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ग़ज़ल की कक्षा

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ग़ज़ल की कक्षा

इस समूह मे ग़ज़ल की कक्षा आदरणीय श्री तिलक राज कपूर द्वारा आयोजित की जाएगी, जो सदस्य सीखने के इच्‍छुक है वो यह ग्रुप ज्वाइन कर लें |

धन्यवाद |

Location: OBO
Members: 323
Latest Activity: Nov 15

Discussion Forum

ग़ज़ल संक्षिप्‍त आधार जानकारी-10 36 Replies

मुफरद बह्रों से बनने वाली मुजाहिफ बह्रेंइस बार हम बात करते हैं मुफरद बह्रों से बनने वाली मुजाहिफ बह्रों की। इन्‍हें देखकर तो अनुमान हो ही जायेगा कि बह्रों का समुद्र कितना बड़ा है। यह जानकारी संदर्भ के काम की है याद करने के काम की नहीं। उपयोग करते करते ये बह्रें स्‍वत: याद होने लगेंगी। यहॉं इन्‍हें देने का सीमित उद्देश्‍य यह है जब कभी किसी बह्र विशेष का कोई संदर्भ आये तो आपके पास वह संदर्भ के रूप में उपलब्‍ध रहे। और कहीं आपने इन सब पर एक एक ग़ज़ल तो क्‍या शेर भी कह लिया तो स्‍वयं को धन्‍य…Continue

Tags: बह्र, विवरण, पाठ, ज्ञान, ग़ज़ल

Started by Tilak Raj Kapoor. Last reply by Farida shahin Jun 24.

ग़ज़ल-संक्षिप्‍त आधार जानकारी-9 6 Replies

(श्री तिलक राज कपूर जी द्वारा मेल से भेजे गए पोस्ट को हुबहू पोस्ट किया जा रहा है.....एडमिन) जि़हाफ़:जि़हाफ़ का शाब्दिक अर्थ है न्‍यूनता या कमी। बह्र के संदर्भ में इसका अर्थ हो जाता है अरकान में मात्राओं की कमी। ग़ज़ल का आधार संगीत होने के कारण यह जरूरी हो गया कि मात्रिक विविधता पैदा की जाये जिससे बह्र विविधता प्राप्‍त हो सके। इसका हल तलाशा गया मूल अरकान में संगीतसम्‍मत मात्रायें कम कर उनके नये रूप बनाकर। मात्रायें कम करना कोई तदर्थ प्रक्रिया नहीं है, इसके निर्धारित नियम हैं।मुख्य…Continue

Started by Admin. Last reply by आवाज शर्मा Jul 20, 2011.

ग़ज़ल-संक्षिप्‍त आधार जानकारी-8 7 Replies

बह्र विवरण-अगला चरण:पिछली पोस्‍ट में जो जानकारी दी गयी थी उससे एक स्‍वाभाविक प्रश्‍न उठता है कि सभी मुफ़रद बह्र एक ही रुक्‍न की आवृत्ति से बनती हैं तो वो प्रकृति से ही सालिम हैं और मुरक्‍कब बह्र अलग-अलग अरकान से बनती हैं तो सालिम हो नहीं सकतीं फिर सालिम परिभाषित करने की आवश्‍यकता कहॉं से पैदा हुई। जहॉं तक मूल अरकान की बात है उनके लिये सालिम परिभाषित करने की वास्‍तव में कोई आवश्‍यकता नहीं थी लेकिन अरकान के जि़हाफ़़ से मुज़ाहिफ़ बह्र बनती हैं और उनमें एक ही जि़हाफ़़ की आवृत्ति होने पर सालिम की…Continue

Tags: पाठ, विवरण, ज्ञान, ग़ज़ल, कक्षा

Started by Tilak Raj Kapoor. Last reply by Tilak Raj Kapoor May 14, 2011.

