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गीत: थिरक रही है... -- संजीव 'सलिल'

गीत:

थिरक रही है...

संजीव 'सलिल'

*

थिरक रही है,

मृदुल चाँदनी थिरक रही है...

*

बाधाओं की चट्टानों पर

शिलालेख अंकित प्रयास के.

नेह नर्मदा की धारा में,

लहर-भँवर प्रवहित हुलास के.

धुआँधार का घन-गर्जन रव,

सुन-सुन रेवा सिहर रही है.

मृदुल चाँदनी थिरक रही है...

*

मौन मौलश्री ध्यान लगाये,

आदम से इन्सान बनेगा.

धरती पर रहकर जीते जी,

खुद अपना भगवान गढ़ेगा.

जिजीविषा सांसों की अप्रतिम

आस-हास बन बिखर रही है.

मृदुल चाँदनी…

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Added by sanjiv verma 'salil' on June 9, 2012 at 11:59am — 6 Comments

सरकार पहले अपनी फिजूलखर्ची बंद करे....राजीव गुप्ता

सरकार पहले अपनी फिजूलखर्ची बंद करे
 …
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Added by Admin on June 8, 2012 at 11:04pm — 2 Comments

आंख में कैसा गंगाजल

कैसी हलचल ह्रदय में ,आंख में कैसा गंगाजल

कैसा जीवन है ये जहा, मरता है मन पल पल .



सब यहाँ लिए है नयन,पर है ये कैसा अंधापन

जीवन की सच्चाई से भाग रहा मानव हर पल



साथ नहीं…

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Added by yogesh shivhare on June 8, 2012 at 11:00pm — 1 Comment

यहाँ सभी की आँख सजल है बाबाजी



जिधर देखिये, जल ही जल है बाबाजी

यहाँ सभी  की आँख सजल है बाबाजी





लोग जिसे गंगाजल कह कर  पीते हैं

वह   गंगा  का  अश्रुजल  है …

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Added by Albela Khatri on June 8, 2012 at 8:50pm — 16 Comments

जो चला गया

ग़मों का कारवां मेरे दामन से कब लिपट गया,
मौसम जो था सावन का नयनो में ठहर गया ,
खुद को बहुत समझाया मगर ये समझ न आया ,
वो वक़्त का मुसाफिर था चला गया तो चला गया

Added by yogesh shivhare on June 8, 2012 at 3:00pm — 8 Comments

सचमुच कभी नहीं आ सकता इतना अच्छा राज

सचमुच कभी नहीं आ सकता इतना अच्छा राज
हर भ्रष्ट भ्रष्टाचार की गंगा में नहा रहा है आज
जितने पैसो में पूरे महीने का राशन लाते थे पिताजी
उतने पैसो में ला रहा हूँ मै मुठ्ठी भर अनाज

Added by RAJESH GOGIYA on June 8, 2012 at 1:00pm — 5 Comments

कठोर बाबा

इण्डिया टी० वी० की ताज़ा  खबर:निर्मल बाबा के जून में दिल्ली श्रीफोर्ट में होने वाले चारों समागम स्थगित हो गए हैं बेचारे बाबा भक्तों के पैसे लौटाएंगे श्रीफोर्ट बुकिंग  के नौ लाख रुपये लौटा दिए I
कठोर बाबा
प्यारे निर्मल भक्तो 
न घबराएँ न शरमाएँ 
यह पैसे लेकर सीघे…
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Added by Deepak Sharma Kuluvi on June 8, 2012 at 10:45am — 8 Comments

धरा लुट गयी तो गगन बेच देंगे

लुटेरे वतन के वतन बेच देंगे

धरा लुट गयी तो गगन बेच देंगे



सजावट बनावट जिसे भा रही हो

कली फूल क्या है चमन बेच देंगे



अगर आँख खोली न अपनी अभी तो

फरेबी कलामो- रमन बेच देंगे



बनाया नहीं गर नया कुंड कोई…

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Added by SANDEEP KUMAR PATEL on June 8, 2012 at 9:06am — 8 Comments

