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चुटकुला(लघुकथा)

दोनों के ठहाकों की गूँज सुन एकत्र हुई भीड़ से आवाज आई, "मौन माहौल में ऐसी हँसी क्यूं, भाई?"
"खुद पर हँस रहा हूं।" पहले व्यक्ति ने जवाब दिया।
"कारण?" भीड़ ने जानना चाहा।
"अपने मत से मैंने ऐसी सरकार चुनी। मति मारी गई थी मेरी।"
"और तुम....?" दूसरे से सवाल हुआ।
"मैंने मत नहीं दिया था। खुश हूं।"
फिर भीड़ शराबियों की तलाश में आई पुलिस के पीछे दौड़ी जो एक अधनंगे भिखारी को नशाखोरी के आरोप में पकड़कर ले जाने लगी थी।
"मौलिक एवं अप्रकाशित"

Added by Manan Kumar singh on April 25, 2023 at 1:53pm — 2 Comments

पुश्तैनी कर्ज़

चार रुपये लिए थे, मेरे दादा ने कर्ज़ में

कल तक बाबा चुका रहे थे, ब्याज उसका फर्ज़ में

 

रकम बढ़ी फिर किश्त की, हर साल के अंत में

मूलधन खड़ा है अब भी, ब्याज दर के द्वंद में

 

चार बीघा ज़मीन थी, अपना खेत खलिहान था

हँसता खेलता घर हमारा, स्वर्ग के समान था

 

बाढ़ आयी सब तबाह हुआ, बाबा की हिम्मत टूट गयी

कल तक जो खिली हुई थी, किस्मत जैसे…

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Added by AMAN SINHA on April 23, 2023 at 8:32am — 2 Comments

दोहा मुक्तक .....

दोहा मुक्तक 

मन को जब मन में मिली , मन चाही पहचान ।
मन  में   जागे   प्यार   के, अनजाने    तूफान ।
मन  की  मोहक  कल्पना, मन के  सुन्दर तीर -
मन ही मन मुस्का रहे, मन  के  सब  अरमान ।
                      * * *
पागल  इच्छा  सो   गई,  स्वप्न  हुए  साकार ।
चातक  नैनों  को  मिला, तृष्णा  का  उपहार ।
शापित अभिलाषा हुई, मन को मिला न मीत -
क्षीण  बिम्ब  सब हो  गए, धधक  पड़े शृंगार ।

सुशील सरना / 22-4-23

मौलिक एवं अप्रकाशित 

Added by Sushil Sarna on April 22, 2023 at 2:54pm — 2 Comments

ग़ज़ल

212 212 212 212

मैं उसी मोड़ पर सोचता रह गया

वो गया याद का सिलसिला रह गया



उसके होंठो पे कुछ बात सी रह गयी

मेरे मन में भी कुछ अनकहा रह गया



देख कर सब मुझे बात करने लगे

हाय क्या शख़्स था और क्या रह गया



आज फिर आँखों में है नमी अज़नबी

आज फिर आइना ताकता रह गया



मिट गया प्यार मायूस नाकाम हो

प्यार का दर्द लेकिन बचा रह गया



कहकहों से भरी चाँद की महफ़िलें

इक चकोरा उसे टेरता रह गया



दोस्त दामन बचाकर बिछड़ते…

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Added by बृजेश कुमार 'ब्रज' on April 21, 2023 at 8:00am — 2 Comments

असत्य स्वीकार नहीं

उषा अवस्थी

धरा पाँव जब सत्य मार्ग पर
मुश्किल पथ,आसान नहीं

सही वस्तु की ग़लत व्याख्या
इस मन का आधार नहीं

तीव्र धार की असि ग्रीवा पर
हो, असत्य स्वीकार नहीं

शान्त,अडिग,निःशंक,अकेला
"मै", लव भर का भार नहीं

दृष्टा पर अवलम्ब दृश्य
दृष्टा तो मुक्त , विकार नहीं

अकथ,अलौकिक,अतुल,अनामय
को मिथ्या स्वीकार्य नहीं

मौलिक एवं अप्रकाशित

Added by Usha Awasthi on April 19, 2023 at 10:22pm — 2 Comments

अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास

एक ताज़ा ग़ज़ल जो अधूरी लगती है

122 122 1212 122 122 1212

मेरे साथ लम्हें गुज़ार ले,मुझे भूलने का ख्याल क्यों?

