For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

January 2012 Blog Posts (97)

मेरे घर के नज़दीक दीवारों पे

मेरे घर के नज़दीक दीवारों पे ||
आए नज़र मुझे तू इश्तिहारों पे ||

है सच्चाई की शरीफ कूचों में भी ,
अक्सर बिकता है हुस्न चौबारों पे ||

शायद सब जायज है इस सियासत में,
बस मुद्दे ही हैं किस्मत के मारो पे ||

मुमकिन ना है अब वस्ल होगा उनसे ,
बसते हैं जो आजकल वो सितारों पे ||

आखिर आए है मौसिमे -वीरानी ,
इस फिजा को महकाती इन बहारों पे ||

Added by Nazeel on January 31, 2012 at 4:30pm — 5 Comments

एक बार मेरे आँगन में कदम रखो श्रीमान ,

एक बार मेरे आँगन में कदम रखो श्रीमान ,

फिर समझ में आएगा कितने हो महान ,

एक तस्वीर जिसपे हम वर्षो से फूल चढ़ाते हैं ,

एक तस्वीर ऐसा  भी आओ तो तुझे दिखाते हैं ,

मरने वाला मर गया तुम बन गए महान ,

एक बार मेरे आँगन में कदम रखो श्रीमान ,

पार्टी बाजी गुट बाजी उनको हमसे दूर किया ,

आपने उनको बा इज्जत शहीद ऐलान किया ,

फिर मेरे आँगन में उनका पुतला लगा दिया ,

कमाने वाला चला गया हमें मझधार दिया ,

और आप…

Continue

Added by Rash Bihari Ravi on January 31, 2012 at 4:00pm — 2 Comments

तुम जिन्दा हो

पास हो मेरे ये कितनी

बार तो बतला चुके तुम !

कौन कहता जा चुके तुम ?



आँख जब धुंधला गई तो

मैंने देखा

तुम ही उस बादल में थे ,

और फिर बादल नदी का 

रूप लेकर बह चला था  ,

नेह की धरती भिगोता

और मेरी आत्मा हर दिन हरी होती गई !

उसके पनघट पर जलाए

दीप मैंने स्मृति के !

झिलमिलाते , मुस्कुराते

तुम नदी के जल में थे !

जब भी दिल धडका मेरा तब

तुम ही उस हलचल में थे…

Continue

Added by Arun Sri on January 31, 2012 at 12:00pm — 6 Comments


सदस्य कार्यकारिणी
गरीब की किस्मत

चुन चुन कर जमा किये थे 

झोली में तेरे प्यार के सुमन 
एक -एक कर बाहर निकल गए  
आँचल के फटे दरवाजे से 
हाय गरीब की किस्मत !!…
Continue

Added by rajesh kumari on January 31, 2012 at 11:00am — 2 Comments

''अपने प्यारे बापू''

आज महात्मा गांधी जी की पुन्य तिथि पर एक बालकविता प्रस्तुत है:

अपने प्यारे बापू

कितने अच्छे थे अपने बापू 

सादा सा जीवन था उनका 

लड़े लड़ाई सच की ही वह

ध्यान हमेशा रखा सबका l



हिंसा ना भाती थी उनको

साथ अहिंसा का अपनाया

सबके लिये थी दया-भावना

काम बड़ा करके दिखलाया l



भारत को आज़ाद कराने में

लगा दिया जीवन था सारा

देश छुड़ाया जब अंग्रेजों से     

सबसे ऊँचा था उनका नारा l



दुबली-पतली काया थी…

Continue

Added by Shanno Aggarwal on January 30, 2012 at 10:30pm — 3 Comments


सदस्य कार्यकारिणी
सरस्वती वंदना

                                      

सरस्वती वंदना 

श्वेता पद्मासना ,वीणा वादिनी 

,विधेकमल नयनमI

शुभ्रवास्त्रव्रता ,विशालाक्षी…

Continue

Added by rajesh kumari on January 30, 2012 at 8:43am — 9 Comments

ज़िन्दगी कॆ रंग,,,,,,,,

ज़िन्दगी कॆ रंग,,,,,,,,

----------------------------

ज़िंदगी कॆ रंग पिचकारी,सॆ सब छूट गयॆ ॥

कैसॆ बतायॆं हम लाचारी, सॆ सब छूट गयॆ ॥१॥

घर, कुआं, खॆत,बगीचा,सब हमारॆ भी…

Continue

Added by कवि - राज बुन्दॆली on January 30, 2012 at 1:59am — 1 Comment

आँसू

आँसू



तमन्ना है तुम्हारी आँख का आँसू मैं बन जाऊ .