दोषी कौन

ऋषि मुनियों की ये धरती

बहती ज्ञान की गंगा

योगी सिद्ध जन पूजे जाते

था मन निर्मल तन चंगा

कोई गाये लहराए कोई पूछे

बाबा रे बाबा तेरा रंग कैसा

दिव्य मुस्कान ले बाबा बोले

जिसमें मिला दो उस जैसा

काल बदला विचार बदला

आदमी का हाल बदला

अंधविश्वास आधुनिकीकरण की दौड़

बाबाओं ने भी चोला बदला

बिकता पानी बिकता खून

बिकती भूख गिरते भ्रूण

अस्मत बिकती कटते वन

सफ़ेद चोला काला मन

बिक रही जब हर चीज

बाबा फिर…

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Added by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on June 7, 2012 at 9:30pm — 12 Comments

बिंदिया [लघु कथा ]

मीनू की डोली जब प्रशांत के घर के आगे रुकी तो दरवाजे पर पूजा की थाली लिए शिखा खड़ी थी | शिखा ने आगे बढ़ कर अपने प्यारे भैया प्रशांत और अपनी प्यारी सखी जो आज दुल्हन बनी ,भाभी के रूप में उसके सामने  खड़ी थी ,आरती उतार कर स्वागत किया |बर्तन में भरे हुए चावल को अपने पैर से बिखराते हुए ,पूरे रीति रिवाज के अनुसार मीनू ने अपने ससुराल में प्रवेश किया |पूरा घर खुशियों से चहक उठा ,शिखा ने मीनू को गले लगाते हुए कहा ,''आज तुम्हारा पांच साल से परवान चढ़ता हुआ प्रेम सफल हुआ ,मै जानती हूँ तुम और…

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Added by Rekha Joshi on June 7, 2012 at 5:25pm — 23 Comments

मन मेरे...

मन मेरे

हिम्मत न हार

जय तेरी होगी|

निरंतर अग्रसर हो

कर्म के पथ पर,

प्रत्याशा के रथ पर

मिटा के अंतर्द्वंदों को

त्याग आलस्य को,

घातक नैराश्य को

तुझमें नैर्गुण्य नहीं,

तू बिलकुल शून्य नहीं

तुझमें भी क्षमता है

अपनी महत्ता है|

स्वयं की पहचान कर

खुद पर अभिमान कर,

शंखनाद कर दे

अस्तित्व के संग्राम का,

भय क्या परिणाम का

निर्भीकता शस्त्र है

मार्ग प्रशस्त है,

कल्पना के चित्र को

यथार्थ पर उकेर,…

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Added by कुमार गौरव अजीतेन्दु on June 7, 2012 at 4:30pm — 10 Comments

गीत -मैं भी कुछ सुनाऊँ तुमको, जो एसी भी शक्ति दी होती

मैं भी कुछ सुनाऊं तुमको,

जो ऐसी भी शक्ति दी होती



हे माँ तेरी चरणों में,

कुछ मेरी भी अर्जी तो होती



मैं दीन हूँ माँ समझो,

पर हीन न समझा करो



सीने से न अपने सही,

चरणों से न दूर करो



मैं पुत्र कुपुत्र हूँ माँ,

समझा न तेरे मन को



तुम तो माँ कुमाता नहीं,

समझो तो मेरे मन को



थोड़ा मुझ को भी दे दो माँ,

स्नेह अपनी झोली से तुम



है माँ बेटे का नाता,

माँ खोयी हो कहाँ तुम | …

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Added by जगदानन्द झा 'मनु' on June 7, 2012 at 1:00pm — 6 Comments

(क्या ऐसे होते हैं-?)

(क्या ऐसे होते हैं-?)
 
क्या बाबा ऐसे होते हैं
जो लोगों को उकसाते हैं
मधुर बाणी से फँसाते हैं
और करोडो अरबों कमाते हैं
लोग तो भोले भाले हैं
बस झांसे में आ जाते हैं 
तन मन धन जब लुट जाता 
तब कहीं होश में आते हैं
धोखा देते जनता को…
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Added by Deepak Sharma Kuluvi on June 7, 2012 at 12:36pm — 8 Comments

- - - -जब मुझे प्यार हो जायेगा - - - - -

आँखें भर आयेंगी, ये दिल भी रो जायेगा 

बदनामों में नाम हमारा भी हो जायेगा 
नींद भी जाएगी ,चैन भी खो जायेगा 
मुझे जब  किसी से  प्यार हो जायेगा 
             चाँद में कभी दाग मुझको नज़र आयेगा 
             पर ' वो ' हमेशा ही  बेदाग नजर आयेगा
             कभी रोशनी से उसकी चमकेगा जहां मेरा 
              रोशनी से उसकी कभी चाँद  भी लाज़ायेगा
चेहरा उसका खिलता गुलाब…
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Added by Ajay Singh on June 7, 2012 at 12:09pm — 6 Comments

