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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s Page

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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। संयोग शृंगार पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। * गुर्बत हटेगी बोल के कुर्सी जिन्हें मिली उनको गरीब लोग ही जल-पान हो गये।२। * घर में बहार नल से जो आयी गरीब के पनघट हर एक गाँव  के वीरान हो गये।३। * भारी हुए जो उनके ये व्यवहार कर्म पर सारे ही फर्ज, कौम को अहसान हो गये।४। * हाथों अपढ़ के देखते शासन की डोर है पढ़ लिख गये जो देश में दरवान हो गये।५। * अपनों में कोई एक भी अपना नहीं हुआ पर हम उन्हीं के बीच में गलवान हो गये।६। * मौलिक/अप्रकाशित लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'See More
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक बधाई।"
Feb 5
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

तब मनुज देवता हो गया जान लो,- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२१२/२१२/२१२/२१२**अर्थ जो प्रेम का पढ़ सके आदमीएक उन्नत समय गढ़ सके आदमी।१।*आदमीयत जहाँ खूब महफूज होएक ऐसा कवच मढ़ सके आदमी।२।*दूर नफ़रत का जंजाल करले अगरदो कदम तब कहीं बढ़ सके आदमी।३।*खींचने में लगे  पाँव अपने ही अबव्योम कैसे सहज चढ़ सके आदमी।४।*तब मनुज देवता हो गया जान लोलोक मन में अगर कढ़ सके आदमी।५।**मौलिक/अप्रकाशितलक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'See More
Feb 2
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . रिश्ते
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। सुंदर दोहै हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Feb 2
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन व आभार।"
Jan 31
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई रवि जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और सुंदर सुझाव के लिए हार्दिक आभार।"
Jan 31
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर और समसामयिक नवगीत रचा है आपने। बहुत बहुत हार्दिक बधाई।"
Jan 30
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

दोहा पंचक - आचरण

चाहे पद से हो बहुत, मनुज शक्ति का भान। किन्तु आचरण से मिले, सदा जगत में मान।। * हवा  विषैली  हो  गयी, रहा  नगर  या गाँव। बिखराते नित मैल अब, जिह्वा के सौ पाँव।। * बदनामी से  नाम  नित, जोड़़  रहे  सब मौन धन अच्छे व्यवहार का, कमा रहा अब कौन।। * मन रिश्तो से बढ़ करे, अब बस धन की होड़ सुख-दुख के  साथी  गये, ऐसे  पथ  में छोड़।। * बन जाये यदि चाहता, जीवन सुन्दर तीज सदाचार के बीज  को, बाल  मनों में बीज।। * मौलिक/अप्रकाशित लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'See More
Jan 29
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"आ. भाई तिलक राज जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति, स्नेह व उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभार। 9, 10 शेर के विषय में आपके कथन से पूर्णतः सहमत हूँ। प्रयास करता हूँ कि कोई विकल्प बन सके। सादर.."
Jan 29
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"आ. भाई दयाराम जी, सादर अभिवादन। गजल का प्रयास अच्छा हुआ है। कुछ मिसरे और समय चाहते है। इस प्रयास के लिए हार्दिक बधाई। "
Jan 29
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। गजल का प्रयास अच्छा हुआ है। आ. भाई तिलक राज जी के सुझाव से यह और निखर गयी है हार्दिक बधाई।"
Jan 29
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"आ. भाई अजय जी, प्रदत्त मिसरे पर गजल का प्रयास अच्छा हुआ है। हार्दिक बधाई।"
Jan 29
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। अच्छी गिरह के साथ गजल का अच्छा प्रयास हुआ है। हार्दिक बधाई।"
Jan 28
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"कोख से मौत तलक रात अमर है साईंअपने हिस्से में भला कौन सहर है साईं।१।*धूप ही धूप मिली जब से सफर है साईंपग नहीं अपने पड़े छाँव जिधर है साईं।२।*वासना ही तो चढ़ी सबकी नजर है साईंरूह का प्यार  जमाने  में किधर है साईं।३।*सादगी करती किसी पर न असर…"
Jan 28
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"सादर अभिवादन।"
Jan 28
रवि भसीन 'शाहिद' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कुर्सी जिसे भी सौंप दो बदलेगा कुछ नहीं-लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आदरणीय लक्ष्मण भाई, नमस्कार। इस प्रस्तुति पे हार्दिक बधाई स्वीकार करें। हर शेर में सार्थक विचार हैं। /कुर्सी जिसे भी सौंप दो बदलेगा कुछ नहीं चढ़ती हैं आदमी में जो कुर्सी की फितरतें।२।/ मेरे ख़्याल से "में" के स्थान पर "पे"…"
Jan 26
रवि भसीन 'शाहिद' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण भाई, नमस्कार। काफ़ी देर के बाद मिल रहे हैं। इस सुंदर प्रस्तुति पे बधाई स्वीकार करें। /भूले हैं सिर्फ लोग न सच को निहारना/ इस शेर के शिल्प में सुधार की गुंजाइश लग रही है। एक सुझाव: भूले नहीं हैं लोग ही सच को निहारना /सच सा हुआ है एक…"
Jan 26
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 175 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई अखिलेश जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त चित्रानुरूप सुंदर छंद हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Jan 25
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आ. भाई सुशील जी , सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर दोहा मुक्तक रचित हुए हैं। हार्दिक बधाई। "
Jan 18