ग़ज़ल-संक्षिप्‍त आधार जानकारी-7 3 Replies

ग़ज़ल की विधा में रदीफ़ काफि़या तक बात तो फिर भी आसानी से समझ में आ जाती है, लेकिन ग़ज़ल के तीन आधार तत्‍वों में तीसरा तत्‍व है बह्र जिसे मीटर भी कहा जा सकता है। आप चाहें तो इसे लय भी कह सकते हैं मात्रिक-क्रम भी कह सकते हैं।रदीफ़ और काफि़या की तरह ही किसी भी ग़ज़ल की बह्र मत्‍ले के शेर में निर्धारित की जाती है और रदीफ़ काफिया की तरह ही मत्‍ले में निर्धारित बह्र का पालन पूरी ग़ज़ल में आवश्‍यक होता है। प्रारंभिक जानकारी के लिये इतना जानना पर्याप्‍त होगा कि बह्र अपने आप में एकाधिक रुक्‍न…Continue

Tags: बह्र, कक्षा, ग़ज़ल, ज्ञान, पाठ

Started by Tilak Raj Kapoor. Last reply by Rohit dobriyal"मल्हार" Sep 26.

ग़ज़ल-संक्षिप्‍त आधार जानकारी-6 15 Replies

काफि़या को लेकर अब कुछ विराम लेते हैं। जितना प्रस्‍तुत किया गया है उसपर हुई चर्चा को मिलाकर इतनी जानकारी तो उपलब्‍ध हो ही गयी है कि इस विषय में कोई चूक न हो। रदीफ़ को लेकर कहने को बहुत कुछ नहीं है फिर भी कोई प्रश्‍न हों तो इस पोस्‍ट पर चर्चा के माध्‍यम से उन्‍हें स्‍पष्‍ट किया जा सकता है। लेकिन रदीफ़ और काफि़या को लेकर कुछ महत्‍वपूर्ण है जिसपर चर्चा शेष है और वह है रदीफ़ और काफि़या के निर्धारण में सावधानी। यह तो अब तक स्‍पष्‍ट हो चुका है कि रदीफ़ की पुनरावृत्ति हर शेर में होती है और काफि़या का…Continue

Tags: पाठ, ज्ञान, ग़ज़ल, कक्षा

Started by Tilak Raj Kapoor. Last reply by kanta roy Jan 27, 2016.

ग़ज़ल-संक्षिप्‍त आधार जानकारी-5 36 Replies

पिछले आलेख में हमने प्रयास किया काफि़या को और स्‍पष्‍टता से समझने का और इसी प्रयास में कुछ दोष भी चर्चा में लिये। अगर अब तक की बात समझ आ गयी हो तो एक दोष और है जो चर्चा के लिये रह गया है लेकिन देवनागरी में अमहत्‍वपूर्ण है। यह दोष है इक्‍फ़ा का। कुछ ग़ज़लों में यह भी देखने को मिलता है। इक्‍फ़ा दोष तब उत्‍पन्‍न होता है जब व्‍यंजन में उच्‍चारण साम्‍यता के कारण मत्‍ले में दो अलग-अलग व्‍यंजन त्रुटिवश ले लिेये जाते हैं। वस्‍तुत: यह दोष त्रुटिवश ही होता है। इसके उदाहरण हैं त्रुटिवश 'सात' और 'आठ' को…Continue

Tags: पाठ, ज्ञान, ग़ज़ल, कक्षा

Started by Tilak Raj Kapoor. Last reply by Nilesh Shevgaonkar Apr 22.

ग़ज़ल-संक्षिप्‍त आधार जानकारी-4 30 Replies

काफि़या को लेकर आगे चलते हैं।पिछली बार अभ्‍यास के लिये ही गोविंद गुलशन जी की ग़ज़लों का लिंक देते हुए मैनें अनुरोध किया था कि उन ग़ज़लों को देखें कि किस तरह काफि़या का निर्वाह किया गया है। पता नहीं इसकी ज़रूरत भी किसी ने समझी या नहीं।कुछ प्रश्‍न जो चर्चा में आये उन्‍हें उत्‍तर सहित लेने से पहले कुछ और आधार स्‍पष्‍टता लाने का प्रयास कर लिया जाये जिससे बात समझने में सरलता रहे।काफि़या या तो मूल शब्‍द पर निर्धारित किया जाता है या उसके योजित स्‍वरूप पर। पिछली बार उदाहरण के लिये 'नेक', 'केक' लिये गये…Continue

Tags: पाठ, ज्ञान, ग़ज़ल, कक्षा

Started by Tilak Raj Kapoor. Last reply by kanta roy Jan 27, 2016.

