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Naveen Mani Tripathi's Blog (306)

ग़ज़ल



2122 1212 22

खूब सूरत गुनाह कर बैठे ।

हुस्न पर हम निगाह कर बैठे ।।

आप गुजरे गली से जब उनके ।

सारी बस्ती तबाह कर बैठे ।।

कुछ असर हो गया जमाने का ।

ज़ुल्फ़ वो भी सियाह कर बैठे ।।

देख कर जो गए थे गुलशन को ।

आज फूलों की चाह कर बैठे ।।

जख्म दिल का अभी हरा है क्या ।

आप फिर क्यों कराह कर बैठे ।।

किस तरह से जलाएं मेरा घर ।

लोग मुझसे सलाह कर बैठे ।।

लोग नफरत की इस सियासत…

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Added by Naveen Mani Tripathi on March 4, 2019 at 1:00pm — 11 Comments

ग़ज़ल

अब शहादत को न जाया कीजिये ।

आइना उनको दिखाया कीजिये।।

मुल्क में है इन्तकामी हौसला ।

हौसलों को मत दबाया कीजिये ।।

आग उगलेगी सुख़नवर की कलम ।

अब न कोई सच छुपाया कीजिये ।।

ख़ाब जो देखें हमारे कत्ल की ।

हर सितम उनपे ही ढाया कीजिये ।।

उनके हमले से फ़जीहत हो गयी।

दिल यहाँ अपना जलाया कीजिये ।।

तफ़सरा कीजै नये हालात पर ।

आप अपना घर बचाया कीजिये…

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Added by Naveen Mani Tripathi on February 24, 2019 at 8:39pm — 4 Comments

ग़ज़ल



1212  1122 1212 22/112

क़ज़ा का करके मेरी इंतिज़ाम उतरी है ।

अभी अभी जो मेरे घर मे शाम उतरी है ।।

तमाम  उम्र  का ले तामझाम उतरी है ।

ये जीस्त मौत को करने  सलाम उतरी है ।।

अदाएं देख के उसकी ये लग रहा है मुझे ।

कि लेने  हूर  कोई  इंतिकाम  उतरी है ।।…

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Added by Naveen Mani Tripathi on February 13, 2019 at 8:30pm — 4 Comments

ग़ज़ल

1222 1222 1222 1222

फ़ना के बाद भी अपनी निशानी छोड़ आये हैं ।

जिसे तुम याद रक्खो वो कहानी छोड़ आए हैं ।।

सुकूँ मिलता हमें कैसे यहां परदेश में आकर ।

विलखती मां की आंखों में जो पानी छोड़ आये हैं ।।

कलेजा मुँह को आता है जरा माँ बाप से पूछो ।

जो घर से दूर जा बेटी सयानी छोड़ आये हैं ।।

हमें इंसाफ का उनसे तकाज़ा ही नहीं था कुछ ।

अदालत में तो हम भी हक़ बयानी छोड़ आये हैं ।l

तेरे प्रश्नों का उत्तर था तेरे लहजे में ही…

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Added by Naveen Mani Tripathi on February 11, 2019 at 12:55am — 3 Comments

ग़ज़ल



221 2121 1221 212

छलके जो उनकी आंख से जज़्बात ख़ुद ब ख़ुद ।

आए मेरी ज़ुबाँ पे सवालात ख़ुद ब  ख़ुद ।।

किस्मत खुदा ने ऐसी बनाई है सोच कर ।

मिलती गमों की हमको भी सौगात ख़ुद ब ख़ुद ।।

चर्चा  है  शह्र  में  उसी की  देख आज कल ।

बाँटा है जिसने इश्क़ को ख़ैरात ख़ुद ब ख़ुद ।।…

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Added by Naveen Mani Tripathi on February 1, 2019 at 3:01pm — 3 Comments

ग़ज़ल

1212     1122     1212      22

क़ज़ा के वास्ते ये इंतिज़ाम किसका है ।

तेरे  दयार  में  जीना  हराम किसका  है ।।

उसे है ख़ास ज़रूरत  जरा पता करिए ।

बड़े  सलीके  से  आया  सलाम किसका  है ।।

दिखे हैं रिन्द बहुत तिश्नगी के साथ वहाँ ।

कोई बताए गली में मुकाम किसका है ।।

है जीतना तो ख़यालात ऐब…

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Added by Naveen Mani Tripathi on January 21, 2019 at 8:30pm — 3 Comments

ग़ज़ल

1222 1222 122

अभी तक आना जाना चल रहा है ।

कोई रिश्ता पुराना चल रहा है ।।

सुना है शह्र की चर्चा में आगे ।

तुम्हारा ही फ़साना चल रहा है ।।

इधर दिल पर लगी है चोट गहरी ।

उधर तो मुस्कुराना चल रहा है ।।

कहीं तरसी जमीं है आब के बिन ।

कहीं मौसम सुहाना चल रहा है ।।

तुझे बख्सा खुदा ने हुस्न इतना ।

तेरे पीछे ज़माना चल रहा है ।।

दिया था जो वसीयत में तुम्हें वो ।

अभी तक वह खज़ाना चल रहा है…

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Added by Naveen Mani Tripathi on January 16, 2019 at 11:37pm — 14 Comments