Profile Information

Gender
Male
City State
Delhi
Native Place
Dharchaula,uttarakhand
Profession
teaching

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s Blog

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२

******

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये

उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१।

*

गुर्बत हटेगी बोल के कुर्सी जिन्हें मिली

उनको गरीब लोग ही जल-पान हो गये।२।

*

घर में बहार नल से जो आयी गरीब के

पनघट हर एक गाँव  के वीरान हो गये।३।

*

भारी हुए जो उनके ये व्यवहार कर्म पर

सारे ही फर्ज, कौम को अहसान हो गये।४।

*

हाथों अपढ़ के देखते शासन की डोर है

पढ़ लिख गये जो देश में दरवान हो…

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Posted on February 7, 2026 at 6:23am

तब मनुज देवता हो गया जान लो,- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२१२/२१२/२१२/२१२
**
अर्थ जो प्रेम का पढ़ सके आदमी
एक उन्नत समय गढ़ सके आदमी।१।
*
आदमीयत जहाँ खूब महफूज हो
एक ऐसा कवच मढ़ सके आदमी।२।
*
दूर नफ़रत का जंजाल करले अगर
दो कदम तब कहीं बढ़ सके आदमी।३।
*
खींचने में लगे  पाँव अपने ही अब
व्योम कैसे सहज चढ़ सके आदमी।४।
*
तब मनुज देवता हो गया जान लो
लोक मन में अगर कढ़ सके आदमी।५।
**
मौलिक/अप्रकाशित
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

Posted on February 1, 2026 at 11:24pm

दोहा पंचक - आचरण

चाहे पद से हो बहुत, मनुज शक्ति का भान।

किन्तु आचरण से मिले, सदा जगत में मान।।

*

हवा  विषैली  हो  गयी, रहा  नगर  या गाँव।

बिखराते नित मैल अब, जिह्वा के सौ पाँव।।

*

बदनामी से  नाम  नित, जोड़़  रहे  सब मौन

धन अच्छे व्यवहार का, कमा रहा अब कौन।।

*

मन रिश्तो से बढ़ करे, अब बस धन की होड़

सुख-दुख के  साथी  गये, ऐसे  पथ  में छोड़।।

*

बन जाये यदि चाहता, जीवन…

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Posted on January 29, 2026 at 11:19pm

सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२

*

ता-उम्र जिसने सत्य को देखा नहीं कभी

मत उसको बोल पक्ष में बोला नहीं कभी।१।

*

भूले हैं सिर्फ  लोग  न  सच को निहारना

हमने भी सच है सत्य पे सोचा नहीं कभी।२।

*

आदत पड़ी हो झूठ की जब राजनीति को

दिखता है सच, जबान पे आता नहीं कभी।३।

*

बस्ती में सच की झूठ को मिलता है ठौर पर

सच को तो  झूठ  आस  भी देता नहीं कभी।४।

*

जनता को सत्य  कैसे  भला रास आएगा

सच सा हुआ है एक भी राजा नहीं…

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Posted on January 7, 2026 at 6:04pm — 4 Comments

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At 9:49pm on October 7, 2025,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं।

At 10:59am on January 25, 2023, Anita Bhatnagar said…

सादर आभार आदरणीय 

At 3:37pm on December 21, 2021, KullarSaddik said…

अपने आतिथ्य के लिए धन्यवाद :)

At 8:45am on January 16, 2021, Aazi Tamaam said…

मुसाफिर सर प्रणाम स्वीकार करें आपकी ग़ज़लें दिल छू लेती हैं

At 8:39pm on December 3, 2020,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

जन्मदिन की शुभकामनाओं के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी 

At 11:39pm on November 22, 2020, DR ARUN KUMAR SHASTRI said…

प्रिय भ्राता धामी जी सप्रेम नमन
आपके शब्द सहरा में नखलिस्तान जैसे - हैं

At 8:37am on May 14, 2020, Om Prakash Agrawal said…
आदरणीय
सराहना हेतु सहृदय आभार एवं धन्यवाद
At 4:12pm on May 7, 2020, सालिक गणवीर said…
हौसला अफजाई के लिए आपका ममनून हूँ आदरणीय
At 4:04pm on August 8, 2018, babita garg said…

शुक्रिया लक्ष्मण जी

At 11:44am on March 3, 2018, Sanjay Kumar said…
बहुत बहुत धन्यवाद और आभार। कोशिश करूंगा कि कुछ योगदान कर सकूं। बस हौसला अफजाई करते रहिएगा और जहां जरूरी हो तो कुछ सिखा दीजियेगा। सादर
 
 
 

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"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
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"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
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Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
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