For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

All Blog Posts

माहौल का फ़र्क़- लघुकथा

"अरे महमूद भाई, कहाँ हो. आज सोसाइटी की मीटिंग में नहीं जाना क्या", रजनीश ने घर में कदम रखते हुए आवाज लगायी.

"आ रहे हैं भाई साहब, आजकल पता नहीं क्या हो गया है, ऑफिस से आने के बाद खामोश से रहते हैं", भाभीजान ने पानी का ग्लास रखते हुए कहा.

"कुछ परेशानी होगी ऑफिस की, मैं पूछता हूँ उससे. वैसे भी आजकल काम बहुत बढ़ गया है और तनाव भी", रजनीश ने सोफे पर बैठते हुए कहा और पानी का ग्लास उठा लिया.

"चाचू, मेरी चॉकलेट कहाँ है", कहते हुए छोटी आयी और रजनीश की गोद में चढ़ने लगी. रजनीश ने…

Continue

Added by विनय कुमार on June 10, 2019 at 7:30pm — 6 Comments

धारा

“यार बड़ी दिक्कत है आजकल.”

“क्यों क्या हुआ.”

“रोज़ धर्म और देश भक्ति को लेकर बवाल हुआ करता है.”

“जब कुछ करने को न हो तब ऐसी छोटी-छोटी चीज़ें टाइम पास का अच्छा साधन होती हैं.”

“तुम्हारे कहने का मतलब जो कुछ भी आजकल हो रहा, सब टाइम पास है?”

“बिलकुल.”

“परसों जो लड़कों में मारपीट हुई, पुलिस ने लाठीचार्ज किया, मीडिया में बवाल मचा हुआ है, सब टाइम पास है?”

“बिलकुल है भाई. इसके अलावा इस बवाल का मतलब क्या है? तुम्हें कुछ सार्थकता दिखती है? नारे क्या देश…

Continue

Added by बृजेश नीरज on June 9, 2019 at 11:25pm — 8 Comments

अलग अलग कारण- लघुकथा

सुबह का अखबार जैसे खून से सना हुआ था, इतनी वीभत्स खबर छपी थी जिसकी कल्पना करके ही दिमाग सुन्न हो जा रहा था. सामने चाय की प्याली रखी हुई थी लेकिन उसे पीने की इच्छा मर चुकी थी. उसने अपना सर पकड़ा और बिस्तर पर ही निढाल हो गयी.

"क्या हो गया है इस समाज को, अब और कितना नीचे गिरेंगे हम लोग?, उसके मुंह से बुदबुदाहट की शक्ल में आवाज निकली.

कुछ देर बाद कामवाली बाई आयी और उसने देखा कि चाय वैसे ही रखी है तो उसने टोका "मैडम, तबियत ठीक नहीं है क्या? मैं दूसरी चाय बना लाती हूँ और कोई दवा भी ला…

Continue

Added by विनय कुमार on June 9, 2019 at 11:16pm — 10 Comments

किस तरह होते फ़ना प्यार निभाने के लिए (४६ )

कैसे होते हैं  फ़ना प्यार निभाने के लिए 

छोड़ जाऊंगा नज़ीर ऐसी ज़माने के लिए 

**

रूह का हुस्न जिसे दिखता वही आशिक़ है 

जिस्म का हुस्न तो होता है लुभाने के लिए 

**

दरमियाँ गाँठ दिलों के जो पड़ी कब सुलझी 

कौन दीवार उठाता है गिराने के लिए 

**

अच्छे लोगों की कमी रहती है क्या जन्नत में 

क्यों ख़ुदा उनको है तैयार बुलाने…

Continue

Added by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on June 8, 2019 at 12:30pm — 4 Comments

शरणार्थी (लघुकथाएं )

शरणार्थी

(1)

---

दो मित्र आपस में बातें कर रहे थे;एक मानवतावादी था, दूसरा समाजवादी।पहले ने कहा-

अरे भई!वो भी आदमी हैं,परिस्थिति के मारे हुए।बेचारों को शरण देना पुण्य-परमार्थ का काम है।

दूसरा:हाँ तभी तक,जबतक यहाँ के लोगों को शरणार्थी बनने की नौबत न आ जाये।



(2)

---

-हाँ,जुझारूपन हमारे खून में है।

-हमारी खातिर तुम क्या करोगे?

