For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

All Blog Posts (19,173)

याद बहुत ही आती है तू

याद बहुत ही आती है तू, जब से हुई पराई।

कोयल सी कुहका करती थी, घर में सोन चि‍राई।

अनुभव हुआ एक दि‍न तेरी, जब हो गई वि‍दाई।

अमरबेल सी पाली थी, इक दि‍न में हुई पराई।

परि‍यों सी प्‍यारी गुड़ि‍या को जा वि‍देश परणाई।।

याद बहुत ही आती है तू---------

लाख प्रयास कि‍ये समझाया, मन को कि‍सी तरह से।

बरस न जायें बहलाया, दृग घन को कि‍सी तरह से।

वि‍दा समय बेटी को हमने, कुल की रीत सि‍खार्इ।

दोनों घर की लाज रहे बस, तेरी सुनें…

Continue

Added by Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul' on August 27, 2014 at 8:00am — 5 Comments

ग़ज़ल/ इस धरती के नाम लिखूंगा हरियाली मैं (डॉ. राकेश जोशी)

जब भी आऊंगा खाकर तुमसे गाली मैं

इस धरती के नाम लिखूंगा हरियाली मैं

 

छोटे-छोटे बच्चों की उंगली थामूंगा

आसमान तक दौड़ लगाऊंगा खाली मैं

 

हरेक महल के हर पत्थर से बात करूंगा

मज़दूरों के लिए बजाऊंगा ताली मैं

 

जिस दिन तेरे बच्चे भी पढ़ने जाएंगे

उस दिन तुझे कहूँगा 'हैप्पी दीवाली' मैं

 

खेतों में सपने फिर से उगने लगते हैं

जब भी करता हूँ बातें फसलों वाली…

Continue

Added by Dr. Rakesh Joshi on August 26, 2014 at 9:46pm — 7 Comments


सदस्य कार्यकारिणी
ग़रीब के हाथ से निवाला न छीनिए (ग़ज़ल 'राज')

12122 12122 1212

कभी लबों तक पँहुचता प्याला न छीनिए

 ग़रीब के हाथ से निवाला न छीनिए  

 

यतीम का बचपना निराला न छीनिए

जमीन, दरगाह या शिवाला न छीनिए

 

बड़ी नहीं कोई चीज़ तहजीब से यहाँ      

नक़ाब, सिर पे ढका दुशाला न छीनिए

 

नसीब में क्या लिखा यहाँ कौन जानता          

किसी जवाँ दीप का उजाला न छीनिए

 

समान हक़ है मिला सभी को पढ़ाई का

गरीब बच्चों से  पाठ शाला न छीनिए 

 

जुड़े खुदा से…

Continue

Added by rajesh kumari on August 26, 2014 at 5:00pm — 31 Comments

हाइकु

प्रेम धुन

प्रिय मोहन

नाचत मन राधा

वेणुका धुन

विरह

टूटती आस

साजन घर नाहीं

फागुन मास…

Continue

Added by Pawan Kumar on August 26, 2014 at 1:30pm — 12 Comments

पुण्‍य (लघुकथा)/ रवि प्रभाकर

शहर के अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त डाॅक्टर के नेतृत्व में एक बहुत बड़ा ‘मुफ्त मैडीकल कैंप’ आयोजित किया गया। जहाँ मुफ्त चैकअप करवाने वालों का हजूम उमड़ आया था। डाॅक्टर साहिब व उनकी टीम को निस्वार्थ भाव से सैकड़ों मरीजों का चैकअप करते देख सभी उनकी मुक्त कंठ से सराहना कर रहे थे।



