For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

All Blog Posts

अच्छा नहीं होता गुस्सा - जवाहर

अच्छा नहीं होता गुस्सा

पर हो जाता है

मन में गुस्सा

जब कभी

मन माफिक नहीं होता

कोई भी काम

नहीं मानते

अपने ही कोई बात

फिर क्या करें ?

हो जाएँ मौन ?

फिर समझ पायेगा कौन?

आप सहमत हैं या असहमत

क्योंकि

लोग तो यही कहेंगे

मौनं स्वीकृति लक्षणं

मन में रखने से कोई बात

हो जाता नहीं तनाव ?

तनाव और गुस्सा

दोनों है हानिकारक

तनाव खुद का करता नुक्सान

गुस्सा खुद के…

Continue

Added by JAWAHAR LAL SINGH on November 27, 2014 at 10:20am — 18 Comments

मरघट का जिन्न (कहानी)

दो मित्र थे, |शेरबहादुर और श्रवणकुमार | नाम के अनुसार शेरबहादुर बहुत वीर और निर्भीक थे ,अन्धविश्वास से अछूते ,बिना विश्लेषण किसी घटना पर यकीन नहीं करते |दुसरे शब्दों में पुरे जासूस थे |बाल की खाल निकालना और अपनी और दूसरों की फजीहत करना उनका शगल था |श्रवणकुमार नाम के अनुसार सुनने की विशेष योग्यता रखते थे |एक तरह से पत्रकार थे ,मजाल है गाँव की कोई कानाफूसी उनके कानों से गुजरे बिना आगे बढ़ जाए |तीन में तेरह जोड़ना उनकी आदत थी इसलिए नारदमुनि का उपनाम उन्हें मिला हुआ था |पक्के अन्धविश्वासी और डरपोक…

Continue

Added by somesh kumar on November 27, 2014 at 10:00am — 7 Comments

पैसों की बात (लघुकथा)

आज विधानसभा में मामला बहुत गर्म हो गया था। नेता विपक्ष के तो कपड़े तक फाड़ दिए। उनको धक्का-मुक्की में दो-चार थप्पड़-लात भी जड़ दिए गए।

"नेता जी, कल हमें आपका समर्थन चाहिए।"- मंत्री जी का फोन आया।

"कैसा समर्थन! हम कोई समर्थन-वमर्थन नहीं देंगें। कपड़े फाड़ने तक तो ठीक था लेकिन हमारी पिटाई भी हुई है।"- नेता जी ने नाराज होते हुए कहा।

"आपकी नाराजगी जायज है लेकिन कल अगर आपका समर्थन ना मिला तो हम सब की तनख्वाह ना बढ़ पाएगी।"

"अच्छा, पैसों की बात है! तो ठीक है हम मान जाते हैं…

Continue

Added by विनोद खनगवाल on November 27, 2014 at 9:30am — 19 Comments

गजल - "एक तरफा प्यार की ये बेबसी मत पूछिये"

