For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

All Blog Posts (19,174)

प्रिय की प्रतीक्षा

अकेले क्यों आये हो तुम ऋतुराज,

क्यों नहीं साथ लाये मेरे प्रिय को आज?

उनकी प्रतीक्षा में थक गए नैन,

अधरों से मेरे फूटते नहीं है बैन।

 कटती नहीं मुझसे विरह की रैन,

आता नहीं मेरे मन को कहीं चैन।

उनके बिना होता नहीं कोई काम -काज।

अकेले क्यों आये हो तुम ऋतुराज,

क्यों नहीं साथ लाये मेरे प्रिय को आज?

बिना उनके फीका सौन्दर्य तुम्हारा,

कोयल के गीतों ने भी उन्हें पुकारा।

बिना प्रिय के अधूरा श्रृंगार हमारा,

काम -बाणों ने बेध दिया तन-मन सारा।

तुमसे ये…

Continue

Added by Savitri Rathore on March 14, 2013 at 8:05pm — 5 Comments

पार्थ और केशव

मैं अर्जुन भौतिक अनूसारा। तिरगुण पुट अखण्ड लाचारा।।

नाथ हृदय अति दीर्घ संदेहू। नश्वर देहि आपहु धरेहू ।।

तुम प्रभु सर्व समर्थ सनाथा। अष्ट योग-चैबिस तत्व गाथा।।

त्रिअवस्था अखण्डहि बृन्दा। होइ कोउ तुम्हारा गोविंदा ।।

हम भीरू कल्मष अनुरागी । मेरे ईष्ट कुटुम्ब अभागी ।।

हम गुरू पितु मातु बंधु के हंता।केहि विधि सुफल राज के संता।।

आपहु भौतिक रूप आचारू। गुरू पितु मात बंधु व्यवहारू।।

कस होइ हित बधे कुटुम्बा। क्षत्रिय नाम विलास अचम्भा।।

आपहु अंश-भिन्नांश न जानें ।…

Continue

Added by केवल प्रसाद 'सत्यम' on March 14, 2013 at 7:16pm — 2 Comments

आयो होली का त्यौहार

आयो होली को त्यौहार

रंग सतरंगी लेकर आई एक छैलछबिली नार,

आ के पास कर गई मेरे रंग बिरंगे गाल ।

कि आयो होली को त्यौहार्, कि आयो होली को त्यौहार् ॥.…

Continue

Added by बसंत नेमा on March 14, 2013 at 2:00pm — 8 Comments

ग़ज़ल "है ज़रा मुश्किल मगर रब राहबर मेरा भी है"

झूठ की गलियों में सच तक का सफ़र मेरा भी है

है ज़रा मुश्किल मगर रब राहबर मेरा भी है

बेबफा तुझसे बिछड़कर हाले दिल अब क्या कहें

जो उधर है हाल तेरा वो इधर मेरा भी है

मुंतज़िर होना नहीं खलता है हमको अब सनम

वक़्त का पाबंद तुझ सा मुंतजर मेरा भी है

दूध पीने की खबर पर यूँ पुजारी कह पड़े

संग में रब है मगर कुछ तो हुनर मेरा भी है

टूट कर बिखरा हुआ इक आइना इतरा रहा

शहरे बुत में हो रही हलचल असर मेरा भी…

Continue

Added by SANDEEP KUMAR PATEL on March 14, 2013 at 1:13pm — 7 Comments

दोहे

राष्ट्र् पिता परमात्मा, परम सनेही जान!
विश्व सकल परिवार है, अन्तरमन लें ठान!!

भाषा तुलसी दास सी, भाव हो शशी सूर !
देश का सम्मान बढे़, संवाद निरमल नूर!!

राष्ट्र् मेरा भारत मा, कमल तिरंगा शेर !
मयूरा नाचत दिल मा, रहा चक्र् को फेर!!

अच्छा संस्कारी देश, भारत जिसका नाम!
सदियों से यह पल रहा,मिला हड़प्पा शान!!
के’पी’सत्यम/मौलिक एवं अप्रकाशित रचना

Added by केवल प्रसाद 'सत्यम' on March 14, 2013 at 12:38pm — 3 Comments

नारी का मन

 

                                                          नारी का मन

                                          तुम समझ  सकोगे  क्या ? ...

