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Sushil Sarna
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Sushil Sarna's blog post तुम्हारी कसम....
"वाह आदरणीय सुशील बहुतखूब लिखा..और आदरणीय आरिफ जी ने खूब लिखा..वाह"
11 hours ago
नादिर ख़ान commented on Sushil Sarna's blog post तुम्हारी कसम....
"उम्दा  ख़याल  खूबसूरत नक्काशी .... बहुत बधाई आदरणीय सुशील सरना जी "
13 hours ago
Mohammed Arif commented on Sushil Sarna's blog post तुम्हारी कसम....
"आदरणीया रक्षिता जी आदाब,                       आदरणीय सुशील सरना जी की रचना पर मेरी प्रतिक्रिया पर अपनी उत्साहवर्धक टिप्पणी देने का बहुत-बहुत शुक्रिया । यह मेरा सबसे बड़ा सौभाग्य है ।"
16 hours ago
Rakshita Singh commented on Sushil Sarna's blog post तुम्हारी कसम....
"आदरणीय आरिफ जी,  सुशील जी रचना पर आपके द्वारा दी गयी बहुत ही लाजबाब  प्रतिक्रिया....बहुत खूब।"
20 hours ago
Rakshita Singh commented on Sushil Sarna's blog post तुम्हारी कसम....
"आदरणीय सुशील जी नमस्कार। खूबसूरत अंदाज में लिखीं बेहतरीन पंक्तियाँ... पढ़कर मजा आ गया। हार्दिक बधाई स्वीकार करें।"
20 hours ago
Mohammed Arif commented on Sushil Sarna's blog post तुम्हारी कसम....
"आपकी क़सम बहुत बेहतरीन हैताज़ा तरीन हैमेहज़बीन हैख़्याल महीन हैपढ़ रहे नाज़रीन हैआपकी क़समलाजवाब है खुली किताब हैक्या ख़ूब शबाब हैबहुत लिखते जनाब हैआपकी क़समपढ़ने की रहती हसरत हैचलती लफ्ज़ों की शरारत हैकुछ-कुछ देती हिदायत हैलेकिन मेरी होती क़यामत हैकुछ- कुछ…"
Friday
Sushil Sarna posted a blog post

तुम्हारी कसम....

तुम्हारी कसम.... हिज़्र की रातों में तन्हा बरसातों में खामोश बातों में नशीली मुलाकातों में तुम्हारी कसम सिर्फ़ तुम ही तुम होचांदनी के शबाब में पलकों के ख्वाब में प्यालों की शराब में अर्श के माहताब में तुम्हारी कसम सिर्फ़ तुम ही तुम होख्यालों की बाहों में बेकरार निगाहों में गुलों की अदाओं में आफ़ताबी शुआओं में तुम्हारी कसम सिर्फ़ तुम ही तुम होसाँसों के ऐतबार में आती हुई बहार में मिलन के करार में वस्ल के इंतज़ार में तुम्हारी कसम सिर्फ़ तुम ही तुम हो(शुआओं= किरणें )सुशील सरनामौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Friday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आदरणीय समर कबीर साहिब के स्वास्थ्य के बारे में सुन कर चिंता हुई लेकिन जनाब मो.आरिफ साहिब की मार्फ़त से ख़बर हुई कि अब उनके स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है। अल्लाह उनको अच्छी सेहत बख्शे. . उनके स्वास्थ्य होने की कामना करता हूँ। अल्लाह उनको शीघ्र…"
Thursday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post अस्तित्व ....
"आद. KALPANA BHATT ('रौनक़')   जी सृजन आपकी स्नेहिल प्रतिक्रिया का आभारी है।"
Thursday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post अस्तित्व ....
"आदरणीय  vijay nikore  जी सृजन आपकी स्नेहिल प्रतिक्रिया का आभारी है।"
Thursday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post अस्तित्व ....
"आदरणीय  narendrasinh chauhan जी सृजन आपकी स्नेहिल प्रतिक्रिया का आभारी है।"
Thursday
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on Sushil Sarna's blog post अस्तित्व ....
"बहुत सुन्दर रचना | हार्दिक बधाई आदरणीय |"
Tuesday
vijay nikore commented on Sushil Sarna's blog post अस्तित्व ....
"बहुत ही सुन्दर भाव प्रेषित किया है, सरलता का प्रवाह भी अच्छा लगा। हार्दिक बधाई, आ० सुशील जी।"
Tuesday
narendrasinh chauhan commented on Sushil Sarna's blog post अस्तित्व ....
"खुब सुन्दर रचना"
Feb 12
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post अस्तित्व ....
"आदरणीय सोमेश कुमार जी सृजन आपकी स्नेहिल प्रतिक्रिया का आभारी है। ये दार्शनिक भाव क्षणिका की प्रस्तुति है।"
Feb 12
somesh kumar commented on Sushil Sarna's blog post अस्तित्व ....
"यह किसी पीड़ा का दृश्य लगता है क्या इसे दृश्य कविता कह सकते हैं ?"
Feb 12

Profile Information

Gender
Male
City State
Jaipur-Rajasthan
Native Place
New Delhi
Profession
Retired from Central Govt.Service as Superintending Officer
About me
I am a simple,sentimental and transparent person.Poetry is my hobby and passion

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Sushil Sarna's Blog

तुम्हारी कसम....

