For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

All Blog Posts (19,174)

हाइकू

                         

                                                    (1)

                                   

                                               सजन मेरे 

                                            छनके है पायल

                                               नाम से तेरे 

   

                                                    (2)

                                                छनछनाती 

             …
Continue

Added by Drshorya Malik on July 8, 2013 at 10:30am — 6 Comments

जगह जगह मधुशाला देखी

जगह जगह मधुशाला देखी , नल का पानी बंद मिला 

अंधी नगरी चौपट राजा , किससे शिकायत किससे गिला



दिया दाखिला सब बच्चों को , 

मिली पढ़ाई मात्र नाम की , 

कंप्यूटर मिल रहे खास को , 

बिजली पानी नही आम की , 

आँखो पर पट्टी है या फिर सबको दी है भंग पिला

गूंगे गाये गीत मान के

बहरे सुन सुन कर इतराएँ

अंधों भी उत्सुक हैं ऐसे

महज इशारों मे बौराएँ

बंदर सारे खेल कर रहे ""अजय" मदारी रहा खिला

मौलिक और…

Continue

Added by ajay sharma on July 7, 2013 at 11:30pm — 9 Comments

ग़ज़ल ५

 

221 2121 1221 212

बेख़ौफ़ सारी उम्र निकल जाये इस तरह

गिरने की बात हो न, संभल जाए इस तरह

 

तूफ़ान भी चले तो चरागा जला करे

दोनों ही अपनी राह बदल जाए इस तरह

 

हर सिम्त जिंदगी रहे, पुरजोश  बारहां

जो मौत का भी होश,बदल जाए इस तरह

 

फैले कहीं जो बाहें तो बच्चों सा दौड़कर

मिलने को हर इक शख्स मचल जाए इस तरह

 

आंसू किसी की आँखों का, हर आँख  से बहे 

इस शहर की फ़ज़ा भी बदल जाये इस तरह…

Continue

Added by Dr Lalit Kumar Singh on July 7, 2013 at 10:40pm — 12 Comments

तलाश

अंतर मन में

अनंत  इच्छाएँ

बिल्कुल समन्दर

की लहरों की तरह

ठीक कुछ समय बाद

समाप्त हो जाती है

ऐसा लगता है कि

कितनी अपेक्षा से

प्रकृति ने जिन भावों

को जगाया था मन में

उन भावों को सपनो में

सजोकर बंदकर

अलसाई उनीदी आखे

फिर सोजाती है

तलाश है उस नीद की

जो  संतुष्टि के बाद

खुले आसमान के नीचे

बैभव से दूर बसुधा की माटी में

माँ के आँचल की तरह सुलाती है

सहलाती…
Continue

Added by दिलीप कुमार तिवारी on July 7, 2013 at 8:00pm — 4 Comments

धूल और शिखर

कुछ शहनशाहों के तख़्त

कुछ ऊँचे पर्वतों के शिखर

कुछ ऊँचें अटार

कुछ ऊँचें लोग अपने कद से भी बहुत ऊँचे

आम आदमी पहुँच नहीं पाता उन तक

और सिर झुकाए निराश है

पर देखो

लाख किरकिराती है

किसी को फूटी आँख नहीं सुहाती है  

फिर भी धूल बही जाती है बेफिक्री में

बिना दुःख और मलाल के

और होता भी है यह है कि

आदी कैसी भी हो

अंत उसके सुपुर्द होता है  .... ~nutan~

मौलिक अप्रकाशित 

Added by डॉ नूतन डिमरी गैरोला on July 7, 2013 at 5:30pm — 2 Comments

पल

तू तो वह पल है
जिसे मैंने पाला है
जिसको मैंने जिया है
जिसने मुझे रुलाया
और
हँसाया भी है
मुझे, तुमसे मिलाया भी है
और मुझको, मुझसे भी मिलाया है
पद दिया
मान दिया
सम्मान दिया
कभी अर्श पे
कभी फर्श पे
बैठाया ....
मगर पल का क्या
पल की आदत है
बीत जाना
तो वो पल था
जो छोड़ गया
ये पल है
कल ये भी न होगा
पल का क्या
पल की तो आदत है
बीत जाना ....

