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क्षणिकाएं-4

१-डर

भयातुर आँखें

शक की नज़रों से देखती सबको

विसंगतियों और क्रूरताओं से भरा यह समाज

कब क्या कर बैठे किसे पता



२-सत्य

जीवन एक तहखाना है

हम सब कैदी

जो ईश्वर से प्यार नहीं करता

वह बार बार यहाँ पटक दिया जाता है

और जो ईश्वर से प्यार करता है

वह हमेसा के लिए मुक्त हो जाता है

३-रहस्य

ये कैसा रहस्य है

सारी उन्मनता.

सारी व्यग्रता

सारी म्लानता

तुम्हारे नेह की तरलता…

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Added by ram shiromani pathak on November 5, 2013 at 10:22pm — 21 Comments

सुनो ऋतुराज- 15

सुनो ऋतुराज- 15 

सुनो ऋतुराज!!

वह एक अन्धी दौड थी 

हांफती हुई 

हदें फलांगती हुई 

परिभाषाओं के सहश्र बाड़ो को 

तोडती हुई

फिर भी वह भ्रम नही टूटा 

जिसे तोडने के लिये संकल्पित थे हम 

ऋतुओं का मौन यूँ ही बना रहा 

सावन बरस् बरस कर सूख गया 

हम अन्धड़ के वेग मे भी तने रहे 

और आसक्ति का वृक्ष सूख गया 

सुनो ऋतुराज 

लमहों का बही खाता 

जब भी खोलोगे 

दग्ध ह्रदय पर लिखा 

शुभलाभ अवश्य दिखेगा …

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Added by Gul Sarika Thakur on November 5, 2013 at 11:30am — 11 Comments

मोहब्बत आग का दरिया

मोहब्बत आग का दरिया भरोसा तोड़ देती है ।

खुदी आधी जलाकर ही भला क्यों छोड़ देती है ।

छलावा इस से बढ़कर ना कहीं देखा ज़माने में ।

समंदर गम के भर लाये ख़ुशी कि बूँद पाने में ।

लिए नादान सी हसरत किसी मासूम से दिल को ,

ख़ुशी का आसरा देकर ग़मों से जोड़ देती है ।

अच्छा था खुदी मेरी ये खुद में ही समा लेती ।

कहीं अपनी पनाहों में ये मुझको भी छुपा लेती ।

लुटा बैठा ये दीवाना कहाँ अपना मकां ढूढे ,

ये सबकुछ छीनकर मेरा मुझे क्यों…

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Added by Neeraj Nishchal on November 5, 2013 at 10:30am — 7 Comments


सदस्य कार्यकारिणी
सियाह रात के पर्दे में है निहाँ सा कुछ

1212 1122 1212 22

 

सियाह रात के पर्दे में है निहाँ सा कुछ

ज़मीं से आज उठे है धुआँ-धुआँ सा कुछ

 

ये ज़ोर शम्अ का है जो बुझी नही शब भर

गया करीब से तूफान बदगुमाँ सा कुछ

 

न जाने कौन खिरामां सफ़र में था मेरे

तमाम राह चला साथ कारवाँ सा कुछ

 

चिराग सा कभी, आतिशबजाँ लगे है गाह

वो टिमटिमाता अँधेरों में इक मकाँ सा कुछ

 

ये बदलियाँ जो हटीं चाँद भी खिला तनहा

इक अर्से बाद नज़र आया शादमाँ सा…

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Added by शिज्जु "शकूर" on November 5, 2013 at 9:00am — 16 Comments

उसके बिना...

वो मुझे याद करता है 

वो मेरी सलामती की

दिन-रात दुआएं करता है 

बिना कुछ पाने की लालसा पाले 

वो सिर्फ सिर्फ देना ही जानता है 

उसे खोने में सुकून मिलता है 

और हद ये कि वो कोई फ़रिश्ता नही 

बल्कि एक इंसान है 

हसरतों, चाहतों, उम्मीदों से भरपूर...

उसे मालूम है मैंने 

बसा ली है एक अलग दुनिया 

उसके बगैर जीने की मैंने 

सीख ली है कला...

