For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

February 2019 Blog Posts

"मरघट के कपोत"

मनुज पशु पक्षी और जंतु,

एक ही सबका जीवन दाता,

धनी हो या फिर निर्धन कोई,

मरघट अंतिम ही सुख् दाता ।

भोर से लेकर सांझ तलक शव,

मरघट में आते रह्ते हैं,

चंद्न लकडी घी पावक मिल,

भस्म उसे करते रहते हैं ।

मूषक पिपिलिका कपोत उपाकर,

व्रीही खाकर जीवीत रहते हैं,

दूषित समझ मनुज जो छोडे,

वो जल पी जीवीत रहते हैं ।

उचित अनुचित तो ये भी जाने,

मनुज के मन को भी पहचाने,

पाप पुण्य का ज्ञान…

Continue

Added by प्रदीप देवीशरण भट्ट on February 4, 2019 at 12:30pm — 4 Comments

नफरत को लोग शान से सर पर बिठा रहे - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)

२२१/२१२१/१२२/१२१२

जब से वफा जहाँन में मेरी छली गयी

आँखों में डूबने की वो आदत चली गयी।१।

नफरत को लोग शान से सर पर बिठा रहे

हर बार मुँह पे प्यार के कालिख मली गयी।२।

अब है चमन ये  राख  तो करते मलाल क्यों

जब हम कहा करे थे तो सुध क्यों न ली गयी।३।

रातों  के  दीप  भोर  को  देते  सभी  बुझा

देखी जो गत भलाई की आदत भली गयी।४।

माली को सिर्फ  शूल  से  सुनते दुलार ढब

जिससे चमन से रुठ के हर एक कली…

Continue

Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 4, 2019 at 12:05pm — 6 Comments

राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ९३

२२१ २१२१ १२२१ २१२



अपनी गरज़ से आप भी मिलते रहे मुझे

ग़म है कि फिर भी आशना कहते रहे मुझे //१ 



दिल की किताब आपने सच में पढ़ी कहाँ

पन्नों की तर्ह सिर्फ़ पलटते रहे मुझे //२ 



मिस्ले ग़ुबारे दूदे तमन्ना मैं मिट गया

बुझती हुई शमा' सा वो तकते रहे मुझे //३ 



सौते ग़ज़ल से मेरी निकलती थी यूँ फ़ुगाँ

महफ़िल में सब ख़मोशी से सुनते रहे मुझे…

Continue

Added by राज़ नवादवी on February 4, 2019 at 10:13am — 6 Comments

ग़ज़ल-किनारा हूँ तेरा तू इक नदी है

अरकान-1222  1222  122

किनारा हूँ तेरा तू इक नदी है

बसी तुझ में ही मेरी ज़िंदगी है।।

हमारे गाँव की यह बानगी है

पड़ोसी मुर्तुज़ा का राम जी है।।

ख़यालों का अजब है हाल यारो

गमों के साथ ही रहती ख़ुशी है।।

घटा गम की डराए तो न डरना

अँधेरे में ही दिखती चाँदनी है।।

मुकम्मल कौन है दुनिया में यारो

यहाँ हर शख़्स में कोई कमी है।।

बनाता है महल वो दूसरों का

मगर खुद की टपकती झोपड़ी…

Continue

Added by नाथ सोनांचली on February 4, 2019 at 7:00am — 9 Comments

'तेरे-मेरे मन की बातें' (लघुकथा)

"तुम भी सिर्फ़ एक क़िताबी कीड़े ही हो! कभी तुमने अपनी सूरत आइने में देखी है? कभी किसी ने तुम्हारी सूरत पर कोई अच्छी सी टिप्पणी की है?"

"क्या मतलब?"

"मतलब यह कि न तो तुम्हारी सूरत देखकर मुझे ख़ुशी मिलती है, न ही तुम्हारी बातें सुनकर! तुम्हारे दिलो-दिमाग़ की सीमाएं नापी जा सकती हैं! तुम ज्ञानी ज़रूर हो, लेकिन तुम भी मेरे किसी काम के नहीं?"

"काम का कैसे नहीं हूं? बताओ क्या सुनना है मुझसे? कहानी, लघुकथा, कविता, इतिहास, नीति-शास्त्र, राजनीति या धर्म संबंधी?"

"वह सब तू…

Continue

Added by Sheikh Shahzad Usmani on February 4, 2019 at 12:00am — 3 Comments

ग़ज़ल (मिट चुके हैं प्यार में कितने ही सूरत देख कर)

ग़ज़ल (मिट चुके हैं प्यार में कितने ही सूरत देख कर)

(फाइ ला तुन _फाइ ला तुन _फाइ ला तुन _फाइ लु न)

मिट चुके हैं प्यार में कितने ही सूरत देख कर l

कीजिए गा हुस्न वालों से मुहब्बत देख कर l

मुझको आसारे मुसीबत का गुमां होने लगा

यक बयक उनका करम उनकी इनायत देख कर l

कुछ भी हो सकता है महफ़िल में संभल कर बैठिए

आ रहा हूँ उनकी आँखों में क़यामत देख कर l

देखता है कौन इज्ज़त और सीरत आज कल

जोड़ते हैं लोग रिश्ते सिर्फ़ दौलत देख…

Continue

Added by Tasdiq Ahmed Khan on February 3, 2019 at 7:43pm — 8 Comments

कुम्भ स्नान (लघुकथा )