2122 2122 2122 212



एक तरफा प्यार की ये बेबसी मत पूछिये ।

रात दिन रहती है कैसी बेखुदी मत पूछिये ।



अब खुशी का साथ छूटे एक अरसा हो गया ,

किस कदर गम से हुयी है दोस्ती मत पूछिये ।



बोलती आँखेँ हैँ मेरी और लब खामोश हैँ ,

किस तरह आवाज दिल की है दबी मत पूछिये ।



लाख रोयेँ लाख तडपेँ पर भला किस से कहेँ ,

वो दिखायेँ हमको कैसी बेरुखी मत पूछिये ।



वाह वाही कीजिये गर दिल छुये मेरी गज़ल ,

कैसे हम करने लगे हैँ शायरी मत पूछिये… Continue

Added by Neeraj Nishchal on November 27, 2014 at 3:06am — 26 Comments

तुम्हारा घोंसला

जैसे तुमने

तिनका तिनका जोड़ कर

धीरे-धीरे, बनाया अपना घोंसला

वैसे ही

तुमको देख-देख कर

बढ़ता रहा, मेरा भी हौसला

तुम एक- एक दाना चुग कर लायीं

अपने बच्चों को भोजन कराया

मैंने भी, वेसे ही खेतों में फसल लगायीं

दिन रात श्रम कर अन्न उगाया

धीरे धीरे रेत,बजरी ,सीमेंट ले आया

एक- एक ईंट जोड़कर

अपने सपनों का महल बनाया

जिस तरह तुमने अपने बच्चों को

उनके पैरों पर खड़ा किया

उड़ना सिखाया , उड़ा दिया, विदा किया…

Continue

Added by Hari Prakash Dubey on November 26, 2014 at 10:30pm — 28 Comments

मन-भावक इतिहास - डॉo विजय शंकर

अच्छा लगता है
पुरखों को याद करना ,
उनकीं कथाएं , उनकीं उब्लब्धियाँ ,
सुनना और बयान करना ॥
एक गौरवपूर्ण अतीत और
उसकी सुनहरी स्मृतियाँ ॥
और , सुन्दर सपने देखना ,
फिर कोई भगीरथ आएगा
गंगा क्या , इस बार स्वर्ग ही
धरती पर उतार लाएगा ॥
अभी से दलाल या ठेकेदार
ढूँढ लो , उसके संपर्क में रहो,
स्वर्ग का टिकट वही न दिलाएगा ॥


मौलिक एवं अप्रकाशित

Added by Dr. Vijai Shanker on November 26, 2014 at 10:30pm — 16 Comments

बड़ी सीख (लघुकथा )

"यार मैं एक लड़की से प्यार करता हूँ "-सुजीत ने अपने दोस्त विपिन से कहा |

"प्यार, यार आजकल तो प्यार का ज़माना कहाँ हैं,बस मजे ले और उसे छोड़ दे"-विपिन ने उसे समझाते हुए कहा | 

"पर ,यार  मैं उस से प्यार करता हूँ,मैं किसी के साथ धोका नही कर सकता हूँ "-सुजीत ने उदास होते हुए कहा | विपिन -"यार  इसी में तो मजा है ,खैर कौन है वो लड़की मैं भी तो जानूँ "

सुजीत-"तेरी बहन ,यार "

इतना सुन कर विपिन कुछ न बोल सका | उसे एक बड़ी सीख मिल चुकी थी |

"मौलिक व…

Continue

Added by maharshi tripathi on November 26, 2014 at 6:05pm — 13 Comments

ग़ज़ल: लौ मचलती रही.

साँस चलती रही, आस पलती रही.

रात ढलने तलक, लौ मचलती रही.

 

वादियों में दिखी, ओस-बूँदें सहर,

चाँदनी रात भर, आँख मलती रही.

 

कुछ हसीं चाहतों की तमन्ना लिए,

जिन्दगी आँसुओं से बहलती रही.

 

मैं समझता हुयी उम्र पूरी मगर,

मौत जाने किधर को टहलती रही.

 

इक उगा था कभी चाँद मेरे फ़लक,

जुगनुओं को यही बात खलती रही.

 

वो सुनी थी कभी बांसुरी की सदा,

ज़िंदगी रागनी में बदलती रही.

 

मैं…

Continue

Added by harivallabh sharma on November 26, 2014 at 2:00pm — 23 Comments


मुख्य प्रबंधक
अतुकान्त कविता : पगली (गणेश जी बागी)

अतुकान्त कविता : पगली

विवाहिता या परित्यक्तता

अबला या सबला

नही पता .......

पता है तो बस इतना कि

वो एक नारी है ।



साथ में लिए थे फेरे

फेरों के साथ

वचन निभाने के वादे

किन्तु .......

उन्हे निभाना है राष्ट्र धर्म

और इसे ……

नारी धर्म

पगली !!



उनकी सफलता के लिए

व्रत, उपवास, मनौती

मंदिरों के चौखटों पर

पटकती माथा

और खुश हो…

Continue

Added by Er. Ganesh Jee "Bagi" on November 26, 2014 at 10:30am — 48 Comments

माॅर्निंग अखबार (लघुकथा)

"अनुपमा, इस पुलिस की नौकरी की तनख्वाह से तो घर चलाना बहुत मुश्किल हो रहा है। बच्चे भी बड़े हो रहे हैं। कैसे इनको हम उच्च शिक्षा और सही परवरिश दे पाएंगे?"

"आप ठीक कह रहे हो लेकिन इसका समाधान भी तो नहीं है।"

"समाधान तो है अगर तुम साथ दो तो.....।"

"पहले बताओ तो! क्या समाधान है?"

