For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

All Blog Posts (19,172)

न्याय की उम्मीद

जो डूब चुका है कंठ तक झूठ के सवालों में 

उससे ही हम न्याय की उम्मीद लगा बैठे ।  

देश आज फंस चुका है गद्दारों के हाथों में 

हमारी आपसी मतभेद का फाइदा उठा बैठे । 

हमसे मांगते मंदिर का सबूत न्यायालय में 

भारत में भी तालिबानी फरमान सुना बैठे । 

राम के मंदिर के लिए लड़ रहे न्यायालय में 

सुबह की रोशनी में अपना अस्तित्व देख बैठे । 

आज न्यायालय ही खड़ा हो गया सवालों में 

जो संविधान को अलग रख निर्णय ले बैठे । 

न्यायाधीस को शर्म नहीं…

Continue

Added by Ram Ashery on August 24, 2019 at 8:30pm — No Comments

बेसुरी खाँसी ....

मन ढूँढता रहा

नीरवता में

खोये हुए कोलाहल को

साथ ले गई

अपनी बेसुरी आवाज़ें

खाँसी की

जीवन के अंतिम पहर में

अपने साथ

जाने कितने सपने,

कितने दर्द छुपे थे

बूढ़ी माँ की

उस बेसुरी खरखरी

खाँसी में

पहले…
Continue

Added by Sushil Sarna on August 24, 2019 at 6:30pm — 2 Comments

ऐ हवा ....

ऐ हवा .............

कितनी बेशर्म है

इसे सब खबर है

किसी के अन्तःकक्ष में

यूँ बेधड़क चले आना

रात की शून्यता में

काँच की खिड़कियों को बजाना

पर्दों को बार बार हिलाना

कहाँ की मर्यादा है

कौमुदी क्या सोचती होगी

क्या इसे ज़रा भी लाज नहीं

इसका शोर

उसे मुझसे दूर ले जायगा

मेरा खयाल

मुझसे ही मिलने से शरमाएगा

तू तो बेशर्म है

मेरी अलकों से टकराएगी

मेरे कपोलों को

छू कर निकल जाएगी

मेरे…

Continue

Added by Sushil Sarna on August 23, 2019 at 7:00pm — 4 Comments

सांच को आंच नही

वर्तमान राजनैतिक व्यवस्ठा पर तंज



वक्त दोहराता है अपने आप को

कैसे कैसे दिन दिखाता आपको



भूलना हम जिसको चाहें बारहा

फिर वही मंज़र दिखाता आपको



जो सबक माज़ी में तुम भूले उसे

याद फिर-फिर से दिलाता आपको



जिस के संग जैसा किया है सामने

वक्त बस शीशा दिखाता आपको



शह नहीं है खेल बस शतरंज का

मात वो देना सिखाता आपको



तुम अगर सच्चे थे तब वो आज है

फिर वो क्यूँ झूठा कहाता आपको



सांच को ना आंच होती है कभी…

Continue

Added by प्रदीप देवीशरण भट्ट on August 23, 2019 at 12:00pm — 1 Comment

इतिहास अदालत होती है क्या

कौन कहता है कि इतिहास कोईअदालत होती है 

जिस में हार गयों की महज़ मुखाल्फत होती है 

और यह भी कि 

यह केवल विजयी का फलसफा लिखती है 

सफे पर सफा लिखती है 

इसलिए  मान लिया जाना चाहिए

कि जीत  यकीनन लाजिमी है 

कैसे भी हो  पर हो केवल विजय

लेकिन

शायद सही हो…

Continue

Added by amita tiwari on August 23, 2019 at 1:00am — 4 Comments

कहें किससे व्यथा ?

तुम हुए जो व्यस्त

अभिभावक कहें किससे व्यथा?

हो गए कितने अकेले 

क्या तुम्हे यह भी पता?



