For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

February 2012 Blog Posts

एक लड़की ( हास्य)

 
मुझे देख के एक लड़की, बस हौले -हौले हंसती है.
प्रेम - जाल मैं डाल के थक गया, पर कुड़ी नहीं फंसती है .
मुझे देख के एक लड़की, बस हौले -हौले हंसती है.
रहती है मेरे पड़ोस में वो, कुछ चंचल - कुछ शोख है वो.
ना गोरी - ना काली है,…
Continue

Added by satish mapatpuri on February 15, 2012 at 1:08am — 5 Comments


सदस्य कार्यकारिणी
प्रेम दिवस

प्रेम दिवस 

ख़त्म हो दिलो की कड़वाहट 
हर शख्स के चेहरे पे…
Continue

Added by rajesh kumari on February 14, 2012 at 10:00am — 3 Comments

चले गये

आये थे हमसे लड़ने को पर शरमा कर चले गये,

जरा हाथ ही पकड़ा और वो हाथ छुड़ा कर चले गये।

 

छिप-छिप कर चिलमन से तुमने बहुत इशारे किये प्रिये,

ज़ख्म दिये हर बार जो तुमने सहा किये और सिया किये,

कस कर जरा कलाई थामी दैया कह कर चले गये।

 

बहुत किया बदनाम ’सरन’ को, सबसे मेरी बातें कीं,

एक एक का हाल बताया हमने जो मुलाकातें कीं,

हमने जब कुछ कहना चाहा, हया दिखा कर चले गये।

 

खूब पिटाया तुमने हमको यारों-रिश्तेदारों से,

खूब…

Continue

Added by Prof. Saran Ghai on February 14, 2012 at 5:57am — No Comments

लघु कथा माँ

माँ

    आज फिर घर पर बहुत झगड़ा हुआ। “अब मैं घर वापिस नहीं आउंगा, नदी में डूब कर मर जाउंगा।” गुस्से से अपनी माँ को बोलकर वो घर से निकल पड़ा।
    “माँ, मुझे माफ कर दे, उठ माँ! आंखे खोल। तू आंखे क्यों नहीं खोलती” दोपहर को जब वो गुस्सा शांत होने के बाद घर वापिस आया तो आंगन में पड़ी अपनी माँ से लिपट कर जोर जोर से बोल रहा था।

Added by Ravi Prabhakar on February 13, 2012 at 6:32pm — 2 Comments

वैलेंटाईन दिवस पर कुछ दोहे......

प्रेम तो है परमात्मा, पावन अमर विचार.
इसको तुम समझो नहीं , महज देह व्यापार.

प्रेम गली कंटक भरी, रखो संभलकर पांव.
जीवन भर भरते नहीं, मिलते ऐसे घाव.

'दर्पण' हमसे लीजिए, बड़े काम की सीख.
दे दो, पर मांगो नहीं, कभी प्यार की भीख.

मन से मन का हो मिलन, तो ही सच्चा प्यार.
मन के बिना जो तन मिले, बड़ा अधम व्यवहार . ... दर्पण

Added by Pradeep Bahuguna Darpan on February 13, 2012 at 5:08pm — 8 Comments

चेहरा तो चाँद सा है मगर दिल ख़राब है......

ज़ाहिर है पाक साफ़ तख़य्युल ख़राब है,

चेहरा तो चाँद सा है मगर दिल ख़राब है।

कहते हैं मुझसे चीख़ के रंजो मलाले दिल,

राहें तेरी हसीन थी मन्ज़िल ख़राब है।

अपनी अना के ख़ोल में जो खुद छुपा रहा,

उसने भी अलम दे दिया महफिल खराब है।

करते हैं शेख़ जी भी यहाँ ऐबदारियाँ,

इस दौर में तन्हाँ नहीं बातिल ख़राब है।

इक राह आख़िरी थी बची वो भी खो गई,

लगता है ये नसीब मुकम्मिल ख़राब है।

इक दौर में बुलन्दी मेरी…

Continue

Added by इमरान खान on February 12, 2012 at 1:10pm — 7 Comments

दशहरा

दशहरा मनाते हर साल हम, 

पुतला जलाते सदियों बीतीं

 कहाँ मरा है रावण अब भी ?

कहा है सुरक्षित अब भी सीता ?.

.

 रंग गुलाल उड़ते थे कभी

आती थी जब जब भी होली

भर रहा है बच्चा वच्चा

बम बारूद से अपनी झोली 

.

खुशियों के दीप जलते थे

जगमग करती थी दिवाली

लपटें उठती हैं शोलों से

बस्ती जलती है अब खली

.

