For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

All Blog Posts (17,178)

कुछ क्षणिकाएं..

कलियाँ फूट रहीं हैं यादों की शाखों में,
कुछ ख्वाब सजे हैं इन सूनी आँखों में..

भींगी-भींगी सी शक्लों में शक्लें हैं फूलों की.
फूलों सी तितलियों या तितलियाँ फूलों सी.

न पूछो मेरी मंजिल क्या है.. अभी तो बस इरादा किया है..
न हारेंगे कभी उम्र भर, किसी और से नहीं, खुद से कहा है

ये जीवन पथ है अद्वितीय, मत 'लीक' पकड़ कर चला करो..
खुद खोजो अपनी राह नयी, खुद दीपक बनकर जला करो..

Added by Pranjal Mishra on March 17, 2011 at 9:55pm — No Comments

बहरीन में विदेशी फ़ौजी दख़ल: सऊदी/वहाबी साम्राज्यवादी महत्वकाक्षाऐं

 
फ़ेसबुक पर मेरी ६ मार्च की पोस्ट से उद्धरत:-

"राजा अब्दुल्लाह इसे आवामी जन विद्रोह को शिया विद्रोह- इरानी षडयन्त्र के नाम पर

क्रूरतापूर्वक दमन कर दे."




आज जब इस वक्त मैं यह लिख रहा हूँ, बुधवार की रात

को पर्ल चौक बहरीन पर सऊदी सैनिकों की उपस्थिती में एक नीम फ़ौजी कार्यवाही करके

वहां गत दो माह से चल रहे…
Continue

Added by Shamshad Elahee Ansari "Shams" on March 17, 2011 at 6:49pm — No Comments

इन अकेली वादियों में चले आये

इन अकेली वादियों में चले आये

(मधु गीति सं. १७१७, दि. १० मार्च, २०११)

 

इन अकेली वादियों में चले आये, भरा सुर आवादियों का छोड़ आये;

गान तुम निस्तब्धता का सुन हो पाये, तान नीरवता की तुम खोये सिहाये.…

Continue

Added by GOPAL BAGHEL 'MADHU' on March 17, 2011 at 1:06pm — 2 Comments

कुछ धुंआ धुंआ...



सूना सा है वो घर अब ..बहुत बदला हुआ ..
यादों का जमघट भी है ..कुछ..धुंआ धुंआ..
निगाहें  हर बार उस चौखट पे जा पहुँचती है....…
Continue

Added by Lata R.Ojha on March 17, 2011 at 1:34am — 1 Comment

ग़ज़ल - उजाले कैद हैं कुछ मुट्ठियों में

OBO पर आकर बहुत अच्छा लगा. यहाँ पर एक से एक उस्ताद शायर और कवियों की रचनाएं पढ़कर आनंद आ गया.

अपनी एक नयी ग़ज़ल पेश कर रहा हूँ, आप सब से मार्गदर्शन की आशा है.



अँधेरा है नुमायाँ बस्तियों में

उजाले कैद हैं कुछ मुट्ठियों में



ये पीकर तेल भी, जलते नहीं हैं…

Continue

Added by Saahil on March 16, 2011 at 8:07pm — 11 Comments

संगदिल शहर

Added by अमि तेष on March 16, 2011 at 12:30pm — 4 Comments

व्यंग्य - महंगाई का निचोड़पन

महंगाई का सिर दर्द लोगों में खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है। कोई दवा भी काम नहीं आ रही है और सरकार की अधमने उछल-कूद भी बेकार साबित हो रही है। एक समय दाल, भोजन की थाली से गायब हो गई। फिर बारी आई, प्याज की। प्याज ने तो इस तरह खून के आंसू रूलाए, जिसे न तो जनता भूल पाई है और न ही सरकार। जनता तो जैसे-तैसे प्याज के सदमे से उबर रही है, मगर सरकार, प्याज के दंभी रूख के कारण अभी भी विपक्ष के निशाने पर है। बेसुध महंगाई को चिंता ही नहीं कि सरकार से उसकी दुश्मनी, जनता पर कितनी भारी पड़ रही है ? सरकार के… Continue

