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महिला दिवस पर विशेष

सृष्टि की अनमोल कृति
कभी दुलारती मां बन जाती
कभी बहन बन स्नेह जताती
बेटी बन जब पिया घर जाती
आँसू की धारा बह जाती
कभी पत्नी बन प्यार लुटाती
बहु बन घर को स्वर्ग बनाती
नारी तेरे बहुविध रूपों से
यह संसार चमन है
महिला दिवस पर हर नारी को बारम्बार नमन है
दुष्यंत...

Added by दुष्यंत सेवक on March 8, 2011 at 12:00pm — 5 Comments

क्या जाने

क्या जाने
 
अब मेरे ज़ब्र के है क्या माने
तू कहे क्या,करे ,ये क्या जाने
 
आँख को मूंदना अदा गोया 
पाँव छाती पे,कब हो,क्या जाने
 
फैलना इक नशा शहर का है
गाँव कब खो गया ये क्या जाने
 
मंद कंदील तुम ने बाले तो 
रोशनी हो न हो ये क्या जाने
 
हम मुसाफिर है तो चलेंगे ही 
राहे मंजिल है क्या,ये क्या…
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Added by ASHVANI KUMAR SHARMA on March 8, 2011 at 8:30am — 4 Comments

एक बार फिर विवादों में केएसके महानदी पावर प्लांट

छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिला अंतर्गत ग्राम नरियरा में स्थापित किए जा रहे 36 सौ मेगावाट के केएसके महानदी पावर प्लांट का जैसे लगता है, विवादों से ही नाता है। अतिरिक्त मुआवजा दिए जाने की मांग को लेकर कुछ दिनों पहले हुई किसानों की भूख-हड़ताल तथा धरना-प्रदर्शन का विवाद जैसे-तैसे थम पाया था, उसके बाद अब रोगदा बांध को बेचे जाने के मामले विधानसभा में गूंज उठा। हालात यहां तक बन गए कि विपक्षी पार्टी के विधायकों को विधानसभा में हंगामा करना पड़ा और कार्रवाई तक स्थगित करनी पड़ी। अंततः पांच सदस्यीय समिति…

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Added by rajkumar sahu on March 8, 2011 at 1:50am — No Comments

‘अभी तो अंगड़ाई है, आगे और लड़ाई है’

वैसे तो महिलाएं सड़क पर उतरकर बहुत कम ही लड़ाई लड़ती हैं, मगर अपनी मांग को लेकर जब नारी-शक्ति अपने पर उतर आती हैं, तो फिर किसी को भी झुकना पड़ जाता है। ऐसा ही कुछ आंदोलन कर रही हैं, नगर पंचायत नवागढ़ की सैकड़ों महिलाएं। ब्लाक मुख्यालय में संचालित शराब दुकान को हटाने नवागढ़ समेत क्षेत्र के कई गांवों की महिलाएं लामबंद हो गई हैं और वे पखवाड़े भर से तहसील कार्यालय के सामने भूूख-हड़ताल करते हुए धरना प्रदर्शन कर रही हैं। अफसरों को हर दिन मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह के नाम ज्ञापन सौंपा जा रहा है, लेकिन अब तक न तो… Continue

Added by rajkumar sahu on March 8, 2011 at 1:14am — No Comments

वक़्त कुछ बहका है ऐसे

कल ही था कि जब छिपाकर, फेंक देते थे हम दातुन,

नीम क़ी कड़वी तबीयत, अब दवाई हो गयी है;

कल ही था जब जेठ क़ी, दुपहरी में हम गुल खिलाते,

गर्मियों क़ी दोपहर, अब बेईमानी हो गयी है;

आमों क़ी वे अम्बियाँ, थे हम कल जिनको चुराते,

बिकती हैं बाज़ार में वो, मेहरबानी हो गयीं हैं;

और ईखों की बदौलत, राब थे हम कल बनाते,

ताज़े गुड़ की भेलियाँ अब इक कहानी हो गयीं हैं.



वक़्त कुछ बदला है ऐसे,

जैसे फ़िल्मी गीतों में अब, नृत्य के अंदाज़ बदले;



कल तक लिखे जिन खतों… Continue

Added by neeraj tripathi on March 7, 2011 at 5:48pm — 12 Comments

द्वादश ज्योतिर्लिंग / बारह ज्योतिर्लिंग हिंदी अनुवाद: संजीव 'सलिल'

द्वादश ज्योतिर्लिंग / बारह ज्योतिर्लिंग



हिंदी अनुवाद: संजीव 'सलिल'

*

सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम.

उज्जयिन्यां महाकालमोंकारममलेश्वरं.१.



सोमनाथ सौराष्ट्र में, मलिकार्जुन श्रीशैल.

ममलेश्वर ओंकार में, महाकाल उज्जैन.१.



परल्यां वैद्यनाथं च डाकिन्यां भीमशंकरं.