जिन्दगी की राह में

तुम तो निकल आगे गए

वे गहन अवसाद, द्वन्दों

में उलझ कर रह गए



सहन कर पाए न वे 

संतान की ये बेरुखी

बेसहारा , ढलती वय

थक कर, हताशा में फंसी



तुम उन्हे कुछ वक्त दो

प्यार दो , संतृप्ति दो

जिन्दगी जीने को कुछ

आधार कण रससिक्त दो



पुष्प फिर आशीष के

तुम पर बरस ही जाएंगे

कवच बन संसार…

Continue

Added by Usha Awasthi on August 22, 2019 at 9:50pm — 5 Comments

सत्ता के गलियारे

जिनको हमने चुनकर भेजा,सत्ता के गलियारों में

उनको लड़ते देखा जैसे, श्वान लड़ें बाज़ारों में

 

कब क्या कैसे गुल ये खिलाते,कोई जान नहीं पाया

इनके असली रंग हैं दीखते, तीज और त्योहारों में

 

चोर उच्चके…

Continue

Added by प्रदीप देवीशरण भट्ट on August 22, 2019 at 12:30pm — 1 Comment

चले आओ .....

चले आओ .....

जाने कौन

बात कर गया

चुपके से

दे के दस्तक

नैनों के

वातायन पर

दौड़ पड़ा

पागल मन

मिटाने अपने

तृषित नैनों की

दरस अभिलाषा

पवन के ठहाके

मेरे पागलपन का

द्योतक बन

वातायन के पटों को

बजाने लगे

अंतस का एकांत

अभिसार की अनल को

निरंतर

प्रज्वलित करने लगा

कौन था

जिसका छौना सा खयाल

स्पर्शों की आंधी बन

मेरी बेचैनियों को…

Continue

Added by Sushil Sarna on August 21, 2019 at 12:56pm — 2 Comments

सड़क की बेबसी

कभी खूनी, कभी कातिल

कभी गुनाहों का मार्ग कहलाती

जुर्म को होते देख चीखती

खून खराबे से मैं थर्राती

कभी खून की प्यासी तो

कभी डायन हूँ कहलाती

चाह के भी कुछ कर ना पाती

बेबसी पर नीर बहाती ||

 

हैवानियत की, कभी बलात्कार की,   

ना चाह मैं साक्षी बनती

हत्या कभी षडयंत्रो का

अंजान देने पथ भी बनती

तैयार की गई हर साजिश को   

हादसो का मैं नाम दिलाती…

Continue

Added by PHOOL SINGH on August 20, 2019 at 4:29pm — 2 Comments

प्रवृत्ति (लघुकथा )

‘दीदी, आप अपनी लहरों में नाचती हैं I कल-कल करती हैं I इतना आनंदित रहती हैं, कैसे ?’ -पोखर ने नदी से पूछा I

‘अपनी आगे बढ़ने की प्रवृत्ति के कारण’- नदी ने उछलकर कहा I

.

 (मौलिक/अप्रकाशित )

Added by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on August 20, 2019 at 3:00pm — 4 Comments

क्यों चिंता की लहरें मुख पर आखिर क्या है बात प्रिये ? (५७)

एक गीत प्रीत का 

--------------------

क्यों चिंता की लहरें मुख पर आखिर क्या है बात प्रिये ? 

पलकों के कोरों पर ठहरी क्यों कर है बरसात प्रिये ?

**

शुष्क अधर क्यों बाल बिखर कर अलसाये हैं शानों पर ?

काजल क्रोधित होकर पिघला जा पहुँचा है कानों पर | 

मीत कपोलों पर जो रहती वह गायब है अरुणाई | 

ऐसा लगता है ज्यों खो दी चंद पलों में तरुणाई…

Continue

Added by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on August 20, 2019 at 9:00am — 4 Comments

मेरे प्रिय विभु मेरे प्रिय मोरांडी-

(13 अगस्त-2018-इटली का मोरांडी पुल हादसा)

 

