हर वक्त ,
दिल -ओ- दिमाग में,
एक बहस सी छिड़ी रहती है-
कितना लड़ते हैं, दोनों आपस में-
कुछ पल के लिए, एक हो भी जाते हैं
मगर फिर अगले ही पल
" मैदान -ए- जंग" ।
और मैं !
एक निहत्थे प्यादे (सैनिक) की तरह ,
जो जीता -
उसी की तरफ।।
( मौलिक व अप्रकाशित)
Added by रक्षिता सिंह on January 29, 2018 at 10:38am — 4 Comments
विधाता छंद वाचिक मापनी का छंद है जिसमे 14, 14 मात्राओं पर यति और दो-दो पदों की तुकांतता होती है। इसका मापनी
1222 1222 1222 1222
पड़े जब भी जरूरत तो, निभाना साथ प्रियतम रे
सुहानी हो डगर अपनी, मिले मुझको न फिर गम रे
बहे सद प्रेम की सरिता, रगों में आपके हरदम
नहाता मैं रहूँ जिसमें, मिटे सब क्लेश ऐ हमदम
बने दीपक अगर तुम जो, शलभ बनके रहूँगा मैं
मिलेगी ताप जो मुझको, वहीं जल के मरूँगा मैं
फकत इतनी इबादत है, जुड़े तन मन…
ContinueAdded by नाथ सोनांचली on January 29, 2018 at 8:46am — 3 Comments
-उन्हें कुत्तों ने बुरी तरह काट खाया है।
-क्यूँ?
-उनकी बड़ाई करने की आदत जो न करा दे।
-बड़ाई?
-हाँ भई।उन्होंने कुत्तों को आदमी कह दिया था।
-अरे,घोर अनर्थ',अदीब चिल्लाया।@
Added by Manan Kumar singh on January 28, 2018 at 10:29pm — 2 Comments
वासन्ती-गीत
सुरीले दिन वसन्त के
मनहर,सरसाते दिन आये रसवन्त के
सुरीले दिन वसन्त के.....!
बहुरंगी बोछारे धरती पर बरसाते
ऋतुओ का राजा फिर आया हँसते गाते
पोर पोर पुलकित दिक् के दिगन्त के
सुरीले दिन वसन्त के......!
मस्ताना मौसम जनजीवन में थिरकन हैं
कान्हा की भक्ति मे खोया हर तन मन हैं
चित्त चपल, ध्यान मग्न, योगी और संत के
सूरीले दिन वसन्त…
ContinueAdded by नन्दकिशोर दुबे on January 28, 2018 at 7:30pm — 2 Comments
212 212 212 212
आज फिर वो मुझे याद आने लगे ।
भूलने में जिसे थे ज़माने लगे ।।
कर गई है असर वो मिरे जख़्म तक ।
इस तरह क्यूँ ग़ज़ल गुनगुनाने लगे ।।
दिल जलाने की साज़िश बयां हो गयी ।
बेसबब आप जब मुस्कुराने लगे ।।
अब बता दीजिये क्या ख़ता हो गयी ।
ख़ाब में इस तरह क्यों सताने लगे…
ContinueAdded by Naveen Mani Tripathi on January 28, 2018 at 4:03pm — 7 Comments
मुसीबतों से लोकतंत्र को, जल्दी उबारना होगा
निर्धनों के हक़ में देश में कानून बदलना होगा |
निर्धन नहीं खड़ा हो सकता, पार्षद के भी चुनाव में
लाखों रुपये चाहिए उसे, चुनाव दंगल लड़ने में |
गणतंत्र अभी धनतंत्र हुआ, धनाढ्य चुनाव लड़ते हैं
गरीब कैसे लडेगा भला, पास न लाखो रूपये हैं’ |
धनबल बाहुबल की प्रचुरता, ताकत बड़ी अमीरों की
निर्धनता ही कमजोरी है, इस देश के गरीबो की |
भ्रष्टाचार और महँगाई, साथ यौन शोषण भी…
ContinueAdded by Kalipad Prasad Mandal on January 28, 2018 at 10:17am — 5 Comments
1212 1122 1212 22
गरीब खाने तलक रोटियां नहीं जातीं ।
तेरे जहान से क्यूँ सिसकियाँ नहीं जातीं ।।
कतर रहे हैं वो पर ख्वाहिशों का अब भी बहुत।
नए गगन में अभी ,बेटियां नहीं जातीं ।।
वो तोड़ सकता है तारे भी आसमाँ से मग़र ।
मुसीबतो की ये परछाइयां नहीं जातीं ।।
यकीं करूँ मैं कहाँ तक जुबान पर साहब ।
लहू से आपके खुद्दारियाँ नहीं जातीं…
ContinueAdded by Naveen Mani Tripathi on January 27, 2018 at 9:51pm — 9 Comments
1212 1122 1212 22
गरीब खाने तलक रोटियां नहीं जातीं ।
तेरे जहान से क्यूँ सिसकियाँ नहीं जातीं ।।
कतर रहे हैं वो पर ख्वाहिशों का अब भी बहुत।
नए गगन में अभी ,बेटियां नहीं जातीं ।।
वो तोड़ सकता है तारे भी आसमाँ से मग़र ।
