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All Blog Posts (19,160)

मैं.. बस एक अंश..

उस दिव्य ज्योति की अंश मात्र..

हूँ उस असीम की कृपापात्र..

इस रंगमंच पे जीना है..

कुछ वर्ष-माह मुझे मेरा पात्र..



कुछ ज्ञान कहीं जो सुप्त सा है..

उसको जड़ता से…

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Added by Lata R.Ojha on January 16, 2011 at 4:30am — 2 Comments

GHAZAL - 25

                ग़ज़ल



हर   रिफअत  मुझसे  फकत,   सादमां  रहा |


ज़ुल्म  थी  ज़मीं   और   कहर  आसमां  रहा ||



खुर्शीद -ओ- चाँद-तारे,  शोले  बने  हैं  आज,


गुल  है  न   कोई   गुलशन  न  बागवां  रहा ||



मिलते   नहीं   हैं   रिश्ते,  वज्मे - ज़हान  में,


साकी  के  मय को मयक़स,  है आजमा रहा ||



हसरत है ज़िंदा लेकिन अब मर चुका है दिल,…
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Added by Abhay Kant Jha Deepraaj on January 15, 2011 at 9:00pm — 1 Comment

सफ़र

बातों बातों में कट गया सफ़र पता ही न चला

आखिर में था न कोई शिकवा न कोई था गिला

बातों बातों में कट गया सफ़र पता ही न चला



कभी रस्ते में सताया इस भीड़ ने

गिरे भी तो उठाया इस भीड़ ने

यों ही चलता रहा सिलसिला

पता ही न चला ..



बातों बातों में कट गया सफ़र पता ही न चला



जागते थे रात भर उजाले की चाह में

वो सपने ही सहारे थे उस राह में

यों ही एक दिन मिल गया शिखर पता ही न चला



बातों बातों में कट गया सफ़र पता ही न चला …

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Added by Bhasker Agrawal on January 15, 2011 at 2:00pm — 2 Comments

GHAZAL - 24

                    ग़ज़ल



इन्सां  तेरे  कदम  तक,   ये  आसमां  झुके |

मंजिल  न  हो  जहाँ,  न  वहाँ  कारवाँ  रुके ||



हस्ती है तेरी खुद में  चिरागां -ए-शब्,  सहर,


तूफां  है  तू  वो,  देख  जिसे,  हर  रवां  रुके ||



रौशन हैं तुझसे रौशनी,  के कारवाँ -ओ- दर,


मुमकिन है, तू जो चाहे, तो खुद, खुदा झुके ||



मंजिल है तेरी वो क़ि-  ज़न्नत  को  रश्क  है,…
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Added by Abhay Kant Jha Deepraaj on January 15, 2011 at 12:58pm — 4 Comments

कुछ ऐसा सोचें।

चलो आज कुछ ऐसा सोचें। 

रोज़ नहीं हम जैसा सोचें

नींद उड़ा दे जो रातों की

सपना कोई ऐसा सोचें

बनती बात बिगड़…

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Added by Pradeep Singh Chauhan on January 15, 2011 at 12:36pm — 2 Comments

GHAZAL - 23

    ग़ज़ल



हमनें हज़ार गम इस,  दिल से लगा लिए हैं |

जब
दर्द हद से गुजरा,  आँसूं  बहा  लिए  हैं ||



उनका भरम है शायद,  काँटों को मैं ने चाहा,

पर, राह में मिले तो,  ये  साथ  आ  लिए हैं ||



है किसके दिल की चाहत, उसे चैन न मिले,

पर,  आश  के  दीपक,  बस नाम के दिये है ||



कभी इसके दर पे बैठे, कभी उसके दर पे बैठे,

ये …
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Added by Abhay Kant Jha Deepraaj on January 15, 2011 at 12:30pm — 4 Comments

