For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

June 2013 Blog Posts (217)

एक बंजर व्योम तो हम पर तना है !

अपरिचय, संवेदना है, भावना है ,

उसे क्या जो पुष्प से पत्थर बना है !



मिले उनको हर्ष के बादल घनेरे ,

एक बंजर-व्योम तो हम पर तना है !



चित्र है उत्कीर्ण कोई चित्त पर ,

ठहर जाती जहां जाकर कल्पना है !



सूर्य की ये रश्मियाँ बंधक बनीं हैं 

एक अंधी कोठरी मे ठहरना है !



रास्ते अब स्वयं ही थकने लगे हैं 

पूछता गंतव्य मन क्यों अनमना है ?



_______________________प्रो. विश्वम्भर…

Continue

Added by प्रो. विश्वम्भर शुक्ल on June 30, 2013 at 10:57pm — 22 Comments

कैलकुलेटर

कैलकुलेटर

‘’सुनती हो बेगम! सोने का दाम मार्केट में बहुत गिर गया है’’

‘’तो मैं क्या करूँ मियाँ?’’

‘’अजी बेगम जल्दी से तैयार हो जाओ ,मार्केट चलते हैं आज तुम्हें सोने से लाद दूँगा’’

‘’क्या.....?’’ राधा मुँह बाये हाथ में करछी पकड़े पति के पास आयी जो बरामदे में बैठा अखबार पढ़ रहा था.

‘’क्या कहा आपने? मुझे सोने से लादोगे? एक जोड़े कंगन के लिये तो सारी जिंदगी तरस गयी.’’ इतना कहकर राधा अपनी नाराज़गी जताती हुई दुबारा रसोईघर में चली गयी.

महिपाल पत्नी को मनाने के लिये उसके…

Continue

Added by coontee mukerji on June 30, 2013 at 9:24pm — 16 Comments

जुदाई

जब तू था तो सूनापन नही था

इच्छा थी पर अरमान नही था 

अश्कों में भिगो लिया दामन मैंने 

प्यासी रहूंगी फिर भी सोचा नही था...

तेरी यादों से दिन बनते थे 

और जुदाई से काली रातें

तेरे प्यार से ज़िन्दगी बनी थी

और बेवफाई से उखड़ी सांसे...

तेरे गम से मेरा गम जुदा कब था

तू नही समझा बस यही गम था

छीन लिया समय से पहले रब ने

जुदाई का गम क्या पहले कम था...

"मौलिक व…

Continue

Added by Aarti Sharma on June 30, 2013 at 7:30pm — 16 Comments

दोहे

जल बिन सब बेजान हैं ,धरती कहे पुकार

बरखा देखो आ गई ,लेकर सुखद फुहार

घाव धरा के भर गए , ग्रीष्म हो गया लुप्त

जल फैला चहुँ ओर है ,धरा हो गई तृप्त



बरखा लेकर आ गई ,राहत और सुकून

दिल्ली भी अब बन गई ,देख देहरादून…

Continue

Added by Sarita Bhatia on June 30, 2013 at 6:00pm — 9 Comments

तीन मुक्तक - लक्ष्मण लडीवाला

मुक्तक 
एकाकीपन सांझ का, चंचल मन भटकाय
इस पड़ाव पर उम्र के,बनता कौन सहाय 
सुन्दर हर पल वह घडी,अनुपम सा उपहार 

साँस साँस की हर लड़ी,मुग्ध मुझे करजाय |


(2)
 
बिगड़ न जावे और ये, जीवन के हालात 

वर्षा जल भूजल करे, तभी बनेगी बात |

हरियाली वसुधा रहे, नदियों में जलधार,

पनघट…
Continue

Added by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on June 30, 2013 at 12:30pm — 15 Comments

देखो चुपके से रात चली है [नज़्म]

