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SANDEEP KUMAR PATEL's Blog – January 2013 Archive (16)

"समीकरण"

"समीकरण"

कागज़ पर

दिल के समीकरणों से उलझा

सिद्ध क्या करना है ???

मुहब्बत

नफरत

आज़ादी

या बंदिशें

क्या हल होगा ??

कर्म करो फल बाद में देखेंगे

किन्तु आगाज कहाँ से करूँ

दिल से

या दिमाग से ???

लीजिये बन गया न

समीकरण

एक वाक्य

हमारे बड़े बड़े शाश्त्र कहते हैं

प्रेम अनंत है

अर्थात

प्रेम बराबर अनंत

अनंत अर्थात

अर्थात

हाँ गगन

तो प्रेम बराबर गगन

अर्थात प्रेम

गगन के समतुल्य है…

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Added by SANDEEP KUMAR PATEL on January 31, 2013 at 4:23pm — 5 Comments

बहुत अच्छी है या रिश्वत बुरी है

वो जो कहते थे के चाहत बुरी है

दिवाने हो गए हालत बुरी है

बना अंधा फखत मगरूर कर दे

बढे गर इस कदर ताकत बुरी है

पचा पाए नहीं खैरात की जो

वही कहते हैं के दावत बुरी है

गँवा चैनो सकूँ ईमान अपना

पता पड़ता है के दौलत बुरी है

कहो मत बेबफा हमको हमनवा  

क़ज़ा दे दो न ये जिल्लत बुरी है

उसे लगता है दिल्लगी हँसना

मेरे हँसने की यूँ आदत बुरी है  

कतारों में खड़े रहना है…

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Added by SANDEEP KUMAR PATEL on January 30, 2013 at 10:06pm — 6 Comments

रिवाजो रस्म क्या सब कुछ बदल दिया तूने

जुरत-आमोज मेरे दिल ये क्या किया तूने

खगूर-ए-हम्द से भी कर लिया गिला तूने



फ़िक्रे-फ़र्दा न कोई गम कभी रहा हमको

कजा से संग दिल मेरे बचा लिया तूने



सुखन में आ गए हो ऐब ढूँढने लेकिन

हमनवा ये बता कितना जहर पिया तूने



अजल से चल रहा है क्या कभी ये सोचा है

रिवाजो रस्म क्या सब कुछ बदल दिया तूने



खुदा से मांग लो अब गैर के लिए भी कुछ

जिया अपने लिए तो "दीप" क्या जिया तूने ??



संदीप पटेल "दीप"



जुरत-आमोज - साहस सिखाने…

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Added by SANDEEP KUMAR PATEL on January 29, 2013 at 9:09pm — 14 Comments

परेशानियाँ

बिन बुलाये आ जाती हैं

कहने पर कहाँ जाती हैं

और हम भी दिन- रात

सोते- जागते

उठते-बैठते 

उन्ही को याद करते हैं

उन्ही के बारे में सोचते हैं

उनके बिन जैसे जीना मुहाल है  

हमारे पास वक़्त नहीं है

और वो ठहरे फ़ुरसतिया 

फिर भी कौन ऐसा है 

जो नहीं करता उनकी खातिर

आखिर हैं तो अपनी ही न

छोड़ भी तो नहीं सकते

जीने के लिए वही तो वजह है

.

.

.

.

.

कितनी अजीज होती हैं न !

ये "परेशानियाँ"



संदीप पटेल…

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Added by SANDEEP KUMAR PATEL on January 27, 2013 at 8:42pm — 5 Comments

ग़ज़ल "सजा कर रख लिया हमने जो खाली आबगीने को "

============ग़ज़ल =============

उड़ा कर छत हवा जब जब करे जाया पसीने को 

गरीबी कोसती फिरती है तब सावन महीने को 



बफा करने के बदले बेबफाई जब मिली यारो 

बढ़ा दर्द-ए जिगर हद से नहीं आराम सीने को 



मेरे हमराज मुझको इक शराबी मान बैठे हैं 

सजा कर रख लिया हमने जो खाली आबगीने को 



इलाहबाद जाकर पापियों ने पाप यूँ धोये 

हुई गंगा वहाँ मैली बचा पानी न…

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Added by SANDEEP KUMAR PATEL on January 22, 2013 at 4:00pm — 6 Comments

ग़ज़ल "अंधेरों को बहुत खलने लगे हैं"

======ग़ज़ल========

बहरे हजज मुसद्दस् महजूफ

वजन-1222/1222/122



दियों में तेल हम भरने लगे हैं

अंधेरों को बहुत खलने लगे हैं



नहीं रूकती हमारी हिचकियाँ भी

हमें वो याद यूँ करने लगे हैं…



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Added by SANDEEP KUMAR PATEL on January 16, 2013 at 3:30pm — 11 Comments

दोहे

==========दोहे===========…

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Added by SANDEEP KUMAR PATEL on January 15, 2013 at 3:30pm — 14 Comments

ग़ज़ल

=========ग़ज़ल=========

बहरे जदीद मुसद्दस महजूफ मक्फूफ़ मुतव्वी

वजन - 212 2121 2112



बात करना बड़ी बड़ी ही सही

झूठ हो या सही सही ही सही



इश्क के हर कदम पे वादे हों

तब तो करना है दोस्ती ही सही



गरचे…

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Added by SANDEEP KUMAR PATEL on January 12, 2013 at 6:25pm — 5 Comments