"मालिक व अप्रकाशित "

Added by Amod Kumar Srivastava on July 7, 2013 at 5:00pm — 5 Comments

पागल

हाथ में पत्थर उठाये वह पगली अचानक गाड़ी के सामने आ गयी तो डर के मारे मेरी चीख निकल गयी. बिखरे बाल, फटे कपडे, आँखों में एक अजीब सी क्रूरता पत्थर लिए हाथ ऊपर ही रह गया.लेकिन जाने क्यों वह ठिठक गयी पत्थर फेंका नहीं उसने .गाड़ी जब उसके बगल से गुजरी खिड़की के बहुत पास से उसके चेहरे को देखा.अब वहां एक अजीब सा सूनापन था.
कार के दूसरी ओर से एक ट्रक निकल गया. वह कार के पीछे की ओर भागी और ट्रक पर पत्थर फेंक दिया.आसपास दुकानों पर खड़े लड़के हंस रहे थे.वह पगली थी घोषित…
Continue

Added by Kavita Verma on July 7, 2013 at 2:24pm — 7 Comments

स्वर्ग है फिर आपका क्या काम?

स्वर्ग है फिर आपका क्या काम? 

अमरनाथ गुफा हो, बद्रीनाथ, केदारनाथ, मान सरोवर, आदि प्राकृतिक स्थल की यात्रा हो...हर व्यक्ति लौटकर एक ही जवाब देता है......क्या स्वर्ग है. क्या देव भूमि है ...समझ में नहीं आता जब वो देव भूमि है, स्वर्ग है...तो आप वहां क्यों जा रहे हैं? देवों की पवित्र भूमि पर आप धरतीवासी कदम रखकर उनकी भूमि को अपवित्र क्यों कर रहे हो? क्या वहां जाने वाले सभी शुद्ध मन, विचार के होते हैं? क्या जिंदगी में दो नंबर का धन कमाने वाले भ्रष्ट आचरण के लोग वहां जाने से परहेज करते हैं?…

Continue

Added by dinesh solanki on July 7, 2013 at 9:22am — 6 Comments

ग़ज़ल

२१२२    २१२२     २१२       १२

हाथ मिला के जो हमे  तन्हा जता गया

 साथ मन में चल रहा था वो बता गया

उस  को  केसे में दयालु मेरे दिल लिखूँ

जेसे वो भगवान बन दुनिया सता गया

फिर  चलेंगे  तो  हमारी  होगी कहानी

फिर क्या वो राह हम से कर खता गया

राह कब उस शहर की तरफ मुझे  ले गई 

राहबर  जिस का जाते हुए दे पता गया

दरख्त  बूढ़े  पै बैठा  तन्हा पक्षी मगर

जिंदगी  का  सच्च  राही को बता…

Continue

Added by मोहन बेगोवाल on July 7, 2013 at 8:00am — 1 Comment

ग़ज़ल - हम और कोई निकले शिनाख्त में।

              ग़ज़ल 

 

आईनों से मिले थे बड़ी हसरत में,

हम और कोई निकले शिनाख्त में।

क्या आज फिर शह्र में लहू बरसा है?

अख़बार की सुर्खियाँ हैं दहशत में।

मुफ़लिसी क्या इतनी बुरी चीज़ है?            मुफ़लिसी - निर्धनता

आये हैं  दोस्त भी मुख़ालफ़त में।              मुख़ालफ़त - विरोध 

जल्द ही इमारती शह्र उग आएगा,

बो तो दिये गये हैं पत्थर दश्त में।             दश्त - जंगल 

उसे लगा आस्मां मुझे…

Continue

Added by सानी करतारपुरी on July 7, 2013 at 3:30am — 1 Comment

*** कुण्डलिया छन्द ***

*** कुण्डलिया छन्द ***

==================

सच्चाई कॊ प्रॆम सॆ, कर लॊ तुम स्वीकार !

सदा दम्भ कॆ शीश पर, करतॆ रहॊ प्रहार !!

करतॆ रहॊ प्रहार, पनपनॆ कभी न पायॆ !

सुन्दर सहज विचार, सभी वॆदॊं नॆं गायॆ !!

कहॆं "राज"कविराज,करॊ जग मॆं अच्छाई !

नाम अमर हॊ जाय, निभायॆ जॊ सच्चाई !!१!!



ताना मारॆ तान कर, निन्दक मिलॆ पुनीत !

जीत गयॆ तॊ जीत है, हार गयॆ भी जीत !!

हार गयॆ भी जीत, भला अपना ही हॊता !

बिन साबुन औ नीर, चरित्र यही है धॊता !!

