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तीन दुर्मिल सवैया छंद

तीन दुर्मिल सवैया छंद :-

===================

(1)

चित चॊर  चकॊर मरॊर दई, झकझॊर दई  पँसुरी पँसुरी,

कस माखनचॊर गही बहियां, चटकाइ दई अँगुरी अँगुरी,…

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Added by कवि - राज बुन्दॆली on December 2, 2012 at 1:30pm — 14 Comments

ग़ज़ल

दिन कहीं छुप खो गया है, रात भी बाकी नहीं।

मुश्किलें हैं हर कदम पर, बात बन पाती नहीं।।

 …

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Added by अरुन 'अनन्त' on December 2, 2012 at 1:26pm — 14 Comments

हाइकु

ओ. बी. ओ. के सभी गुरुजनों, मित्रों एवं पाठकों को मेरा विन्रम प्रणाम. आज ओ. बी. ओ. पर काफी दिनों के बाद मेरा आना हुआ है. और ऐसा महसूस हो रहा है कि एक भूला-भटका राही अपने खुशहाल घर वापस आ गया, जहाँ बड़ों का आशीष है, स्नेह है, सहयोग है और कदम- 2 पर साथ है. हाइकु लिखने की पहली कोशिश है मालुम नहीं ठीक है या गलत, आशा करता हूँ कि आप सब मार्गदर्शन अवश्य करेंगे.



सादर

अरुन शर्मा

पराया धन

बढ़ाता परेशानी

मन में चिंता



बुरी नज़र

जलाती तिल…

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Added by अरुन 'अनन्त' on December 2, 2012 at 11:30am — 12 Comments


सदस्य कार्यकारिणी
सुनो क्या कहे अंतर्मन

रवि  किरणों  को कंटक सम  चुभता   

 नोच डाला  गिद्धों ने जो गिरी का बदन

करते हैं दोहन उसकी भुजाओं का 

कैसे दिखाए नदी शिव को अपना वदन

जब चाहा संहार किया काटी ग्रीवा   

आज चुपचाप बिलखते हैं अरण्य सघन

मासूम गंगा की छीन ली पावनता  

बहाते  गन्दगी धुलते  मैले कुचैले  वसन  

शून्य धरा शून्य अम्बर बचा क्या 

प्रदूषित जल ,पर्यावरण , प्रदूषित पवन 

क्या दोगे धरोहर अगली पीढ़ी को 

कुछ तो बचा लो ,सुनो क्या कहे …

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Added by rajesh kumari on December 2, 2012 at 10:34am — 10 Comments


सदस्य टीम प्रबंधन
जो हमें बरसों से हरदम चीट ही करते रहे

जो हमें बरसों से हरदम चीट ही करते रहे

मसअले दर मसअले वो ट्वीट ही करते रहे

 

खर्च करने के लिए इमदाद में आई रकम

पंचतारा होटलों में मीट ही करते रहे

 

जो हमें समझा किये कीड़े मकोडों की तरह

हम खुदा की तरह उनको…

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Added by Rana Pratap Singh on December 2, 2012 at 8:50am — 9 Comments

प्रेम ही इश्वर है.

प्रेम ही ज्ञान है प्रेम ही मान है, प्रेम ही राधिका श्याम भी प्रेम ही,…

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Added by Ashok Kumar Raktale on December 1, 2012 at 10:58pm — 8 Comments

ग़ज़ल : बरगदों से जियादा घना कौन है?

बहर : २१२ २१२ २१२ २१२

बरगदों से जियादा घना कौन है

किंतु इनके तले उग सका कौन है

 

मीन का तड़फड़ाना सभी देखते

झील का काँपना देखता कौन है

 

घर के बदले मिले खूबसूरत मकाँ

छोड़ता फिर जहाँ में भला कौन है

 

लाख हारा हूँ तब दिल की बेगम मिली

आओ देखूँ के अब हारता कौन है

 

प्रश्न इतना हसीं हो अगर सामने

तो फिर उत्तर में नो कर सका कौन है

Added by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on December 1, 2012 at 8:30pm — 13 Comments

ऐसा वरदान हम को ईश्वर दे

                                                      ग़ज़ल 

                                                   [1]    ऐसा  वरदान  हम  को  ईश्वर  दे  ! 
                                                           झोलियाँ  सब की  प्यार  भर  दे  !
                …
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Added by लतीफ़ ख़ान on December 1, 2012 at 6:28pm — 13 Comments


सदस्य टीम प्रबंधन
प्रतिभा (लघु कथा )/डॉ. प्राची

“हैलो क्षिप्रा, कैसी हो? मैं निशा बोल रही हूँ, मॉडर्न स्कूल की प्रिंसिपल! आज सभी स्कूलों के लिए आयोजित पोस्टर कम्पीटीशन में तुम जज हो न?”