अटठावन वर्ष की उम्र भी कोई उम्र होती है

ना तो पूर्ण  रुपेण युवा और ना ही पूरे वृद्ध

तुम्हारा यूँ इस तरह अकस्मात ही चले जाना

पूरे शहर को कर गया है अचम्भित और विक्षिप्त…

Continue

Added by प्रदीप देवीशरण भट्ट on August 19, 2019 at 5:00pm — 2 Comments

ग़ज़ल (2×16): मनोज अहसास

पीछे मायूसी का साया आगे खतरा अनजाना है

हर लम्हा ये सोच रहा हूँ खुद को कैसे समझाना है

तेरी यादों का सूरज भी काम नहीं आता अब मेरे

मुझको इस मुश्किल मौसम में खुद से दूर चले जाना है

हम दिल की बातें लिखते हैं दिल न दुखाने की सीमा तक

ऊंची सोच की इस महफिल से हमको जल्द ही उठ जाना है

तेरे खतों की मधुर कहानी सोच से पीछे छूट गई है

पैथोलॉजी की रिपोर्ट का हाथों में एक अफसाना है

मां की हथेली चूम के निकला फौजी बेटा अपने घर…

Continue

Added by मनोज अहसास on August 18, 2019 at 10:30pm — 3 Comments

कागज की नाव

कागज की किस्ती और वर्षा का पानी,

वह बचपन की यादें हैं बहुत याद आती 

आज रूठी गई दादी और वर्षा की रानी 

न कहती है कहानी न बरसता है पानी॥

बच्चों को पता नहीं कैसे बहती है नाली 

छतों से गटर में बहता, बरसा का पानी 

गटर जब चोक हो ,सड़क पर बहे पानी  

सड़के और गलियाँ नदियाँ बनके बहती ॥ 

वह कागज की किस्ती तभी याद आती 

दादी की कहानी, रिमझिम बरसता पानी 

बहुत याद आती वह बचपन की कहानी 

माँ बाप को फुरसत कहाँ कहे जो…

Continue

Added by Ram Ashery on August 18, 2019 at 3:00pm — 2 Comments

किसी के प्यार की ख़ातिर हमारा दिल तरसे (५६ )

किसी के प्यार की ख़ातिर हमारा दिल तरसे

घटा-ए-इश्क़ तो छाई न जाने कब बरसे

**

न तीर दिल पे चला यार ज़ख़्म गर देना

कि इस पे ज़ख़्म हुआ करते जब गुल-ए-तर से

**

क़दम बढ़ाना भी मुश्किल है जानिब-ए-मंज़िल

मिला फ़रेब हमें इस क़दर है रहबर से

**

करेगा चूर अगर ज़ुल्म की हदें टूटें

उमीद और है क्या आईने को पत्थर से

**

ख़ुदाया देख ज़रा भी किसी को, दर्द नहीं

किसी के दर्द बड़े हो गए समंदर से

**

लकीरें हाथों की जिसने बनाई मेहनत से

उसे…

Continue

Added by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on August 18, 2019 at 1:00am — 2 Comments

आडंबर - लघुकथा -

मेरा बचपन का दोस्त कबीर इस बार तीन साल बाद दुबई से ईद मनाने खास तौर पर अपने देश आया था। मुझे  खाने पर बुलाया था। तीन साल पहले वह  आया था तो नया मकान बनवाया था। मैं उस समय देश से बाहर था तो नहीं जा पाया था। इस बार तो जाना ही था। दोस्तों से सुना था कि खूब कमाई कर रहा है दुबई में।

शाम को कुछ मिष्ठान, चॉकलेट और गुलाब के फूलों  का  गुलदस्ता लेकर खोजते पूछते पहुंचा तो घर का बाहरी आवरण देख कर बड़ी निराशा हाथ लगी।घर की बाहरी दीवार पर सीमेंट भी नहीं था।पानी की निकासी की  नाली  में बिजली का पोल…

Continue

Added by TEJ VEER SINGH on August 17, 2019 at 10:00am — 2 Comments

सच बात तो यह

सुनो

वहम है तुमको

कि स्वर मिला स्वर में तुम्हारे.

मैं कृत -कृत हो  जाऊंगी…

Continue

Added by amita tiwari on August 17, 2019 at 2:00am — No Comments

तिरंगे तुझे सुनानी है ....