उसी…
Continue

Added by Ravi Prabhakar on August 26, 2014 at 11:30am — 10 Comments

प्रगति आत्मबल से होती है --डा० विजय शंकर

सड़क आने जाने के लिए है ,

आवागमन को गति देने के लिए है

गढ्ढे प्रक्रिया की नैसर्गिक देन हैं ,

गत्यावरोध गति नियंत्रण का विधान है ,

व्यवधान ही प्रगति का सही समाधान है ॥



इंटरनेट , विश्व व्यापी सम्पर्क सूत्र है ,

दुनिया को कंप्यूटर के माध्यम से

पल भर में जोड़ देता है , युग की देन है ,

हमारा संपर्क सूत्र प्रायः टूटा रहता है ,

क्यों , यही तो हमारे लिए शोध का विषय है ,

नेटवाला बताएगा, फोन लाइन चेक कराओ ,

फोन वाला कहेगा , नेट चेक कराओ… Continue

Added by Dr. Vijai Shanker on August 26, 2014 at 9:44am — 8 Comments

यह जीवन महावटवृक्ष है

यह जीवन महावटवृक्ष है।

सोलह संस्‍कारों से संतृप्‍त

सोलह शृंगारों से अभिभूत है

देवता भी जिसके लिए लालायित

धरा पर यह वह कल्‍पवृक्ष है।

यह जीवन महावटवृक्ष है।।

सुख-दु:ख के हरित पीत पत्र

आशा का संदेश लिए पुष्‍प पत्र

माया-मोह का जटाजूट यत्र-तत्र

लोक-लाज, मर्यादा,

कुटुम्‍ब, कर्तव्‍य, कर्म,

आतिथ्‍य, जीवन-मरण

अपने-पराये, सान्निध्‍य, संत समागम,

भूत-भविष्‍य में लिपटी आकांक्षा,

जिस में छिपा…

Continue

Added by Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul' on August 26, 2014 at 8:00am — 5 Comments


सदस्य कार्यकारिणी
दर सारे दीवार हो गए ( गीत ) गिरिराज भंडारी

दर सारे दीवार हो गए

**********************

सारी खिड़की बंद लगीं अब 

दर सारे दीवार हो गये

 

भौतिकता की अति चाहत में

सब सिमटे अपने अपने में

खिंची लकीरें हर आँगन में  

हर घर देखो , चार हो गये

 

सारी खिड़की बंद लगीं अब 

दर सारे दीवार हो गए

 

पुत्र कमाता है विदेश में

पुत्री तो ससुराल हो गयी

सब तन्हा कोने कोने में

तनहा सब त्यौहार हो गए

 

सारी खिड़की बंद लगीं अब 

दर सारे…

Continue

Added by गिरिराज भंडारी on August 25, 2014 at 8:30pm — 34 Comments

बस बात करें हम हिन्‍दी की

बस बात करें हम हिन्‍दी की।

न चंद्रबिन्‍दु और बिन्‍दी की।

ना बहसें, तर्क, दलीलें दें,

हम हिन्‍दुस्‍तानी, हिन्‍दी की।।

हों घर-घर बातें हिन्‍दी की।

ना हिन्‍दू-मुस्लिम-सिन्‍धी की।

बस सर्वोपरि सम्‍मान करें,

हम हिन्‍दुस्‍तानी, हिन्‍दी की।।

पथ-पथ प्रख्‍याति हो हिन्‍दी की।

ना जात-पाँत हो हिन्‍दी की।

बस जन जाग्रति का यज्ञ करें,

हम हिन्‍दुस्‍तानी, हिन्‍दी की।

एक धर्म संस्‍कृति हिन्‍दी…

Continue

Added by Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul' on August 25, 2014 at 7:44pm — 6 Comments

...गुनगुनाने दो पीर को...

गुनगुनाने दो पीर को...



गुनगुनाने ..दो पीर को

प्यासे अधर अधीर को

नयनों के .इस नीर को

मधुर स्मृति समीर को

हाँ , गुनगुनाने दो पीर को ….



रांझे की …उस हीर को

भूखे ..इक ..फकीर को

मरते .हुए …जमीर को

प्यासे नदी के .तीर को

हाँ , गुनगुनाने दो पीर को ….



घायल नारी के चीर को

पंछी के बिखरे नीड़ को

शलभ की ..तकदीर को

घुट घुट मरती भीड़ को

हाँ , गुनगुनाने दो…

Continue

Added by Sushil Sarna on August 25, 2014 at 7:00pm — 7 Comments

ग़ज़ल ..तालीम-ओ-तरबीयत ने यूँ ख़ुद्दार कर दिया

गागा लगा लगा /लल /गागा लगा लगा 



तालीम-ओ-तरबीयत ने यूँ ख़ुद्दार कर दिया,

चलने से राह-ए-कुफ़्र पे इनकार कर दिया.

.

मै ज़ीस्त के सफर में गलत मोड़ जब मुड़ा,

मेरी ख़ुदी ने मुझको ख़बरदार कर दिया.

.