ओहो! निशा! कैसी हो? कितने समय बाद याद किया? क्या तुम भी आ रही हो?क्षिप्रा नें पूछा.

“मेरे स्कूल के बच्चे प्रतिभागिता कर रहे हैं , बच्चों को मोटिवेट करने के लिए आना तो चाहती हूँ, पर मेरे स्कूल में भी एक समारोह है, अब देखो! अच्छा तुम कितने बजे तक पहुँचोगी?”निशा नें पूछा .

“मैं ग्यारह बजे तक पहुचूंगी, आ सको तो आना, मिलते हैं फिर.”…

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Added by Dr.Prachi Singh on December 1, 2012 at 6:00pm — 21 Comments

अपने ब्लॉग पर सर्वप्रथम पोस्ट ( रचना )माँ को समर्पित ...!!

                -1-

बीज रूप ॐ मिला,जग को आधार मिला,

शक्ति रूप में हुआ है,तेरा विस्तार माँ  !

हर युग में कपूत , देते रहे कष्ट धूप  ,

उनका भी हित…

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Added by भावना तिवारी on December 1, 2012 at 1:46pm — 11 Comments

जागरूक कर जाय

लूट व् भ्रष्टाचार से, भरा पड़ा अखबार,
ह्त्या, बलात्कार से, ख़बरों की भरमार ।
 
घोटालों की भरमार, जनता को सब भान
जाँच करा लिपापोती, सरकार की ये शान ।
 
सुर्खियों में रहना ही, नेता समझे शान,
चर्चा में हरदम रहे,  नेता उसको जान…
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Added by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on December 1, 2012 at 1:30pm — 14 Comments

लघुकथा: नपुंसक

“अनिता, यार जल्दी करो, ऐसे तो दोपहर का शो भी निकल जाएगा !” विजय अपनी पत्नी अनिता से बोला !

“बस अब सब्जी कट ही गई, इसे गैस चढ़ाकर तैयार हो जाऊंगी, टेंसन नॉट, समय पर पहुँच जाएंगे !” अनिता सब्जी काटते हुवे कह रही थी कि तभी, “आह...!” अचानक चाकू हाथ पर लग गया !

“अरे अनिता..... ध्यान कहाँ था..? छोड़ो ये सब्जी, चलो मै दवा लगा देता हूँ !” विजय चौकता हुवा बोला, और फिर जख्म पर दवा लगाकर पट्टी किया ! इसके बाद सब्जी काटकर गैस पर चढ़ा दिया ! इधर अनिता तैयार होने की कोशिश…

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Added by पीयूष द्विवेदी भारत on December 1, 2012 at 1:18pm — 20 Comments

प्रेम

प्रेम  नशा अरु प्रेम मजा सब, प्रेम कथा अरु प्रेम हि भक्ति व,

प्रेम हि भाव व प्रेम सुभाव व,प्रेम हि त्याग व प्रेम हि शक्ति व,…

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Added by Ashok Kumar Raktale on December 1, 2012 at 8:53am — 6 Comments

दो सवैये

मदिरा सवैया

मोषक राज किये यतियों पर ये कहना अतिरंजन है।
कौन बचा दुनिया भर में कह दे उसका चित कंचन है।
शोषक भी सब शोषित भी सब मौसम का परिवर्तन है।
कारण है निजता चढ़ के सिर नाच रही कर गर्जन है॥

दुर्मिल सवैया

अवलंबन हो निज का तब जीवन ये सुख की रसधार लगे।
प्रभुवंदन से मन पावन हो तरणी भव के उसपार लगे।
धरती सम हो उर तो नित "मैं कुछ दूँ सबको" यह भाव जगे।
अनुशीलन है बसता जिसमें उसमें नव के प्रति चाव जगे॥