चाँद सितारों संग, महकी बहारों संग,

देखो चुपके से रात चली है ।

गहरी खामोशी में, ऐसी मदहोशी में ,

दिल में फिर तेरी बात चली है ।

चाँद का जब दीदार करूँ तो ।

दिल के झरोखे से प्यार करूँ तो ।

यादों की महकी बारात चली है ।

पूछो ना काटी कैसे तनहाई ।

याद जो आये वो तेरी जुदाई ।

आँखों से मेरे बरसात चली है ।

थाम के बाहें बाहों में ऐसे ।

चले दो राही राहों में ऐसे ।

जैसे संग सारी कायनात चली है ।

प्यार…

Continue

Added by Neeraj Mishra "प्रेम" on June 30, 2013 at 12:00pm — 15 Comments

ग़ज़ल

वेदियों सा तप्त मन अपने लिए

कर रहा सारे हवन अपने लिए



अपनेपन को छोड़ मतलब साधते

दोस्त का होता चयन अपने लिए



मूढ़ मन में मैल ले गंगा नहा

कर रहा है आचमन अपने लिए



तितलियों को हांक कर भंवरे कहें

फूल कलियाँ हैं चमन अपने लिए



देश की है फ़िक्र किस इंसान को

हर कहीं चिंतन मनन अपने लिए



हिंदियों की नाक ऊँची कर रहा

पश्चिमी का ला चलन अपने लिए



आँख दिखलाता है वो माँ बाप को

संस्कृति का कर हनन अपने लिए…

Continue

Added by SANDEEP KUMAR PATEL on June 30, 2013 at 10:30am — 6 Comments

सिर्फ तुम्हारे लिए

तेरे अधरों की मुस्कान,

भरती मेरे तन में प्राण.

जीवन की ऊर्जा हो तुम,

साँसों की सरगम की तान.

मैं सीप तुम मेरा मोती ,

मैं दीपक तुम मेरी ज्योति.

कभी पूर्ण न मैं हो पाता ,

संग मेरे जो…

Continue

Added by Pradeep Bahuguna Darpan on June 30, 2013 at 9:00am — 20 Comments

रविवार ....

कल रविवार था ... 

फिर उदास, सूनी शाम थी ... 

देख रहा था

हल्की बारिश जो 

सब कुछ भिगो रही थी 

सामने पंछी रोशनदान 

मे छिपने का प्रयास कर रहे थे 

हवाएँ तेज चल रहीं थी 

जो आँधी, रुकने के बाद भी 

आँधी चलने का एहसास करा रही थी 

मैं खड़ा अपने आपको खोज रहा था 

सब कुछ फैला हुआ, तितर बितर था 

अतीत के पन्ने अब भी 

हवा मे तैर रहे थे 

कुछ गीले, कुछ फटे 

कुछ बिखरे पड़े थे 

सब कुछ ठहर गया…

Continue

Added by Amod Kumar Srivastava on June 30, 2013 at 8:00am — 10 Comments

गीतिका ~

शौक है , अजीब लगता है,

दर्द कोई  रकीब लगता है !

रोज तरसा है मुस्कुराने को 

चेहरे-चेहरा गरीब लगता है !

