For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

All Blog Posts (19,149)

प्रतिकर्ष

तेरे आकर्षण का पल पल प्रतिकर्ष सताता है

सामजिक ताना बाना मिरी उलझन बढ़ाता है //

नदिया के पास जाऊं तो शीतल हो जाऊं

साथ दो अगर तो मैं मुस्कान बन जाऊं //

आकर्षक सा छद्म आव्हान मुझे बुलाता है //

सामजिक ताना बाना मिरी उलझन बढ़ाता है //

तुमसे कहने का मैं कोई मौका न छोड़ता

बस एक इशारा मिलता तो ही तो बोलता //

ऊहा पोह के सागर में अब गोता खाता हूँ

सामजिक ताना बाना मिरी उलझन बढ़ाता है //

दर्द की बात न करूंगा दर्द अब बेमानी हुआ

चाय…

Continue

Added by DR ARUN KUMAR SHASTRI on February 2, 2021 at 4:45pm — 2 Comments

एक नज़्म - बे - क़ायदा

वक़्त मिलता है कहाँ

आज के मौसुल में

रक़ीबा दर - ब - दर

डोलने का हुनर मंद है

ये ख़ाक सार

इक अदद पेट ही है

जिसने न जाने कितनी

जिंदगियां लीली है

तुखंम उस पर कभी भरता नहीं

हर वक्त सुरसा सा

मुँह खोल के रखता है

न जाने किस कदर

इसमें ख़ज़ीली हैं।

ईंते ख़ाबां मुलम्मा कौन सा

इस पर चढ़ा होगा

दिखाई भी तो नहीं देता

मगर इक बात मुझको

इसके जानिब ये ज़रुर कहनी है।

अगरचे ये नहीं होता

बा कसम ये दुनिया नहीं होती

ये जो…

Continue

Added by DR ARUN KUMAR SHASTRI on February 2, 2021 at 4:30pm — No Comments

गीत

स्वार्थ रस्ता  रोके बैठे है.....!

कई दिनों से सोन चिरैया

गुमसुम  बैठी रहती  है

देख रही चहुँ ओर कुहासा

भूखी घर बैठी रहती है

चौराहे पर बंद  लगे हैं

स्वार्थ रस्ता  रोके बैठे हैं !

कितने बच्चे कितने बूढ़े

कितनों के रोज़गार छिने हैं

लोग मर गए  बिना दवा के

हार गए जीवन से हैं...

जंतर मंतर रोज  रचे हैं 

हँसते हँसते रो दे ते हैं  !

तोड़ रहे  कानून …

Continue

Added by Chetan Prakash on February 2, 2021 at 2:02pm — 5 Comments

यूँ तो जनता की रही सरकार कहने के लिए - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२१२२/२१२२/२१२२/२१२

.

शेष इस में  क्या  रहा  इनकार  कहने के लिए

कह गया कनखी में सब दरवार कहने के लिए।१।

*

काम जनता के न आयी आज तक ये एक दिन

यूँ तो जनता  की  रही  सरकार  कहने के लिए।२।

*

इश्तहारों के सिवा जनहित का उसमें कुछ नहीं

शेष है बस  नाम  ही  अखबार  कहने के लिए।३।

*

काम कोई भी किया ऐसा न जिसका दम भरें

बात ही  उस की  रही  दमदार  कहने के लिए।४।

*

सब दिहाड़ी पर  बुलाए  उस के ही मजदूर थे

लोग जितने  भी  जुटे  आभार  कहने के…

Continue

Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 2, 2021 at 3:30am — 3 Comments

निष्ठुर नगर -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

१२२२/१२२२/१२२२/१२



नहीं कुछ गाँव सा सुनता हुआ निष्ठुर नगर

दिखाने घाव मत  जाना सखा निष्ठुर नगर।१।

*

उसे डर है कि उसके हित कमीं आजायेगी

नहीं देता किसी  का  भी  पता निष्ठुर नगर।२।

*

नदी सूखी हुई  कहती  है  प्यासे खेत से

तेरे हिस्से का पानी पी गया निष्ठुर नगर।३।

*

कहाँ तुम बात दुख की यार करते हो भला

खुशी तक में अकेला ही दिखा निष्ठुर नगर।४।

*

निकल पाया न खुद के व्यूह से सायास…

Continue

Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 31, 2021 at 8:59am — 9 Comments

ग़मों से हम सभी आज़ाद होंगे (126 )

ग़ज़ल( 1222 1222 122 )
ग़मों से हम सभी आज़ाद होंगे
मगर शायद क़ज़ा के बाद होंगे
**
यक़ीनन अब जहाँ में फिर कभी भी
न पैदा कैस और फरहाद होंगे
**
ग़लतफ़हमी न पालें इश्क़ में ये
कि जो उश्शाक़ हैं सब शाद होंगे
**
मुहब्बत शय है वो जिसमें ख़ुशी से
कई आबाद और…
Continue