"तुम्हें बस एक बार मंत्री जी के पास माॅर्निंग का अखबार लेकर जाना होगा। फिर मेरा ट्रांसफर ऐसी जगह हो जाएगा जहाँ तनख्वाह से कई गुना ऊपर की कमाई होगी।"

अनुपमा की माॅर्निंग अखबार की सहमति ने परिवार…

Continue

Added by विनोद खनगवाल on November 26, 2014 at 9:39am — 16 Comments

तुम मेरे कौन हो

तुम मेरे कौन हो?

तुम मेरे कौन हो ?

उषा सिंदूरी या चाँदनी रात

उषा जिससे ज़िन्दगी का अन्धेरा जाता है

जिसके स्पर्श से जीवन लहराता है

खिल उठते हैं जिसके दर्शन से बेल-बूटे…

Continue

Added by somesh kumar on November 25, 2014 at 7:30pm — 10 Comments

गुदगुदी

डाक्टर कहते है

स्वस्थ आनंदित जीवन के लिए

हंसो

ठठाकर हंसो , खिलखिलाकर हंसो

आकाश गुंजा दो ,अट्टहास करो

तभी तो

शरीर से झरेगा

ऐंडोर्फिन रसायन

जो हृदय को रखेगा मजबूत

नष्ट होंगे बैक्टीरिया, वायरस

सशक्त होगा प्रतिरक्षातंत्र

 

 

पर हंसू कैसे ?

बचपन में कोई फिसल कर गिरता

कीचड में सनता 

या चिडिया करती बीट

तब हम ताली बजा कर हँसते

लोट-पोट हो जाते

मै और मेरी बहन हम, सब…

Continue

Added by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on November 25, 2014 at 5:30pm — 24 Comments

साँझ होते ही सो जाता हूँ अतीत की चादर ओढ़ कर,

साँझ होते ही

सो जाता हूँ

अतीत की चादर

ओढ़ कर,

बेसुध

न जाने कब

चादर विरल होने लगती है

इतनी विरल कि

चादर तब्दील हो जाती है

एक खूबसूरत बाग़ में

जिसमे तुम मुस्कुराती हो

फूल बन कर

और मै मंडराता हूँ

भँवरे सा

तुम इठलाती,

इतराती रात भर,

तो कभी ऐसा भी हुआ

जब मै बृक्ष बन उग आता हूँ

और तुम, बेल बन लिपट जाती हो

मै हँसता हूँ तुम मुस्कुराती हो

फिर तुम चाँद बन जाती हो

और मै - चकोर

और मै लगाने लगता…

Continue

Added by MUKESH SRIVASTAVA on November 25, 2014 at 5:00pm — 9 Comments

पानी और प्यास

पानी हमको पीना है

मिनरल या फिर फ़िल्टर

साफ़ पानी सुरक्षित पानी

खुद का बर्तन खुद का पानी||

 

पानी बड़ा या प्यास ?

विषय है ये बेहद ही ख़ास

प्यास है एक स्वाभाविक सी क्रिया

प्यास सभी को जगती है||

 

कभी मिल जाता पानी तो

कभी सूखे से तपती है

प्यास है तन के प्यास है मन की

प्यास आँखों की प्यास कुछ पाने की||

 

पानी चाहिए मीठा मीठा

हो तो फ़िल्टर या फिर मिनरल

प्यासा जब मरने को…

Continue

Added by sarita panthi on November 25, 2014 at 9:42am — 7 Comments

ग़ज़ल-----मैं समन्दर को आँखों में भरके चला हूँ

212 212 212 2122

-------------------------------------------

मुद्दतों से पलक बन्द करके चला हूँ

मैं समन्दर को आँखों में भरके चला हूँ

....

जा बसा पत्थरों में हुआ वो भी पत्थर

मैं फकीरों के जैसे बे-घरके चला हूँ

....

कैसे कहदूँ मेरे यार को बेव़फा मैं

जिसकी तस्वीर को दिल में धरके चला हूँ

....

ले गया वो मेरी साँस भी साथ अपने

जिन्दगी भर बिना साँस मरके चला हूँ

....

ले न जाये छुड़ाके कहीं याद अपनी

इसलिये उम्र भर ही मैं ड़रके चला…

Continue

Added by umesh katara on November 25, 2014 at 8:18am — 22 Comments

आजकल हँसता हंसाता कौन है

२१२२...२१२२...२१२.