तेरे दामन को भिगो दूं उसी में ज़ज़्ब हो जाऊ.



जन्म लूँ आँख में तेरी बहू मैं गाल पे तेरे.

तेरे होठो को छू लूँ मैं होंठ छूते ही मर जाऊ

तमन्ना है तुम्हारी आँख…
Continue

Added by Mukesh Kumar Saxena on January 28, 2012 at 7:30pm — 3 Comments

हाइकू.

हाइकू.

१-- चुनाव आया
नेताओं की बला से
    तनाव लाया!
***
२- ईमानदार
निभाना है मुश्किल
   ये किरदार!
***
३- ये गंगा-जल
हाँथ में रख कर
   सच उगल!
***
४- ये जिंदगानी
समय की नदी में
   बहता पानी.
***
५- विनाशकाले
विपरीत है बुद्धि
   जान बचा…
Continue

Added by AVINASH S BAGDE on January 27, 2012 at 7:03pm — 5 Comments


सदस्य कार्यकारिणी
जय गणतंत्र दिवस !!

बीत गए बरस तिरसठ 

 हुआ  देश स्वतंत्र 
तन से नंगा हाथ में तिरंगा 
कैसा ये गणतंत्र  
अब तो राम बचावे…
Continue

Added by rajesh kumari on January 26, 2012 at 12:30pm — 10 Comments

''आजाद देश के पंछी हम'' एक बाल-गीत

हाँ, आज का दिन छुट्टी का दिन l

आजाद देश के पंछी हम

जय हिंद ! वन्दे मातरम् !

सुबह-सुबह उठी जब मुन्नी

बोली मेरी स्कूल से छुट्टी

भैया की कालेज से छुट्टी

पापा की आफिस से छुट्टी

मौज ही मौज है सारा दिन l

हाँ, आज का दिन छुट्टी का दिन l

आजाद देश के पंछी हम

जय हिंद ! वन्दे मातरम् !

निकलेगा जलूस सड़कों पर

देखेंगे टीवी हम मिलकर

हाथों में सधा तिरंगा होगा

भरत नाट्यम डांस भी होगा

होगी तब खूब ताक धिना-धिन l

हाँ, आज का दिन…

Continue

Added by Shanno Aggarwal on January 26, 2012 at 4:00am — 4 Comments

उठो साथियों!

उठो साथियों!

उठो साथियों उठ के घर से चलो,
मोहब्बत के तुम अब मदरसे चलो.
अमन की नई  तुम रिसाले गढ़ो  ,
इल्मो-ईमान की तुम डगर से चलो.
बारूदों की जहां पर सुरंगे बिछें ,
साजिशों से भरे उस शहर से चलो.
ऐसी हस्ती बनो, लोग पूजा करें,
बढ़ के सजदा करें तुम जिधर से चल
फिर, फिरंगी तुम्हे बरगलाये नहीं,
साथ आओ, न ऐसे बिखर के चलो.
है बड़प्पन इसी में, इसी बात…
Continue

Added by AVINASH S BAGDE on January 25, 2012 at 11:41pm — 3 Comments

बहती गंगा मॆं,,,,,

बहती गंगा मॆं,,,,,

--------------------------

स्वार्थ की चादर, तानकर सॊयॆ हैं सब ॥

न जानॆ कौन सॆ, भ्रम मॆं खॊयॆ हैं सब ॥१॥

समय किसी का, उधार रखता नहीं है,…

Continue

Added by कवि - राज बुन्दॆली on January 25, 2012 at 9:23pm — 1 Comment

''नाशाद मेरा मिहिर''

