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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s Page

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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। अच्छी गिरह के साथ गजल का अच्छा प्रयास हुआ है। हार्दिक बधाई।"
22 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"कोख से मौत तलक रात अमर है साईंअपने हिस्से में भला कौन सहर है साईं।१।*धूप ही धूप मिली जब से सफर है साईंपग नहीं अपने पड़े छाँव जिधर है साईं।२।*वासना ही तो चढ़ी सबकी नजर है साईंरूह का प्यार  जमाने  में किधर है साईं।३।*सादगी करती किसी पर न असर…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"सादर अभिवादन।"
yesterday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कुर्सी जिसे भी सौंप दो बदलेगा कुछ नहीं-लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आदरणीय लक्ष्मण भाई, नमस्कार। इस प्रस्तुति पे हार्दिक बधाई स्वीकार करें। हर शेर में सार्थक विचार हैं। /कुर्सी जिसे भी सौंप दो बदलेगा कुछ नहीं चढ़ती हैं आदमी में जो कुर्सी की फितरतें।२।/ मेरे ख़्याल से "में" के स्थान पर "पे"…"
Monday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण भाई, नमस्कार। काफ़ी देर के बाद मिल रहे हैं। इस सुंदर प्रस्तुति पे बधाई स्वीकार करें। /भूले हैं सिर्फ लोग न सच को निहारना/ इस शेर के शिल्प में सुधार की गुंजाइश लग रही है। एक सुझाव: भूले नहीं हैं लोग ही सच को निहारना /सच सा हुआ है एक…"
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 175 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई अखिलेश जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त चित्रानुरूप सुंदर छंद हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आ. भाई सुशील जी , सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर दोहा मुक्तक रचित हुए हैं। हार्दिक बधाई। "
Jan 18
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

२१२२/२१२२/२१२ **** तीर्थ  जाना  हो  गया  है सैर जब भक्ति का हर भाव जाता तैर जब।१। * देवता फिर दोस्त होंगे क्यों भला आदमी  का  आदमी से बैर जब।२। * दुश्मनो की क्या जरूरत है कहो रक्त  के  रिश्ते   हुए  हैं  गैर जब।३। * तन विवश है मन विवश है आज भी क्या करें  हम  मनचले  हों  पैर जब।४। * सोच लो कैसा  समय  तब सामने मौत मागे  जिन्दगी  की  खैर जब।५। * मौलिक/अप्रकाशित लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"See More
Jan 18

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आपने कहे को सस्वर किया इस हेतु धन्यवाद, आदरणीय  //*फिर को क्यों करने से "क्यों " का दोहराव होरहा है। इसकी जगह यह कैसा रहेगा सुझाइए -// मेरा आशय फिर और क्यों के बीच अदला-बदली से था - देवता फिर दोस्त होंगे क्यों…"
Jan 13
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और विस्तृत टिप्पणी से मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार। मिसरों में सुधार का प्रयास किया है मार्गदर्शन कीजिए। //तीर्थ जाना  हो  गया है सैर जब भक्ति का यूँ भाव जाता तैर जब।१। …"
Jan 10
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
Jan 10
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post आदमी क्या आदमी को जानता है -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई रवि जी सादर अभिवादन। गजल पर आपकी उपस्थिति का संज्ञान देर से लेने के लिए क्षमा चाहता.हूँ। आपके द्वारा इंगित मिसरो में सुधार का प्रयास किया है सम्भव हो तो मार्गदर्शन करने की कृपा करें। आपके असीम स्नेह के लिए हार्दिक आभार। //आदमी निज में नहीं…"
Jan 10
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कुर्सी जिसे भी सौंप दो बदलेगा कुछ नहीं-लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजलपर उपस्थिति और सप्रेमं मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार। इसे बेहतर करने का प्रयास करता हूँ सादर..."
Jan 9
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post न पावन हुए जब मनों के लिए -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति व उत्ताहवर्धन के लिए हार्दिक आभार।"
Jan 9
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। क्रोध पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई। साथ ही भाई अशोक जी की बात का संज्ञान लें । सादर..."
Jan 9
Ashok Kumar Raktale commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post न पावन हुए जब मनों के लिए -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"   हमारे बिना यह सियासत कहाँजवाबों में हम हैं सवालों में हम।३।... विडम्बना है  रहा भाग्य अपना तो सीमित यहीरहे भूख  में  या  निवालों  में हम।६।.... नसीब है. वाह ! आदरणीय भाई लक्षमण धामी जी सादर,  खूबसूरत…"
Jan 8
Sushil Sarna commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"वाह बहुत सुंदर प्रस्तुति हुई है आदरणीय लक्ष्मण धामी जी । हार्दिक बधाई "
Jan 8
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन।बहुत सुंदर समसामयिक गजल हुई है। बहुत बहुत हार्दिक बधाई।"
Jan 8
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ * ता-उम्र जिसने सत्य को देखा नहीं कभी मत उसको बोल पक्ष में बोला नहीं कभी।१। * भूले हैं सिर्फ  लोग  न  सच को निहारना हमने भी सच है सत्य पे सोचा नहीं कभी।२। * आदत पड़ी हो झूठ की जब राजनीति को दिखता है सच, जबान पे आता नहीं कभी।३। * बस्ती में सच की झूठ को मिलता है ठौर पर सच को तो  झूठ  आस  भी देता नहीं कभी।४। * जनता को सत्य  कैसे  भला रास आएगा सच सा हुआ है एक भी राजा नहीं कभी।५। * तन्हा मिलेगा पथ में 'मुसाफिर' से बोल दे सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी।६। *** मौलिक/अप्रकाशित - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'See More
Jan 7