ये गम हैं कि छोड़ते ही…

Continue

Added by प्रो. विश्वम्भर शुक्ल on June 29, 2013 at 7:30pm — 11 Comments

ग़ज़ल - यूं ही आने वाला वक्त बदलता नहीं|

वैसे तो वक्त किसी के लिए ठहरता नहीं,

उसे रोके बिना दिल हमारा भी भरता नहीं|

आने वाले पलों को खुशामदीद आज करलें

यूं ही तो आने वाला वक्त बदलता नहीं|

क़दमों की गर्मी से पहाड़ को बना दें पानी

रंगीनियों में तो बर्फ भी पिघलता नहीं|…

Continue

Added by Chandresh Kumar Chhatlani on June 29, 2013 at 6:00pm — 10 Comments

****तुम हो आँखों में ऐसा लगता क्यूँ है****

तुम हो ख्वाबों में ऐसा लगता क्यूँ है

अब हो यादो…

Continue

Added by Atendra Kumar Singh "Ravi" on June 29, 2013 at 2:00pm — 4 Comments

पीड़ा

मैंने देखा है ज़िन्दगी को पास से 

मैंने सुना है  उन आंसुओं की  हर एक अवाज  को 
जो चुप चाप मन में घोर विषाद लिए निकल रहे हैं 
मैंने देखा है एक रोटी के लिए बिलखते मासूमों को,
जिन्होंने ज़िन्दगी का प्रथम चरण भी नहीं देखा 
जिन्हें मा कहना भी ढंग से नहीं आता,
सच बहुत दुःख होता है इनको देखकर,
क्यों ऐसा होता है ?
 
क्या…
Continue

Added by Devendra Pandey on June 29, 2013 at 12:29pm — 12 Comments

"गज़ल-ए-जिंदगी"

मुझसे मेरी हयात ऐसी दिल्लगी करे

मंजिल का मेरी फैसला आवारगी करे



तुझसे भी हैं ज़रूरी दुनिया में और काम

सब को भुला के कौन तेरी बंदगी करे



बेपीर बेमुरव्वत मुझसे न पूंछ कुछ भी

मेरा बयान-ए-हाल ये बेचारगी करे



मुद्दत से थोड़े ख्वाब सहेजे हैं आँख में

की इंतज़ार-ए-आब जैसे तिश्नगी करे



हर रोज सबसे छुप कर किसकी हैं ये दुआएं

शामों में आफताब सी ताबिन्दगी करे



रोऊँ तो ये हंसाए, हँसता हूँ तो रुलाए

मुझको यूँ परेशान मेरी जिंदगी… Continue

Added by Anurag Singh "rishi" on June 29, 2013 at 12:13pm — 13 Comments

मेरा मन

जाने क्यो उदास है

मेरा मन

जाने क्यों निराश है

मेरा मन

जाने क्यों हताश है

मेरा मन

अधरों से फूटते नही बोल

घुटन सी होती है इस मन में

चुभन सी होती है इस तन में

चंचलता से भरा मेरा मन

जाने क्यों उदास है

लगता है ऐसे कोई नही

अपना आस-पास है

अपनों को खोजता ये मन

लिए तड़पन, लिए लगन

आँसूओं की धारा में

गुम-सुम हुआ मेरा मन

मौलिक व अप्रकाशित

Added by Pragya Srivastava on June 29, 2013 at 11:13am — 15 Comments

होवे हृदयाघात यदि, नाड़ी में अवरोध-

होवे हृदयाघात यदि, नाड़ी में अवरोध ।

पर नदियाँ बाँधी गईं, बिना यथोचित शोध ।

बिना यथोचित शोध, इड़ा पिंगला सुषुम्ना ।

रहे त्रिसोता बाँध, होय क्यों जीवन गुम ना ।

अंधाधुंध विकास, खड़ी प्रायश्चित रोवे ।

भौतिक सुख की ललक, तबाही निश्चित होवे ।।

त्रिसोता = गंगा जी

मौलिक / अप्रकाशित

Added by रविकर on June 29, 2013 at 10:50am — 9 Comments

रिश्ता

रिश्ता.... 

ख्वाब नहीं है 

ये मेरा ख्याल नहीं है 

ये तेरा सवाल नहीं है 

रिश्ता ..... 

किसी  के लिए चाँद है …

Continue

Added by Amod Kumar Srivastava on June 28, 2013 at 10:00pm — 17 Comments

नेता रह मत भूल में, मत-रहमत अनमोल

मत की कीमत मत लगा, जब विपदा आसन्न ।

आहत राहत चाहते, दे मुट्ठी भर अन्न ॥

आहत राहत-नीति से, रह रह रहा कराह |

अधिकारी सत्ता-तहत, रिश्वत रहे उगाह ॥

घोर-विपत आसन्न है, सकल देश है सन्न ।

सहमत क्यूँ नेता नहीं, सारा क्षेत्र विपन्न ॥

नेता रह मत भूल में, मत-रहमत अनमोल |

ले जहमत मतलब बिना, मत शामत से तोल ॥

मौलिक / अप्रकाशित

Added by रविकर on June 28, 2013 at 4:44pm — 8 Comments

न आये लौट के

रूठकर गयी थी सुबह मुझसे 

रात का दर्पण दिखा कर 
फिर लौट आयी है सुबह !!.
.
रूठकर गयी थी बहार मुझसे 
पतझड के पत्ते उड़ा कर 
फिर लौट आयी है फिजा !!…
Continue