                                 कि मेरी झुकी समर्पित पलकों के पीछे

                                 सदियों से स्वरहीन

                                 मेरी मुरझाई आस्था आज…

Continue

Added by vijay nikore on March 14, 2013 at 12:30pm — 22 Comments

बसन्तागमन का स्वागत

(मौलिक व अप्रकाशित रचना)



दिनकर रश्मियाँ मार्ग खोजती

चली शनैः शनैः वसुन्धरा पथ

तिमिर अकङता जकङे रहता

जोर लगाता वसुन्धरा ललाट

आलोक को विलोक तिमिर

विस्मृत करता स्वबल शक्ति

दिनकर रश्मियाँ पहुँच वसुन्धरा

मानव मानस भाव उपजाती

रमणी वसुन्धरा श्रृंगारित होती

केश मोगरा पुष्पदल सजाती

केसर मिश्रित टीका लगाती

कर्ण हरसिंगार फूल पहनती

मस्तक ओढे धानी चुनरिया

सप्तरंगी पुष्पमाल उर सुशोभित

कलाई गुलाबी कंगना डारे

हस्त गेंदा पहरे… Continue

Added by सतवीर वर्मा 'बिरकाळी' on March 14, 2013 at 12:26pm — 4 Comments

ग़ज़ल-शख़्स जब वो इधर से गुजरा है

शख़्स जब वो इधर से गुजरा है

एक पत्थर जरूर पिघला है।



दिल मेरा बार-बार धडका है,

क्यूँ मुझे कोई डर सा रहता है।



मेरा महबूब मेरा इतना है,

ज़िन्दगी भर की कोई आशा है।



चाँदनी आज और बढ गई है,…

Continue

Added by सूबे सिंह सुजान on March 14, 2013 at 7:00am — 11 Comments

हल्का-फुल्का,,,,हास्य रस

---------------

झाँसी की रानी रहॊगी प्राण लॆकर ही मेरॆ,

मौनी बाँध बैठी हॊ बॊल न उचारती हॊ ॥

बनाय खाय सिगड़ी  बुझाय बिस्तर लगा,

औंधी  पड़ी  खाट पर तुम  डकारती हॊ ॥

सात फॆरॆ जॊ लॆ लियॆ तुम्हॆं धॊबी मिल गया,

कपड़ॆ दिन मॆं सात  जॊड़ी  उतारती हॊ ॥

बताती रहती हॊ धौंस माई बाप  की मुझॆ,

 चमचॆ सॆ बॆलन सॆ झाड़ू सॆ मारती हॊ ॥

=============================

सखी तरकीब तूनॆ नहीं है बताई मुझॆ,

प्रॆम-सौंदर्य कॊ कैसॆ तुम निखारती हॊ ॥

आतॆ हैं पिया पीकर…

Continue

Added by कवि - राज बुन्दॆली on March 14, 2013 at 3:00am — 3 Comments

राहत के दो दिन दे रब्बा- गज़ल श्याम सखा श्याम

राहत के दो दिन दे रब्बा,

कुछ अलग से पल छिन दे रब्बा |

दर्द उदासी कितनी बाकी,

आज मुझे तू गिन दे रब्बा |

नाचे थिरके दिल मेरा भी,

ताक धिना धिन-धिन दे रब्बा |

करदे पूरी हर हसरत जो,…

Continue

Added by shyamskha on March 14, 2013 at 2:30am — 10 Comments

नारी....

मैं नारी....
हूँ सशक्तिकरण की पहचान,



मैंने ही जन्मे, मर्यादा पुरषोतम राम,

रास-लीला रचाने घनश्याम,…

Continue

Added by Deepika Mandal on March 13, 2013 at 11:30pm — 10 Comments

दोहा/व्यंग



भ्रष्टाचार जड़ विकट, माया-मोह-गठजांेड़।

कहे सुने बढ़ जात है, अहं-विकार-मदलोभ।।

पंडित वेद कुरान पाठ, करि सब हुए मसान।

नेता-भ्रष्टाचार-आतंक, सब बनगै श्रीमान।।

भ्रष्टाचार बन जगदगुरु, लूटे देश समूल ।

रामदेव-अन्ना हजारे, लिए हाथ मा तूल।।

,

जनता निरीह गाय-भैंस, लठैत है सरकार।

दूध दुहन को वोट बैंक, फिर पीछे मक्कार।।

नेता सब ज्रागत भये, सोवत संसद बीच ।

जनता जस जागरण करे, मारे झोंटा खींच।।

बंदर बांट-रेवड़ी बांट, बांट जो जोहे…

Continue

Added by केवल प्रसाद 'सत्यम' on March 13, 2013 at 11:17pm — 7 Comments

नज़्म/ कुछ आराम हो

धीरे धीरे शाम उतर आयी

धरती पर

मेरा इंतजार अभी भी बरकरार है

कि कब तेरा दीदार हो

और मेरी सुब्ह हो

 