टूट गया है क्या वह सांचा बाबाजी

कितना झूठा, कितना साचा बाबाजी

हमने सब का  चेहरा बांचा बाबाजी



अग्निपथ टू  देख के दर्शक चौंक उठे

विजय से ज़्यादा हॉट है कांचा बाबाजी



जुहू तट पर अपनी अपनी आयटम संग…

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Added by Albela Khatri on June 7, 2012 at 9:22am — 22 Comments

बड़े आदमी का माँगने का कला (व्यंग्य)

एक बड़ा आदमी अभी बोला कि वो माँगने कू नहीं गया था | उसे तो महामहिम ने अपने आप दे दिया , तो वो ले लिया | वो एकदम ई सच्ची बोला | क्यूं , इस वास्ते कि बड़ा आदमी छोटा चीज कभी नईं मांगता | बड़ा चीज भी वो एसीच्च नईं मांगता | बड़ा आदमी का माँगने का कला भी बड़ा ई अलग होता | अपुन जैसा मिडिल क्लास मांगेगा तो बोलेगा कि मिल जाएगा तो बड़ा मेहरबानी होगा , अक्खा लाईफ ओबलाईज रहेगा | थोड़ा और नीचे जायेंगा , बोले तो एकदम फटीचर क्लास में  तो वो बोलेगा कि माईं बाप अपुन…

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Added by अरुण कान्त शुक्ला on June 6, 2012 at 11:30pm — 13 Comments

हैं हर-सू धमाके अमन हो रहा है

यूँ बदनाम अपना वतन हो रहा है

था धरती कभी अब गगन हो रहा है



जो चढ़ फूल देवों 'प' इतरा रहे हैं

बे-ईमान सारा चमन हो रहा है



जो पग में चुभा था कभी खार बनके

वो झूठा फरेबी सुमन हो रहा है



दी आहूति सपनों भरी अब युवा ने…

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Added by SANDEEP KUMAR PATEL on June 6, 2012 at 6:00pm — 10 Comments

पाप के भागीदार

खंडेला गाँव से गौरी गंगोत्री नगर उच्च सिक्षा हेतु आई जहां उसने विवेकानंद महाविद्यालय में दांखिला लिया | तीन वर्ष की अध्ययन अवधि में उसकी सुनीला के साथ मित्रता ही नहीं, बल्कि परिवार के लोगो के साथ भी अच्छा परिचय हो गया | धीरे धीरे सुनीला का भाई धर्मेन्द्र गौरी को चाहने लगा | धर्मेन्द्र के पिताजी प्रोफ. सोमेंद्रनाथ टेगोर महाविद्यालय से सेवा निवृत होगये | उन्होंने होनहार लड़की देखकर गौरी के पिता से अपने लडके धर्मेन्द्र का रिश्ता करने का प्रस्ताव् किया, जो गौरी के पिता ने गौरी की भावनाओ को देखते…

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Added by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on June 6, 2012 at 5:30pm — 6 Comments

मुझे मेरा गाँव याद अब भी आता है

होता हूँ जब अकेला चुपके से आता है

मुझे मेरा गाँव याद अब भी आता है

कभी बन आँखों में आँसू

कभी बन दिल में कसक

रातों को जगाने सपनों में

मुझे मेरा गाँव याद अब भी आता है

मैं अपने गाँव का, गाँव मेरा है

उसके सपने सारे सपने मेरा है

होता हूँ जब अकेला चुपके से आता है

मुझे मेरा गाँव याद अब भी आता है

मैं अपने गाँव को सम्हालूँगा

मैं अपने सपनों को फिर से सजाऊंगा

टूटा हुआ तारा हूँ मैं जिस गाँव का

फिर से…

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Added by जगदानन्द झा 'मनु' on June 6, 2012 at 5:30pm — 12 Comments

बोलो न माँ ..........क्यों बेटियाँ बोझ होती हैं !

क़त्ल करना है तो सबका करो

मुझ अकेली को मारने से क्या होगा

अगर मिटाना है मेरी हस्ती को

तो सबको मिटाओ ..............

मुझ अकेली को मिटाने से क्या होगा ..............…

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Added by Sonam Saini on June 6, 2012 at 3:30pm — 12 Comments

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