाएं :
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,अच्छी क्षणिकाएँ हुई हैं,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
13 hours ago
Sushil Sarna posted blog posts
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post मेरे आसमान का चाँद ...
"आदरणीय समर कबीर साहिब, आदाब .... सृजन पर आपकी आत्मीय प्रशंसा का दिल से आभार। आपके द्वारा त्रुटि बिलकुल सही है। पोस्ट करने से पहले मैं एडिट करने भूल गया। अभी संशोधित कर पुनः पोस्ट करता हूँ। इस हेतु आपका तहे दिल से शुक्रिया।"
yesterday
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post मेरे आसमान का चाँद ...
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,अच्छी कविता हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । 'आसमान का चाँद से'--"आसमान के चाँद से" ये त्रुटि दो जगह है,देखियेगा ।"
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

मेरे आसमान का चाँद ...

आसमान का चाँद :शीत रैन की धवल चांदनी में बैचैन उदास मन बैठ जाता है उठकर करने कुछ बात आसमान के चाँद सेमैं अकेली छत की मुंडेर पर उसकी यादों में स्वयं को आत्मसात कर मांगती हूँ अपना प्यार आसमान के चाँद सेकेसरिया चांदनी में उसका प्यार लेकर आया था मेरे पास मौन चाहतें उदास प्यास अदृश्य समर्पण कहती रही मौन व्यथा देर तकआसमान के चाँद सेकौमुदी रैन में तकिये पर बिखरी उसकी गंध को सहेजते सहेजते मैं कब सो गयी कुछ पता न चला निश्चिंत हो गयी श्वासों में जीवित कस्तूरी गंध से सुवासित…See More
Friday
Sushil Sarna posted a blog post

३ क्षणिकाएं :

३ क्षणिकाएं :तृप्त हो गए चक्षु पिघला कर एक पाषाण से बोझ को हृदय की स्मृति श्रृंखला से.......................मृत्यु किसी जीवंत स्वप्न का यथार्थ है ज़िंदगी यथार्थ का आभास है प्रीत आभास में निहित विश्वास है...............................कुछ टूटा कुछ छूटा प्रीत पथ के अंतस से वेदना साकार हुई बुत बनी आँखों से अनुत्तरित एकांत विकलता का पर्याय बना बीता क्षण स्मृतिपृष्ठ का अविनाशी अध्याय बनासुशील सरना मौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Jan 17
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post ३ क्षणिकाएं :
"आदरणीय Mahendra Kumar जी सृजन पर आपकी मनोहारी प्रशंसा का हार्दिक आभार।"
Jan 16
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post ३ क्षणिकाएं :
"आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी सृजन पर आपकी मनोहारी प्रशंसा का हार्दिक आभार।"
Jan 16
Mahendra Kumar commented on Sushil Sarna's blog post ३ क्षणिकाएं :
"आदरणीय सुशील सरना जी, आपकी तीनों क्षणिकाएँ उम्दा हैं. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. //विश्वास है// सादर."
Jan 16
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Sushil Sarna's blog post ३ क्षणिकाएं :
"आद0 सुशील सरना जी सादर अभिवादन। तीनों क्षणिकाएँ उत्तम हैं। इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Jan 16
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post ३ क्षणिकाएं :
"आदo  सुचिसंदीप अग्रवाल जी सृजन पर आपकी मनोहारी प्रशंसा का हार्दिक आभार।"
Jan 11
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post ३ क्षणिकाएं :
"आदरणीय  PHOOL SINGH जी सृजन पर आपकी मनोहारी प्रशंसा का हार्दिक आभार।"
Jan 11
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post ३ क्षणिकाएं :
"आदरणीय  Samar kabeer जी सृजन पर आपकी मनोहारी प्रशंसा का हार्दिक आभार।"
Jan 11
सुचिसंदीप अग्रवालl commented on Sushil Sarna's blog post ३ क्षणिकाएं :
"सुशील सरना जी, बहुत ही उम्दा, उत्तम रचना। सृजन हेतु हार्दिक बधाई"
Jan 11
PHOOL SINGH commented on Sushil Sarna's blog post ३ क्षणिकाएं :
""सरना जी" बहुत सूंदर रचना बधाई स्वीकारें"
Jan 10
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post ३ क्षणिकाएं :
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,तीनों क्षणिकाएँ उत्तम हैं,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Jan 9

Profile Information

Gender
Male
City State
Jaipur-Rajasthan
Native Place
New Delhi
Profession
Retired from Central Govt.Service as Superintending Officer
About me
I am a simple,sentimental and transparent person.Poetry is my hobby and passion

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तीन क्षणिकाएं :

तीन क्षणिकाएं :

बन जाती हैं

बूँदें

घास पर

ओस की

जब कभी

रोता है मयंक

कौमुदी के वियोग में

.............................