-जान भी दे सकते हैं।

-हमें वोट चाहिए।जान…

Continue

Added by Manan Kumar singh on June 8, 2019 at 8:53am — 2 Comments

कुण्डलिया छंद-

1-

तुलसी बाबा कह गए, परहित सरिस न धर्म।

परपीड़ा सम है नहीं, अधमाई का कर्म।।

अधमाई का कर्म, मर्म यह जिसने जाना।

उसको ही नरश्रेष्ठ, जगत ने भी है माना।।

जहाँ प्रेम सौहार्द, वहीं है काशी-काबा।

परहित सरिस न धर्म, कह गए तुलसी बाबा।।

2-

सबको ही यह ज्ञात है, परहित सरिस न धर्म।

किंतु आज वह चैन में, जिसके कुत्सित कर्म।।

जिसके कुत्सित कर्म, उसी के वारे न्यारे।

झूठ कपट छल छिद्र, स्वार्थ ने पैर पसारे।।

मिथ्या पाले दम्भ, आदमी भूला रब को।

रब…

Continue

Added by Hariom Shrivastava on June 7, 2019 at 7:11pm — 3 Comments

गर्मी पर 5 दोहे ....

गर्मी पर 5 दोहे ....

लू में हर जन भोगता, अनचाहा संताप।

दुश्मन मेघों का बना,भानु किरण का ताप।।

मेघों से धरती कहे, कब बरसोगे तात।

प्यासी वसुधा मांगती, थोड़ी सी बरसात।।

जंगल सारे कट गए, कैसे हो बरसात।

तपती धरती पर लिखी, पर्यावरणी बात।।

धरती पर हर ताप का, भानु ताप सरताज।

गौर वर्ण पर हो गया, स्वेद कणों का राज।।

भानु अनल से तप रहे, धरती अंबर आज।

प्यासा जीवन हो गया, बारिश का मुहताज…

Continue

Added by Sushil Sarna on June 6, 2019 at 7:00pm — 5 Comments

गज़ल - अकेले ईद हम कैसे मनाएँ

गज़ल(ईद मनाएं)

(मफाईलुन - मफाईलुन - फ ऊलन)

न घर आएं न वो हम को बुलाएं

अकेले ईद हम कैसे मनाएं

यही है ईद का पैग़ाम लोगों

दिलों को आज हम दिल से मिलाएँ

मुबारक बाद मैं दूँ उनको कैसे

कभी वो सामने मेरे न आएं

मनाई साथ ही थी हम ने होली

सिवइयां साथ ही हम आज खाएँ

गिले शिकवे भुला दें आज के दिन

गले मिल कर मुहब्बत को बढ़ाएं

वतन से ख़त्म हो फिरका परस्ती

ख़ुदा से आज ये…

Continue

Added by Tasdiq Ahmed Khan on June 5, 2019 at 9:00pm — 3 Comments

कुण्डलिया छंद-(विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में)

1-

हरियाली  कम  हो  गई, हुई  प्रदूषित  वायु।

शनै-शनै कम हो रही,अब मनुष्य की आयु।।

अब मनुष्य की आयु, धरा पर  संकट भारी।

पर्यावरण   सुधार, विश्व  में  हैं  अब  जारी।।

दिवस मनाकर एक,मुक्ति क्या मिलने वाली।

इसका सिर्फ निदान, बढ़े फिर से हरियाली।।

2-

जीवन  को  संकट  हुआ, करते  सभी  प्रलाप।

पर्यावरण  बिगड़  गया, बढ़ा  धरा  का  ताप।।

बढ़ा   धरा  का   ताप, गर्क  होता  अब  बेड़ा।

पहले  बिना  विचार, प्रकृति को  हमने  छेड़ा।।

अब भी एक उपाय, करें हम विकसित वन…

Continue

Added by Hariom Shrivastava on June 5, 2019 at 8:12pm — 1 Comment

ईद ...

ईद ...