Added by Sumit Naithani on June 28, 2013 at 3:30pm — 16 Comments

बारिश की बूंदे

प्यासी धरती पर 

बरसती थी जब 
बारिश की बूंदे 
सोंधी - सोंधी सी खुशबु से 
महक उठता था ......
मेरे घर का आँगन .....
खिल उठते थे बगीचे में 
लगे पेड़ - पोधे .....
और खिल उठता था 
हम सब का मन ......
प्यासी धरती पर 
बरसती थी जब 
बारिश की बूंदे ........
घर के बाहर बहता था वो 
छोटा सा दरिया ......
अक्सर चला करती थी…
Continue

Added by Sonam Saini on June 28, 2013 at 1:11pm — 12 Comments

Monthly Archives

2018

2017

2016

2015

2014

2013

2012

2011

2010

1999

1970

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- बहुत आसाँ है दुनिया में किसी का प्यार पा लेना,
"धन्यवाद आ. समर सर,मैंने अपनी प्रति में  सुधार कर लिया है सादर "
1 hour ago
Samar kabeer commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post अतुकांत
"जनाब डॉ.छोटेलाल सिंह जी आदाब,बहुत बढ़िया अतुकान्त कविता लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
1 hour ago
Samar kabeer commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- बहुत आसाँ है दुनिया में किसी का प्यार पा लेना,
"जनाब निलेश 'नूर' साहिब आदाब,बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । 4थे…"
1 hour ago
Samar kabeer commented on Kumar Gourav's blog post क्षितिज
"जनाब कुमार गौरव जी आदाब,सुंदर प्रस्तुति हेतु बधाई स्वीकार करें ।"
1 hour ago
Samar kabeer commented on TEJ VEER SINGH's blog post तन की बात - लघुकथा –
"जनाब तेजवीर सिंह जी आदाब,बहुत बढ़िया लघुकथा,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
1 hour ago
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post गुलज़ार प्यार का
"आपका हार्दिक आभार, आदरणीय आशुतोष जी"
1 hour ago
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post गुलज़ार प्यार का
"आपका हार्दिक आभार, आदरणीय शेख शहजाद उस्मानी जी"
1 hour ago
Samar kabeer commented on Nand Kumar Sanmukhani's blog post ग़ज़ल
"'वो पहले भी दोस्त नहीं था' इस मिसरे को बदलने का प्रयास करें ।"
1 hour ago
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- बहुत आसाँ है दुनिया में किसी का प्यार पा लेना,
"धन्यवाद आ, तेजवीर सिंह जी आभार"
1 hour ago
Nilesh Shevgaonkar commented on Nand Kumar Sanmukhani's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय नंद कुमार जी, एक ग़ज़लकार होने के नाते मैं भी इसी दुविधा से दोचार होता हूँ। मुझे लगता है कि…"
1 hour ago
TEJ VEER SINGH commented on Kumar Gourav's blog post क्षितिज
"हार्दिक बधाई आदरणीय कुमार गौरव जी।बेहतरीन प्रस्तुति।आज की ज्वल्लंत समस्या को आइने में उतारती लघुकथा।"
3 hours ago
Nand Kumar Sanmukhani commented on Nand Kumar Sanmukhani's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Nilesh Shevgaonkar जी, सादर नमस्कार । मेरे ग़ज़ल के बारे में आपका जो भी मत बना है, उसका मैं…"
3 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service