ग़ज़ल-संक्षिप्‍त आधार जानकारी-3 53 Replies

एक बात जो आरंभ में ही स्‍पष्‍ट कर देना जरूरी है कि यह आलेख काफि़या का हिन्‍दी में निर्धारण और पालन करने की चर्चा तक सीमित है। उर्दू, अरबी, फ़ारसी या इंग्लिश और फ्रेंच आदि भाषा में क्‍या होता मैं नहीं जानता।पिछले आलेख पर आधार स्‍तर के प्रश्‍न तो नहीं आये लेकिन ऐसे प्रश्‍न जरूर आ गये जो शायरी का आधार-ज्ञान प्राप्‍त हो जाने और कुछ ग़ज़ल कह लेने के बाद अपेक्षित होते हैं।प्राप्‍त प्रश्‍नों पर तो इस आलेख में विचार करेंगे ही लेकिन प्रश्‍नों के उत्‍तर पर आने से पहले पहले कुछ और आधार स्‍पष्‍टता प्राप्‍त…Continue

Tags: पाठ, ज्ञान, ग़ज़ल, कक्षा

Started by Tilak Raj Kapoor. Last reply by Rajeev Bharol Feb 22, 2012.

ग़ज़ल-संक्षिप्‍त आधार जानकारी-2 11 Replies

ग़ज़ल की आधार परिभाषायें जानने के बाद स्‍वाभाविक उत्‍सुकता रहती है इन परिभाषित तत्‍वों के प्रायोगिक उदाहरण जानने की। ग़ज़ल में बह्र का बहुत अधिक महत्‍व है लेकिन उत्‍सुकता सबसे अधिक काफि़या के प्रयोग को जानने की रहती है। आज प्रयास करते हैं काफि़या को उदाहरण सहित समझने की।सभी उदाहरण मैनें आखर कलश पर प्रकाशित गोविन्‍द गुलशन जी की ग़ज़लों से लिये हैं। एक मत्‍ला देखें:'दिल में ये एक डर है बराबर बना हुआमिट्टी में मिल न जाए कहीं घर बना हुआ'इसमें 'बना हुआ' तो मत्‍ले की दोनों पंक्तियों के अंत में आने…Continue

Tags: पाठ, ज्ञान, ग़ज़ल, कक्षा

Started by Tilak Raj Kapoor. Last reply by Tilak Raj Kapoor Mar 21, 2011.

ग़ज़ल-संक्षिप्‍त आधार जानकारी-1 54 Replies

यह आलेख उनके लिये विशेष रूप से सहायक होगा जिनका ग़ज़ल से परिचय सिर्फ पढ़ने सुनने तक ही रहा है, इसकी विधा से नहीं। इस आधार आलेख में जो शब्‍द आपको नये लगें उनके लिये आप ई-मेल अथवा टिप्‍पणी के माध्‍यम से पृथक से प्रश्‍न कर सकते हैं लेकिन उचित होगा कि उसके पहले पूरा आलेख पढ़ लें; अधिकाँश उत्‍तर यहीं मिल जायेंगे। एक अच्‍छी परिपूर्ण ग़ज़ल कहने के लिये ग़ज़ल की कुछ आधार बातें समझना जरूरी है। जो संक्षिप्‍त में निम्‍नानुसार हैं:ग़ज़ल- एक पूर्ण ग़ज़ल में मत्‍ला, मक्‍ता और 5 से 11 शेर (बहुवचन अशआर) प्रचलन…Continue

Tags: पाठ, ज्ञान, कक्षा, ग़ज़ल

Started by Tilak Raj Kapoor. Last reply by Rohit dobriyal"मल्हार" Sep 26.

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on May 16, 2015 at 4:50pm

भाई मनोज जी,
आप उसी समूह में अपने प्रश्न और जिज्ञासाएँ निवेदित कर रहे हैं जिस समूह में ग़ज़ल सम्बन्धित पाठों के क्रमवार लिंक दिये गये हैं.
फिर, ओबीओ के हर पेज के फ़ूटर में उपर्युक्त पाठों के अलावे ग़ज़ल सम्बन्धी अन्य पाठों के लिंक हुआ करते हैं.
आप इन सभी पाठों का मनोयोग पूर्वक अध्ययन किया करें. आपकी अधिकांश जिज्ञासाएँ संतुष्ट हो सकेंगीं.

इसके बाद हर रचना प्रस्तुति पर आवश्यक चर्चा होती है. इस पर आपका भी ध्यान गया होगा. आप इन चर्चाओं से भी लाभ प्राप्त कर सकते हैं.
शुभेच्छाएँ.