दीद आपकी ईद पर, है अनुपम सौगात।

ईद मुबारक कर गई , आज ईद की रात ।।

मेघों की चिलमन हटी, हुई चाँद की दीद।

भेद-भाव सब भूलकर, कहें मुबारक ईद।।

दीद आपकी दे गई, ईदी हमको आज।

धड़कन के बजने लगे, देखो दिल में साज ।।

अर्श पर्श पर आज है, ईद मिलन का राज ।

ईद मुबारक सब कहें , इक दूजे को आज ।।

तरस रही हैं दीद को,कब आएगी ईद।

आएगी जब ईद, तो कैसे होगी दीद।।

बिना आपके बे-मज़ा,…

Continue

Added by Sushil Sarna on June 5, 2019 at 3:30pm — 3 Comments

तेरी मेरे कहीं कुछ कहानी तो है

ग़ज़ल:



तेरी मेरी कहीं कुछ कहानी भी है

प्यार में तैरती ज़िन्दगानी भी है

मत डरो देख तुम इस जमन की लहर

रासलीला तुम्हीं संग रचानी भी है

आँसुओं से नहाती रही उम्र-भर

तू ही चंपा मेरी रातरानी भी है

फूल जब मुस्कुराएँ तो समझा करो

इन बहारों में अपनी जवानी भी है

बाँध मत प्यार की बह रही है नदी

है रवाँ जिसमें उल्फ़त का पानी भी है

साथ देता हमेशा रहा…

Continue

Added by Amar Pankaj (Dr Amar Nath Jha) on June 4, 2019 at 7:30pm — 3 Comments

सफर बाकी है अभी

सफर बाकी है अभी 

अभी बाकी है

जिंदगी से अभिसार

कह रहा हूं

तुम्हीं से

बार-बार

सुन रही हो न

ऐ मृत्यु के आगार।…

Continue

Added by Amar Pankaj (Dr Amar Nath Jha) on June 4, 2019 at 7:22pm — No Comments

ज़िंदगी ... तीन क्षणिकाएँ

ज़िंदगी ... तीन क्षणिकाएँ

मरती रही ज़िंदगी
ज़िंदा रही जब तक
अमर हो गई
फ्रेम में
कैद होने के बाद

..........................
जीती रही ज़िंदगी
ज़िंदा रही जब तक
मर गई
फ्रेम में
कैद होने से पहले

..........................

वाकिफ़ थी
अपने हश्र से
ज़िंदगी
फिर भी
मिट न सकी
जीने की लालसा
अवसान से पहले

.....................

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Added by Sushil Sarna on June 2, 2019 at 9:24pm — 4 Comments

इक कदम (लघुकथा)

गाड़ी रूकते ही मैं ढाबे की तरफ़़ बढ़ा। कुर्सी पर बैठते हुए छोटू को पास बुलाया।

उस से बात करने लगा, जैसे अक्सर ही मैं ऐसा   करता हूँ, ऐसा करना मेरा काम है, किसी को अच्छा या नहीं लगता।  ये जानना मेरा काम नहीं ।"

“आप इन से क्या बात करते हो?" दूसरी तरफ बैठे मालिक ने उठ कर बालो से उस  पकड़ा अंदर की ओर ले कर जाते हुए कहा

 आप को यहाँ काम के लिए रखा है, बातों के लिए नहीं।

"भाई साहिब,कुछ लेना है,आप ने।" उसने मेरी तरफ 

देखते हुए कहा

“नहीं,बात करनी है,इस और आप से।"…

Continue

Added by मोहन बेगोवाल on June 2, 2019 at 4:30pm — 6 Comments

दर्द

ये रातें जल रही हैं,

वो बातें खल रही हैं

लगा दी ठेस तुमने दिल के अंदर

नसें अंगार बनकर जल रही हैं

मौसम सर्द है,

जीवन में लेकिन

लगी है आग,

तन मन जल रहा है।

जिसे उम्मीद से बढ़कर था माना

वही घाती बना है छल रहा है।

तुम्हारी ठोकरों के बीच आकर

बहुत टूटा हुआ हूँ, लुट गया हूँ

तेरा सम्मान खोकर, स्नेह खोकर

स्वयं ही बुझ चुका हूँ, घुट गया हूँ।

यहाँ हालात क्या से क्या हुआ है

नहीं कुछ सूझता…

Continue

Added by आशीष यादव on June 1, 2019 at 5:02pm — No Comments

अबला सहे हर अत्याचार |

घर चलता है नर नारी से , नर का चले  सारा अधिकार |
 घर का  काम करे सब  नारी , फिर भी रहे नर से  लाचार | 
 
संग  रहे भाई  बचपन में  , बात  बात में देता ताना |
एक दिन ससुराल जाओगी , वहाँ होगा   तेरा ठिकाना |
सदा  कहा  भाई की होती , बहन का नहीं  चले बहाना |
रोकर चुप हो जाती बहना , दबा लेती आंसू की धार…
Continue