तेरा जज्ब ए अमजद

या चाहत का असर

ओढ़ता बिछाता हूं…

Continue

Added by बृजेश नीरज on March 13, 2013 at 11:15pm — 5 Comments

-::जग मान जरा भव कालहि::-

जग मान जरा भव कालहि! 

’जग’ सागर कै बुल्ला ज्यों, तनिक छुवे मिट जाता है!

अहम ईर्षा लोभ क्षोभ जो, फॅसत निकल नहि पाता है!!

काम-’मान’ घास-पूस सो, यह चिनगी पाय दहकाता है!

मन नहि माने ’जरा’ सुनाये, तब बुध्दि योग उलझाता है!!



गृहस्थ ’भव’ स्वः विदेह जानो, राम नाम गुण गाता है!

केवल इस साधना भक्ति में, सद्गुरू ही पता बताता है!!

मित्र कुटुम्ब ’कालहि’ समान, छिन-छिन भ्रमहि कपट कहिहै!

सत्यम ज्ञान विराग लुटावहिं, जगमा न जरा भव का लहिहै!

सत्यम/मौलिकएवं…

Continue

Added by केवल प्रसाद 'सत्यम' on March 13, 2013 at 10:58pm — 1 Comment

मुआवजा नहीं मिला

(मौलिक व अप्रकाशित)



आया था मैं

शहर में

खोजने

रोजगार का अवसर

नहीं था गाँव मेँ

दो जून

खाने का सहारा

पाँच बीघा जमीन थी

भेंट चढ गई

सरकारी योजना के

अमले कहकर गये

बङी सङक बनेगी

मुआवजा मिलेगा

सङक बन गई

बहुत अच्छी बनी

चमकती थी

सीसे के जैसी

इंतजार किया

मुआवजे का

नहीं आये अमले

चक्कर काटे

दफ्तरों के

चप्पलें घिस गई

मुआवजा नहीं मिला।



रोटी का सहारा छिना

जमा पूँजी खत्म… Continue

Added by सतवीर वर्मा 'बिरकाळी' on March 13, 2013 at 10:51pm — 6 Comments

ओ बी ओ के समस्त साहित्यकारों से विनम्र निवेदन

साथियों, मैं एक शोध पत्र तैयार कर रही हूँ जो आगामी अखिल भारतीय साहित्यकला मंच द्वारा काठमाण्डु (नैपाल) में आयोजित (अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी समारोह - 8 जून 2013 से 11 जून, 2013 तक) में पढ़ा जायेगा, इस निमित ओ बी ओ के समस्त साहित्यकारों से विनम्र निवेदन के साथ कहना है कि यदि आप सभी के माध्यम से मुझे विदेशों में रहने वाले भारतीय साहित्यकारों की  सूची, उनके द्वारा सृजित साहित्य, व उनके द्वारा सम्पादित पत्र पत्रिकाओं की सूची उपलब्ध हो सकती हो तो कृपया उपलब्ध करायें, यदि आप…

Continue

Added by asha pandey ojha on March 13, 2013 at 10:30pm — 4 Comments

टूथ-पेस्ट की ट्यूब

टूथ-पेस्ट की ट्यूब

 

और एक दिन ऐसा भी आता है

खूब खूब दबाने से निकलता

चने के दाने बराबर

इत्ता सा टूथ-पेस्ट...

कि बने झाग थोडा सा

मुंह की बदबू दूर हो जाए

मुहलत मिले इतनी कि

शाम खदान से लौटते वक्त

ज़रूर खरीद लाना है

एक नया टूथ-पेस्ट...

 

अगली सुबह

हड़बड़ी में

वाश बेसिन के सामने

ब्रुश उठाते ही हाथ में

दिख जाता वही

पिचका

चिपटा

तुडा-मुडा टूथपेस्ट

मुंह…

Continue

Added by anwar suhail on March 13, 2013 at 9:31pm — 4 Comments

बस यूँ ही.....काश ये हलके होते.....