Added by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on January 30, 2021 at 11:30am — No Comments

नज़्म (कृषि बिल पर किसानों के शकूक-ओ-शुब्हात)

1222 - 1222 - 1222 - 1222 

ज़मीं होगी तुम्हारी पर फ़सल बेचेंगे यारों हम

मिलेगी तुमको राॅयल्टी न देंगे खेत यारों हम

जो बोएगा वही काटेगा ये बातें पुरानी हैं

फ़सल तय्यार करना तुम मगर काटेंगे यारों हम

ये जोड़ी अब तुम्हारी और हमारी ख़ूब चमकेगी

करो मज़दूरी तुम डटकर करें व्यापार यारों हम 

ज़मीं पर बस हमारी ही हुकूमत होगी अब प्यारो 

मईशत 'उनके' हाथों में न जाने देंगे यारों हम 

रखेंगे हम ज़ख़ीरा कर…

Continue

Added by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on January 29, 2021 at 11:46pm — 14 Comments

तेरे कहने से ही क्या हो जाएगा......( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

2122 2122 212



तेरे कहने से ही क्या हो जाएगा 

जो बुरा है वो भला हो जाएगा (1)

जो पुराना जख़्म माज़ी ने दिया

दो ही दिन में क्या नया हो जाएगा (2)

खाद पानी मिलने से ही क्या शजर

वक़्त से पहले बड़ा हो जाएगा (3)

है अलग सबसे ख़ज़ाना प्यार का

ख़र्च कीजै दोगुना हो जाएगा (4)

दोस्ती में दर्द-ओ-ग़म हो या ख़ुशी

जो भी तेरा है मेरा हो जाएगा (5)

क़द अगर छोटा है उसका दोस्तो

मैं झुका तो वो बड़ा…

Continue

Added by सालिक गणवीर on January 29, 2021 at 10:30pm — 11 Comments

ग़म सभी की ज़ीस्त से हों लापता कीजे दुआ

ग़ज़ल( 2122 2122 2122 212 )
ग़म सभी की ज़ीस्त से हों लापता कीजे दुआ
और ख़ुशियों से हो पैहम सामना कीजे दुआ
**
दिल मिलाने के लिए आगाज़ हो इक जश्न का
दिल न कोई अब रहे टूटा हुआ कीजे दुआ
**
नफ़रतों के सब शजर उखड़ें हमारे मुल्क से
और शगुफ़्ता हर शजर हो प्यार का कीजे दुआ
**…
Continue

Added by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on January 29, 2021 at 8:30pm — 6 Comments

शायद नहीं. . . . . . . .

शायद नहीं. . . . . . . .
बोलते हैं
और बहुत बोलते हैं
जाने क्या-क्या बोलते हैं
मगर
क्या वही बोलते हैं
जो चाहते हैं बोलना
शायद नहीं…
Continue

Added by Sushil Sarna on January 29, 2021 at 5:39pm — 5 Comments

अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास

221   2121  1221  212

ये मानता हूँ पहले से बेकल रहा हूँ मैं,

लेकिन तेरे ख़्यालों का संदल रहा हूँ मैं।

अब होश की ज़मीन पर टिकते नहीं क़दम,

बरसों तुम्हारे प्यार में पागल रहा हूँ मैं।

हैरत से देखते हैं मुझे रास्ते के लोग,

बिल्कुल किनारे राह के यूँ चल रहा हूँ मैं।

मुझको उदासियां मिली है आसमान से,

चुपचाप इन के आसरे में जल रहा हूँ मैं।

साहिल पर जाके तू मुझे मुड़ कर तो देखता,

इक वक्त तेरी रूह की हलचल रहा हूँ…

Continue

Added by मनोज अहसास on January 28, 2021 at 11:35pm — 5 Comments

ग़ज़ल

ग़ज़ल(22 22 22 22 22 22 2 )
किसने आज सजाई महफ़िल मेरी यादों की
कौन सफ़ाई का इच्छुक है अपनी आँखों की
**
दर्द बढ़ाती है पीरी का अपनों से दूरी
कौन समझता पीर जहाँ में घायल रिश्तों की
**
बाजू कट जाता है जिसका वो ही ये जाने
कितनी बढ़ती हैं तक़लीफ़ें उसके शानों की
**
कटता है…
Continue

Added by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on January 28, 2021 at 3:30pm — 11 Comments

शिकायत-एक अद्रश्य अपराध

शिकायत कभी भी खत्म ना होती

कोई जीवन चाहे कुर्बान करें  

खाली दिमाग का सब फितूर है

ये सोच के अपना काम करें ||

 

हर तरह के लोग जहां में

बस मेहनती लोगो की बात करें

कष्ट सहकर भी हार ना माने

जज्बे को उनके सलाम करें ||

 

पद मिले तो अभिमान में भरते

ना बड़े-छोटे का सम्मान करें

संस्कारों की बात कहीं ना

बस अपने कर्मो का गुणगान करें ||

 

