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Ajay Tiwari
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  • rajesh kumari
 

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Ajay Tiwari commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल - हम रह सकें ऐसा जहाँ तलाश रहा हूँ ( गिरिराज भंडारी )
"आदरणीय गिरिराज जी,   'इस बहर में मीर के कुछ ही ऐसे मिसरे है जिन पर विवाद है.' मेरी इस पंक्ति का आशय ये नहीं है कि इन मिसरों की मौजूनियत पर किसी को शक है. या किसी ने ये कहा हो कि ये मिसरे बेबहर हैं. विवाद के कई दूसरे अरूजी पहलू रहे…"
Thursday
Ajay Tiwari commented on Alok Rawat's blog post ग़ज़ल: दिल ए नादान से हरगिज़ न संभाली जाए
"आदरणीय आलोक जी, बहुत खूबसूरत ग़ज़ल हुई है. हार्दिक शुभकामनाएं. सादर  "
Wednesday
Ajay Tiwari commented on SALIM RAZA REWA's blog post मुझसे रूठा है कोई उसको मनाना होगा - सलीम रज़ा रीवा
"आदरणीय सलीम साहब, बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है. हार्दिक शुभकामनाएं. आदरणीय अफरोज साहब का सुझाव अच्छा है लेकिन उसके लिए मक्ते के ऊला में 'कि' की जगह 'जो' रखना होगा. सादर "
Wednesday
Ajay Tiwari commented on rajesh kumari's blog post इश्क इससे क्यूँ दुबारा हो गया (ग़ज़ल 'राज')
"आदरणीया राजेश कुमारी जी, बहुत खूबसूरत ग़ज़ल हुई है.हार्दिक शुभकामनाएं. सादर  "
Wednesday
Ajay Tiwari commented on Samar kabeer's blog post 'आपके पास है जवाब कोई'
"आदरणीय समर साहब, आदाब, खूबसूरत ग़ज़ल हुई है. हार्दिक शुभकामनाएं. सादर  "
Nov 13
Ajay Tiwari commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल - हम रह सकें ऐसा जहाँ तलाश रहा हूँ ( गिरिराज भंडारी )
"आदरणीय गिरिराज जी,   इस बहर के मूलभूत तथ्य ये हैं :   1 - इस बहर का प्रचलित नाम बहरे-मीर है.   2 - इस बहर का अरूजी नाम 'मुतक़ारिब मुसम्मन असरम मक़्बूज़ महज़ूफ़ मुज़ाइफ़' है .   3- इस बहर के अरूजी अर्कान…"
Nov 13
Ajay Tiwari commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल - हम रह सकें ऐसा जहाँ तलाश रहा हूँ ( गिरिराज भंडारी )
"आदरणीय वीनस जी, बहरे-मीर पर पुस्तक के सम्पूर्ण अंश को प्रस्तुत करने के लिए आपका बहुत बहुत धयवाद. इसके कुछ अंश मुझे ऐसे लगे जिन पर पुनार्विचार की जरूरत है :  \\ इसमें कहीं भी ११ को २ अनुसार पढ़ा जा सकता है।\\ इस बहर के बारे में यह तथ्य…"
Nov 13
Ajay Tiwari commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल - हम रह सकें ऐसा जहाँ तलाश रहा हूँ ( गिरिराज भंडारी )
"आदरणीय गिरिराज जी, 1 - क्या हम - 22 ( फेलुन ) को 121  112   211  लेसक्ते हैं  या नही > इस बहर  में 112 नहीं ले सकते  2 - 222  को 1212   1122  2211  2121  लिया जा सकता है या…"
Nov 9
Ajay Tiwari commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल - हम रह सकें ऐसा जहाँ तलाश रहा हूँ ( गिरिराज भंडारी )
"आदरणीय गिरिराज जी,अरूज में यह पूर्व निर्धारित है कि किस बहर में कौन से जिहाफ इस्तेमाल हो सकते हैं और कौन कौन से अर्कान इस्तेमाल हो सकते है. बहरे- मुतकारिब में फइलुन (112) का इस्तेमाल नहीं होता क्योंकि मुतकारिब के किसी जिहाफ से फइलुन (112) हासिल नहीं…"
Nov 9
Ajay Tiwari commented on Afroz 'sahr''s blog post ग़ज़ल,,,,भीगी पलकों पे कई ख़्वाब,,
"आदरणीय अफ़रोज़ साहब,खूबसूरत ग़ज़ल हुई है. हार्दिक शुभकामनायें. 'तुझसे मिलने को हूँ बेताब है ये सच लेकिनआमद ओ रफ़्त के असबाब हुआ करते हैं' खास तौर से ये शेर बहुत अच्छा लगा. 'गुल में ख़ुश्बू के कई बाब हुआ करते हैं' नायाब मिसरा…"
Nov 8
Ajay Tiwari commented on Devendra Pandey's blog post मुक्तक
"आदरणीय देवेन्द्र जी, अच्छे शेर निकाले हैं. हार्दिक  शुभकामनाएं. सादर    "
Nov 8
Ajay Tiwari commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post अक्स
"आदरणीय गोपाल नारायण जी, इस खूबसूरत और संवेदनशील काव्य-प्रस्तुति के लिए हार्दिक शुभकामनाएं. सादर "
Nov 8
Ajay Tiwari commented on Rahila's blog post ***खरबूजा*** राहिला(लघुकथा)
"आदरणीया राहिला जी, इस कथा के मर्म में एक मार्मिक कविता है. लघुकथा के शिल्प जो कुछ बेहतर हो सकता है वह सब कुछ इसमें है. इसमें कहे हुए से जो अनकहा है वह ज्यादा असर छोड़ता है. सादर "
Nov 8
Ajay Tiwari commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल - हम रह सकें ऐसा जहाँ तलाश रहा हूँ ( गिरिराज भंडारी )
"आदरणीय गिरिराज जी, इस ग़ज़ल की रदीफ़ में ही फइलुन (112) का इस्तेमाल है इसलिए ये यह 'बहरे-मीर' की ग़ज़ल नहीं हो सकती और इसमें 2121 या 1212 जैसी संरचना इस्तेमाल नहीं हो सकती क्योंकि 'मुतदारिक मक्बूज़ मुसक्किन' में इसकी अनुमति नहीं…"
Nov 8
Ajay Tiwari commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post गीत... हर आहट पर यूँ लगता है जैसे हों साजन आये-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"आदरणीय बृजेश जी, अगर गीत में बहरे मीर और हिंदी के किसी छंद को एक साथ साधना हो तो मदिरा सवैया को आजमायें. दोनों की तुलनात्मक संरचना ये है : भगण  भगण  भगण   भगण    भगण   भगण    भगण    गुरु 211     211    211     211     211    211      211     …"
Nov 6
Ajay Tiwari commented on Gurpreet Singh's blog post (ग़ज़ल - इस्लाह के लिए) अक्सर तन्हाई में रोया करता हूँ -(गुरप्रीत सिंह)
"आदरणीय गुरप्रीत जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई है. हार्दिक शुभकामनाएं. बाकी आदरणीय समर साहब सब कह चुके हैं. सादर "
Nov 6