इज़हार-ए-इश्क़ में वो नज़ाकत नहीं रही, …

Continue

Added by Nilesh Shevgaonkar on August 25, 2014 at 6:00pm — 33 Comments

राह चले शादी हो जाती |

अजीब बात  है ये प्यार  की    , भूले वो सारा  संसार |

सारा यौवन   बर्बाद   करे , मिल गया बेवफा जो यार | 

शादी बंधन अपवित्र करे  , रिश्ते  को गड्ढे में डाल | 

जिंदगी  ही  डूबे  नर्क में , आगे का अब कौन हवाल |

माता पिता जब करे  शादी , जा कर ही देखे घर बार |

जान पानी  छान कर पीते , तब  कहीं करते  ऐतबार |

शादी पावन है  जीवन में ,   इसी से   चलता संसार |

राह चले शादी हो जाती ,   दूसरे  दिन पड़ता दरार |

गोद में जब बालक आये , आशिक हो जाता  फरार  | 

मुँह…

Continue

Added by Shyam Narain Verma on August 25, 2014 at 5:00pm — 8 Comments

सिसकियाँ (लघुकथा)

माँ सोनी के कमरे से खूब रोने चीखने की आवाजें आ रही थी, १४ साल की राधा भयभीत हो रसोई में दुबकी रही, जब तक पिता के बाहर जाने की आहट ना सुनी ! बाहर बने मंदिर से पिता हरी की दुर्गा स्तुति की ओजस्वी आवाज गूंजने लगी! भक्तों की "हरी महाराज की जय" के नारे से सोनी की सिसकियाँ दब गयी! पिता के बाहर जाते ही माँ से जा लिपट बोली "माँ क्यों सहती हो?" सोनी घर के मंदिर में बिराजमान सीता की मूर्ति देख मुस्करा दी! अपने घाव पर मलहम लगाते हुए बोली, "मेरा पति और तेरा पिता…

Continue

Added by savitamishra on August 25, 2014 at 2:00pm — 20 Comments

किससे क्‍या शिकवा

किससे क्‍या है शिकवा

किसको क्‍या शाबाशी।

नहीं कम हुए बढ़ते

दुष्‍कर्मों को पढ़ते

बेटे को माँ बापों पर

अहसाँ को गढ़ते

नेता तल्‍ख़ सवालों पर

बस हँसते-बचते

देख रहे गरीब-अमीर

की खाई बढ़ते

कितनी मन्‍नत माँगे

घूमें काबा काशी।

 

फि‍र जाग्रति का

बिगुल बजेगा जाने कौन

फि‍र उन्‍नति का

सूर्य उगेगा जाने कौन

आएगी कब घटा

घनेरी बरसेगा सुख,

फि‍र संस्‍कृति की

हवा बहेगी…

Continue

Added by Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul' on August 24, 2014 at 7:00pm — 3 Comments

क्षणिकाएँ

वो मेरा कुछ नहीं लगता

और मैं कोई महान व्यक्ति भी नहीं

फिर भी बार बार वो

मेरे पैर पकड़ रहा था  

पता है क्यों ?

मैंने सिर्फ दो रोटी दी उसे

**************************

बहुत दुश्मन है उसके

गलती ?

बहुत अच्छा आदमी है वो

*******************************

सिसकियाँ मत लो ग़म-गीं हवाओ

चुप हो जाओ

पता है क्यों?

वो आ रहीं है

*********************************

लोग कहते है उनकी आँखों में

प्यार का समंदर है

फिर भी मैं क्यों ?

प्यासा…

Continue

Added by ram shiromani pathak on August 24, 2014 at 6:00pm — 14 Comments

दोहावली

द्वेष,बुराई,दुष्टता ,ना ही हो अनाचार

भेदभाव नफरत मिटे ,करो सभी से प्यार ||



आजादी के बाद भी, ख़त्म हुई ना जंग

गुंडागर्दी है बढ़ी ,दानव फिरें दबंग ||



काम ,मोह, मद, लालसा,फैला भ्रष्टाचार

मानव दानव है बना ,करता अत्याचार ||



देश प्रेम की भावना, होगी तब साकार

दूर हटे जब दीनता ,सपने लें आकार ||

बिजली पानी झोंपड़ी ,इसकी है दरकार

पेट भरे हर एक का, तभी सफल सरकार…

Continue

Added by Sarita Bhatia on August 24, 2014 at 1:29pm — 10 Comments

खुद का भी अहसास लिखो

खुद का भी अहसास लिखो!
एक मुकम्मल प्यास लिखो!!

उससे इतनी दूरी क्यों !
उसको खुद के पास लिखो !!

खाली गर बैठे हो तुम!
खुद का ही इतिहास लिखो !!

 गलती उसकी बतलाना !
खुद का भी उपहास लिखो!!