ग़ज़ल: फिर नए सपने दिखाना चुप रहो

2122 2122 212

आज उनका है ज़माना चुप रहो ।

गर लुटे सारा खज़ाना चुप रहो ।।

क्या दिया है पांच वर्षों में मुझे ।

मांगते हो मेहनताना चुप रहो ।।

रोटियों के चंद टुकड़े डालकर ।

मेरी गैरत आजमाना चुप रहो ।।

मंदिरों मस्ज़िद से उनका वास्ता ।

हरकतें हैं वहिसियाना चुप रहों ।।

लुट गया जुमलों पे सारा मुल्क जब ।

फिर नये सपने दिखाना चुप रहो ।।

दांव तो अच्छे चले थे जीत के ।

हार पर अब…

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Added by Naveen Mani Tripathi on January 8, 2019 at 12:30pm — 10 Comments

हुस्न कोई नूरानी है



22 22 22 2



शायद    वह    दीवानी   है ।

लड़की   जो  अनजानी  है ।।

दिलवर से मिलना है क्या ।

चाल   बड़ी   मस्तानी  है ।।

इश्क़  हुआ है क्या  उसको ।

आँखों    में   तो   पानी  है ।।

खोए    खोए    रहते    हो ।

यह   भी   इक  नादानी  है ।।…

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Added by Naveen Mani Tripathi on January 6, 2019 at 11:55am — 3 Comments

ग़ज़ल

1222 1222 1222 1222

तरन्नुम बन ज़ुबाँ से जब कभी निकली ग़ज़ल कोई ।

सुनाता ही रहा मुझको मुहब्बत की ग़ज़ल कोई ।।

बहुत चर्चे में है वो आजकल मफ़हूम को लेकर ।

जवां होने लगी फिर से पुरानी सी ग़ज़ल कोई ।।

कभी यूँ मुस्कुरा देना कभी ग़मगीन हो जाना ।

वो छुप छुप कर तुम्हारी जब कभी पढ़ती…

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Added by Naveen Mani Tripathi on January 6, 2019 at 11:21am — 3 Comments

आप गुजरेंगे गली से तो ये चर्चा होगा

2122 1122 1122 22

पूछ मुझसे न सरे बज़्म यहाँ क्या होग़ा ।

महफ़िले इश्क़ में अब हुस्न को सज़दा होगा ।।

बाद मुद्दत के दिखा चाँद ज़मीं पर कोई ।

आप गुजरेंगे गली से तो ये चर्चा होगा ।।



वो जो बेचैन  सा दिखता था यहां कुछ दिन से ।

जेहन में अक्स  तेरा बारहा उभरा होगा ।।

रोशनी कुछ तो दरीचों से निकल आयी जब ।

तज्रिबा कहता है वो चाँद का…

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Added by Naveen Mani Tripathi on December 31, 2018 at 8:20pm — 5 Comments

ग़ज़ल

1222 1222 122

बहुत से लोग बेेेघरर  हो  गए  हैं ।

सुना   हालात  बदतर  हो  गए  हैं ।।

मुहब्बत उग नहीं सकती यहां पर ।

हमारे   खेत  बंजर   हो  गए   हैं ।।

पता हनुमान  की  है  जात जिनको।

सियासत  के  सिकन्दर हो गए हैं ।।

यहां  हर  शख्स   दंगाई   है  यारो ।

सभी के  पास  ख़ंजर  हो  गए  हैं ।।…

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Added by Naveen Mani Tripathi on December 29, 2018 at 3:00pm — 6 Comments

दिल जो टूटा अभी तक जुड़ा ही नहीं

212 212 212 212

कैसे कह दूं हुआ हादसा ही नहीं ।

दिल जो टूटा अभी तक जुड़ा ही नहीं।।

तब्सिरा मत करें मेरे हालात पर ।

हाले दिल आपको जब पता ही नहीं ।।

रात भर बादलों में वो छुपता रहा ।

मत कहो चाँद था कुछ ख़फ़ा ही नहीं ।।

आप समझेंगे क्या मेरे जज्बात को ।

आपसे जब ये पर्दा हटा ही नहीं ।।

मौत भी मुँह चुराकर गुज़र जाती है ।

मुफ़लिसी में कोई पूछता ही…

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Added by Naveen Mani Tripathi on December 26, 2018 at 6:02pm — 9 Comments