‘अरे राम-राम, संगम से इतनी दूर भी गंगा का किनारा साफ़ नहीं I सब ससुर किनारे में ही निपटान करत है i ऐसे में गंगा नहाय से का फायदा ? मगर हमरे घरैतिन के सिर पर तो कुम्भ सवार रहै I’- पंडित जी ने नाव वाले से कहा I नाव में कुछ और सवारियाँ भी थीं, परन्तु किसी का भी चेहरा धुंधलके और घने कुहरे के कारण साफ़ नजर नही आता था I

मल्लाह ने स्वीकार की मुद्रा में धीरे से ‘हूँ------‘ कहा और नाव खेने में मशगूल हो गया I    

‘इनका होश ही नाहीं i’– पंडिताइन ने ठंढी बयार से बचाने के लिए गोद में पड़े अपने…

Continue

Added by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on February 3, 2019 at 5:41pm — 3 Comments

राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ९२

२२१ २१२१ १२२१ २१२



मिलना नहीं जवाब तो करना सवाल क्यों

मेरी ख़मोशियों पे है इतना मलाल क्यों //१

दामाने इंतज़ार में कटनी है ज़िंदगी

मरने तलक है हिज्र तो होगा विसाल क्यों //२ 

यारों को कब पता नहीं कैसे हैं दिन मेरे

है जो नहीं वो ग़ैर तो पूछेगा हाल क्यों //३ 



जब है ज़रीआ कस्ब का कोई नहीं मेरा

आसाईशों की चाह की फिर हो मज़ाल…

Continue

Added by राज़ नवादवी on February 3, 2019 at 12:09pm — 3 Comments

अनसोई कविता............

अनसोई कविता............

कभी देखे हैं
अनसोई कविताओं के चेहरे
अँधेरे में टटोटलना
मेरे साँझ से कपोलों पर
रुकी कविताओं के
सैलाब नज़र आएँगे
छू कर देखना
उसमें आहत
अनसोई कविताओं के चेहरे
बेनकाब
नज़र आएँगे

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Added by Sushil Sarna on February 2, 2019 at 6:23pm — 2 Comments

हयात में तू मुहब्बत की आन रहने दे (२१)

(1212 1122 1212 22 )

हयात में तू मुहब्बत की आन रहने दे 

कतर न पंख ये दिल की उड़ान रहने दे 

***

न तोड़ सिलसिला तू इस तरह मुहब्बत का

वफ़ा का मुझको जरा सा गुमान रहने दे

****

न खोल राज़ सभी हो न मेरी रुसवाई 

कुछ एक राज़ सनम दरमियान रहने दे

***

मैं जानता हूँ हक़ीक़त में प्यार है मुझसे 

क़फ़स में क़ैद तेरे मेरी जान रहने दे…

Continue

Added by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on February 2, 2019 at 6:00pm — 2 Comments

कुण्डलिया छंद -

1-

जिसको ईश्वर की नहीं, कोई भी परवाह।

वह चल पड़ता है यहाँ, पाप कर्म की राह।।

पाप कर्म की राह, मगर फिर ठोकर खाता।

करके सत्यानाश, सही पथ पर वह आता।।

लोकलाज या शर्म,आज आखिर है किसको।

करता वही कुकर्म,न ईश्वर का भय जिसको।।

2-

हो जाता जो आदमी, लालच में पथभ्रष्ट।

वही भोगता बाद में, जीवन में अति कष्ट।।

जीवन में अति कष्ट, मगर हो जाता अंधा।

झूठ कपट छल छिद्र,पाप का करता धंधा।।

सीधा सच्चा मार्ग, नहीं उसको फिर भाता।

लालच में पथभ्रष्ट, आदमी…

Continue

Added by Hariom Shrivastava on February 1, 2019 at 7:08pm — 3 Comments

ग़ज़ल



221 2121 1221 212

छलके जो उनकी आंख से जज़्बात ख़ुद ब ख़ुद ।

आए मेरी ज़ुबाँ पे सवालात ख़ुद ब  ख़ुद ।।

किस्मत खुदा ने ऐसी बनाई है सोच कर ।

मिलती गमों की हमको भी सौगात ख़ुद ब ख़ुद ।।

चर्चा  है  शह्र  में  उसी की  देख आज कल ।

बाँटा है जिसने इश्क़ को ख़ैरात ख़ुद ब ख़ुद ।।…

Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on February 1, 2019 at 3:01pm — 3 Comments

Monthly Archives

2026

2025

2024

2023

2022

2021

2020

2019

2018

2017

2016

2015

2014

2013

2012

2011

2010

1999

1970

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

रोहित डोबरियाल "मल्हार" replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"1 लाख मासिक चाहिए ही क्यों भाई, वर्डप्रेस CRM में वेबसाइट को ट्रांसफर कर दिया जाए, तो सालाना खर्च…"
Wednesday
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"दुःखद"
Sep 29
Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
Sep 24
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Sep 22
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Sep 19
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Sep 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Sep 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Sep 17
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11
जगदानन्द झा 'मनु' replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय, प्रणाम संगहि संग हार्दिक धन्यवाद। अपनेक मार्गदर्शन पाबि बहुत बेसी मोटिवेशन आ सीखक मिलैए…"
Sep 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
Aug 18
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Aug 15

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service