तुम वही हो

तुम वही हो
जिसके लिए मैने स्वपन बुने है
तुम वही हो
जिसकी धुन मैने गुने है
तुम वही हो
जिसके लिए ह्रदय मे स्पंदन है
तुम वही हो
जिसके लिए मन में बँधन है
तुम वही हो
जिसके बिना आँखो मे नमी सी थी
तुम वही हो
जिसकी जीवन में कमी सी थी

Added by Raju on January 14, 2011 at 11:17pm — 4 Comments

सॉरी सर (कहानी )अंक -3

सॉरी सर (कहानी )
लेखक - सतीश मापतपुरी
अंक -3
-------------------- गतांक से आगे ----------------------------
"जी नहीं, सोनाली घोष." प्रो. सिन्हा ने आज बड़े गौर से उस लड़की की आँखों में देखा.मनोविज्ञान के विशेषज्ञ
के लिए उस लड़की की आँखों की…
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Added by satish mapatpuri on January 14, 2011 at 3:30pm — No Comments

स्वप्निल सुबह

गुनगुनाती मध्यम धूप सुबह की, 

तन -मन मैं बिखेर देती है अनगिनित उजाले'

कहीं खो जाते है इस स्वर्णिम चमक में,

मन में छुपे कुछ बादल काले

 

खिल जाती हैं, नयी उमीदों की नयी कोपलें

नई धुन पर तैयार ,नई गुनगुनाहटे,  

  पहले से जवान, पहले से हसीन, 

  मन के कोने से निकलकर कहीं,                           

कोरे कैनवास…

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Added by anupama shrivastava[anu shri] on January 14, 2011 at 1:00pm — 6 Comments

डा.महंगाई सिंह

पूरा देश महंगाई के मार से पस्त है .महंगाई नियंत्रण की कही कोई उम्मीद नहीं दिख रही है .पक्ष बिपक्ष लगातार बयानबाजी कर रही है लेकिन निदान किसी के पास नहीं है.और यह सब तब हो रहा है जब इस देश की बागडोर एक कुशल अर्थशास्त्री डा.मनमोहन सिंह के हाथ में है.ये वो अर्थशास्त्री है जिन्होंने भारत को उस संकट से निकला था ,जब पूरा देश का सोना गिरवी रखने की नौबत आ गयी थी .इन्होने अपने अर्थशास्त्र और कौशल परिचय देते हुए भारत को उस मुसीबत से निकाला और एक विस्वसनीय योद्धा बन कर सामने आये. वर्ष २००४ से लेकर २००९ तक… Continue

Added by Ratnesh Raman Pathak on January 14, 2011 at 11:48am — 2 Comments

धर्म का पालन

में रोज जब घर से निकलता हूँ

तो खुला आसमान दिखता है

जैसे कि वो अपनी अनन्तता में

मेरा स्वागत कर रहा हो,

 

हवाएं मेरे बालों को सहलाती,

पंछी गीत गाते मुझे सुकून देते हैं

जमीन मेरा बोझ उठाकर

मुझे सम्हाले रखती है,

 

ये इनका रोज का नियम है ,

उनका प्रेम है जो, कभी कम नहीं होता

शायद वो अपना धर्म नहीं जानते ,

वरना मुझे छोड़ आपस में ही

वाद विवाद में उलझे होते,

 

या फिर शायद वो अपना…

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Added by Bhasker Agrawal on January 14, 2011 at 10:00am — 5 Comments

जख्म, तकदीर और मैं

जख्म भरता नहीं.. दर्द थमता नहीं,

कितनी भी कोशिश कर ले कोई,

तकदीर का लिखा मिटता नहीं ...

चलता ही रहता है, जिंदगी का सफ़र,

कोई किसी के लिए, यहाँ रुकता नहीं..

 

खुद ही सहने होंगे सारे गम,

किसी की मौत पर कोई मरता नहीं,

हंसने पर तो दुनिया भी हंसती है संग,

हमारे अश्को पर, कोई पलकें भिगोता नहीं ...