हे ईश्वर ऊब गया हूँ!
मेरा भी अवकाश लिखो!!
***************************
राम शिरोमणि पाठक"दीपक"
मौलिक/अप्रकाशित
 

Added by ram shiromani pathak on August 24, 2014 at 1:11am — 28 Comments

एक मैं ही तो गैर था -- डा० विजय शंकर

बाँट दीं खुशियाँ तमाम हमने

कोई दुआएं दे के ले गया

कोई दबाव बना के ले गया

सब अपने ही थे ,कोई गैर नहीं था ||

बाँट दीं खुशियाँ तमाम हमने

कोई आँखें झुका के ले गया

कोई आँखें दिखा के ले गया

सब अपने ही थे कोई गैर नहीं था ||

कोई हंस के मिलता था ,

कोई जल के मिलता था ,

कोई मिल के छलता था ,

कोई छल के मिलता था ,

सब अपने लिए मिलते थे ,

कोई मुझसे नहीं मिलता था ||

लोग , सच कुर्सी पसंद होते हैं

हर मिलने वाला मुझसे नहीं

कुर्सी से… Continue

Added by Dr. Vijai Shanker on August 23, 2014 at 10:16pm — 21 Comments

केले में

मिला कंधा नहीं हमको पड़ी है लाश ठेले में

खिलाया क्यों ज़हर तुमने मिला कर हम को केले में

चली आ तू बहाने से मिलेगें आज हम दोनो

न आई तो समझ लेना फसा देगें झमेले में

न आती थी हमें नीदें कहें जब तक न गुडनाइट

किये हम रात भर बाते दिया जो फोन मेले में

पहन कर लाल जोड़ा तुम चली हो साथ क्‍याे उनके

करे हम ये दुआ रब से रहे तू तो तबेले में

सजाई मॉंग क्‍यों अपनी तड़पता छोड़…

Continue

Added by Akhand Gahmari on August 23, 2014 at 8:17pm — 22 Comments

नव गीत ////आबाद होंगे कब जीवन मरुस्थल !

सोचता रहता हूँ

उदासियो में घिरकर

प्रतिक्षण-प्रतिपल 

आबाद होंगे कब जीवन -मरुस्थल ?

 

काल की क्रूरता ने

मेरे प्रयासों को

आशा-उजासो को

जीवन-विकल्पों को  

कर डाला धूमिल

कर्म हुआ निष्काम

कार्य भी निष्फल

आबाद होंगे कब जीवन-मरुस्थल ?

 

सूने शून्य जीवन में

नियति के बंधन से

करुणा से क्रंदन से

पूरे जो न हो पायें

स्वप्न हुए चंचल  

पंगु प्रेरणा के पग

शान्त और…

Continue

Added by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on August 23, 2014 at 7:27pm — 20 Comments

Monthly Archives

2026

2025

2024

2023

2022

2021

2020

2019

2018

2017

2016

2015

2014

2013

2012

2011

2010

1999

1970

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"जिस प्रकार हम लाइव तरही मुशायरा, चित्र से काव्य तक, obo लाइव महा उत्सव इत्यादि का आयोजन करते हैं…"
14 hours ago
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"मैं लगभग 10 वर्ष पहले इस मंच से जुड़ा, बहुत कुछ सीखने को मिला। पारिवारिक व्यस्तता के कारण लगभग सोशल…"
15 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अगर हमारे समूह में कोई व्यवसायी हैं और उनके पास कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी फंड्स हों तो वे इसके…"
18 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सदस्यों में रुचि के अभाव ने इसे बंद करने के विचार का सूत्रपात किया है। ऐसा लगने लगा था कि मंच को…"
18 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" एक दुखद स्थिति बन रही है. लेकिन यह नई नहीं है. जब आत्मीयजनों और ओबीओ के समृद्ध सदस्यों की…"
18 hours ago
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"मै मंच के प्रारंभिक दिनों से ही जुड़ा हुआ हूं। इसका बंद होना बहुत दुखद होगा। मुझे लगता है कि कुछ…"
21 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय गणेश जी, जितना कष्ट आपको यह सूचना देते हुए हो रहा है, उतना ही कष्ट हम सब को यह सुनने में हो…"
22 hours ago
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"दु:खद "
22 hours ago
Admin posted a discussion

अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....

प्रिय सदस्य गण / प्रबंधन समिति के सदस्य गण / ओ बी ओ के सभी पाठक एवं शुभचिंतक गणसादर प्रणामआप सभी…See More
23 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-133 (विषय मुक्त)
"हाड़-मॉंस स्ट्रेट (लघुकथा) : "नेता जी ये क्या हमें बदबूदार सॅंकरी गलियों वाली बस्ती के दौरे…"
Thursday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-133 (विषय मुक्त)
"सादर नमस्कार आदरणीय मंच। इंतज़ार है साथियों की सार्थक रचनाओं का, सहभागिता का। हम भी हैं कोशिश में।"
Thursday
Admin posted a discussion

"ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-133 (विषय मुक्त)

आदरणीय साथियो,सादर नमन।."ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" में आप सभी का हार्दिक स्वागत है।प्रस्तुत…See More
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service