वो मुझमें घुला-मिला है इतना 

कि उसका उजला रंग और…

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Added by anwar suhail on November 4, 2013 at 7:36pm — 6 Comments

|| अंजुमन ग़ज़ल नवलेखन पुरस्कार - 2014 ||

दोस्तो,

अंजुमन प्रकाशन द्वारा 27 अक्टूबर 2013 को लखनऊ के पुस्तक लोकार्पण समारोह में की गयी घोषणा के अनुसार अंजुमन ग़ज़ल नवलेखन पुरस्कार-2014 के नियम एवं शर्त उपलब्ध हैं | युवा शाइरों से निवेदन है कि इस पुरस्कार योजना में शामिल हो कर इसे सफल बनाएँ व इसका लाभ उठायें |…



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Added by वीनस केसरी on November 3, 2013 at 7:30pm — 27 Comments

दीवाली के दोहरे

दीवाली के दोहरे

होती है हर एक को, रिद्धि सिद्धि की चाह।

दीप पर्व दिखला रहा, अंतर मन को राह।१।

 

उनका जीवन पथ चुनें, करें आत्म उत्थान।

जिनके जीवन में मिला, यश कीरत…

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Added by Satyanarayan Singh on November 3, 2013 at 7:00pm — 28 Comments

दीपावली पर ओबीओ के लिये शुभकामना

छंदों के दीप जलें, शायरी की झिलमिल हो

हँसी खुशी भरी सदा, ओबिओ की महफिल हो

साहित्य करे उन्नति, भाषा का विकास हो

इस मंच पर सदा-सदा स्नेह का प्रकाश हो

सभी विधाओं का सभी दिशाओं में उत्थान हो

सभी नयी प्रतिभाओं के लिये यहां मुस्कान हो

समस्त लक्ष्य - योजना व स्वप्न साकार हो

आने वाले पल के सदा हाथ में उपहार हो

दीपावली की 'चर्चिती शुभकामना' फलीभूत हो

इस मंच के सभी प्रयास सफल व अनुभूत हों

(मौलिक एवं…

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Added by VISHAAL CHARCHCHIT on November 3, 2013 at 2:00pm — 16 Comments

दीपावली की असीम शुभ कामना (गीतिका)

दीप पावन तुम जलाओ, अंधियारा जो हरे ।

पावन स्नेह ज्योति सबके, हृदय निज दुलार भरे ।

वचन कर्म से पवित्र हो, जीवन पथ नित्य बढ़े ।

लीन हो ध्येय पथ पर, नित्य नव गाथा गढ़े ।

कीजिये कुछ परहित काज, दीन हीन हर्षित हो ।

अश्रु न हो नयन किसी के, दुख दरिद्र ना अब हो ।

सीख दीपक से हम लेवें, हम सभी कैसे जियें ।

मन सभी निर्मल रहे अब, हर्ष अंतर्मन किये ।

शुभ करे लिये शुभ विचार, मानव का मान करे ।

भटक ना जाये मन राह, अधर्म कोई न करे ।

कायम हो…

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Added by रमेश कुमार चौहान on November 3, 2013 at 1:00pm — 11 Comments

दोहे-८ (दीपावली)

ज्योतिपर्व की रात में ,करो तिमिर का नाश!

सच ही जीता है सदा ,ऐसा हो विश्वास !!

शांतिदीप घर घर जले ,समय तभी अनुकूल !

आपस में सौहार्द हो,कटुता जाओ भूल !!

ज्योतिपर्व की रात में ,तुम्हे समर्पित तात !

जीवन यूँ जगमग रहे ,दीपों की सौगात!!

मन में शुभ संकल्प लो,हाँथो में ले दीप !

अंतस का कल्मष छटे ,मन का आँगन लीप !!

मन का अँधियारा छटे,कटे दम्भ का जाल !

पहनाओ कुछ इस तरह ,दीपों की इक माल !!

ज्योतिपर्व…

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Added by ram shiromani pathak on November 3, 2013 at 11:30am — 26 Comments

मिट्टी का बर्तन..! ( अतुकांत )

सुन..! मेरे मिट्टी के बर्तन,

तू अपनी असलियत को पहचान

इस संसार की झूठी, खोखली वाहवाही से

परे रहना

अपनी गहराई से ज्यादा, अनुपयोगी द्रव्य को

मत सहेजना, ढुल जाता है..