नाशाद मेरा मिहिर तो जिंदगी वफात है  

साँसों के गिर्दाब में इस रूह की निजात है l  

 

साहिर है तेरी कलम में कुछ कमाल का

जैसे खून में भरा हो कुछ रंग गुलाल का l

 

हर्फों में छुपा रखी है सदियों की बेबसी 

तेरे चेहरे पे अब देखती हूँ ना कोई हँसी l

 

बातों में बेरुखाई अब होती है इस कदर   

बेजार सी जिंदगी जैसे बन गई हो जहर l

 

तासीर न कम होती है होंठों को भींचकर

या बेसाख्ता बहते हुये अश्कों से सींचकर…

Continue

Added by Shanno Aggarwal on January 24, 2012 at 7:50pm — 9 Comments

भूतिया वो पेड़

खिड़की से नज़र आता

भूतिया वो पेड़

जिसकी हर एक शाख

पतझड़ की सोच में डूबी

मानो उंगलियाँ

और पत्ते...

आसेबी हवा के ज़ोर…

Continue

Added by Nutan Vyas on January 24, 2012 at 7:21pm — 2 Comments

इशारॊं-इशारॊं सॆ

इशारॊं-इशारॊं सॆ

----------------

इशारॊं-इशारॊं सॆ, बात कर ली जायॆ ॥

आज सितारॊं सॆ, बात कर ली जायॆ ॥१॥

गुलॊं सॆ मॊहब्बत, है हर एक कॊ,

क्यूं न ख़ारॊं सॆ, बात कर ली जायॆ ॥२॥

यह हवॆली महफ़ूज़, है या कि नहीं,

इन पहरॆदारॊं सॆ, बात कर ली जायॆ ॥३॥

रॊटी की कीमत, समझ मॆं आ जायॆ,

जॊ बॆरॊजगारॊं सॆ, बात कर ली जायॆ ॥४॥

उस की आबरू, नीलाम हॊगी कैसॆ,

चलॊ पत्रकारॊं सॆ, बात कर ली जायॆ ॥५॥

किसकी सिसकियां, हैं उन खॆतॊं मॆं,

"राज"जमींदारॊं…

Continue

Added by कवि - राज बुन्दॆली on January 24, 2012 at 3:13pm — 4 Comments

हम अब नहीं फंसने वाले (कविता )

क्यों आज तुम्हे अब चैन नहीं है महलों में?,

लाखों के बिस्तर पर भी नींद नहीं आती?
क्यों घूम रहे हो आज मध्य तुम जनता के,
क्यों आज बार की परियां तुम्हे नहीं भातीं?




वो पांच सितारा होटल, जहाँ ठहरते…
Continue

Added by आशीष यादव on January 24, 2012 at 3:00pm — 27 Comments

ना जाने आईने से, कैसी अपनी परदादारी है...

ख़ुशी के कितने लमहे हैं, जीस्त जिनसे संवारी है,

मेरे गम का मगर ये पल, मेरे जीने पे भारी है.



कोई भी ख्वाब अब आता नहीं, जो दे सुकूं मुझको,

मुलाजिम हूँ, रातों पर मेरे, अब पहरेदारी है.



जलाए कितने ही घर, कितने ही दुश्मन मिटा डाले,

नहीं आती कोई भी चीख, ये कैसी खुमारी है.



हो कोई सामने, पर बढ़ना है सर काटकर मुझको,

जिसे ठहराते हो जायज, वो जीने की बीमारी है.