Comment by Manoj kumar Ahsaas on May 16, 2015 at 4:03pm
आप सभी को प्रणाम करता हु
उपस्थित सभी ज्ञानी जनों कुछ क्रियात्मक ज्ञान आप सभी से प्राप्त करने की इच्छा है
ग़ज़ल कैसे कही जाती है ये मेरा प्रश्न है


ग़ज़ल के आधार भुत कुछ तत्वों से काफी पहले से मेरा परिचय रहा है
जैसे मिसरा शेर काफ़िया रदीफ़ आदि
अब बहर मेरे सर का दर्द बन गयी है
बहर के बारे में इतनी जानकारी मुझे है क़ि ग़ज़ल एक लय पर कही जाती है और बहुत सारी लय पहले से ही निश्चित है
इसमें मात्राओ की गणना होती है पूरी ग़ज़ल एक ही निश्चित मात्र क्रम पर आधारित होती है जिसके बिगड़ जाने पर ग़ज़ल खारिज हो जाती है
इतनी थोड़ी बहुत जानकारी मुझे है


अब
मै ग़ज़ल कैसे कहता हु ये बता रहा हु
मैं जब कभी भाव अवस्था में होता हु और अनायास कोई पंक्ति मुह ऐ निकल जाती है या दिमाग में गूंजती रहती है तो उसे लिख लेता हु उसके उपरांत उसे गाकर एक ऎसे क्रम में लगा लेता हु की उसके अंतिम शब्द अर्थात काफ़िया और रदीफ waywasthit हो जाये
अर्थात काफ़िया ऐसा हो जिसके तुकांत या सामान उच्चारण वाले कई शब्द मुझे ज्ञात हो
फिर दूसरा मिसरा उनमे से एक एक काफिये से बनना शुरू होता है और पहला मिसरा दूसरे मिसरे के जुड़ाव बनता जाता है उसी भाव में जो मन में है इस प्रकार शेर बनते जाते है




अब सवाल ये है क़ि इस प्रकिर्या में बहर कहाँ आती है
दूसरी बात क्या मात्राएँ गिन गिन कर शब्दों का चुनाव होता है
या गाने पर ले न बनने पर मात्रा गिनी जाती है



सभी बातों को कहदिया है पर सवाल बहुत से है

कृपिया। जवाब साधारण शब्दों में सवालो के अंतर्गत ही दे
अगर एक ग़ज़ल की निर्माण प्रक्रिया उद्धरण स्वरुप बता दे
के ऐसा होता है क़ि......
तो बड़ी कृपा होगी


बहुत बेचैनी से प्रतीक्षा है
सादर
Comment by Manan Kumar singh on May 14, 2015 at 9:59am

आदरणीय तिलक सर, 

मापनी पर कुछ जानकारी जरूर लगती है, मैं नहीं समझ पाता हूँ;सादर, मनन 

Comment by Manoj kumar Ahsaas on May 10, 2015 at 12:56pm
आप सभी को प्रणाम करता हूँ
ग़ज़ल सीखना चाहता हूँ
कृपिया साथ और आशीर्वाद दोनों से हौसला दे

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on May 9, 2015 at 9:51pm

हा हा हा ..

तब तो आपका बुद्धत्व वाकई सादर प्रणम्य है.. हीरे को कंकर ही समझता है. :-))

आपकी जिज्ञासा -- कस्तूरी कुण्डलि बसै, मृग ढूँढे बन माँहि..
:-)))

Comment by Nilesh Shevgaonkar on May 9, 2015 at 9:47pm

वो यूँ कि -"कहाँ से ख़रीदी ऐसी बोकवास डिक्शनरी" 
माज़रत के साथ 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on May 9, 2015 at 9:14pm

आपको अचानक प्राप्त हो गये ’बुद्धत्व’ का तनिक हमें भी लाभ मिले, आदरणीय.

:-)

जिसने चेन्नै एक्प्रेस देखा न हो, वो दीपिका के प्रश्न पर क्या समझे ?

Comment by Nilesh Shevgaonkar on May 9, 2015 at 8:45pm

अब चेन्नई एक्सप्रेस की दीपिका वाला सवाल नहीं पूछूँगा ..हा हा हा 

Comment by Nilesh Shevgaonkar on May 9, 2015 at 8:44pm

और हम यहाँ ऐसे ही माथा फोड़ रहे हैं..हा हा हा 

Comment by Nilesh Shevgaonkar on May 9, 2015 at 8:44pm

हा हा हा 

 
 
 

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