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कुर्सी जिसे भी सौंप दो बदलेगा कुछ नहीं-लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, इस गजल को अभी तनिक और समय दिया जाना था.  सादर  "
Jan 7

Profile Information

Gender
Male
City State
Delhi
Native Place
Dharchaula,uttarakhand
Profession
teaching

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s Blog

सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२

*

ता-उम्र जिसने सत्य को देखा नहीं कभी

मत उसको बोल पक्ष में बोला नहीं कभी।१।

*

भूले हैं सिर्फ  लोग  न  सच को निहारना

हमने भी सच है सत्य पे सोचा नहीं कभी।२।

*

आदत पड़ी हो झूठ की जब राजनीति को

दिखता है सच, जबान पे आता नहीं कभी।३।

*

बस्ती में सच की झूठ को मिलता है ठौर पर

सच को तो  झूठ  आस  भी देता नहीं कभी।४।

*

जनता को सत्य  कैसे  भला रास आएगा

सच सा हुआ है एक भी राजा नहीं…

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Posted on January 7, 2026 at 6:04pm — 3 Comments

न पावन हुए जब मनों के लिए -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

१२२/१२२/१२२/१२

****

सदा बँट के जग में जमातों में हम

रहे खून  लिखते  किताबों में हम।१।

*

हमें मौत  रचने  से  फुरसत नहीं

न शामिल हुए यूँ जनाजों में हम।२।

*

हमारे बिना यह सियासत कहाँ

जवाबों में हम हैं सवालों में हम।३।

*

किया कर्म जग  में  न ऐसा कोई

गिने जायें जिससे सबाबों में हम।४।

*

न मंजिल न मकसद न उन्वान ही

कि समझे गये हैं मिराजों…

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Posted on December 5, 2025 at 6:20am — 2 Comments

आदमी क्या आदमी को जानता है -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

२१२२/२१२२/२१२२



कर तरक्की जो सभा में बोलता है

बाँध पाँवो को वही छिप रोकता है।।

*

देवता जिस को बनाया आदमी ने

आदमी की सोच ओछी सोचता है।।

*

हैं लगाते पार झोंके नाव जिसकी

है हवा विपरीत जग में बोलता है।।

*

जान  पायेगा  कहाँ  से  देवता को

आदमी क्या आदमी को जानता है।।

*

एक हम हैं कह रहे हैं प्यार…

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Posted on November 11, 2025 at 1:03pm — 2 Comments

देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

२१२२/२१२२/२१२

****

तीर्थ  जाना  हो  गया  है सैर जब

भक्ति का हर भाव जाता तैर जब।१।

*

देवता फिर दोस्त होंगे क्यों भला

आदमी  का  आदमी से बैर जब।२।

*

दुश्मनो की क्या जरूरत है कहो

रक्त  के  रिश्ते   हुए  हैं  गैर जब।३।

*

तन विवश है मन विवश है आज भी

क्या करें  हम  मनचले  हों  पैर जब।४।

*

सोच लो कैसा  समय  तब सामने

मौत मागे  जिन्दगी  की  खैर जब।५।

*

मौलिक/अप्रकाशित

लक्ष्मण धामी…

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Posted on November 4, 2025 at 10:30pm — 3 Comments

Comment Wall (18 comments)

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At 9:49pm on October 7, 2025,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं।

At 10:59am on January 25, 2023, Anita Bhatnagar said…

सादर आभार आदरणीय 

At 3:37pm on December 21, 2021, KullarSaddik said…

अपने आतिथ्य के लिए धन्यवाद :)

At 8:45am on January 16, 2021, Aazi Tamaam said…

मुसाफिर सर प्रणाम स्वीकार करें आपकी ग़ज़लें दिल छू लेती हैं

At 8:39pm on December 3, 2020,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

जन्मदिन की शुभकामनाओं के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी 

At 11:39pm on November 22, 2020, DR ARUN KUMAR SHASTRI said…

प्रिय भ्राता धामी जी सप्रेम नमन
आपके शब्द सहरा में नखलिस्तान जैसे - हैं

At 8:37am on May 14, 2020, Om Prakash Agrawal said…
आदरणीय
सराहना हेतु सहृदय आभार एवं धन्यवाद
At 4:12pm on May 7, 2020, सालिक गणवीर said…
हौसला अफजाई के लिए आपका ममनून हूँ आदरणीय
At 4:04pm on August 8, 2018, babita garg said…

शुक्रिया लक्ष्मण जी

At 11:44am on March 3, 2018, Sanjay Kumar said…
बहुत बहुत धन्यवाद और आभार। कोशिश करूंगा कि कुछ योगदान कर सकूं। बस हौसला अफजाई करते रहिएगा और जहां जरूरी हो तो कुछ सिखा दीजियेगा। सादर
 
 
 

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