मुझे इस भंवर से उबार ले,मुझे भूलने का ख्याल क्यों?

भले आज तुझसे मैं दूर हूँ, किसी बेबसी का सुरूर हूँ

मुझे फिर से दिल में उतार ले,मुझे भूलने का ख्याल क्यों?

मैं तेरी नज़र का करार था ,तेरे सूने मन की बहार था।

मुझे गौर से तो निहार ले ,मुझे भूलने का ख्याल क्यों?

मुझे देख ले फिर उसी तरह,मेरे पास आजा किसी तरह

मुझे चाँद कह के पुकार ले,मुझे भूलने…

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Added by मनोज अहसास on April 18, 2023 at 11:17pm — 2 Comments

एहसास (कविता)

बदलते मौसम-से बदल गए 

बढाते हुए कदम और आगे बढ़ गए 

कौन कहता है कि हरजाई हो 

बदलना था तुमको और तुम बदल गए|

छूट गए गलियारे कितने ही! 

रूठ गए सुखद पल उतने ही 

अब बहार आये लगता नहीं है 

 क्यारियाँ महके लगता नहीं है| 

नहीं! नहीं! कुछ अलग नहीं हुआ है 

दुनिया का दस्तूर ही तो निभाया है 

भावनाओं का कुचलना स्वाभाविक था 

यूँ कदम-तले रौंद देना ही ठीक था | 

खुश हैं गलियारे तुम्हारे करीब…

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Added by KALPANA BHATT ('रौनक़') on April 17, 2023 at 6:35pm — No Comments

अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास :इस्लाह के लिए

2122 1122 1122 22

उठ के चल राह में तू मेरी उजाले कर दे

या कि चुपचाप मुझे मेरे हवाले कर दे

तुझको पीना है मेरा खून अभी मुद्दत तक

मेरे हिस्से में भी दो चार निवाले कर दे

अपनी तकदीर से ज्यादा तुझे शक है मुझपर

मेरे पीछे तू कईं देखने वाले कर दे

ये भी मुमकिन है बदल दे मुझे रस्तों का मिजाज़

ये भी मुमकिन है तेरे पाँवों में छाले कर दे

तोड़ डाला है हवाओं ने भरम मेरा तो

कहीं ये दौर तेरे…

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Added by मनोज अहसास on April 13, 2023 at 11:22pm — No Comments

श्रम चोर

उषा अवस्थी

सुबह सबेरे थैलियाँ लेकर निकलें आप

तोड़ पुष्प झोली भरें प्रभु-पूजा के काज

भगवन भूखे भाव के, न जानें यह मर्म

दूजों के श्रम की करें चोरी, नित्य अधर्म

माली से ले आज्ञा, गुरु के हित, सुखधाम

फुलवारी में जनक की, फूल चुने तब राम

मन्दिर में प्रभु को प्रसन्न करने के हित,भोर

गलियों - गलियों डोलते हैं प्रसून के चोर

पाले, पोसे , सींच कर बड़ा करे कोई और

नष्ट करें शाखाओं को खींच-खींच…

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Added by Usha Awasthi on April 13, 2023 at 5:58pm — 2 Comments

ग़ज़ल 'नूर' की - कोई हुस्न-परस्त जो अपने रब की बातें करता है

कोई हुस्न-परस्त जो अपने रब की बातें करता है

तिल की बातें करता है या लब की बातें करता है.

.

दिल तो फिर भी धड़कन धड़कन सब की बातें करता है

ज़ह’न है साहूकार फ़क़त मतलब की बातें करता है.

.

लड़ते लड़ते दुश्मन से भी हो जाता है इश्क़ अजब

जुगनू भी अक्सर दीये से शब् की बातें करता है.

.