Added by Shyam Narain Verma on June 1, 2019 at 2:30pm — No Comments

इच्छाओं का भार नहीं धर----ग़ज़ल

22 22 22 22

इच्छाओं का भार नहीं धर

रिश्तों के नाज़ुक धागों पर

पोषित पुष्पित होंगे रिश्ते

हठ मनमानी त्याग दिया कर

ऊर्जा से परिपूर्ण रहेगा

खुद में शक्ति सहन की तू भर

करनी का फल सन्तति भोगे

सो कुकर्म से ए मानव डर

देख निगाहें घुमा-फिरा के

कौन नहीं फल भोगे यहाँ पर

अब वैज्ञानिक भी कहते हैं

पाप-प्रलय-भय तू मन में भर

गा कर, लिख कर, यूँ ही पंकज

हर मन से अवसाद सदा…

Continue

Added by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on June 1, 2019 at 12:46pm — 1 Comment

जा रहे हम दूर-दूर

ढलते पहर में लम्बाती परछाईयाँ

स्नेह की धूप-तपी राहों से लौट आती

मिलन के आँसुओं से मुखरित

बेचैन असामान्य स्मृतियाँ

ढलता सूरज भी तब

रुक जाता है पल भर

बींध-बींध जाती है ऐसे में सीने में

तुम्हारी  दुख-भरी भर्राई आवाज़

कहती थी ...

"इस अंतिम उदास

असाध्य संध्या को

तुम स्वीकारो, मेरे प्यार"

पर मुझसे यह हो न सका

अधटूटे ग़मगीन सपने से जगा

मैं पुरानी सूनी पटरी पर…

Continue

Added by vijay nikore on June 1, 2019 at 12:00am — 4 Comments

वफ़ा ढूंढते हो जफ़ा के नगर में यहाँ पर वफ़ा अब बची ही कहाँ है (४५ )

(१२२ १२२ १२२ १२२ १२२ १२२ १२२ १२२ )

.

वफ़ा ढूंढते हो जफ़ा के नगर में यहाँ पर वफ़ा अब बची ही कहाँ है 

बुझी है वफ़ा की मशालें दिलों से वफ़ा का नहीं कोई नाम-ओ-निशाँ है 

**

यहाँ राज करते हवस के पुजारी किसी की नहीं है मुहब्बत से यारी 

इधर बेवफ़ाओं का लगता है मेला कोई बावफ़ा अब न मिलता यहाँ है 

**

इधर पैसा फेंको दिखेगा तमाशा अगर जेब ख़ाली मिलेगी हताशा 

इधर है न…

Continue

Added by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on May 31, 2019 at 4:30pm — 2 Comments

आदमीं हूँ ख्वाहिशें होनी नहीं कम ऐ खुदा ...



2122-2122-2122-212

मतला:-

ख़ुश ही रहता हूँ शिकायत क्या करूँ क्या है अता।।

आदमी हूँ ख्वाहिशें होनी नहीं कम ऐ ख़ुदा।।

हुश्न-ए-मतला:-

तेरे ज़ानिब से मुझे जो भी मिला अच्छा लगा ।

मैं तो मुफ़लिस था मेरी हिम्मत कहाँ कुछ माँगता।।

मेरा दम घुटने लगा जब महफिलों की शान में ।

यार आया हूँ उठा कर दूर खुद का मकबरा।।

मेरी मैय्यत में गुलों की बारिशें अच्छी नहीं।

शाइरी के भेष में करने लगा था इल्तिज़ा।।

देख़ो उल्फ़त के…

Continue

Added by amod shrivastav (bindouri) on May 31, 2019 at 12:20pm — No Comments

Monthly Archives

2026

2025

2024

2023

2022

2021

2020

2019

2018

2017

2016

2015

2014

2013

2012

2011

2010

1999

1970

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
18 hours ago
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Thursday
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11
जगदानन्द झा 'मनु' replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय, प्रणाम संगहि संग हार्दिक धन्यवाद। अपनेक मार्गदर्शन पाबि बहुत बेसी मोटिवेशन आ सीखक मिलैए…"
Sep 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
Aug 18
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Aug 15
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
Aug 15
जगदानन्द झा 'मनु' added 2 discussions to the group मैथिली साहित्य
Aug 10
Shyam Narain Verma commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"नमस्ते जी, बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
Aug 6

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service