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गीता के १८ अध्याय

 

चारो ओर, खड़े है सैनिक

युद्ध में जीत दिलाने को

शोक करुणा से, अभिभूत है अर्जुन

देख, रक्त सम्बन्धी रिश्तेदारों को

खड़े हुए है अब कृष्णा

उसे शोक से मुक्त कराने को

देहान्तरं  की प्रक्रिया कैसी

संक्षेप में ये समझाने को

अजर अमर है जीवात्मा

स्मरण रखना इस ज्ञान को

खड़ा हो जा धनुष उठा

अपना धर्म निभाने को

मरे हुओ को मार डालना

जग में नाम कराने को

अपने पराये से मुहँ मोड़ लो

पाप पुण्य की चिंता…

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Added by PHOOL SINGH on December 3, 2012 at 5:42pm — 3 Comments

कहानी : तमाचा

  उस बस में जगह की वैसी ही किल्लत थी, जैसी मुंबई में पानी की है ! पर ये किल्लत मेरे पहुँचने के बाद हुई, इसलिए मुझे सीट मिल गई थी, और मै बैठा था ! अगला स्टॉपेज आया, यहाँ पर्याप्त लोग उतर गए, कुछ चढ़े भी, पर उतरने की मात्रा ज्यादा थी ! इसलिए अब बस में कुछ हल्कापन था ! बस में चढ़ने वालों में एक लड़की भी थी, जोकि मेरे पास आकर बोली, “थोड़ी जगह मिलेगी?” मै अपनी जगह से जरा सा खिसककर उसको जगह दिया ! उस लड़की के तत्काल बाद, याकि उसके पीछे ही एक लड़का भी बस में चढ़ा, उस लड़के के विषय में मुझे अजीब बात ये लगी…

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Added by पीयूष द्विवेदी भारत on December 3, 2012 at 11:00am — 13 Comments

हमारी फिर से मुलाकात हो नहीं सकती...

तमाम उम्र भी ये बात हो नहीं सकती,

हमारी फिर से मुलाकात हो नहीं सकती।



हर एक ख्वाब की ताबीर मिल सके हमको,

कोई भी ऐसी करामात हो नहीं सकती।



गुरूब हो चुका मेरे नसीब का सूरज,

अब और नूर की बरसात हो नहीं सकती।



मैं रात हूँ मुझे सूरज मिले भला कैसे,

हो शम्स पास तो फिर रात हो नहीं सकती।



बजाय हमको मनाने के कह गये है वो,

के छोडो हमसे इल्तजात हो नहीं सकती।



कोई गुनाह बहुत ही कबीर है मेरा,

कबूल जिसकी मुनाजात हो नहीं…

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Added by इमरान खान on December 2, 2012 at 10:30pm — 19 Comments

आपने सराहा / बड़ा मजा आया



21 2221 2221 2221 2



यह जुबाँ कहती जुबानी, जो जवानी ढाल पर ।

क्या करे शिकवा-शिकायत, खुश दिखे बदहाल पर ।|

आँख पर परदे पड़े, आँगन नहीं पहले दिखा -

नाचते थे उस समय जब रोज उनकी ताल पर ।।



कर बगावत हुश्न से जब इश्क अपने आप से -

थूक कर चलता बना बेखौफ माया जाल पर ।।

आँच चूल्हे में घटी घटते सिलिंडर देख कर

चाय काफी घट गई अब रोक ताजे माल पर ।।

वापसी मुश्किल तुम्हारी, तथ्य रविकर जानते

कौन किसकी इन्तजारी कर…

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Added by रविकर on December 2, 2012 at 9:24pm — 15 Comments


सदस्य टीम प्रबंधन
कुछ हाइकू /डॉ.प्राची

***********************

सीप में मोती.

पिय प्रेम हृदय.

जागृत ज्योति.

************************

दुख के शूल.

गुलदस्ता जीवन.

प्रेम के  फूल.

*************************

प्रेम शरण.

तिमिर में किरण.

गुरु चरण.

**************************

अभिन्न मित्र.

सुरम्य लय ताल.

बंध पवित्र.

***************************

है ज़रुरत.