कहॆं… Continue

Added by कवि - राज बुन्दॆली on July 6, 2013 at 6:19pm — 14 Comments

यूं ही बचपन गया शरारत में

यूं  ही बचपन गया शरारत  में

औ' जवानी गयी  मुहब्बत  में

और जो वक़्त जिंदगी के बचे

वो भी गुज़रे फ़क़त तिजारत में  



बादे मुश्किल मिले जो पल वो भी

हो गए रायगाँ शिकायत में

मुफ्लिसों को भला  बुरा  कहना

है शुमार आज सबकी आदत में



फूल बेलपत्र के अलावा शिव

जान  मांगे है अब ज़ियारत में



फ़ासला तू औ' मैं का जब न मिटे

तो मज़ा ख़ाक है मुहब्बत में



गाँव से वो कपास की कतरन

जाके चुनता है शह्रे सूरत…

Continue

Added by Sushil Thakur on July 6, 2013 at 5:00pm — 5 Comments

मेरा गाँव

सुन्दरता इसको घेरी है 

मादकता इसमें पिरोई है 

मीठे में मिश्री जैसा मेरा गाँव 

सबसे प्यारा सबसे न्यारा मेरा गाँव 



उंच नीच का भेद नहीं है 

शहरों जैसा क्लेश नहीं है 

फूलों में गुलशन जैसा मेरा गाँव

सबसे प्यारा सबसे न्यारा मेरा गाँव 



सुन्दरता तरुओं की प्यारी 

मादकता सरसों की सारी …

Continue

Added by Devendra Pandey on July 6, 2013 at 2:30pm — 4 Comments

प्रकृति का नर्तन

प्रकृति का नर्तन

(उत्तराखण्ड आपदा के संदर्भ में)

हमने भी देखा है,

माथे पर स्वर्ण-टीका लगाये

संध्या को,

शैल-शिखरों पर अभिसार करते हुए.

देवदार कुछ लजीले, कुछ शरमाए

चीड़ चंचल उत्पात करे,

मौन इशारे करते कुछ बहके -

देखा है रात ने,

भँवरे को कमल संग रमन करते हुए.

प्रातः मधुरस लिये भँवरा

गुँजन करता चमन चमन,

इस कान में कुछ स्वर

उस सुमन को देता कुछ मकरंद.

सौगात बाँटता वन उपवन…

Continue

Added by coontee mukerji on July 6, 2013 at 12:30pm — 4 Comments

प्रीत की रीत न कोई जाने [गीत ]

ऊद्धव कन्हैया से जाकर सिर्फ इतना बता दीजियेगा ।

हे कृष्ण प्रेमी जनों की अब कुछ तो खबर लीजियेगा ।

उनकी खातिर दिलों जाँ लुटाया ।

और ज़माने को दुश्मन बनाया ।

उनके पीछे ये दुनिया भुलायी ।

उनकी राहों में पलकें बिछायी ।

उनके बिन बृज में क्या हो रहा है हाल सारा सुना दीजियेगा ।

हे कृष्ण प्रेमी जनों की अब कुछ तो खबर लीजियेगा ।

उनके बिन अपनी हालत न पूछो ।

कैसी है दिल में चाहत न पूछो ।

हम तो मर मर के जीने लगे हैं ।…

Continue

Added by Neeraj Nishchal on July 6, 2013 at 8:00am — 4 Comments

क्या लिखूँ

मैं क्या लिखूँ

कहाँ से पकड़ू

कहाँ से जोड़ू

न भाव है 

न आधार है 

अंतहीन है  सिलसिला 

गुजरता जाता है 

सब कुछ इस जहां मे

निराकार  है, निराधार है 

लालसाए हैं 

न ठिकाना है, न ठहरना है 

फैले हुये शब्दों के जंजाल 

महत्वाकांक्षाएं, मौलिकता 

सब दिखावा है 

क्या लिखूँ 

यह व्यथा की कथा है 

शब्दों का सूनापन है 

क्या लिखूँ 

न भाव हैं ... न ही आधार है…

Continue

Added by Amod Kumar Srivastava on July 6, 2013 at 7:30am — 5 Comments

बता दो क्या कर लोगे

बता दो क्या कर लोगे

सूरज के ही आगे पीछे रहती है बस  धूप,

बता दो क्या कर लोगे 

उनका पेट भरेगा, तेरी भांड में जाए भूख ,

बता दो क्या कर लोगे 

तेरे ही काँधे पर चढ़कर छोड़ेंगे बन्दूक,

बता दो क्या कर लोगे 

बेटा उनका आगे होगा, तुम्ही जाओगे छूट, 

बता दो क्या कर लोगे 

काला होगा धन उनका जब तेरा पैसा लूट,

बता दो क्या कर लोगे 

कुर्सी तेरी वो बैठेंगे, तुम बस देना घूस,

बता दो क्या कर लोगे

 

