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Ajay Tiwari
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12 hours ago
Ajay Tiwari commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- फ़लक में उड़ने का क़ल्बो-जिगर नहीं रखता / दिनेश कुमार
"आदरणीय दिनेश जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई."
12 hours ago
Ajay Tiwari commented on क़मर जौनपुरी's blog post ग़ज़ल-4 (सब परिंदे लड़ रहे हैं...)
"आदरणीय कमर साहब, अच्छी ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई."
12 hours ago
Ajay Tiwari commented on क़मर जौनपुरी's blog post ग़ज़ल - 2 ( क़मर जौनपुरी )
"आदरणीय कमर साहब, खूबसूरत ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई. "
12 hours ago
Ajay Tiwari commented on santosh khirwadkar's blog post मिट गए नक़्श सभी....संतोष
"आदरणीय संतोष जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई."
13 hours ago
Ajay Tiwari commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post होश की मैं पैमाइश हूँ:........ग़ज़ल, पंकज मिश्र..........इस्लाह की विनती के साथ
"आदरणीय पंकज जी, रदीफ़ और काफ़िया ऐसा चुने जिसमें कथ्य के प्रभावी विस्तार की पर्याप्त जगह हो. शेष आदरणीय समर साहब कह चुके हैं.आख़िरी शेर अच्छा लगा. एक अच्छी कोशिश के लिए हार्दिक बधाई."
13 hours ago
Ajay Tiwari commented on सतविन्द्र कुमार राणा's blog post किसी के इश्क में बिस्मिल हमारी बेबसी कब तक(गजल)
"आदरणीय सतविन्द्र जी, ख़ूबसूरत शेर हुए है. हार्दिक बधाई."
13 hours ago
Ajay Tiwari commented on शिज्जु "शकूर"'s blog post एक ग़ज़ल - शिज्जु शकूर
"आदरणीय शिज्जु जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई."
13 hours ago
Ajay Tiwari added a discussion to the group ग़ज़ल की कक्षा
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उर्दू शायरी में इस्तेमाल की गईं बह्रें और उनके उदहारण - II

पहले भाग में मुफ़रद बह्रों के उदाहरण प्रस्तुत किए गए थे. इस भाग में मुरक़्क़ब बह्रों के उदाहरण हैं.मज़ारेमज़ारे मुसम्मन अख़रब मक्फ़ूफ़ महज़ूफ़मफ़ऊलु फ़ाइलातु मुफ़ाईलु फ़ाइलुन221        2121      1221     212हक़ फ़त्ह-याब मेरे ख़ुदा क्यूँ नहीं हुआतू ने कहा था तेरा कहा क्यूँ नहीं हुआ जो कुछ हुआ वो कैसे हुआ जानता हूँ मैंजो कुछ नहीं हुआ वो बता क्यूँ नहीं हुआ - इरफ़ान सिद्दीक़ी दीवार क्या गिरी मेरे ख़स्ता मकान कीलोगों ने मेरे सह्न में रस्ते बना लिए - सिब्त अली सबाबुत-ख़ाना तोड़ डालिए मस्जिद को ढाइएदिल को न तोड़िए…See More
20 hours ago
Ajay Tiwari commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post याद के खेत गोड़ देता हूँ (ग़ज़ल) पंकज मिश्र: इस्लाह की गुज़ारिश के साथ पेश
"आदरणीय पंकज जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई. ग़ज़ल में एक अतिशय निराशा का भाव है लेकिन वो शायद 'ड़' के काफ़िये की वज़ह ठीक से अभिव्यक्त नहीं हो पाया है. शिल्प का वैचित्र्य कथ्य पर भारी पड़ गया है. सादर "
Nov 10
Ajay Tiwari commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ६७
"आदरणीय राज़ साहब, खूबसूरत अशआर हुए हैं. हार्दिक बधाई. मनाएं जश्न भी क्या हम अँधेरी रातों का नहीं है पास में बाती, दिया भी ख़ाली है???  रदीफ़ और काफ़िया?  "
Nov 10
Ajay Tiwari commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- नेकियाँ तो आपकी सारी भुला दी जाएँगी / दिनेश कुमार
"आदरणीय दिनेश जी, खूबसूरत ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई.  "
Nov 8
Ajay Tiwari commented on सतविन्द्र कुमार राणा's blog post हमेशा तो नहीं होती बुरी तकरार की बातें(ग़ज़ल)
"आदरणीय सतविन्द्र जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई."
Nov 8
Ajay Tiwari commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post जलूँ  कैसे  तुम्हारे बिन - लक्ष्मण धामी"मुसाफिर" ( गजल )
"आदरणीय लक्ष्मण जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई."
Nov 8
Ajay Tiwari commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (ख़त्म कर के ही मुहब्बत का सफ़र जाऊंगा)
"आदरणीय तस्दीक साहब, अच्छी ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई."
Nov 8
Ajay Tiwari commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ६६
"आदरणीय राज़ साहब, खूबसूरत शेर हुए हैं. हार्दिक बधाई. "
Nov 8