सेतुबन्धे तु रामेशं नागेशं दारुकावने.२.



भीमशंकर डाकिन्या, परलय वैद्येश.

नागेश्वर दारुकावन, सेतुबंध रामेश.२.



वाराणस्यां तु विश्वेशं त्र्यंबकं… Continue

Added by sanjiv verma 'salil' on March 7, 2011 at 5:39pm — 2 Comments

एक कविता: धरती _____ संजीव 'सलिल'

एक कविता

धरती

संजीव 'सलिल'

*

धरती काम करने

कहीं नहीं जाती

पर वह कभी भी

बेकाम नहीं होती.

बादल बरसता है

चुक जाता है.

सूरज सुलगता है

ढल जाता है.

समंदर गरजता है

बँध जाता है.

पवन चलता है

थम जाता है.

न बरसती है,

न सुलगती है,

न गरजती है,

न चलती है

लेकिन धरती

चुकती, ढलती,

बंधती या थमती नहीं.

धरती जन्म देती है

सभ्यता को,

धरती जन्म देती है

संस्कृति को.

तभी ज़िंदगी

बंदगी बन पाती है.

धरती… Continue

Added by sanjiv verma 'salil' on March 7, 2011 at 5:38pm — 2 Comments

मुक्तिका: बड़े नेता... संजीव 'सलिल'

मुक्तिका:

बड़े नेता...



संजीव 'सलिल'

*
बड़े नेता.

सड़े नेता. .



मरघटों में

गड़े नेता..



स्वहित हेतु

अड़े नेता..



जड़, बिना जड़

जड़े नेता..…





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Added by sanjiv verma 'salil' on March 7, 2011 at 5:30pm — 3 Comments

" ARUNA shanbhag " -A most sorrowful story in the world

" ARUNA shanbhag " -A most sorrowful story in the world

****************************

किस लिए मासूम रूहों को तड़पने की सज़ा...

अपने बंदों की ख़ुशी से क्यूँ जला करता है तू...

मुंसिफ़े-तक़दीर मिल जाएगा तो पूछेंगे हम...

किस बिना पे…

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Added by Dinesh Choubey on March 7, 2011 at 5:00pm — 1 Comment

अबला जीवन तेरी हाय यही कहानी!

8 मार्च -अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष



जंग ए आजादी के दौर में राष्ट्रकवि मैथलीशरण गुप्त ने आंख के आंसूओं में अपनी कलम डूबाकर इन पंक्तियों की रचना की थी

अबला जीवन तेरी हाय यही कहानी !

आंचल में है दूध और आंखों में पानी

आज़ादी के दौर में यह कहानी बहुत कुछ बदल चुकी है। देश की महिलाएं  सातवें आसमान में देश का झंडा गाड़कर कल्पना चावला बन रही हैं। किरन बेदी बनकर अपराधियों से लोहा ले रही हैं। अरुणा राय और मेधा…

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Added by prabhat kumar roy on March 7, 2011 at 7:00am — No Comments

नकल का कलंक और नकेल

कई तरह के माफिया की बातंे जिस तरह अक्सर होती हैं, कुछ उसी तरह छत्तीसगढ़ में पिछले बरसांे मंे षिक्षा माफिया भी सक्रिय रहे। छत्तीसगढ़ के कई जिले नकल के लिए ही बदनाम हुए और नकल के कलंक को आज भी ढो रहे हैं। हालांकि आज स्थिति कुछ बदली हुई नजर आती हैं। सरकार और षासन की नीतियांे में बदलाव का ही परिणाम है कि फिलहाल इस बरस की बोर्ड कक्षाआंे में नकल पर नकेल होना, नजर आ रहा है। पिछले दो बरस में हुई परीक्षा की स्थिति भी कुछ ऐसी ही रही। इस सख्ती का सीधा असर छात्रांे की संख्या पर देखी जा सकती है। कई जिलांे में… Continue

Added by rajkumar sahu on March 7, 2011 at 12:46am — No Comments

मैंने प्यार किया था...............

तुमसे कितना प्यार किया ऐ कभी समझा नहीं                  

                 तुम्हारे न आने पर हम कितने उदास होते थे                   

 तुम्हें हम कितना याद करते थे,                                    

               आपने ओ कभी महसूस नहीं किया                                                  

 आप पे हमने कितना…

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Added by Sanjay Rajendraprasad Yadav on March 6, 2011 at 8:00pm — No Comments

कहावत है की प्यार जहाँ, दर्द, वहाँ , आखिर ऐसा क्यूँ ?

कहावत है की प्यार जहाँ, दर्द, वहाँ ,  आखिर  ऐसा क्यूँ ?