हमें तुम भी मिटा पाए नहीं क्या

1222 1222 122

नए हालात पढ़ पाए नहीं क्या ।

अभी तुम होश में आए नहीं क्या ।।

उठीं हैं उंगलियां इंसाफ ख़ातिर ।

तुम्हारे ख़ाब मुरझाए नहीं क्या ।।

सुना उन्नीस में तुम जा रहे हो ।

तुम्हें सब लोग समझाए नहीं क्या ।।

किया था पास तुमने ही विधेयक ।

तुम्हारे साथ वो आए नहीं क्या ।।

जला सकती है साहब आह मेरी ।

अभी तालाब खुदवाए नहीं क्या ।।

है टेबल थप थपाना याद मुझको ।

अभी तक आप शरमाए…

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Added by Naveen Mani Tripathi on December 21, 2018 at 5:36pm — 3 Comments

जिनके दिल मे कभी मेरा घर था

2122 1212 22

बाद मुद्दत खुला मुक़द्दर था ।

मेरी महफ़िल में चाँद शब भर था ।।

देख दरिया के वस्ल की चाहत ।।

कितना प्यासा कोई समंदर था ।।

जीत कर ले गया जो मेरा दिल।

हौसला वह कहाँ से कमतर था ।।

दर्द को जब छुपा लिया मैने ।

कितना हैराँ मेरा सितमगर था ।।

अश्क़ आंखों में देखकर उनके ।

सूना सूना सा आज मंजर था ।।

जंग इंसाफ के लिए थी वो ।

कब…

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Added by Naveen Mani Tripathi on December 18, 2018 at 1:00pm — 7 Comments

कौन कितना है मदारी जानते हो

2122 2122 2122



खेल क्या तुम भी सियासी जानते हो ।

कौन कितना है मदारी जानते हो ।।

फैसला ही जब पलट कर चल दिये तुम।।

फिर मिली कैसी निशानी जानते हो।।



हो रहा  है देश का सौदा कहीं  पर ।

खा  रहे  कितने  दलाली  जानते  हो।।

मसअले पर था ज़रूरी मशविरा भी ।

तुम  हमारी  शादमानी  जानते हो।।…

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Added by Naveen Mani Tripathi on December 17, 2018 at 10:07pm — 8 Comments

ग़ज़ल

1212 1122 1212 22

हर एक शख्स को मतलब है बस ख़ज़ाने से ।

गिला करूँ मैं कहाँ तक यहां ज़माने से ।।

कलेजा अम्नो सुकूँ का निकाल लेंगे वो ।।

उन्हें है वक्त कहाँ बस्तियां जलाने से ।।

न पूछ हमसे अभी जिंदगी के अफसाने ।

कटी है उम्र यहां सिसकियां दबाने से ।।

मैं अपने दर्द को बेशक़ छुपा के…

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Added by Naveen Mani Tripathi on December 12, 2018 at 9:08pm — 4 Comments

ग़ज़ल

122 122 122 122



दिया आप ने था हमें जो सिला कुछ ।

बड़ा फैसला हमको लेना पड़ा कुछ ।।

कहा किसने अब तक नहीं है जला कुछ ।

धुंआ रफ़्ता रफ़्ता है घर से उठा कुछ ।।

बहुत हो चुकी अब यहाँ जुमले बाजी ।

तुम्हारे मुख़ालिफ़ चली है हवा कुछ ।।

बहुत दिन से ख़ामोश दिखता है मंजर ।

कई दिल हैं टूटे हुआ हादसा कुछ ।।

कदम मंजिलों की तरफ बढ़ गए जब ।

तो अब पीछे मुड़कर है क्या देखना…

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Added by Naveen Mani Tripathi on December 8, 2018 at 1:04am — 8 Comments

ग़ज़ल

221 2121 1221 212

अच्छी लगी है आपकी तिरछी नज़र मुझे ।।

समझा गयी जो प्यार का ज़ेरो ज़बर मुझे ।।1

आये थे आप क्यूँ भला महफ़िल में बेनक़ाब ।

तब से सुकूँ न मिल सका शामो सहर मुझे ।।2

नज़दीकियों के बीच बहुत दूरियां  मिलीं ।

करना पड़ा है उम्र भर लम्बा सफर मुझे ।।3…

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Added by Naveen Mani Tripathi on December 5, 2018 at 12:34am — 10 Comments

ग़ज़ल

12221222 122



वो भौरे पास हैं जब से कली के ।

हैं बिखरे रंग तब से पाँखुरी के ।।

सुना है चांद आएगा जमी पर ।

बढ़े हैं हौसले अब चांदनी के ।।

जरा कमसिन अदाएं देखिए तो ।

अजब अंदाज़ उनकी बेख़ुदी के ।।

वो बेशक पास मेरे आ रही है ।

लगे हैं स्वर सही कुछ बाँसुरी के ।।

मुहब्बत हो गयी उनसे जो मेरी ।

हुए मशहूर किस्से आशिकी के ।।

तुम्हारा खत मिला जो…

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Added by Naveen Mani Tripathi on December 2, 2018 at 10:30am — 6 Comments

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