एकता का पाठ भूले हम

भूल गए मानवता के नारे

काम, क्रोध, लोभ की आग में

सुख शांति सब जल…

Continue

Added by praveen singh "sagar" on February 12, 2012 at 10:00am — 1 Comment

पाँच हाइकू

 दिल लगाया.

वादे बहुत किये.

मोल चुकाया! 

*

बाज,बाज है.

गिद्ध, ' दृष्टि' रखता.

चालबाज है.

*

अजगर भी.

बैठ-बैठ के खाते.

अफसर भी! 

*

रंग-बिरंगी.

गलियाँ जीवन की.

बड़ी बेढंगी!

*

खून खौलता.

मुट्ठियाँ भींच जाती.

मुख बोलता.

*

अविनाश बागडे.

Added by AVINASH S BAGDE on February 11, 2012 at 10:30am — 8 Comments

फिर क्यों ?

तुम .

मेरी चेतना के पंख

रूह के मंदिर में 

बजता भोर का शंख

मन की उड़ान 

देह की जान

बनती बिखरती कहानी

निर्मल निर्झर का

बहता हुआ सा पानी

फूलों की खुशबू

या वो पवन

जो लाती है वो जादू

जो बना देता है

मतवाला अक्सर .

तुम ही तो हो

ये सब .

फिर क्यों

कभी कभी

मैं हो जाता हूँ

तन्हा.

बताओ तो जरा…

Continue

Added by Dr Ajay Kumar Sharma on February 9, 2012 at 9:28pm — 1 Comment

मुझे सीने से लगाओ या मसल दो मुझको.....

हमनशीं राह पे बस और ना छल दो मुझको,
मुझे सीने से लगाओ या मसल दो मुझको।

मसनुई प्यार से अच्छा है के नफरत ही करो,
शर्त बस ये है के नफरत भी असल दो मुझको।

दिले बीमार ने बस कोने मकाँ माँगा है,
मेरी चाहत ये कहाँ ताजो महल दो मुझको।

मेरे बिगड़े हुए हालात में तुम आ जाओ,
वक़्त ए आखिर है के दो पल तो सहल दो मुझको।

डबडबाई हुई आँखों से न रुखसत करना,
बड़ा लम्बा है सफर खिलते कँवल दो मुझको।

Added by इमरान खान on February 8, 2012 at 2:46pm — 10 Comments

पुरुष और प्रकृति

जब उठाया घूंघट तुमने,

दिखाया मुखड़ा अपना

चाँद भी भरमाया

जब बिखरी तुम्हारे रूप की छटा

चाँदनी भी शरमायी

तुम्हारी चितवन पर

आवारा बादल ने सीटी बजाई ।

तुमने ली अगंड़ाई, अम्बर की बन आई

तुमसे मिलन की चाह में फैला दी बाहें,

क्षितिज तक उसने

भर लिया अंक में तुम्हें, प्रकृति, उसने

तुम्हारे…

Continue

Added by mohinichordia on February 7, 2012 at 6:30am — 10 Comments

पत्नियाँ

डूबती इक नाव होती आदमी की जिंदगी,

ग़र न होतीं जिंदगी में मुस्कुराती पत्नियाँ।

 

बेसुरा संगीत होती आदमी की जिंदगी,

ग़र न होतीं जिंदगी में गुनगुनाती पत्नियाँ।

 

गूंजता अट्टहास होती आदमी की जिंदगी,

ग़र न होतीं जिंदगी में  खिलखिलाती पत्नियाँ।

 

मौन सा आकाश होती आदमी की जिंदगी,…

Continue

Added by Prof. Saran Ghai on February 7, 2012 at 4:42am — 11 Comments

दो जन्म

( दो जन्म )

हाँ , आज  हुआ है मेरा 

जन्म , 
एक शानदार हस्पताल में ....
कमरे में टीवी है ...
बाथरूम है ...फ़ोन है ....
तीन वक्त का खाना 
आता है .....
जब मेरा जन्म हुआ 
तो मेरे पास ...
डाक्टरों और नर्सों 
का झुरमट ....
मेरी माँ मुझे देखकर 
अपनी पीड़ा को 
कम करने की कोशिश 
कर रही है .....
हर तरफ ख़ुशी…
Continue