मेरी जेबें भरी हैं, खूँ सने सिक्कों से अब, लेकिन,

कोई…

Continue

Added by Arvind Kumar on January 23, 2012 at 3:22pm — No Comments

शीर्षक आप बताएं

छरहरा सा वदन उसका श्वेत वस्त्र धारण किये ।

था पीत किरीट भाल की शोभा तन वहुत नाजुक लिए।

खोल के जो कपाट घर के देखा उसको गौर  से ।

शर्म से नज़रें झुका लीं प्रिय सी चंचलता लिए ।

थाम के उसको लगाया होंठ से अपने जभी ।

इश्क की गर्मी से  मेरी खुद ही खुद वह जल उठी ।

खेंच कर सांसों को उसकी जब मै उसको पी गया ।

आग सीने में लगी जल कर कलेजा रह गया ।

धुंए का गुब्बार निकला और फिजा…

Continue

Added by Mukesh Kumar Saxena on January 23, 2012 at 11:34am — 2 Comments

''मौसम के रंग'' (नवगीत)

निशा के आँचल को समेट

खुद को किरणों में लपेट

क्षितिज पार फैली अरुणाई

बहने लगी पवन बौराई 

कोहरे का आवरण हटा    

सूरज ने खोले नयन कोर l

 

नीड़ में दुबके बैठे आकुल

भोर हुई तो चहके खगकुल

खुले झरोखे हवा की सनसन 

आकर तन में भरती सिहरन

है नव प्रभात, संदेश नवल

नव उमंग, मन में हलचल

कमल सरोवर पर अलि-राग

काँव-काँव कहीं करते काग

हर्ष से तरु-पल्लव विभोर l  

 

संक्रांति मनाते हैं हिलमिल…

Continue

Added by Shanno Aggarwal on January 23, 2012 at 3:30am — 9 Comments

Monthly Archives

2019

2018

2017

2016

2015

2014

2013

2012

2011

2010

1999

1970

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 कबीर सर सादर नमन  आपका स्वास्थ्य ठीक न होने के बाद भी अपने इतनी मेहनत की यह मेरे लिए बहुत…"
39 minutes ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post रंग-ए-रुख़सार निखरने का सबब क्या आखिर(३९ )
"आदरणीय Samar kabeer साहेब आदाब | आपकी पारखी नज़रों से गुज़रकर ग़ज़ल कामयाब हुई | हौसला आफजाई…"
1 hour ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post रंग-ए-रुख़सार निखरने का सबब क्या आखिर(३९ )
" आदरणीय  Sushil Sarna जी आपकी हौसला आफजाई के लिए दिली शुक्रिया | "
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहे ... एक भाव कई रूप ... नर से नारी माँगती ..
"आ. भाई सुशील जी, सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
5 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on सतविन्द्र कुमार राणा's blog post पत्थरों पे हैं इल्ज़ाम झूठे सभी-गजल
"आ. भाई सतविंद्र जी, अच्छा प्रयास हुआ है । हार्दिक बधाई।"
5 hours ago
Sushil Sarna commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post 'कागा उवाच' (लघुकथा) :
"आदरणीय शेख़ उस्मानी साहिब, आदाब .... बहुत ही सुंदर और सारगर्भित लघु कथा हुई है। अपडेट रहना ही पड़ेगा…"
5 hours ago
Sushil Sarna commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post रंग-ए-रुख़सार निखरने का सबब क्या आखिर(३९ )
"आदरणीय गहलोत जी खूबसूरत अशआर की ग़ज़ल के लिए दिल से बधाई।"
5 hours ago
Sushil Sarna commented on विनय कुमार's blog post चिट्ठियाँ --
"आदरणीय विनय कुमार जी चिट्ठियों के माध्यम से अंतस भावों का सुंदर चित्रण हुआ है। हार्दिक बधाई।"
5 hours ago
Sushil Sarna commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post नवगीत-वेदना ने नेत्र खोले-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"आदरणीय बृजेश जी सुंदर भावों को चित्रित करते इस नवगीत के लिए हार्दिक बधाई।"
5 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post नवगीत-वेदना ने नेत्र खोले-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"आ. भाई बृजेश जी, सुंदर नवगीत हुआ है । हार्दिक बधाई।"
5 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कैसे बाँचें पीढ़ियाँ, रंगों का इतिहास - दोहे ( लक्ष्मण धामी' मुसाफिर' )
"आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन। दोहों पर उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभार।  क्या " इधर "…"
5 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post होली के दोहे :
"आदरणीय समर कबीर साहिब आदाब , सृजन के भावों को आत्मीय स्नेह से अलंकृत करने का दिल से आभार। सर आपके…"
5 hours ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service