मौलिक और…

Continue

Added by Dr Lalit Kumar Singh on July 5, 2013 at 10:00pm — 16 Comments

पाये अध्यादेश से, भोजन जन गन देश -

पाये अध्यादेश से, भोजन जन गन देश |
चारो पाये तंत्र के, दिये हमें पर क्लेश |


दिये हमें पर क्लेश, दिये टिमटिमा रहे हैं |
हुआ तैल्य नि:शेष, काल ने प्राण गहे हैं |


है आश्वासन झूठ, मूठ हल की जब आये |
पाये हल हर हाल, जियें मानव चौपाये ||

मौलिक/अप्रकाशित

Added by रविकर on July 5, 2013 at 9:01pm — 4 Comments

खुद्दार (सच्ची घटना )

ऑफिस के बाहर खड़ा मै फोन पे बात कर रहा था,तभी अचानक एक लड़का मेरे पास आकर खड़ा हो गया ! कुछ देर देखने के बाद मैंने उससे पूछा क्या?

तो उसने मेरे पैरों की तरफ इशारा किया...मै समझा नहीं फिर मै उसके कपड़े जो बहुत ही पुराने और फटे थे ,देखने लगा!!

इतने में उसने अपने थैले से बूट पोलिश करने का ब्रश और एक डिबिया निकाल ली...फिर तो मै समझ गया यह क्या कह रहा था !!

मुझे भी दया आ गयी कहा चालो भाई अब पोलिश कर ही दो...



मैंने जूते निकाले और वो अपने काम में मस्त…

Continue

Added by ram shiromani pathak on July 5, 2013 at 7:00pm — 16 Comments

मेरे गीतों में मीरा दीवानी सही

ओ.बी.ओ. के पावन मंच और गुरुजनों को सादर प्रणाम करता हूँ. समयाभाव के चलते  नियमित रूप से मंच से जुड नही पा रहा हूँ इसके लिए क्षमा प्रार्थी हूँ  और आप सबके बीच कुछ मुक्तक निवेदित कर रहा हूँ. कृपया मार्गदर्शन करें .सादर

क्यूँ कभी प्रेम की ये निशानी लगे.

अश्रुपूरित कभी  ये जवानी  लगे.

ओस बन खो गये हैं हवा में कहीं,

बूँद पानी  की ये  जिंदगानी  लगे.

प्रेम  की  बागवानी  पुरानी  सही.

कृष्ण-राधा की प्यारी कहानी सही.

तुम लिखो फूल…

Continue

Added by CA (Dr.)SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' on July 5, 2013 at 1:30pm — 12 Comments

Monthly Archives

2026

2025

2024

2023

2022

2021

2020

2019

2018

2017

2016

2015

2014

2013

2012

2011

2010

1999

1970

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय बाग़ी जी एवं कार्यकारिणी के सभी सदस्यगण !बहुत दुखद है कि स्थिथि बंद करने तक आ गयी है. आगे…"
4 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय अजय गुप्ता जी, आपकी भावनाओं और मंच के प्रति आपके जुड़ाव को शब्द-शब्द में महसूस किया जा सकता…"
15 hours ago
amita tiwari and आशीष यादव are now friends
yesterday
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
"मान्यवर  सौरभ पांडे जी , सार्थक और विस्तृत टिप्पणी के लिए आभार."
yesterday
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"आशीष यादव जी , मेरा संदेश आप तक पहुंचा ,प्रयास सफल हो गया .धन्यवाद.पर्यावरण को जितनी चुनौतियां आज…"
yesterday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय धामी जी सारगर्भित ग़ज़ल कही है...बहुत बहुत बधाई "
Monday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार
"आदरणीय सुशील जी बड़े सुन्दर दोहे सृजित हुए...हार्दिक बधाई "
Monday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"प्रबंधन समिति से आग्रह है कि इस पोस्ट का लिंक उस ब्लॉक में डाल दें जिसमें कैलंडर डाला जाता है। हो…"
Monday
आशीष यादव posted a blog post

गन्ने की खोई

पाँच सालों की उम्र,एक लोहे के कोल्हू में दबी हुई है।दो चमकदार धूर्त पत्थर (आंखें) हमें घुमा रहे…See More
Monday
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय श्री सुशील जी नमस्कार।  बहुत अच्छे दोहे रचे गए हैं।  हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए।"
Monday
आशीष यादव commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"एक बेहतरीन ग़ज़ल रचा है आपने। बिलकुल सामयिक।  इस बढ़िया रचना पर बधाई स्वीकार कीजिए।"
Monday
आशीष यादव commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"सदियों से मनुष्य प्रकृति का शोषण करता रहा है, जिसे विकास समझता रहा है वह विनास की एक एक सीढ़ी…"
Monday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service