74 members
97 members
33 members
376 members
119 members
वक़्त अच्छा है
तो सब अच्छा है ,
वर्ना बुरे वक़्त से
बुरा, कुछ नहीं। ....... (1)
जोड़ना और जुड़ जाना भी
एक बहुत बड़ा हुनर है।
अक्सर लोग , टूट कर ,
खुद ही बिखर जाते हैं ,
दूसरों को तोड़ने में । ... (2)
मौलिक एवं अप्रकाशित
Posted on September 24, 2023 at 5:30pm — 6 Comments
सत्य अटल है , स्थिर है ,
झूठ न अटल है ,न स्थिर है।
समय के अनुसार परिवर्तन शील है ,
परिस्थिति वश बदल जाता है ,
हर हाल से समझौता कर लेता है ,
मुखर है , निडर है ,सर चढ़ कर बोल लेता है ,
बहुरंगी है , बहुधन्धी है ,
इसलिए हर जगह चलता है ,
सत्य स्थिर है , अटल है ,
सत्य खोजना पड़ता है ,
झूट स्वयं उपस्थित हो जाता है.
मौलिक एवं अप्रकाशित
Posted on September 14, 2023 at 10:00pm — 4 Comments
हम समझते थे ,
झूठ के करोड़ों प्रकार होते हैं।
यहां तो सच भी हर एक का
अपना अपना हैं। .......... 1.
तुम बेशक मेरे रास्ते में
रोड़े बिछा सकते हो ,
मेरा नसीब नहीं बदल सकते,
अगर बदल सकते तो
अपनी तक़दीर बदलते ,
दूसरों के रास्ते में यूं
रोड़े नहीं बिछाते रहते।......... 2.
मौलिक एवं अप्रकाशित
Posted on March 5, 2022 at 9:59am — 2 Comments
भूख नैसर्गिक है ,
पर रोटी , रोटी
नैसर्गिक नहीं है।
भूख का निदान
स्वयं को करना होता है ,
रोटी कमानी पड़ती है ,
रोटी खरीदनी पड़ती है ,
रोटी पर टैक्स चुकाना पड़ता है ,
रोटी निदान है , आय का जरिया है।
भूख ऐसी कुछ नहीं , उसका निदान ,
आदमी से क्या कुछ नहीं करा देता है ,
उसे एक शब्द में कमाई कह देते हैं।
अपने लिए , अपने पेट के लिए।
सब कुछ नैसर्गिक है ......... ?
व्यापार के लिए , राजस्व के लिए।
मौलिक…
ContinuePosted on November 27, 2021 at 11:29am — 2 Comments
आवश्यक सूचना:-
1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे
2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |
3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |
4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)
5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |
Switch to the Mobile Optimized View
© 2026 Created by Admin.
Powered by
महत्वपूर्ण लिंक्स :- ग़ज़ल की कक्षा ग़ज़ल की बातें ग़ज़ल से सम्बंधित शब्द और उनके अर्थ रदीफ़ काफ़िया बहर परिचय और मात्रा गणना बहर के भेद व तकतीअ
ओपन बुक्स ऑनलाइन डाट कॉम साहित्यकारों व पाठकों का एक साझा मंच है, इस मंच पर प्रकाशित सभी लेख, रचनाएँ और विचार उनकी निजी सम्पत्ति हैं जिससे सहमत होना ओबीओ प्रबन्धन के लिये आवश्यक नहीं है | लेखक या प्रबन्धन की अनुमति के बिना ओबीओ पर प्रकाशित सामग्रियों का किसी भी रूप में प्रयोग करना वर्जित है |
Comment Wall (18 comments)
You need to be a member of Open Books Online to add comments!
Join Open Books Online
देर से ही सही.. हर्दिक आभार आपका आदरणीय विजय शंकर जी!
Haardik abhaar aapka!
सदस्य कार्यकारिणीमिथिलेश वामनकर said…
आदरणीय डॉ विजय शंकर सर,
आपको जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनायें
आदरणीय Dr. Vijai Shanker जी आप का हार्दिक आभार ....मंगलकामनाएँ...सादर
सदस्य कार्यकारिणीमिथिलेश वामनकर said…
आदरणीय डॉ विजय शंकर सर, निवेदन स्वीकार करने के लिए आभार...
विद्यार्थी की मुक्त कंठ प्रशंसा आपका बड़प्पन और आपके हृदय की विशालता का प्रमाण है.
आपका स्नेह और आशीर्वाद सदैव मिलता रहे, इसके लिए सदैव प्रयास करता रहूँगा. नमन
सदस्य कार्यकारिणीमिथिलेश वामनकर said…
आदरणीय डॉ विजय शंकर सर, आभार, धन्यवाद.... आप लोगो के स्नेह और आशीर्वाद से ही मंच पर सक्रिय हो पाता हूँ. आपका आभार हार्दिक धन्यवाद
आपको सपरिवार ज्योति पर्व की हार्दिक एवं मंगलमय शुभकामनाएं...
View All Comments