Added by राज लाली बटाला on February 6, 2012 at 10:30pm — 21 Comments

मॆरी बात तॊ समझॊ,,,,,,,,,

मॆरी बात तॊ समझॊ,,,,,,,,,

-----------------------------

उछलॊ मत यार ज़रा,हालात तॊ समझॊ ॥

मैं कह रहा हूं कि, मॆरी बात तॊ समझॊ ॥१॥…



Continue

Added by कवि - राज बुन्दॆली on February 6, 2012 at 10:00pm — 3 Comments

मासूम इश्क

देखें हैं हमने नज़ारे कई , शरारे कही  तो बहारें कई ,

लिखी-पढ़ी  है खूबसूरती की कई परिभाषाएं 

कही-सुनी है इबादत ए हुस्न की कई कवितायेँ …
Continue

Added by Rohit Dubey "योद्धा " on February 6, 2012 at 9:00pm — 2 Comments

वो कोशिश करते रहे रुसवा करने की ,

मांगी जो उनसे जिगर में पनाह हमने ||

देखें ऐसे जो किया हो गुनाह हमने ||

आज तक न मिला मुहब्बत सा बहर गहरा,

देखे लाखों बहर गहरे अथाह हमने ||

हमको उसने भी दिया ना जवाब कोई ,…

Continue

Added by Nazeel on February 6, 2012 at 8:10pm — No Comments

छन्न पकैया

छन्न पकैया-छन्न पकैया, जीवन तेरा- मेरा.

रोज डूबता सूरज इसमे, होता रोज सबेरा.

**

छन्न पकैया-छन्न पकैया, सांसें आती-जाती.

चलने का मतलब है जीवन,रुकना मौत कहाती.

**

छन्न पकैया-छन्न पकैया, सुख ही दुःख का कारण.

इस धरती पर कोई घटना , होती नही अकारण.

**

छन्न पकैया-छन्न पकैया, कह गए ज्ञानी-ध्यानी.

अपना ही गुण-धर्म निभाते, हवा,आग और पानी.

**

छन्न पकैया-छन्न पकैया, धर्म वही है सच्चा.

जिसे जानता वसुंधरा का, साधो, बच्चा-बच्चा.…

Continue

Added by AVINASH S BAGDE on February 6, 2012 at 8:00pm — 5 Comments

अनछुआ एहसास

बहुत सोचा कि लिख ही डालूँ 

यादों और एहसासों को साँस दे ही डालूँ...
आई जब तन्हाई की आगोश में,
लायी जब यादों को होश में...
तब जेहन में आया किसी का जिक्र,
एहसासों का वो गुबार, 
जिसकी नहीं थी कोई फिक्र....
यादों के झरोके में पाया वो एहसास,
जिससे न थी कभी टकराने की कोई आस....
उन एहसासों को दी अल्फाजो…
Continue

Added by Yogyata Mishra on February 5, 2012 at 4:00pm — 3 Comments

तीन कुंडलियां / अविनाश बागडे

(१)

शक्तिशाली खूब बनो,साहस हो भरपूर.

विनम्रता के भाव ही,मन में रहे प्रचूर.

मन में रहे प्रचूर ,सादगी का गहना हो.

अपनी जरुरत की सरहद में ही रहना हो.

कहता है अविनाश,बढ़ेगी तब खुशहाली.

जीवन अपना और बनेगा शक्तिशाली.

(२)

भाई से भाई टकरा के होते है बरबाद.

दुश्मन के सारे मंसूबे हो जाते आबाद.

हो जाते आबाद,सभी तुम पर हंसते है.

टूटा घर दिखलाकर सब फिकरे कसते हैं.

कहता है अविनाश रोकिये जगत हंसाई

घर का झगडा घर में…

Continue

Added by AVINASH S BAGDE on February 5, 2012 at 1:00pm — 6 Comments

वक्त,,,,

वक्त,,,,

--------------

किसी किसी कॊ भला खासा, बना दॆता है वक्त ॥

किसी की ज़िंदगी का तमाशा,बना दॆता है वक्त ॥१॥





कभी चुल्लू भर पानी सॆ, भर दॆता है समंदर कई,…

Continue

Added by कवि - राज बुन्दॆली on February 5, 2012 at 11:30am — 4 Comments

Monthly Archives

2026

2025

2024

2023

2022

2021

2020

2019

2018

2017

2016

2015

2014

2013

2012

2011

2010

1999

1970

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Monday
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
Monday
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेतुझे याद किया था हमने ... "क्या...तुम्हारे मन के द्वार…See More
Monday
आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी)

काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
Sunday
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
Friday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
Friday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत चौपाइयों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. जी !…"
Friday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
Jul 21

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय अशोक भाईजी, वर्षा ऋतु, विशेषकर सावन मास, के नम क्षणों का रागात्मक वर्णन रोचक बन पड़ा है.…"
Jul 20
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Jul 18
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
Jul 14

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service