 

इक दिन निकल गया मैं

किसी के कहने पर

इक नयी मिट्टी का बर्तन बनाने

उस मिटटी में सौंधी खुसबु,

रंग मेरी मिट्टी की ही तरह, साँवला

हुबहू.... मेरे जैसी ही मिट्टी

पर शायद तनिक, कंकरियां मिली थीं,

 

उससे न बना पाया,बर्तन

बनने से…

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Added by जितेन्द्र पस्टारिया on November 3, 2013 at 11:30am — 28 Comments

पाव पाव दीपावली, शुभकामना अनेक-

पाव पाव दीपावली, शुभकामना अनेक |
वली-वलीमुख अवध में, सबके प्रभु तो एक |


सब के प्रभु तो एक, उन्हीं का चलता सिक्का |
कई पावली किन्तु, स्वयं को कहते इक्का |


जाओ उनसे चेत, बनो मत मूर्ख गावदी |
रविकर दिया सँदेश, मिठाई पाव पाव दी ||

मौलिक / अप्रकाशित

वली-वलीमुख = राम जी / हनुमान जी
पावली=चवन्नी
गावदी = मूर्ख / अबोध

Added by रविकर on November 3, 2013 at 9:00am — 13 Comments

दीपोत्सव

दीपोत्सव पर्व की हार्दिक शुभकामनाए 

पुष्य नक्षत्र की शुभ बेला में, लक्ष्मी जी ने जन्म लिया,

महक फैलाती आई कमला, गुरु नक्षत्र का चयन किया |

ज्ञान पिपासु की वृद्धि करने, ज्ञानेश्वरी को साथ लिया,             

धन वैभव में बरकत करती, सुख सम्रद्धि का भाव दिया |

 

लक्ष्मी,गणेश खुश हो जाते,जब हो हंसवाहिनी संग,   

दीपोत्सव त्यौहार मनाओ, रंगोली ले आती रंग | 

घर लक्ष्मी की हो प्रसन्नता, लक्ष्मी देवे तब वरदान  

बिन गणपति और…

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Added by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on November 3, 2013 at 6:30am — 14 Comments

आई दिवाली -- शुभकामनायें!!

अब तक तो सभी घरों मे रंग रोगन होकर नए तरीके से सभी के घर भी सज चुके है । जिन घरों मे रंग रोगन नहीं हुआ है वहाँ साफ सफाई होकर सज सज्जा के साथ घरों को लक्ष्मी जी के आगमन हेतु तैयार कर लिया गया है । इस दिवाली लक्ष्मी जी सभी के घरों को खुशियों से भर दें । सभी के मनों मे प्रेम, सौहार्द्य एवं सच्चाई का उजाला भर दें ।कहा जाता है कि दीपावली कि रात्री मे विष्णु प्रिया श्री लक्ष्मी सदगृहस्थों के घर मे प्रवेश कर यह देखती है कि हमारे निवास योग्य घर कौन…

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Added by annapurna bajpai on November 2, 2013 at 9:30pm — 16 Comments

उतर रही लक्ष्मी घर आँगन

उतर रही लक्ष्मी घर आंगन

सावन भादो बरस गये

हर्षित हुई अवनी.

नृत्य कर रही है वह खेतों में

धानी चुनरी पहन.

मिली किसानों को फ़सलों का सौगात

बीत गये अंधकार भरे दिन.

गा रही है हर सुबह

उषा, मृदु स्वर में असावरी.

उल्लसित है सब का मन.

कर पितरों को जल तर्पण

भगवती को सुगंधित अर्ध्य अर्पण

तुलसी बीरवा तले दीप जला

त्यौहारों का है मौसम

सखी! सतरंगी परिधान पहन

चल हाट! मोल ले चूड़ियाँ

सिंदूर टिकुली मेहेंदी महावर

और…

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Added by coontee mukerji on November 2, 2013 at 5:07pm — 12 Comments

ग़ज़ल : ‘’सुभान’अल्ला’’ (1222-1222-1222-1222)

सवाल-ए-इश्क़, रुख़ पे, क्या असर लाये, सुभान’अल्ला!

झुकी नज़रेँ उठेँ, उठ कर झुकेँ, हाए, सुभान’अल्ला!