फाइलातुन फाइलातुन फाइलुन ..

=====================

आजकल हँसता हंसाता कौन है

गम छुपा के मुस्कराता कौन है !!

हम ज़माने पे यकीं कैसे करें,

आज कल सच-सच बताता कौन है.!!

उलझनों में भी हैं कुछ नादानियाँ,

याद बचपन की भुलाता कौन है !!

जब मिलूँगा तो शिकायत भी करू

इसलिए मुझको बुलाता कौन है!!

दो घडी की बात है ये ज़िन्दगी,

ज़िन्दगी भर को निभाता कौन…

Continue

Added by Alok Mittal on November 25, 2014 at 8:13am — 27 Comments

बेड़ा गर्क कराती क्यों हो

ठूस ठूस कर खाती क्यों हो।
मोटी हो शर्माती क्यों हो।।

एक मासूम सी पत्नी हूँ।
यूँ चुटकुला सुनाती क्यों हो।।

बच्चे डर जाते है हरदम।
इतना गन्दा गाती क्यों हो।।

मुखड़े पर लीपा पोती कर।
मुझको रोज डराती क्यों हो।

आती नहीं बोलनी इंग्लिश।
बेड़ा गर्क कराती क्यों हो।।

खुद खाने के फाकें फिर भी।
भाई को बुलवाती क्यों हो।।
**********************
-राम शिरोमणि पाठक
मौलिक/अप्रकाशित

Added by ram shiromani pathak on November 25, 2014 at 1:30am — 6 Comments

एक ही सच्चा किरदार

एक ही सच्चा किरदार।
बाकी सब किरायेदार।।

खुद को इंशा कहता है।
उसके गम भी ले उधार।।

कितने भूंखे मरते हैं।
कभी तो पढ़ ले अखबार।।

बड़ा अज़ीब बन्दा है वो।
दुश्मनों से करता प्यार।।

जबसे प्यार कर लिया है ।।
लोग कहते हैं बीमार।।

तुझको फिर से नज़र लगी।
जाके कभी नज़र उतार।।
*********************
-राम शिरोमणि पाठक
मौलिक/अप्रकाशित

Added by ram shiromani pathak on November 25, 2014 at 12:57am — 26 Comments

जाते हो तो जाओ आप

जाते हो तो जाओ आप।
अब ना और रुलाओ आप।

मुझे जीने का शौक नहीं।
अपनी खैर बताओ आप।।

अंदर कोई सो गया है।
आके उसे जगाओ आप।।

हँसना नहीं आता हो गर।
आकर कभी रुलाओ आप।।

आपका कुछ छूट गया है।
जो भी है ले जाओ आप।।
********************
-राम शिरोमणि पाठक
मौलिक/अप्रकाशित

Added by ram shiromani pathak on November 25, 2014 at 12:46am — 6 Comments

उच्छवास

अब  हद हो गयी आजमाने की,
मेरे बुलाने की, तेरे न आने की।
रहे छुपाते अपनी-अपनी कबसे,

पर्दाशुदा हुआ नजर ज़माने की।
बेदम पड़ी ख्वाहिशें भी देख लो,
तेरी  पाने की,अपनी लुटाने की।

कितना कहें शेर? फिजां तेरे रुत

में आने की,मेरे कसम निभाने की।
अपनी खुदी खुद मिटा माँगता मैं
कुछ तेरी नेमतें गले लगाने की।

@मनन (मौलिक व अप्रकाशित)

 

Added by Manan Kumar singh on November 24, 2014 at 10:33pm — 7 Comments

Monthly Archives

2026

2025

2024

2023

2022

2021

2020

2019

2018

2017

2016

2015

2014

2013

2012

2011

2010

1999

1970

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"दुःखद"
Sep 29
Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
Sep 24
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Sep 22
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Sep 19
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Sep 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Sep 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Sep 17
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11
जगदानन्द झा 'मनु' replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय, प्रणाम संगहि संग हार्दिक धन्यवाद। अपनेक मार्गदर्शन पाबि बहुत बेसी मोटिवेशन आ सीखक मिलैए…"
Sep 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
Aug 18
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Aug 15
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
Aug 15

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service