मुसीबतो की ये परछाइयां नहीं जातीं ।।
यकीं करूँ मैं कहाँ तक जुबान पर साहब ।
लहू से आपके खुद्दारियाँ नहीं जातीं…
ContinueAdded by Naveen Mani Tripathi on January 27, 2018 at 9:49pm — 1 Comment
गीत - आरज़ू
अंजाने से सपने, अंजानी राह है,
पाना है तुझको ही, यह मेरी चाह है,
तेरे बिना ऐसे कैसे मैं जियुं,
चाहता हूँ साथ तेरे मैं रहूँ,
पूरी कर दे तू मेरी यह आरज़ू,
पूरी कर दे तू…
Added by M Vijish kumar on January 27, 2018 at 8:18pm — 4 Comments
लघुकथा - प्यास –
फ़ौज़ी सौदान सिंह रात के गस्त पर था। उसकी पीने के पानी की बोतल खाली हो गयी। उसे प्यास लगी थी| इधर उधर नज़र दौड़ाई। यूनिट की चौकी बहुत दूर थी।
अचानक उसकी नज़र एक किसान पर पड़ी जो खेत में सिंचाई कर रहा था। सौदान सिंह को लगा कि उसके पास पानी अवश्य मिलेगा। अतः वह उसके पास चला आया,
"भाई जी, क्या आपके पास पीने का पानी मिलेगा"?
"वीर जी, तुम्हारी कौम क्या है"?
"भाई जी, आपके इस सवाल का पानी से क्या ताल्लुक़ है"?
" वीर जी, ताल्लुक़ है तभी तो पूछा…
ContinueAdded by TEJ VEER SINGH on January 27, 2018 at 6:42pm — 10 Comments
कलम उठाई है मैंने अब, सोयी रूह जगाने को
जिस मिट्टी में जन्म लिया है, उसका कर्ज चुकाने को
कलमकार का फर्ज निभाऊं, हलके में मत लेना जी
भुजा फड़कने अगर लगे तो, दोष न मुझको देना जी
सन सैतालिस हमसे यारो, कब का पीछे छूटा है
भारत के अरमानों को खुद, अपनो ने ही लूटा है
भूख गरीबी मिटी नही है, दिखती क्यो बेगारी है
झोपड़ियो के अंदर साहब दिखती क्यों लाचारी है
भारत माता की हालत को, देखों तुम अखबारों में
कैद…
ContinueAdded by नाथ सोनांचली on January 26, 2018 at 1:23pm — 8 Comments
मैं ....
मैं
कल भी
ज़िंदा था
आज भी
ज़िंदा हूँ
और
कल भी
ज़िदा रहूंगा
फ़र्क
सिर्फ़ इतना है
कि
मैं
कल गर्भ था
आज
देह हूँ
कल
अदेह हो जाऊंगा
गर्भ की यात्रा से शुरू
मैं
मैं की केंचुली छोड़
अनंत के गर्भ में
अमर
अदेह हो जाऊंगा
सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित
Added by Sushil Sarna on January 26, 2018 at 12:00pm — 12 Comments
एक किसान, एक सैनिक से यूं रूबरू हुआ :
"तुम्हारे पास क्या-क्या है?"
"मेरे पास हैं बंदूक, तोप, गोला-बारूद और रक्षा और युद्ध के आधुनिक साजो-सामान! अब तू बता, तेरे पास क्या-क्या है?"
"हमरे पास तो बाबू गैंती-फावड़े, बीज-खाद, और खेती-किसानी के पुराने और आधुनिक साजो-सामान हैं! वैसे अपनी चीज़ों के नाम और रूप भले अलग-अलग हैं, पर काम और नसीब तो अपन दोनों के एक जैसे लगते हैं!"
"हां, दोनों ही अपनी मां के लिए अपना-अपना ख़ून-पसीना और परिवार दांव पर लगा देते हैं!"
"पर बाबू अपनी इस…
Added by Sheikh Shahzad Usmani on January 26, 2018 at 5:00am — 4 Comments
शत्रु दल को धूल चटाई वो मेरा हिन्दुस्तान है ,
आज़ादी की धुन बजाई वो मेरा हिन्दुस्तान है ,
बलिदानियों की गाता हरदम शौर्य गाथा ,
कर्म की बजी शहनाई वो मेरा हिन्दुस्तान है ।
*********
बलिदानी रंग से सजा मेरा हिन्दुस्तान है ,
हरा-गुलाबी , केसरिया मेरा हिन्दुस्तान है ,
मेरा तो जीना मरना सबकुछ इसके साथ है
खुशी-उल्लास में डूबा मेरा हिन्दुस्तान है ।
मौलिक एवं अप्रकाशित ।
Added by Mohammed Arif on January 25, 2018 at 3:53pm — 7 Comments
मसाला मिलाओ बनाओ मूवी
किसी को नचाओ सजाओ मूवी।1
चलें लात मुक्के डिगो मत निडर
बड़ी हसरतें हैं दिखाओ मूवी।2
लजाते नहीं आजकल सब बेढ़ब
लगे आग चाहे चलाओ मूवी।3
बँधी आँख पर पट्टियाँ कितनी हैं!