Added by rajkumar sahu on March 15, 2011 at 1:52am — No Comments

जरा इधर भी करें नजरें इनायत

1. समारू - जाटों ने ओबीसी आरक्षण के लिए आर-पार की लड़ाई शुरू कर दी है।

पहारू - आरक्षण का झमेला तो राजनीतिक पार्टियों ने वोट के लिए पाल रखी है।



2. समारू - टैक्स पर इनकम बटोरने वाला एक और नाम आया।

पहारू - जितनी कमाई, उतनी टैक्स चोरी, खुली छूट है।



3. समारू - छग विधानसभा में कांग्रेस, भाजपा सरकार को घेरने में सफल नजर आ रही है।

पहारू - इतनी एकजुटता दिखाकर चुनाव में मेहनत करते तो विपक्ष में नहीं रहते।



4. समारू - पूर्व राज्यपाल एनडी तिवारी की…

Continue

Added by rajkumar sahu on March 15, 2011 at 12:10am — No Comments

प्रिय अभी

प्रिय अभी 

मै न चाहते हुए भी आज उन स्थानों  पर कभी-कभी पहुँच जाता हूँ,जहां कभी अपने प्रेम के बहारो के फूल खिले थे , ना जाने कितने आरजुओ ने जन्म लिए थे जब कभी मै उन जगहों पर जाता हूँ तो हमेशा मेरी नज़र उन जगहों को देखती है जहां हम साथ चले थे , मेरे होठो पर तुम्हारा नाम बरबस ही आ जता है,मेरी नज़रे शायद तुम्हारे पद चिन्हों को ठुंठती है ! पर उसे असफलता ही हाँथ लगाती…

Continue

Added by Sanjay Rajendraprasad Yadav on March 14, 2011 at 8:05pm — 3 Comments

याद आउंगी..

                                                                               

मैं रहूँ न रहूं ,यादें मेरी रह जाएंगी..

शायद किसी की यादों में ,कभी दोहराई जाएंगी..
 जब कभी भी मौसम धुआं धुआं होगा..…
Continue

Added by Lata R.Ojha on March 14, 2011 at 12:30pm — 3 Comments

बेटी गरीब की

बेटी गरीब की



बेटी थी वो गरीब की मजबूर थी लाचार--

थी खूबसूरत यौवना लेकिन ईमानदार --

सड़कों पे सर झुकाए वो गाँव में निकलती ---

कुछ मनचले दबंगों की नीयतें मचलती --

फिकरे कोई कसे तो वो चुपचाप ही रहती --

मक्कार दबंगों की कई हरकतें सहती --

ना बाप था ना भाई ना उसकी कोई बहिन थी --

तकदीर की मारी हुई वो नेकचलन थी --

कपडे वो नदी पर ही धोती थी नहाती थी -

शाम के ढलते ही घर लौट के आती थी --

एक शाम वो दबंगों के हाथ लग गई --

अब तक बचा रखी थी वो… Continue

Added by jagdishtapish on March 13, 2011 at 8:13pm — 1 Comment

मैं जब भी ठोकरें खाता हूँ नया मुकाम मिलता है....................

मैं जब भी ठोकरें खाता  हूँ नया मुकाम मिलता है
तजुर्बे का चहेरा बनाकर भगवान मिलता है





तसल्ली देती हैं पुरानी…
Continue

Added by अमि तेष on March 13, 2011 at 7:30pm — 3 Comments

Gazal

                  गजल

ईमानदार मैदाॅं में, बाजी मार जाते हैं।     

बेईमानों के घोडे, आखिरी हार जाते हैं।।

परस्तिश करती है, उनकी सल्तनत दोस्तों।

वतन की राह में,जो जांॅ निसार जाते हैं।।

हथियारों पे कायम है, कायनात जिनकी।…

Continue

Added by nemichandpuniyachandan on March 13, 2011 at 7:26pm — 1 Comment

रंग अपना अपना ..

रंग अपना अपना ..



हर आदमी में होता है, रंग अपना अपना ।

उड़ान भर रहे हैं, लेकर के अपनी कल्पना।।

पूरी हुई न अबतक, इस जिंदगी में राहें।

यदि थक गया है कोई, तो भर रहा है आहें।

कुछ और आगे चलने का, रह गया है सपना।।

हर आदमी में…

Continue

Added by R N Tiwari on March 13, 2011 at 6:00pm — 1 Comment

ग़ज़ल :- ऐ खुदा क्योंकर तेरे सागर में सुनामी हुई

ग़ज़ल :- ऐ खुदा क्योंकर तेरे सागर में सुनामी हुई

आपदा की हद हज़ारों ज़िंदगी पानी हुई ,

ऐ खुदा क्योंकर तेरे सागर में सुनामी हुई |

 

है नहीं कूवत लखन सी दौर के इंसान में…

Continue

Added by Abhinav Arun on March 13, 2011 at 3:30pm — 3 Comments

............त्याग बलिदान सॆ.........

............त्याग बलिदान सॆ.........

-------------------------------------------------



कभी त्याग बलिदान सॆ कभी जीवन-मरण सॆ निकलती है !

कविता कलम सॆ नहीं कवि कॆ अंतःकरण सॆ निकलती है !!

कभी बिंदु मॆं समॆट लॆती चराचर संसार यह,

नयन बिन दॆख लॆती है क्षितिज कॆ पार यह,

हवाऒं का रूप धर लिपट जाती वृक्ष कॆ गलॆ,

कभी बूँद बन नीर की पुकारती रसातल तलॆ,

कभी शबनम का रूप धर, यॆ पर्यावरण सॆ निकलती है !!१!!