अनकहा…

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Added by Dr.Prachi Singh on December 2, 2012 at 8:27pm — 24 Comments

पिकहा बाबा ----प्रेस वार्ता

पिकहा बाबा ----प्रेस वार्ता 

------------------------------
हे नाती बाबू एहर सुना देखा अंतरजाल आश्रम पर काफी भीड़ इकट्ठी होएला. का  माजरा  बा ?
सुना नाना जी कौनो चिंता न किये . ई सब चारों स्तंभ के लोग इकठ्ठा कियेला . आज तोहरा प्रेस वार्ता का आयोजन बा .
देखा नाती हमका चरका न देवा . २ महीना हो गईला हमरे अवतार का रोजे रोज दांव होएला. कौनो हमरे पास न आवेला. न जाने सब कहाँ बिजी बा . बड़ा मनेजमेंट गुरु बनेला. इतना मा तो हम पूरे  देश की सरकार…
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Added by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on December 2, 2012 at 5:58pm — 6 Comments

तीन दुर्मिल सवैया छंद

तीन दुर्मिल सवैया छंद :-

===================

(1)

चित चॊर  चकॊर मरॊर दई, झकझॊर दई  पँसुरी पँसुरी,

कस माखनचॊर गही बहियां, चटकाइ दई अँगुरी अँगुरी,…

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Added by कवि - राज बुन्दॆली on December 2, 2012 at 1:30pm — 14 Comments

ग़ज़ल

दिन कहीं छुप खो गया है, रात भी बाकी नहीं।

मुश्किलें हैं हर कदम पर, बात बन पाती नहीं।।

 …

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Added by अरुन 'अनन्त' on December 2, 2012 at 1:26pm — 14 Comments

हाइकु

ओ. बी. ओ. के सभी गुरुजनों, मित्रों एवं पाठकों को मेरा विन्रम प्रणाम. आज ओ. बी. ओ. पर काफी दिनों के बाद मेरा आना हुआ है. और ऐसा महसूस हो रहा है कि एक भूला-भटका राही अपने खुशहाल घर वापस आ गया, जहाँ बड़ों का आशीष है, स्नेह है, सहयोग है और कदम- 2 पर साथ है. हाइकु लिखने की पहली कोशिश है मालुम नहीं ठीक है या गलत, आशा करता हूँ कि आप सब मार्गदर्शन अवश्य करेंगे.



सादर

अरुन शर्मा

पराया धन

बढ़ाता परेशानी

मन में चिंता



बुरी नज़र

जलाती तिल…

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Added by अरुन 'अनन्त' on December 2, 2012 at 11:30am — 12 Comments


सदस्य कार्यकारिणी
सुनो क्या कहे अंतर्मन

रवि  किरणों  को कंटक सम  चुभता   

 नोच डाला  गिद्धों ने जो गिरी का बदन

करते हैं दोहन उसकी भुजाओं का 

कैसे दिखाए नदी शिव को अपना वदन

जब चाहा संहार किया काटी ग्रीवा   

आज चुपचाप बिलखते हैं अरण्य सघन

मासूम गंगा की छीन ली पावनता  

बहाते  गन्दगी धुलते  मैले कुचैले  वसन  

शून्य धरा शून्य अम्बर बचा क्या 

प्रदूषित जल ,पर्यावरण , प्रदूषित पवन 

क्या दोगे धरोहर अगली पीढ़ी को 

कुछ तो बचा लो ,सुनो क्या कहे …

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Added by rajesh kumari on December 2, 2012 at 10:34am — 10 Comments


सदस्य टीम प्रबंधन
जो हमें बरसों से हरदम चीट ही करते रहे

जो हमें बरसों से हरदम चीट ही करते रहे

मसअले दर मसअले वो ट्वीट ही करते रहे

 

खर्च करने के लिए इमदाद में आई रकम

पंचतारा होटलों में मीट ही करते रहे

 

जो हमें समझा किये कीड़े मकोडों की तरह

हम खुदा की तरह उनको…

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Added by Rana Pratap Singh on December 2, 2012 at 8:50am — 9 Comments

प्रेम ही इश्वर है.

प्रेम ही ज्ञान है प्रेम ही मान है, प्रेम ही राधिका श्याम भी प्रेम ही,…

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Added by Ashok Kumar Raktale on December 1, 2012 at 10:58pm — 8 Comments

ग़ज़ल : बरगदों से जियादा घना कौन है?