बस यूँ ही.....काश ये हलके होते.....

 

बचपन के सपने

खुली आँखों के सपने

खुला आकाश 

आज़ाद पंछी

बहुत से उड़ गए

कुछ सफ़र पूरा कर

वापस पलकों पर आ गए 

 

और अब...

बंद आँखों में नींद कंहा

नींद कभी आई तो

सपने…

Continue

Added by pawan amba on March 13, 2013 at 7:43pm — 11 Comments

कर पनीर तैयार (दोहा छंद)

अपनी गलती को प्रिये! मत समझो तुम भार।

दूध फटा तो क्या हुआ, कर पनीर तैयार॥



जीवन का उद्देश्य क्या, मिला हमें क्यों जन्म।

परमपिता को याद कर, करें निरन्तर कर्म॥



घृणा और पर डाह से, हो खुशियों का नाश।

प्रेम और सद्भाव से, मन में भरे प्रकाश॥



प्रेम और विश्वास हैं, दोनों एक समान।

जबरन ये न हो सके, चाहे जाये जान॥



दृश्य बदलते हैं प्रिये! बदलो अपनी दृष्टि।

निज नजरों के दोष से, दोषी दिखती सृष्टि॥



मेरी गलती भूलते, प्रतिदिन ही… Continue

Added by विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी on March 13, 2013 at 7:30pm — 11 Comments

पाधारो म्हारा देश

पाधारो म्हारा देश, पलक पावणा  बिछा देंगे

तुम जवानों के सिर काट लो, हम चुप नहीं बैठेंगे,कहकर सो जायेंगे



आतंक का नंगा नाच दिखाओ ,भेदिये  जुटा  देंगे  

कोई हमारे सब्र कि परीक्षा ना ले, और हम एक बार फिर फेल हो जायेंगे



खूब रेल जलाओ ,अपहरण करो ,आतंकी रिहा करा देंगे

शोर शराबा किया तो, सम्प्रदाइकता का  आरोप लगा ,ध्यान बटा देंगे…

Continue

Added by Dr Dilip Mittal on March 13, 2013 at 6:30pm — 9 Comments

Monthly Archives

2026

2025

2024

2023

2022

2021

2020

2019

2018

2017

2016

2015

2014

2013

2012

2011

2010

1999

1970

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

amita tiwari and आशीष यादव are now friends
14 hours ago
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
"मान्यवर  सौरभ पांडे जी , सार्थक और विस्तृत टिप्पणी के लिए आभार."
14 hours ago
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"आशीष यादव जी , मेरा संदेश आप तक पहुंचा ,प्रयास सफल हो गया .धन्यवाद.पर्यावरण को जितनी चुनौतियां आज…"
15 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय धामी जी सारगर्भित ग़ज़ल कही है...बहुत बहुत बधाई "
20 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार
"आदरणीय सुशील जी बड़े सुन्दर दोहे सृजित हुए...हार्दिक बधाई "
20 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"प्रबंधन समिति से आग्रह है कि इस पोस्ट का लिंक उस ब्लॉक में डाल दें जिसमें कैलंडर डाला जाता है। हो…"
22 hours ago
आशीष यादव posted a blog post

गन्ने की खोई

पाँच सालों की उम्र,एक लोहे के कोल्हू में दबी हुई है।दो चमकदार धूर्त पत्थर (आंखें) हमें घुमा रहे…See More
yesterday
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय श्री सुशील जी नमस्कार।  बहुत अच्छे दोहे रचे गए हैं।  हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए।"
yesterday
आशीष यादव commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"एक बेहतरीन ग़ज़ल रचा है आपने। बिलकुल सामयिक।  इस बढ़िया रचना पर बधाई स्वीकार कीजिए।"
yesterday
आशीष यादव commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"सदियों से मनुष्य प्रकृति का शोषण करता रहा है, जिसे विकास समझता रहा है वह विनास की एक एक सीढ़ी…"
yesterday
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .अधर
"वाह। "
yesterday
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .विविध
"आदरणीय श्री सुशील जी नमस्कार।  बहुत बढ़िया दोहों की रचना हुई है।  बधाई स्वीकार कीजिए।"
yesterday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service