Profile Information

Gender
Male
City State
U P
Native Place
Ballia
Profession
IT

Ajay Tiwari's Blog

ग़ज़ल - दुनिया का सबसे बड़ा झूठा, खुद को सच्चा कहता है

नादान से बच्चे भी हँसते हैं, जब वो ऐसा कहता है

दुनिया का सबसे बड़ा झूठा, खुद को सच्चा कहता है

 

मुँह उसका है अपने मुंह से, जो कहता है कहने दो

कहने को तो अब वो खुद को, सबसे अच्छा कहता है

 

चिकने पत्थर, फैली वादी, उजला झरना, सहमे पेड़

लहू से भीगा हर इक पत्ता, अपना किस्सा कहता है

 

सूखे आंसू, पत्थर आँखें, लब हिलते हैं बेआवाज

लेकिन उन पे जो गुजरी है, हर इक चेहरा कहता…

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Posted on October 27, 2018 at 7:00am — 30 Comments

ग़ज़ल - सब में आग थी, लोहा भी था, नेक बहुत थे सारे हम - अजय तिवारी

फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ेलुन  फ़ा

 22      22      22       22     22      22      22      2

सब में आग थी, लोहा भी था, नेक बहुत थे सारे हम

लेकिन  तन्हा-तन्हा लड़ कर,  तन्हा-तन्हा  हारे हम

 

ज़र्रा-ज़र्रा  बिखरे  है  हम,  चारो ओर खलाओं में

लेकिन जिस दिन होंगे इकठ्ठा, बन जायेंगे सितारे हम

 

कितने दिन वो मूँग दलेंगे, कमजोरों की छाती पर

कितने दिन और चुप  बैठेंगे, बनके यूं बेचारे हम 

 

कबतक और ये…

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Posted on March 26, 2018 at 11:49am — 22 Comments

केदारनाथ सिंह के लिए - अजय तिवारी

केदारनाथ सिंह के लिए

वैसे तो आजकल किसी को क्या फर्क पड़ता है -

एक कवि के न होने से !  

लेकिन जैसे ख़त्म हो गया है धरती का सारा नमक 

और अलोने हो गए हैं  

सारे शब्द...

मौलिक/अप्रकाशित

Posted on March 21, 2018 at 4:40pm — 16 Comments

ग़ज़ल - जरा-सा छुआ था हवाओं ने,  कि नदी की देह सिहर गयी - अजय तिवारी

मुतफाइलुन   मुतफाइलुन    मुतफाइलुन   मुतफाइलुन

11212         11212          11212         11212

जरा-सा छुआ था हवाओं ने,  कि नदी की देह सिहर गयी

तभी धूप सुब्ह की गुनगुनी,   उन्हीं सिहरनों पे उतर गयी

 

खिली सरसों फिर से कछार में, भरे रंग फिर से बहार में

घुली खुश्बू फिर से बयार में, कोई टीस फिर से उभर गयी   

 

उसी एक पल में ही जी लिए, उसी एक पल में ही मर गए

वही एक पल मेरी सांस में,  तेरी सांस जब थी ठहर गयी

 

जमी…

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Posted on March 20, 2018 at 12:28pm — 9 Comments

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At 12:21pm on September 5, 2018, Ravi Shukla said…

namaskar 

is computer me hindi font nahi hai is liye kshama 

aapka hardik abhaar mitro me shamil karne ke liye 

9024323219 nambar ha kripya is par bhi sampark karne ka shram karen 

dhanywad 

ravi 

At 11:16pm on November 1, 2017, Prakash P said…
आदरणीय श्री अजय तिवारी जी सदर प्रणाम..माफ़ कीजियेगा ये मेरा
प्रथम प्रयास था अतः बहुत कमियां हैं मेरे लेखन में ..आपका सुझाव हृदय से स्वीकार करता हूँ .ग़ज़ल की कक्षा अावश्य मार्गदर्शक सिद्ध होगी मेरे लिए, धनयवाद !नहीं उपस्थित होने का कारण बैंक का थकाऊ कार्य है ..उसके लिए क्षमा प्रार्थी हूँ.
 
 
 

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