बहर : २१२ २१२ २१२ २१२

बरगदों से जियादा घना कौन है

किंतु इनके तले उग सका कौन है

 

मीन का तड़फड़ाना सभी देखते

झील का काँपना देखता कौन है

 

घर के बदले मिले खूबसूरत मकाँ

छोड़ता फिर जहाँ में भला कौन है

 

लाख हारा हूँ तब दिल की बेगम मिली

आओ देखूँ के अब हारता कौन है

 

प्रश्न इतना हसीं हो अगर सामने

तो फिर उत्तर में नो कर सका कौन है

Added by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on December 1, 2012 at 8:30pm — 13 Comments

ऐसा वरदान हम को ईश्वर दे

                                                      ग़ज़ल 

                                                   [1]    ऐसा  वरदान  हम  को  ईश्वर  दे  ! 
                                                           झोलियाँ  सब की  प्यार  भर  दे  !
                …
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Added by लतीफ़ ख़ान on December 1, 2012 at 6:28pm — 13 Comments


सदस्य टीम प्रबंधन
प्रतिभा (लघु कथा )/डॉ. प्राची

“हैलो क्षिप्रा, कैसी हो? मैं निशा बोल रही हूँ, मॉडर्न स्कूल की प्रिंसिपल! आज सभी स्कूलों के लिए आयोजित पोस्टर कम्पीटीशन में तुम जज हो न?”

ओहो! निशा! कैसी हो? कितने समय बाद याद किया? क्या तुम भी आ रही हो?क्षिप्रा नें पूछा.

“मेरे स्कूल के बच्चे प्रतिभागिता कर रहे हैं , बच्चों को मोटिवेट करने के लिए आना तो चाहती हूँ, पर मेरे स्कूल में भी एक समारोह है, अब देखो! अच्छा तुम कितने बजे तक पहुँचोगी?”निशा नें पूछा .

“मैं ग्यारह बजे तक पहुचूंगी, आ सको तो आना, मिलते हैं फिर.”…

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Added by Dr.Prachi Singh on December 1, 2012 at 6:00pm — 21 Comments

अपने ब्लॉग पर सर्वप्रथम पोस्ट ( रचना )माँ को समर्पित ...!!

                -1-

बीज रूप ॐ मिला,जग को आधार मिला,

शक्ति रूप में हुआ है,तेरा विस्तार माँ  !

हर युग में कपूत , देते रहे कष्ट धूप  ,

उनका भी हित…

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Added by भावना तिवारी on December 1, 2012 at 1:46pm — 11 Comments

जागरूक कर जाय

लूट व् भ्रष्टाचार से, भरा पड़ा अखबार,
ह्त्या, बलात्कार से, ख़बरों की भरमार ।
 
घोटालों की भरमार, जनता को सब भान
जाँच करा लिपापोती, सरकार की ये शान ।
 
सुर्खियों में रहना ही, नेता समझे शान,
चर्चा में हरदम रहे,  नेता उसको जान…
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Added by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on December 1, 2012 at 1:30pm — 14 Comments

लघुकथा: नपुंसक

“अनिता, यार जल्दी करो, ऐसे तो दोपहर का शो भी निकल जाएगा !” विजय अपनी पत्नी अनिता से बोला !

“बस अब सब्जी कट ही गई, इसे गैस चढ़ाकर तैयार हो जाऊंगी, टेंसन नॉट, समय पर पहुँच जाएंगे !” अनिता सब्जी काटते हुवे कह रही थी कि तभी, “आह...!” अचानक चाकू हाथ पर लग गया !

“अरे अनिता..... ध्यान कहाँ था..? छोड़ो ये सब्जी, चलो मै दवा लगा देता हूँ !” विजय चौकता हुवा बोला, और फिर जख्म पर दवा लगाकर पट्टी किया ! इसके बाद सब्जी काटकर गैस पर चढ़ा दिया ! इधर अनिता तैयार होने की कोशिश…

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Added by पीयूष द्विवेदी भारत on December 1, 2012 at 1:18pm — 20 Comments

प्रेम

प्रेम  नशा अरु प्रेम मजा सब, प्रेम कथा अरु प्रेम हि भक्ति व,

प्रेम हि भाव व प्रेम सुभाव व,प्रेम हि त्याग व प्रेम हि शक्ति व,…

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Added by Ashok Kumar Raktale on December 1, 2012 at 8:53am — 6 Comments

दो सवैये

मदिरा सवैया

मोषक राज किये यतियों पर ये कहना अतिरंजन है।
कौन बचा दुनिया भर में कह दे उसका चित कंचन है।
शोषक भी सब शोषित भी सब मौसम का परिवर्तन है।
कारण है निजता चढ़ के सिर नाच रही कर गर्जन है॥

दुर्मिल सवैया

अवलंबन हो निज का तब जीवन ये सुख की रसधार लगे।
प्रभुवंदन से मन पावन हो तरणी भव के उसपार लगे।
धरती सम हो उर तो नित "मैं कुछ दूँ सबको" यह भाव जगे।
अनुशीलन है बसता जिसमें उसमें नव के प्रति चाव जगे॥

Added by कुमार गौरव अजीतेन्दु on December 1, 2012 at 8:21am — 10 Comments

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