एक भारहीन अतीत

हृदय कलश में

पिउनी पुष्प सा

सुवासित होता रहा

मैं

देर तक

समर्पित रही

अधर तटों के

क्षितिज पर

.........................

जीत दम्भ की

प्राचीर को तोड़ते

जब

दोनों हार गए

तो

प्रचीर भी

हार गई

जीत की

स्वीकार पलों…

Continue

Posted on January 21, 2019 at 7:13pm — 1 Comment

मेरे आसमान का चाँद ...

आसमान का चाँद :

शीत रैन की

धवल चांदनी में

बैचैन उदास मन

बैठ जाता है उठकर

करने कुछ बात

आसमान के चाँद से

मैं अकेली

छत की मुंडेर पर

उसकी यादों में

स्वयं को आत्मसात कर

मांगती हूँ अपना प्यार

आसमान के चाँद से

केसरिया चांदनी में

उसका प्यार

लेकर आया था

मेरे पास

मौन चाहतें

उदास प्यास

अदृश्य समर्पण

कहती रही

मौन व्यथा

देर तक

आसमान के चाँद…

Continue

Posted on January 18, 2019 at 5:30pm — 2 Comments

३ क्षणिकाएं :

३ क्षणिकाएं :

तृप्त हो गए

चक्षु

पिघला कर

एक पाषाण से बोझ को

हृदय की

स्मृति श्रृंखला से

.......................

मृत्यु

किसी जीवंत स्वप्न का

यथार्थ है

ज़िंदगी

यथार्थ का

आभास है

प्रीत

आभास में निहित

विश्वास है

...............................

कुछ टूटा

कुछ छूटा

प्रीत पथ के

अंतस से

वेदना साकार हुई

बुत बनी आँखों से …

Continue

Posted on January 8, 2019 at 2:30pm — 10 Comments

कलम ....

कलम ....

कहाँ

चल सकती है

बिना बैसाखी के

कागज़ पर

कलम

पडी रहती है

निर्जीव सी

किसी के इंतज़ार में

कलमदान में

कलम

लेकिन

ये न हो तो

आसमान की ऊंचाईयों को

ज़मीन नहीं मिलती

शब्दों को पंख नहीं मिलते

सोच को साकार का माध्यम नहीं मिलता

भाव अन-अंकुरित ही रह जाते हैं

यथार्थ में देखा जाए तो

कलम को बैसाखी की नहीं

अपितु

भाव

बिना कलम की बैसाखी के

मृत समान होते…

Continue

Posted on January 7, 2019 at 2:46pm — 2 Comments

Comment Wall (34 comments)

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At 11:15pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुशील सरना जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी "कविता : कितना अच्छा होता" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 1:35am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका मेल बॉक्स ब्लॉक होने के कारण मेल सेंड नहीं हो रहा है. 

At 1:29am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय सुशील सरना सर, विलम्ब से प्रत्युत्तर हेतु क्षमा. आपको मेल कर दिया है. सादर 

At 10:17pm on April 7, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ० सरना भाई जी, सादर  प्रणाम!

आपका हार्दिक स्वागत है.  मित्रता से भाग्योदय होता है ,  मैं धन्य हुआ. सादर

At 9:46am on April 1, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय सुशील जी ..महीने का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर मेरी तरफ से हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

At 6:02am on March 20, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ०  सुशील सरना भाई जी, सादर प्रणाम!  आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" चुने जाने पर बहुत-बहुत बधाई. सादर

At 4:22pm on March 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

सुशील सरना जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:00pm on February 17, 2016, Tasdiq Ahmed Khan said…

मोहतरम जनाब सुशील सरना  साहिब ,  यह  आप सब की हौसला अफ़ज़ाई का नतीजा है  , जिसके लिए   आप का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी

At 8:47pm on January 11, 2016, सतविन्द्र कुमार राणा said…
धन्यवाद आदरणीय sushil Sarna जी।आपको भी सपरिवार सादर हार्दिक शुभकामनाएं!
At 2:33pm on January 5, 2016, अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव said…

तन स्वस्थ रहे मन में उमंग...सुशील भाईजी आपको भी सपरिवार नव वर्ष की ढेरों  शुभकामनायें

 
 
 

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