तुम्हारी कसम.... 

हिज़्र की रातों में

तन्हा बरसातों में

खामोश बातों में

नशीली मुलाकातों में

तुम्हारी कसम

सिर्फ़

तुम ही तुम हो

चांदनी के शबाब में

पलकों के ख्वाब में

प्यालों की शराब में

अर्श के माहताब में

तुम्हारी कसम

सिर्फ़

तुम ही तुम हो

ख्यालों की बाहों में

बेकरार निगाहों में

गुलों की अदाओं में

आफ़ताबी शुआओं में

तुम्हारी कसम

सिर्फ़

तुम ही तुम…

Continue

Posted on February 16, 2018 at 2:24pm — 6 Comments

अस्तित्व ....

अस्तित्व ....

एक अस्तित्व
शून्य हुआ
एक शून्य
अस्तित्व हुआ
धूप-छाँव के बंधन का
हर एक सूरज
अस्त हुआ
ज़िंदगी ज़मीन की
ज़मीन के पार
चलती रही
और
दूर कहीं
कोई चिता
धू-धू कर
जलती रही

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on February 11, 2018 at 3:15pm — 8 Comments

1. खोये स्वप्न .../2. मन्नत   ....

1. खोये स्वप्न ...

तमाम रात

मेरे साथ था

एक स्वप्न

भोर होते ही

वो स्वप्न

स्वप्न सा हो गया

मैं

देर तक

पलकों की दहलीज़

बुहारती रही

खोये स्वप्न को

ढूंढने के लिए

...........................

2. मन्नत   ....

देर तक

रुका रहा

मेरे घर की छत पर

वो आसमान से टूटा

मन्नत का तारा

मेरे ज़ह्न में

काँपता रहा

देर तक उसका ख़्याल

मेरी आँखों के कटोरों में

कोई अपने अक्स की…

Continue

Posted on February 4, 2018 at 3:52pm — 14 Comments

अमर हो गए ...

अमर हो गए ...

मेरी हिना

बहुत लजाई थी

जब तुम्हारे स्पर्श

मेरे हाथों से

टकराये थे

मेरा काजल

बहुत शरमाया था

जब

तुम्हारी शरीर दृष्टि ने

मेरी पलक

थपथपाई थी

मेरे अधर

बहुत थरथराये थे

जब तुम्हारी

स्नेह वृष्टि ने

मेरे अधर तलों को

अपने स्नेहिल स्पर्श से

स्निग्ध कर दिया था

मैं शून्य हो गयी

जब

प्रेम के दावानल में

मेरा अस्तित्व

तुम्हारे अस्तित्व के…

Continue

Posted on February 3, 2018 at 4:35pm — 6 Comments

Comment Wall (34 comments)

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At 11:15pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुशील सरना जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी "कविता : कितना अच्छा होता" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 1:35am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका मेल बॉक्स ब्लॉक होने के कारण मेल सेंड नहीं हो रहा है. 

At 1:29am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय सुशील सरना सर, विलम्ब से प्रत्युत्तर हेतु क्षमा. आपको मेल कर दिया है. सादर 

At 10:17pm on April 7, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ० सरना भाई जी, सादर  प्रणाम!

आपका हार्दिक स्वागत है.  मित्रता से भाग्योदय होता है ,  मैं धन्य हुआ. सादर

At 9:46am on April 1, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय सुशील जी ..महीने का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर मेरी तरफ से हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

At 6:02am on March 20, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ०  सुशील सरना भाई जी, सादर प्रणाम!  आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" चुने जाने पर बहुत-बहुत बधाई. सादर

At 4:22pm on March 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

सुशील सरना जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:00pm on February 17, 2016, Tasdiq Ahmed Khan said…

मोहतरम जनाब सुशील सरना  साहिब ,  यह  आप सब की हौसला अफ़ज़ाई का नतीजा है  , जिसके लिए   आप का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी

At 8:47pm on January 11, 2016, सतविन्द्र कुमार said…
धन्यवाद आदरणीय sushil Sarna जी।आपको भी सपरिवार सादर हार्दिक शुभकामनाएं!
At 2:33pm on January 5, 2016, अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव said…

तन स्वस्थ रहे मन में उमंग...सुशील भाईजी आपको भी सपरिवार नव वर्ष की ढेरों  शुभकामनायें

 
 
 

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