Added by कुमार गौरव अजीतेन्दु on December 1, 2012 at 8:21am — 10 Comments

दिल में खौफ़े खुदा भी लाया जाए

दिल में खौफ़े खुदा भी लाया जाए

अच्छे बुरे का फर्क जाना जाए

कब्ल इसके उंगली उठाओ सब पर

अपने दिल को भी तो खंगाला जाए

यूँ तो उनकी की है फजीहत सबने

प्यार उनसे कभी जताया जाए

निकले बाहर गरीबों की आवाज़ें

उनको भी तो कभी सुन लिया जाए

पहले इसके बिगड़ जायें हालात

जुल्मों को वक़्त रहते रोका जाए 

Added by नादिर ख़ान on November 30, 2012 at 10:35pm — 4 Comments

आम आदमी

आसमाँ के देखता है ख्वाब आम आदमी

चाहता है माहो-आफताब आम आदमी



खुद चुभन सहे मगर करे नहीं वो उफ़ तलक

कायनाते खार में गुलाब आम आदमी



रात दिन गुजारता है धूप छाँव भूल कर

काम कर रहा है बेहिसाब आम आदमी…



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Added by SANDEEP KUMAR PATEL on November 30, 2012 at 3:30pm — 8 Comments


सदस्य टीम प्रबंधन
डमी

“हैलो पूर्वा, शाम साढ़े सात बजे तक तैयार रहना, आज मिस्टर अग्रवाल की बिटिया का महिला संगीत है और रात को डिनर के लिए चलना है” अक्षय नें अपनी पत्नी से फोन पर कहा. पूर्वा नें हामी भरी और पार्टी के कपडे निकालने के लिए अल्मारी खोली. उफ़! कितनी भारी भारी साड़ियाँ, पर आज तो कुछ सौम्य सा पहनने का मन है, सोचते हुए पूर्वा नें पाकिस्तानी कढाई का एक बेहद खूबसूरत सूट निकला और तैयार होने लगी.

आँखों का हल्का सा मेकअप, आई लाईनर, काजल, बालों का ताजगी भरा स्टाईल, चन्दन का इत्र, छोटी सी बिंदी, हल्की सी…

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Added by Dr.Prachi Singh on November 29, 2012 at 9:58am — 27 Comments

सस्ता के चक्कर में !

घरनी गाड़ी में बैठाया , चली ट्रेन पकड़ी रफ्तार ।

प्लेटफार्म आस पास घर है , किसी बात की ना दरकार ।

वापस गया काम पर अपने , पहुँचेगी अकेल इस बार ।

जनरल डिब्बा भीड़ भारी, गर्मी से थे सब लाचार ।

बाहर हवा अंदर पसीना , सीट की चाहत बेकरार ।

मुंबई से इटारसी रुकी , केले वालों की भरमार ।

सस्ता खोजते चली आगे , केला मिला बहुत बेकार ।

दुःखी मन फिर गाड़ी भूली , बैठी गाड़ी में मनमार ।

झोला झाकड़ लगी खोजने , लगी पूछने हो लाचार ।

अनपढ़ को मिले तमिल यात्री , जाने कैसे बात… Continue

Added by Shyam Narain Verma on November 28, 2012 at 1:11pm — 4 Comments

छन्न पकैया छन्न पकैया

छन्न पकैया छन्न पकैया, सॉरी भैया धोनी।

स्पिन ट्रैक से क्या होता है, टलती थोड़े होनी॥

छन्न पकैया छन्न पकैया, भाग देख लो फूटे।

अपने सौवें ही दंगल में, वीरू दादा टूटे॥

छन्न पकैया छन्न पकैया, थोड़ा चले पुजारा।

लदफद होती सेना को जो, देते रहे सहारा॥

छन्न पकैया छन्न पकैया, क्या करते हो सच्चू।

अपने ही घर में अपनी क्या, पिटवाओगे बच्चू॥

छन्न पकैया छन्न पकैया, अन्ना दीखे भज्जी।

कुक पूरे सरकारी बन के, उड़ा रहे थे धज्जी॥

छन्न पकैया छन्न पकैया, दिखी…

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Added by कुमार गौरव अजीतेन्दु on November 27, 2012 at 7:13pm — 12 Comments

आम आदमी पार्टी

आम आदमी पार्टी 
आज तक हम खास थे अब आम हो गए 
सब पार्टियों को छोड़ 'आम' के साथ हो गए 
सबको परख चुके अब इनको भी परखेंगे 
ख्वावों की वंदिशों से हम आज़ाद हो गए 
कांग्रेस परखी,भाजपा परखी परखी सपा,बासपा
आम आदमी पार्टी भी परख लें पूर्ण होगी परिक्रमा 
या तो लुटिया डूबेगी या तर जाएँगे सारे
हमारे खज़ाने से क्या जाएगा अगर गए वो हारे 
जीत गए गर आम आदमी तो हो जाएँगे…
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Added by Deepak Sharma Kuluvi on November 27, 2012 at 2:45pm — 5 Comments

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