 

पलक से, वक़्त बे-क़ाबू, हवा मोड़े जो, चाल ऐसी,

खुले जो ज़ुल्फ, मौज आये, घटा छाये, सुभान’अल्ला!

 

तेरी खुशबू के रंगोँ से, बहारोँ की धनक महके,

तेरी आवाज़, क़ुदरत का सुकूँ, हाए, सुभान’अल्ला!

 

उफक़ ये हुस्न, तो, वो चाँद-सूरज हैँ तेरी बिन्दी,

सितारा, बन तेरी नथनी, चमक पाये, सुभान’अल्ला!

 

कमर प्याला, सुराहीदार गर्दन, जिस्म…

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Added by सन्दीप सिंह सिद्धू "बशर" on November 2, 2013 at 3:00pm — 7 Comments

ग़ज़ल - लोग हैं तैयार खुद की लाश ढोने के लिए

ख्वाब के मोती हकीकत में पिरोने के लिए।

लोग हैं तैयार खुद की लाश ढोने के लिए।

झोंपड़े में सो रहा मजदूर कितने चैन से,

है नहीं कुछ पास उसके क्योंकि खोने के लिए।

आसमां की वो खुली, लंबी उड़ानें छोड़कर,

क्यों तरसते हैं परिंदे कैद होने के लिए।

जिंदगी भर खून औरों का बहाते जो रहे,

जा रहे हैं तान सीना पाप धोने के लिए।

जगमगाते हैं दिखावे से शहर के सब मकान,

सादगी तो रह गई है मात्र कोने के लिए।

पुष्प सारे चल…

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Added by कुमार गौरव अजीतेन्दु on November 2, 2013 at 12:25pm — 28 Comments

!!! दीवाली क्या चीज है !!!

!!! दीवाली क्या चीज है !!!

जीवन का उद्देश्य सम, हर पल रहें प्रसन्न।

मृत्यु काल के घाट पर, नहीं पूंछती प्रश्न।। 1

सदा दिया के सम बनो, उजला रहे समाज।

निश-दिन पाप मुक्त तभी, कर दीवाली आज।। 2

यह प्यारा संसार है, दीन-हीन के संग।

दीपक जिनके घर नही, उनके लिए पतंग।। 3

लक्ष्मी को पूजें सभी, धनतेरस है कमाल।

बहू हमारी कर्ज सी, नित झगड़ा जंजाल।। 4

आलम-गौरव गले मिलें, होली हो या ईद।

नेता झंझट कील से, उकसाते…

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Added by केवल प्रसाद 'सत्यम' on November 2, 2013 at 9:32am — 20 Comments


मुख्य प्रबंधक
लघुकथा : मतिमूढ़ (गणेश जी बागी)

बसंता लगभग एक साल बाद अपने गाँव लौट रहा था । बसंता इतना खुश था कि जो भी वेंडर ट्रेन मे आता वो कुछ न कुछ खरीद लेता, माला, गुड़िया, चूड़ी, बिंदी, सोनपापड़ी और भी बहुत कुछ । पैसे देने के लिए हर बार वह नोटों से भरा पर्स खोल लेता । अगल बगल के यात्रियों ने उसे डांटा भी, मगर भोला भला बसंता हँस कर बात टाल जाता ।    



आख़िर वही हुआ जिसका डर था, चलती ट्रेन में किसी ने उसका रुपयों से भरा पर्स निकाल लिया । बसंता ज़ोर ज़ोर से रोने लगा, तब…

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Added by Er. Ganesh Jee "Bagi" on November 1, 2013 at 9:00pm — 34 Comments

अंतस

 

जब आसमान में काले बादल

नज़र आते हैं

जब रात स्याह और घनी हो जाती है

कोई पथ नहीं दिखता

डर बढ़ जाता है

स्वयं को खोने का

तब मेरे अंदर से आवाज़ आती है

मैं तुम्हारे साथ हूँ

जब दर्द बढ़ जाता है

पीड़ा घनीभूत हो

आँसू बन ढुलकती है

गालों पर मोती सी

तब मेरे अंदर से आवाज़ आती है

मैं तुम्हारे साथ हूँ

जब मेरे ही

मुझे प्रताडित करते हैं

मुझ में विश्वास नहीं कर

मुझे निराश करते…

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Added by mohinichordia on November 1, 2013 at 3:18pm — 12 Comments

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