तिरंगे तुझे सुनानी है ....

सन ४७ की रात में

आज़ादी की बात में

दर्दीले आघात में

छुपी जो एक कहानी है

तिरंगे तुझे सुनानी है

आज़ादी के शोलों में

रंग बसन्ती चोलों में

जय हिन्द के बोलों में

छुपी जो एक कहानी है

तिरंगे तुझे सुनानी है

राजगुरु सुखदेव भगत

और मंगल पण्डे लक्ष्मी बाई

गाँधी शेखर और शिवा की

छुपी जो एक कहानी है

तिरंगे तुझे सुनानी है

आज़ादी के दीवानों की

सरहद के जवानों की…

Continue

Added by Sushil Sarna on August 16, 2019 at 6:44pm — 2 Comments

मत्तगयंद सवैया

छंद - मत्तगयंद सवैया
******************************
शिल्प= भगण×7+2 गुरु ,
23 वर्ण यति 12,11 

सावन मास रही तिथि पूनम,
क्रूर महा शिशुपाल सँहारे।

युध्द मझार उतार दिया रिपु ,
शीश सुदर्शन को कर धारे।
घायल अंगुलिका हरि रक्षति,
द्रौपदि अंबर को निज फारे।

वस्त्र हरे बलवान दुशासन,
चीर बढा हरि कर्ज उतारे।।

मौलिक व अप्रकाशित

Added by Satyanarayan Singh on August 15, 2019 at 8:07pm — No Comments

वियोग

￰मिले थे हम यूँ किनारे समंदर था पहाड़ थे ,
जीवन शैली के कुछ नए अरमान थे ,
कुछ नए पुराने से आयाम थे,
कुछ तड़प थी कुछ झड़प थी ,…
Continue

Added by Pratibha Pandey on August 15, 2019 at 5:30pm — 2 Comments

Monthly Archives

2026

2025

2024

2023

2022

2021

2020

2019

2018

2017

2016

2015

2014

2013

2012

2011

2010

1999

1970

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा दशम. . . . . उम्र
"आदरणीय विजय निकोर जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय "
5 hours ago
Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
Wednesday
amita tiwari posted a blog post

गर्भनाल कब कट पाती है किसी की

कहीं भी कोई भी माँ अमर तो नहीं होती एक दिन जाना होता ही है सब की माताओ को फिर भी जानते बूझते भी…See More
Tuesday
vijay nikore commented on Sushil Sarna's blog post दोहा दशम. . . . . उम्र
"भाई सुशील जी, सारे दोहे जीवन के यथार्थ में डूबे हुए हैं.. हार्दिक बधाई।"
Tuesday
vijay nikore posted a blog post

प्यार का पतझड़

एक दूसरे में आश्रय खोजतेभावनात्मक अवरोधों के दबाव मेंकभी ऐसा भी तो होता है ...समय समय से रूठ जाता…See More
Tuesday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"प्रारम्भ (दोहे) अंत भला तो सब भला, कहते  सब ये बात। क्या आवश्यक है नहीं, इक अच्छी…"
Sunday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"आदरणीय  जयहिंद रायपुरी जी अच्छा हायकू लिखा है आपने. किन्तु हायकू छोटी रचना है तो एक से अधिक…"
Sunday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"हाइकु प्रारंभ है तो अंत भी हुआ होगा मध्य में क्या था मौलिक एवं अप्रकाशित "
Apr 11
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"स्वागतम"
Apr 11
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185

आदरणीय साहित्य प्रेमियो,जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
Apr 8
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद ' जी सादर अभिवादन प्रथम तो मैं क्षमाप्रार्थी हूँ देरी से आने की…"
Apr 7
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा दशम. . . . . उम्र

दोहा दशम् . . . . उम्रठहरी- ठहरी उम्र अब, करती एक सवाल ।कहाँ गई जब जिंदगी, रहती थी खुशहाल ।।यादों…See More
Apr 6

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service