 

आज दर्द हद से गुजर जायेगा जैसे,

कोई बढ़कर साथ देता नहीं,

जिंदगी तुझसे गिला भी क्या करे,

वक़्त से पहले,…

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Added by Anita Maurya on January 14, 2011 at 8:01am — 2 Comments

सॉरी सर (कहानी ) अंक - 2

सॉरी सर (कहानी )
लेखक - सतीश मापतपुरी
अंक - 2
---------------- गतांक से आगे ----------------------------------
इस छोटे से पत्र के समक्ष उन्हें जीवन के…
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Added by satish mapatpuri on January 13, 2011 at 4:00pm — 2 Comments

ग़र साथ नहीं तेरी किस्मतें...

 

यूँ तो उड़ सकता है कोई कागज़ का पुर्ज़ा भी
पैर ज़मीन पर पसारे,
कभी कभी भाग्य के सहारे,
लेकिन उड़ नहीं पाता वही…
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Added by Veerendra Jain on January 13, 2011 at 11:30am — 13 Comments

कविता : गूलर का फूल

कितने किस्से गढ़े गए

गूलर के फूल पर…

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Added by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on January 13, 2011 at 10:52am — 4 Comments

असल

चाँद नज़र ना आया तो गम है क्या

सितारों का साथ पाया ये कम है क्या



में तो खुद पे यकीन करता हूँ

नहीं जानता में के भरम है क्या



ना कर तू ज़ाहिर मुझको ख्वाइश अपनी

तेरी जरूरत में शामिल हम है क्या



चाहत मेरी मेरे ख्वाबों में बरसती है

नहीं… Continue

Added by Bhasker Agrawal on January 13, 2011 at 9:56am — 5 Comments

वो कौन है-2

वो कौन है,

 

अतीत जैसा पास है,

या कि मेरा आज है,

व आगे का एहसास है|

मैं फंसा इन उलझनों में, सोचता,

वो कौन है|

 

जो गा सकूँ वो गान है,

कि मिला सकूँ वो तान है,

या कि मेरा सम्मान है|

ये सुलझ जाए पहेली, जान लूँ,

वो कौन है|

 

मधुरव भरा वो साज है,

या कि नवोढ़ा लाज है,

मेरे लिए क्यूँ राज है?

एक रूप सदिश बने तब, कह सकूँ,

वो कौन है|

 

गुल है वो कि बाग़…

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Added by आशीष यादव on January 13, 2011 at 9:32am — 14 Comments

फैज़ अहमद फैज़

फैज़ अहमद फैज़ की जन्मशती वर्ष के अवसर पर



भारतीय उपमहाद्वीप में इस साल फैज़ अहमद फैज़ की जन्मशती का जश्न चल रहा है। पाकिस्तान की सरजमीं के इस शानदार शायर को वस्तुतः संपूर्ण भारतीय उपमहाद्वीप का शायर माना जाता है। फैज़ अहमद फैज़ की शायरी मंत्रमुग्ध करने वाली शायरी मानी जाती है। इसका अहम् कारण रहा कि फै़ज़ ने साहित्य और समाज की खातिर जीवनपर्यन्‍त कठोर तपस्या अंजाम दी। जिंदगी भर समाज के गरीब मजलूमों के लिए समर्पित रहने वाले फै़ज़ ने बेवजह शेर कहने की कोशिश कदाचित नहीं की। उनके कविता…

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Added by prabhat kumar roy on January 13, 2011 at 7:30am — 3 Comments

फिर एक किनारा......? Copyright ©

 

फिर एक किनारा......? Copyright ©



फिर एक किनारा......?

इस ओर से उस ओर को जाने वाला एक खिवैया..

दो किनारों के बीच आवाजाही ही तो है जो समझ नहीं आती है..

रेत पर मेरे स्वागत को तत्पर..

बलुआ मिटटी और सीपियों से बनी तुम्हारी रंगोली..

मेरे आने से पहले ही बड़ी लहर उसे निगल…

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Added by Jogendra Singh जोगेन्द्र सिंह on January 12, 2011 at 11:32pm — 2 Comments

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