"ग़ज़ल"जिसे देखा नहीं हमने उसे भगवान बोलेंगे

===========ग़ज़ल=============

बहर-ए-हजज मुसम्मन सालिम 

वजन- 1222 / 1222 / 1222 / 1222 



गरीबों का दमन करके जो सीना तान बोलेंगे 

झुकाए सर उन्ही को आप तुर्रम खान बोलेंगे 



सिपाही काठ के पुतले बने फिरते हैं राहों में 

कसम खाई वो करने जो…

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Added by SANDEEP KUMAR PATEL on January 11, 2013 at 3:30pm — 8 Comments

कभी तो पास में आकर सदा सुनो दिल की

==========ग़ज़ल===========

कभी तो पास में आकर सदा सुनो दिल की
ज़रा सी चाह और ये इल्तजा सुनो दिल की

कहीं भी आप रहो हो न कोई दर्दो गम
जुबाँ से मेरे निकलती दुआ सुनो दिल की

छलक गए है जो प्याले निगाह मिलते ही
यूँ ले रही है नज़र क्या रजा सुनो दिल की

ग़ज़ब हुनर जो लिए खेलते हो तुम दिल से
कभी कभी ही सही बेबफा सुनो दिल की

अगर मगर तो हमेशा बजूद में होगा
कभी तो "दीप" यूँ ही बेवजा सुनो दिल की

संदीप पटेल"दीप"

Added by SANDEEP KUMAR PATEL on January 9, 2013 at 4:27pm — 7 Comments

सुन ले कायर पाकिस्तान

सुन ले कायर पाकिस्तान

नहीं झुकेगा हिन्दुस्तान



बात से पहले समझायेंगे

तुम क्या हो ये बतलायेंगे

भारत के वीरों का गहना 

संयम शांति जतलायेंगे 



अगर समझ फिर भी न पाया 

मारें थप्पड़ खींचें कान ....................... 



गीदड़ की न चाल चलो तुम 

छुप छुप कर न वार करो तुम 

शेरों से लड़ने के खातिर

कुछ हाथी तैयार करो तुम 



बच्चा बच्चा वीर यहाँ का

हमको है खुद पर अभिमान .................................



घुसपैठी को आज तजो…

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Added by SANDEEP KUMAR PATEL on January 9, 2013 at 3:54pm — 7 Comments

वो दिन कितने प्यारे थे

वो दिन कितने प्यारे थे

गाँव गाँव और

शहर शहर में 

प्रेम पगे गलियारे थे ......

स्वार्थ नहीं

इक अपनापन था

परहित में

जीवन-यापन था

अमन चैन के

रंग में रंगे 

आलोकिक भुनसारे थे ..........

कोई बुराई

नहीं करता था 

अविश्वास

सदा मरता था 

दोस्त दोस्त से

आस लगाये 

राग द्वेष अंधियारे थे ............

इक होती थी

सबकी राय

कोई अपनी

नहीं चलाय

संग में

जब तब 

होती मस्ती …

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Added by SANDEEP KUMAR PATEL on January 5, 2013 at 3:30pm — 6 Comments

एक दिन तुम देखना

एक दिन तुम देखना 

एक दिन तुम देखना



खौफ और आतंक ऐसे

बढ़ रहा है आज कैसे

लाज लुटती राह में यूँ 

लगता अंधा राज जैसे 



संस्कृति के जो हैं भक्षक सब बनेंगे सरगना ...........................



मान मर्यादा मिटाई

नींव रस्मों की हिलाई

अपने में सीमित हुई है

आजकल की ये पढ़ाई



बदलो ये सब अब नहीं तो होगा खुद को कोसना ..............................



शून्य ही बस अंक होगा 

पोखरों में पंक होगा

शुष्क होंगे वन और पर्वत  …

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Added by SANDEEP KUMAR PATEL on January 4, 2013 at 3:58pm — 10 Comments

अधजल गगरी छलकत जाए

आधा सुन के खूब सुनाये 

अधजल गगरी छलकत जाए



धैर्य नहीं इक पल भी रखना

चाहे मूरख सब कुछ चखना

क्या है मीठा क्या है खारा

नहीं भा रहा उसे परखना



अंतर में रख घोर अन्धेरा

बाहर बाहर दीप जलाए....................



सुने नहीं वो बात बड़ों की

आंके बस औकात बड़ों की

दिन को देख के नहीं सोचता 

गुजरे कैसे रात बड़ों की 



बिन अनुभव के बड़ा न कोई 

कौन भला इसको समझाए ........................



जो चाहूँ मैं अभी बनालूं

कच्ची माटी ऐसे…

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Added by SANDEEP KUMAR PATEL on January 3, 2013 at 3:41pm — 9 Comments

मुल्क की इस पाक माटी को मुबारक हो ये साल

मुल्क की इस पाक माटी को मुबारक हो ये साल

संग सी वीरों की छाती को मुबारक हो ये साल



चल पडा है कारवाँ अधिकार अपने मांगने

इस बगावत करती आंधी को मुबारक हो ये साल 



आग हर दिल में जला दी फूंक के डर का कफ़न 

हो चली रुखसत जो बेटी को मुबारक हो ये साल…



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Added by SANDEEP KUMAR PATEL on January 1, 2013 at 4:00pm — 7 Comments

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