प्यार, दर्द, एहसास, सच और झूठ सब मिलकर ' छुपा -छुपी ' का खेल खेलने का फैसला किया ! और जैसे ही दर्द ने छुपाने को कहा सब अपने-अपने जगह छुप गए, फिर दर्द ने गिनती सुरु की और सब पकडे भी गए, पर प्यार पकड़ा नहीं गया, क्यूंकि प्यार गुलाब की झाड़ियों में जा छुपा था, सब ने मिलकर प्यार को खोज निकाला, फिर दर्द ने प्यार को खीचा, गुलाब की झाड़ियों में छुपे होने से दर्द को जोर लगाकर खीचने से गुलाब के कांटे प्यार की…

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Added by Sanjay Rajendraprasad Yadav on March 6, 2011 at 7:30pm — No Comments

अभिराजभी..................................

 

अभिराजभी..................................

तुम्हारा चेहरा जब आँखों के सामने होता है

जो कभी मेरे इस ह्रदय के राजदार थे

आज तेरे वियोग में ह्रदय मेर तड़पता है

तेरे ओ वादे इरादे तेरी ओ कसमे

आज  मेरे ह्रदय के यादगार है,

गलत मै हूँ जो तुम्हें भुला न सका

 तुम तो किये लाख बहाने

दिल लगाने से पहले तैयार थी 

तुम्हारी…

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Added by Sanjay Rajendraprasad Yadav on March 6, 2011 at 12:53pm — No Comments

यादें,,,,,,,,,,,,,,

 

हम जब कभी बारिश की पहली बूंद में भीगे थे
वह बात आज भी तन मन को छू कर जाती है
तो तुम्हें याद करता हूँ,तुम्हें महसूस करता हूँ
इन आँखों में तुम्हारी एक तस्वीर उभर आती है
जब तुमें मै याद करता हूँ,
तुम छोड़ हमें चाहे जाओ कितनी ही दूर
मेरी आँखों का चैन चुरा बन जाओ
किसी का…
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Added by Sanjay Rajendraprasad Yadav on March 6, 2011 at 12:00pm — No Comments

मै तो एक पागल कवि हूँ

                                                        मै  तो एक पागल  कवि हूँ
क्या फर्क पड़ता है 
मै तो एक पागल कवि हूँ 
तम को काटता रवि हूँ
कौन किसलिए जीता है 
कौन किसलिए पीता है 
ज़िन्दगी तो सीता है 
कर्मो की गीता है 
भाग्य विपरीता है 
यहाँ तो हर कोई 
बस अपने लिए जीता है  
मै तो राम की सीता हूँ 
गीतों की गीता हूँ 
पर…
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Added by arvind yogi on March 5, 2011 at 11:43pm — 3 Comments

गहरा प्यार.......................



गहरा प्यार.......................
जब तुम्हें कभी हो यह महसूस   

की प्यार किसी का कम हो रहा है 

आशाओं के तुम्हारे जीवन में

निराशाओं का कुहरा छाने लगे 

प्रेम पथ की गति जब कभी थमने लगे 

खुशियों के दामन में 
जब मायूसी  झाने लगे        
तुम लौट आना-तुम लौट आना

दफ़न किये जो मेरे प्यार को 

अर्थ…
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Added by Sanjay Rajendraprasad Yadav on March 5, 2011 at 5:00pm — No Comments

तुम तो हो न प्रभु

 



हमेशा कई स्वर उभरे
'पैसा बहुत ज़रूरी चीज है
इतना पैसा होना चाहिए कि सुख में कोई कमी न रहे ...'
मैंने हमेशा कहा - 'पैसा ज़रूरी है पर पैसा सुख नहीं ,
'प्यार' में ज़िन्दगी है , वहाँ कोई कमी नहीं होती ... '
ऐसा कहते ... मैं…
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Added by rashmi prabha on March 5, 2011 at 3:38pm — 1 Comment

ek ghazal

एक ग़ज़ल 
 
रिरिया रहे है लोग 
घिघिया रहे है लोग
 
उद्घोष होना चाहिए 
मिमिया रहे है लोग
 
बेदर्द क़त्ल है ये 
बतिया रहे है लोग
 
है वक़्त पूनियों सा 
कतिया रहे है लोग
 
संवेदना मरी है
खिसिया रहे है लोग
 
धोखे की टट्टियों को 
पतिया रहे है…
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Added by ASHVANI KUMAR SHARMA on March 5, 2011 at 10:55am — 5 Comments

कोई सुनेगा

पाषाण समाज के सीने पे पडी नन्ही अश्रु की बूँद गाती है अनसुना गीत ,सुनाती है अजन्मी कहानी .|

उसकी गिरेबां को पकडे रोती ,बिलखती , कोसती, झकझोरती , सवाल करती , पता पूछती हैं उस भ्रूण हत्यारे का|

फिर सहसा आंसू पोछती .सोचती कहती की अच्छा हुआ जन्म  से पहले मिटा दी  गयी पैदा होती तो जाने क्या हश्र होता |…

Continue

Added by Anand Vats on March 5, 2011 at 10:21am — 3 Comments

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