कविता कलम सॆ… Continue

Added by कवि - राज बुन्दॆली on March 13, 2011 at 3:09pm — 3 Comments

जानॆं किससॆ मिली प्रॆरणा, और...........................

जानॆं किससॆ मिली प्रॆरणा....

------------------------------------------------------------

कब मैना मन मुस्कानी है, कब बॊलॆ वह कॊयल कागा !!

जानॆं किससॆ मिली प्रॆरणा, और सृजन का अंकुर जागा !!

शब्द-सुमन चुननॆं मॆं मॆरा,आधा जीवन बीता,

अखिल विश्व का चिंतन,था लगता रीता-रीता,

कभी ढूंढ़ता मॆघदूत मैं,तॊ कभी खॊजता गीता,

मीरा राधा और अहिल्या, कभी द्रॊपदी सीता,

कॆवट और भागीरथ बन कर, क्या-क्या वर मैं मांगा !!१!!

जानॆं किससॆ मिली प्रॆरणा,… Continue

Added by कवि - राज बुन्दॆली on March 13, 2011 at 3:05pm — No Comments

ग़ज़ल :- खार में भी कली खिला देगा

ग़ज़ल :- खार में भी कली खिला देगा

खार में भी कली खिला देगा ,

आदमी जब भी मुस्कुरा देगा |

 

यह तो दस्तूर है ज़माने का ,

नाम लिख कर कोई मिटा देगा…

Continue

Added by Abhinav Arun on March 13, 2011 at 3:00pm — 17 Comments

ग़ज़ल:- अपने शहर में झूठ के चर्चे आम बहुत हैं

ग़ज़ल:- अपने शहर में झूठ के चर्चे आम बहुत हैं

 

अपने शहर में झूठ के चर्चे आम बहुत हैं ,

सच कहने वालों के सर इलज़ाम बहुत हैं…

Continue

Added by Abhinav Arun on March 13, 2011 at 2:55pm — No Comments

भज गोविन्दम् (मूल संस्कृत, हिन्दी काव्यानुवाद, अर्थ व अंग्रेजी अनुवाद सहित) - संजीव 'सलिल'







भज गोविन्दम् 

(मूल संस्कृत, हिन्दी काव्यानुवाद, अर्थ व अंग्रेजी अनुवाद सहित)


                                                                             

भज गोविन्दं भज गोविन्दं, गोविन्दं भज मूढ़मते।

संप्राप्ते सन्निहिते काले, न हि न हि रक्षति डुकृञ् करणे ॥१॥…




Continue

Added by sanjiv verma 'salil' on March 13, 2011 at 2:34pm — 2 Comments

Monthly Archives

2020

2019

2018

2017

2016

2015

2014

2013

2012

2011

2010

1999

1970

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Profile IconDR DEEPAK PANDEY and Anupama Mishra joined Open Books Online
22 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Er. Ganesh Jee "Bagi"'s blog post अतुकांत कविता : मैं भी लिखूंगा एक कविता (गणेश बाग़ी)
"आ. भाई गणेश जी बागी, सादर अभिवादन। सुंदर रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
38 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Usha Awasthi's blog post धरणी भी आखिर रोती है
"आ. ऊषा जी, अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
46 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post
1 hour ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on amita tiwari's blog post जायदाद के हकदार
"आदरणीय अमिता जी, इस भावपूर्ण सुन्दर रचना के लिए आपको हार्दिक बधाई।"
1 hour ago
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post डूब गया कल सूरज
"रचना की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार, प्रिय भाई समर कबीर जी।"
3 hours ago
vijay nikore commented on amita tiwari's blog post जायदाद के हकदार
"सचाई से भरपूर सुन्दर मार्मिक रचना के लिए धन्यवाद, मित्र अमिता जी ।"
3 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post प्रेम पत्र - लघुकथा -
"हार्दिक आभार आदरणीय समर कबीर साहब जी। आदाब।"
4 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Samar kabeer's blog post एक ताज़ा ग़ज़ल
"आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन । बेहतरीन गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
4 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post नए बीज / कविता
"आ. भाई चंद्रेश जी, अच्छी कविता हुई है । हार्दिक बधाई । "
4 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on MUKESH SRIVASTAVA's blog post प्रेम गली अति सांकरी
"आ. भाई मुकेश जी, सुंदर कथा हुई है । हार्दिक बधाई ।"
4 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post ग़ज़ल मनोज अहसास
"आ. भाई मनोज जी, अच्छी गजल हुई है , हार्दिक बधाई । 'बेटी जब कालेज में पढ़ने' कर लीजिएगा…"
5 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service