Profile Information

Gender
Male
City State
U P
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Ballia
Profession
IT

Ajay Tiwari's Blog

ग़ज़ल - सोचो कुछ उनके बारे में, जिनका दिया जला नहीं

मुफ्तइलुन मुफाइलुन  //  मुफ्तइलुन मुफाइलुन

2112       1212      //   2112      1212

क्या करें और क्यों करें, करके भी फायदा नहीं

दिल में जो दर्द है तो है, लब पे कोई गिला नहीं 

 

उसके कहे से हो गये, लाखों के घर तबाह पर 

उसने कहा कि उसने तो, कुछ भी कभी कहा नहीं

 

सच तो हमेशा राज था, सच था हमेशा सामने

सच तो सभी के पास था, ढूंढे से पर मिला नहीं 

 

दोनों के दोनों चुप थे पर, गहरे में कोई शोर था

दोनों ने ही…

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Posted on October 20, 2017 at 7:47am — 23 Comments

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At 11:16pm on November 1, 2017, Prakash P said…
आदरणीय श्री अजय तिवारी जी सदर प्रणाम..माफ़ कीजियेगा ये मेरा
प्रथम प्रयास था अतः बहुत कमियां हैं मेरे लेखन में ..आपका सुझाव हृदय से स्वीकार करता हूँ .ग़ज़ल की कक्षा अावश्य मार्गदर्शक सिद्ध होगी मेरे लिए, धनयवाद !नहीं उपस्थित होने का कारण बैंक का थकाऊ कार्य है ..उसके लिए क्षमा प्रार्थी हूँ.
 
 
 

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