इक मुद्दत से यार! चलन से बाहर है ये लफ़्ज़-ए-वफ़ा  

दिल नादान मुअर्रिख़ जैसा; कब की बातें करता है.                         मुअर्रिख़- इतिहास-कार…

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Added by Nilesh Shevgaonkar on April 13, 2023 at 4:00pm — 6 Comments

क़िस्मत के मेरे पन्ने ही कोरे निकल गए (ग़ज़ल)

दिल में जो मेरे ख़्वाब मुहब्बत के पल गए

इस ज़िन्दगी के सारे मआनी बदल गए

ग़ैरों में इतना दम कहाँ था मात दे सकें 

अपने समर के बीच विभीषण निकल गए 

आहों का मेरी उन प नहीं कुछ असर हुआ

सुन कर मगर उसे कई पत्थर पिघल गए

उसकी जुदाई में मेरी हालत को देख कर

यमराज के भी भेजे फ़रिश्ते दहल गए

दावा था जिनका साथ निभाएँगे उम्र भर

ग़ुर्बत में जीता देख के रस्ते बदल गए 

उसको मैं बेवफ़ाई का दूँ दोष किस…

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Added by Ajay Kumar on April 11, 2023 at 8:48pm — No Comments

कुछ कर न सका

वो मुझसे दूर होती गई

और मैं देख्ता रहा चुपचाप

कुछ कर न सका

दुख की सीमा मत पूंछो

कितना कम्मपित था हृदय अरे

मन भीषण सन्ताप से पीडित था

कुछ कर न सका

कुछ कर न सका हे नाथ

वो मुझसे दूर होती गई

और मैं देख्ता रहा चुपचाप

मानव हृदय भी कैसा है

कुछ सोच रहा कुछ होता है

मानव हृदय भी कैसा है

कुछ सोच रहा कुछ होता है

बस में इसके कुछ भी तो नहीं

बस पडा पडा ये रोता है

वो दूर गई जाती ही रही…

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Added by DR ARUN KUMAR SHASTRI on April 10, 2023 at 1:30am — No Comments

दोहा मुक्तक .....

दोहा मुक्तक 

नाम बदलने से कहाँ , खुलें भाग्य के द्वार ।

बिना  कर्म  संसार  में, कब  होता  उद्धार ।

जब तक चलती जिन्दगी, चले जीव संग्राम -

जीवन के हर मोड़ का, हार  जीत  शृंगार ।

                         ***

काहे  अपने  रूप  पर, करता  जीव गुमान ।

कहते   हैं   रहती  नहीं, उम्र  ढले  पहचान ।

बुझ कर भी बुझती नहीं, अरमानों की आँच -

मुट्ठी   भर    की   जिंदगी, तेरी  है   इंसान ।

सुशील सरना /

मौलिक एवं…

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Added by Sushil Sarna on April 5, 2023 at 1:01pm — 2 Comments

(ग़ज़ल) जो सच का पैरोकार नहीं

22     22     22     22

 

जो सच का पैरोकार नहीं 

वो काग़ज़ है अख़बार नहीं 

 

बेशक मैं गुल का हार नहीं

पर नफ़रत का भण्डार नहीं 

 …

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Added by Ajay Kumar on April 4, 2023 at 9:00pm — 2 Comments

ग़ज़ल( यहाँ की बात वहाँ ला के जोड़ देते हैं)

1212 1122 1212 22

ये न्यूज़ वाले कहानी को मोड़ देते हैं

यहाँ की बात वहाँ ला के जोड़ देते हैं

ख़राब आज को करते नहीं हैं उसके लिए

जो कल की बात है कल पे ही छोड़ देते हैं

बड़े ही प्यार से माँ बाप पालते जिनको

उमीद उनकी वो  बच्चे  ही  तोड़ देते हैं

दिखाते फिरते नहीं ज़ख़्म अपने दुनिया को

हम  अपना  दर्द  ग़ज़ल  में  निचोड़  देते  हैं

जो आइना तुझे घूरे अधिक समय तक तो

उस आइने की  भी आँखों को फोड़ देते हैं

उठा के …

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Added by नाथ सोनांचली on April 4, 2023 at 1:56pm — 4 Comments

अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास :इस्लाह के लिए

2122   2122   2122  212

तुम हमारे दौर के इक रहनुमा हो तो हँसों।

नाच कठपुतली का जग में हो रहा देखो हँसों।1

इश्क़ वालों ने किसी भी दौर में पाया न चैन,

सूखी आँखों से सभी की दास्तां लिक्खो, हँसों।2

मुझको दिल से है ज़रूरत अपने घर की छांव की,

मेरे पथ में बिछ चुके हर खार को देखो,हँसों।3

घर किसी का तोड़ने फिर आ गई है वो मशीन,

खूब दिल से ये तमाशा देखने वालों हँसों ।4

चूर हो जाओगे तुम टकरा के इन…

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Added by मनोज अहसास on April 1, 2023 at 12:04am — 2 Comments

ताजगी का एक झोंका नित्य लाती खिड़कियाँ - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

रोशनी उस पार बेढब नित दिखाती खिड़कियाँ

काश नन्ही भोली चिड़िया खोल पाती खिड़कियाँ/१

*

है नहीं कोई उबासी सोच पर हावी सनम

ताजगी का एक झोंका नित्य लाती खिड़कियाँ/२

*

दूर पथ पर चाँद बढ़ता हसरतों से देखना

याद का झोंका लिए यूँ याद आती खिड़कियाँ/३

*

इस हवा को बात कोई कर रही बेचैन क्या

द्वार के ही साथ जो ये खटखटाती खिड़कियाँ/४

*

ढूँढ लेना छाँव पन्छी पेड़ की इक डाल पर

दोपहर की धूप से जब कुम्हलाती खिड़कियाँ/५

*

कर दिया जर्जर समय ने ओढ़ ली हर…

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Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 31, 2023 at 10:24pm — No Comments

तितली ( दोहे ) - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

आ जाती हैं  तितलियाँ, होते ही नित भोर

सब को इनकी सादगी, खींचे अपनी ओर।१।

*

मधुवन में जब तितलियाँ, बहुत मचाती धूम

पीछे - पीछे  भागता,  हर्षित   बचपन  झूम।२।

*

फूलों से अठखेलियाँ, कलियों से कर बात

तन–मन में जादू  जगा, तितली  सोये रात।३।

*

मधुबन  में  जब  बैठते, बच्चे , वृद्ध, जवान

सबकी देखो तितलियाँ, हरती लुभा थकान।४।

*

छोटे -छोटे  पंख  से, रचकर  मृदु  संगीत

कलियों से तितली कहे, फूल बने हैं मीत।५।

*

नापे नभ  को  तितलियाँ,…

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Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 31, 2023 at 10:02pm — 2 Comments

हमें यूँ न रंगीन सपने दिखाओ - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

१२२/१२२/१२२/१२२

*

अँधेरों से जब जब डरी रोशनी है

बड़ी मुश्किलों में पड़ी जिन्दगी है।१।

*

कहीं आदमी खुद लगे देवता सा

कहीं देवता भी हुआ आदमी है।२।

*

सहेजी न हम से गयी यार पुरवा

कहो मत कि अब हर हवा पश्चिमी है।३।

*

हमें यूँ न रंगीन सपने दिखाओ

हमारे हृदय में बसी सादगी है।४।

*

समझ कौन पाया रही एक औषध

कहन आपकी जो लगी नीम सी है।५।

*

वही लोक में नित हुए देवता हैं

जिन्हें नार केवल रही उर्वसी है।६।

*

मौलिक /…

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Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 30, 2023 at 4:57am — 2 Comments

सम्राट अशोक महान

चन्द्रगुप्त का पौत्र, जो बिन्दुसार का पुत्र था

बौद्ध धर्म का बना अनुयायी

जो धर्म-सहिष्णु सम्राट हुआ||

 

माता जिसकी धर्मा कहलाती, सुशीम नाम का भाई था

इष्ट देव शिव-शंकर पहले

ज्ञान-विज्ञान का बड़ा जिज्ञासु हुआ||

 

परोपकार की भावना जिसमें, उत्सुक जो अभिलाषी था

महेंद्र-संघमित्रा का पिता न्यारा

सदा पुत्र-पुत्री का साथ मिला||

 

बेहतरीन अर्थव्यवस्था ग़ज़ब सुशासन, जिसका…

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Added by PHOOL SINGH on March 28, 2023 at 4:27pm — 1 Comment

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