दिखेगा नहीं जो जलाओ मूवी।4
"कहाँ मोल खूं का रहा पहले का
बहाओ, बहाओ,बहाओ, मूवी!"5
मौलिक और अप्रकाशित
Added by Manan Kumar singh on January 25, 2018 at 10:00am — 8 Comments
बह्र:- 1222-1221-22
अरे ! हम कोई लेखक थोड़ी हैं।।
समय हो पास , वो मुमफली हैं।।
कहाँ कहना हमें मंच-कविता।
बहल बस दिल ही जाएं ख़ुशी हैं।।
बड़े ओहदे ,रंगीं रात ,ना ना।
गरीबां का निवाला, सही हैं।।
मुहब्बत में हमारी भी दोस्त।
नशा भी वो ,वही मयकशी हैं।।
कोई रूठे तो रूठे मेरा क्या।
मेरी दौलत ओ शोहरत नही हैं।।
आमोद बिंदौरी /मौलिक अप्रकाशित
Added by amod shrivastav (bindouri) on January 24, 2018 at 8:42pm — 2 Comments
1222 1222 122
ग़मो का इक समंदर टूटता है।
किसी का भी अगर घर टूटता है।।
मिले धोख़े पे धोख़ा जब किसी को।
तो वो अंदर ही अंदर टूटता है।।
सँभलता मुश्किलों से आदमी फिर।
भरोसा जब कहीं पर टूटता है।।
करो कोशिश भले तुम लाख यारो।
न आईने से पत्थर टूटता है।।
उजड़ते है परिंदों के कई घर।
कभी कोई भी खण्डहर टूटता है।।
यही तक़दीर में शायद लिखा हो।
जो देखूं ख़्वाब अक्सर टूटता है।।
ग़ज़ल…
ContinueAdded by surender insan on January 24, 2018 at 9:30am — 10 Comments
असाधारण आस
हवा की लहर का-सा
हलका स्पर्ष
कि मानो कमरे में तुम आई
मेरे कन्धे पर हलका-सा हाथ ...
छू कर मुझे, स्वपन-सृष्टि में
पुन: विलीन हो गई
कुछ कहा शायद
जो अनसुना रहा
या जो न कहा
वह मेरे खयालों ने सुना
कोई एक खयाल अधूरा
जो पूरा न हुआ
कण-कण काँप रहे तारों के
तिमिर-तल के तले
खयाल जो पूरा न हुआ
मुराद
बन कर रह गया,…
ContinueAdded by vijay nikore on January 24, 2018 at 9:03am — 25 Comments
"चलो चलो!जल्दी तैयार हो जाओ सब लोग यहाँ पंक्ति में खड़े हो जाओ।" सफ़ेद कुर्ते वाला चिल्ला रहा था। गाँव के चौपाल पर महिलाओं को इक्कठा किया जा रहा था। महिलाएं सजी -धजी पंक्ति में खड़ी होती जा रही थी। चौपाल पर कुछ नव-युवक और कुछ बुज़ुर्ग वर्ग बैठे हुए थे। बुज़ुर्गों के लिए तो जैसे यह आम बात थी। चौपाल पर भारतीय प्रजातंत्र की बातें हो रही थी। नव-युवक बुज़ुर्गों की बातें ध्यान से सुन रहे थे। किसी ने पूछा,"ये महिलाएं कहाँ जा रही हैं? इनको यह कुर्ते वाला क्यों लेने आया है? यह कौन है?" तरह- तरह की बातें हो…
ContinueAdded by KALPANA BHATT ('रौनक़') on January 24, 2018 at 8:12am — 8 Comments
विगत -गत
कल कोने में दुबके सहमे
डरे डरे कुछ लम्हे पाए
मैंने जा कर के सहलाया
झूठ सही पर जा बहलाया
कि मेरे होते न यूं डरो
परिचय दे ले बात करो
सुन कर पल ने ली अंगडाई
व्यंग बुझी सी हँसी थमाई
बोला कलंक से कलुषित हो
आत्मग्लानि से झुका हुआ था
विगत साल हूँ रुका हुआ था
उत्सुक था क्या नया करोगे
मुझे भेज जब नया…
ContinueAdded by amita tiwari on January 24, 2018 at 5:23am — 5 Comments
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