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June 2015 Blog Posts (183)

मैं कहां पर रहूँ ?

मैं  यहां  पर  रहूँ  या  वहां  पर  रहूँ

ऐ  खुदा  तू  बता  मैं  कहां  पर रहूँ ?

 

एक  साया   मुझे  आपका   जो  मिले

फ़िक्र क्या फिर कहाँ किस मकां पर रहूँ I

 

जिन्दगी  आज  तो  है  तिजारत हुयी   

फर्क ये है कि  मैं किस  दुकां  पर रहूँ I

 

हो  रहम  मालिकों  की मयस्सर मुझे 

पंचवक्ता  तेरी   मैं   अजां  पर  रहूँ I

 

याद   तेरी  करूं …

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Added by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on June 1, 2015 at 11:00am — 24 Comments

कोई सुने तो बयाँ दिल का दर्द करता हूँ

मफ़ाइलुन फ़इलातुन मफ़ाइलुन फ़ेलुन/फ़इलुन



मैं कैसे कर्ब से तकलीफ़ से गुज़रता हूँ

कोई सुने तो बयाँ दिल का दर्द करता हूँ



तमाम टैक्स चुकाता हूँ ज़िंदा रहने के

प शाईरी का अलग से लगान भरता हूँ



यही सबब है ,मुझे कम ही लोग जानते हैं

मैं इन फ़ुज़ूल की रुसवाईयों से डरता हूँ



अज़ल से आज तलक सिलसिला ये जारी है

मैं रोज़ जीता हूँ दुनिया में रोज़ मरता हूँ



यही तो है,मिरे फ़न का कमाल,देखो तो

जहाँ पे मिटते हैं सब लोग,मैं सँवरता हूँ



वो जिस… Continue

Added by Samar kabeer on June 1, 2015 at 11:00am — 29 Comments

उसके हिस्से का उजाला (लघुकथा)

" अरे छोटका क माई , देख तो तनिख । काम भर का पत्तल बन गया है न की अउर बनायें "। मुसहराने का दुखिया बहुत खुश था , आखिरकार गाँव में शादी थी और पत्तल उसी के यहाँ से जाती थी ।

" काल तनिक अउर पत्तल बना लेना , कहीं कम न पड़ जाये । याद है न पिछले बियाह में घट गया था पत्तल , केतना गाली सुनाये थे हमको अउर पइसो पूरा नहीं मिला था "। दुखिया ने हामी में सर हिलाया , कइसे भुला सकता था उसको ।

अगले दिन भिन्सहरे ही वो लग गया अउर पत्तल बनाने में , इस बार कम न पड़े । छोटका भी लगा हुआ था उसके साथ और…

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Added by विनय कुमार on June 1, 2015 at 10:30am — 18 Comments

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