कुछ लोगो की आदत बुरी है

उनकी कभी ना बात करें  

हर…

Continue

Added by PHOOL SINGH on January 27, 2021 at 6:30pm — 1 Comment

आशंका :,,,,,,,,,

आशंका :,,,,,,,,,
वृक्ष की सबसे ऊँची टहनी पर
एक लम्बी चोंच वाला पक्षी
चुपचाप
अपनी आँखें बन्द किये
अपने धवल पंख समेटे हुए
शायद किसी तपस्या में लीन था…
Continue

Added by Sushil Sarna on January 26, 2021 at 3:52pm — 7 Comments

नज़्म

बेबाक दिलबरी का आलम न पूँछिये। 

हम से मोहब्बत का बस हुनर सीखिये ।

दिल में लगी हो आग तो सेक लीजिये। 

वरना लगा के दाग यूँ सितम न कीजिये। 

तारीफ़ कीजिये या के…

Continue

Added by DR ARUN KUMAR SHASTRI on January 25, 2021 at 10:00pm — 2 Comments

ग़ज़ल-वफ़ा नहीं मिलती

2122 1212 22

1

खा के क़समें वफ़ा नहीं मिलती

ज़ख़्मी दिल की दवा नहीं मिलती

2

बाँध ले बात गाँठ तू यारा

दर्द देकर दुआ नहीं मिलती

3

गाँव की तरह् शह्र में हमको

यार बाद-ए-सबा नहीं मिलती

4

साँस फेरेगी आँख ख़ुद ही सनम

चाहने से कज़ा नहीं मिलती

5

वस्ल की रात ओढ़कर घूँघट

आजकल क्यों हया नहीं मिलती

6

गुनगुना ले जो धड़कनों के सुर

ऐसी नग़्मा-सरा नहीं…

Continue

Added by Rachna Bhatia on January 25, 2021 at 3:54pm — 6 Comments

दो आशीष नया हो भारत - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२/२२/२२/२२



दो आशीष  नया हो भारत

जग में और बड़ा हो भारत।१।

*

आयु बढ़े नित जितनी इसकी

उतना  और  युवा  हो  भारत।२।

*

ज्ञाता हो विज्ञान का लेकिन

साथ ही वेद पढ़ा हो भारत।३।

*

दुख  के  नाले  सब  सूखे  हों

सुख का एक किला हो भारत।४।

*

जिनके घर ढब बन्द पड़े हैं

कहते और खुला हो भारत।५।

*

उनको सबक सिखाना वीरों

जिनकी चाह डरा हो भारत।६।

*

सीमाओं का द्वन्द मिटाकर

दोनों ओर…

Continue

Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 25, 2021 at 8:30am — 9 Comments

' दिल '

22 22 22 22 

कैसा अक्कड़ बक्कड़ है दिल..

पा के तुझको अक्खड़ है दिल..

सपने देखे, ऐसे वैसे..

रब्बा जाने कैसे कैसे..

उड़ता फिरे ये बैठे बैठे..

चाहे मिलना जैसे तैसे..

फिरते फ़क़ीर सा फक्कड़ है दिल।

उठते ही जालिम ये सबेरे..

हाथ पैर ये जोड़े मेरे..

चल कर आयें, घर के फेरे..

चिपका गली से, जैसे तेरे..

मोहल्ले का, नुक्कड़ है दिल।

चाहे, तुझसे बातें ये…

Continue

Added by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on January 24, 2021 at 6:00pm — 4 Comments

ख़ुद की बाबत

2122  2122 22

दिल ने की है तेरी बहुत खिदमत

तू जो समझा है की जिसको आफत

सुर्ख रू होगा सुकूँ ना होगा पर

इस तरह आयेगी तेरी शामत

मैं तो नादानी में हूँ लेकिन तू

तुझ को होने की खुदा है आदत

यूँ की खुद को ही भुला देता हूँ

अब ना पीना आंसुओं का शरवत

तू ने छेड़ा ही कोई क्यों है फिर

गर तू होता ही न खुद से सहमत

इस तरह भी और कोई है क्या

खुद से पूँछे जो की खुद की…

Continue

Added by Aazi Tamaam on January 21, 2021 at 11:00pm — No Comments

शायर सस्ता

22 22 22 22 22

इंसान ही शैतान इंसान ही शाइस्ता

इंसान के होने से है ख़ुदा बाबस्ता

कोई खुदा इंसान से बड़कर नहीं

समझ आयेगा आहिस्ता आहिस्ता

जिस रस्ते सब जाने से ही डरते हैं

लो मैं ही जाता हूँ की उस रस्ता

हो हर इक इंसान बस इंसान ही

क्या कोई भी है नहीं ऐसा रस्ता

जो खुदाओं पे यूँ झगडा़ करते हैं

ऐसे लोगों से अपना क्या रिश्ता

शायद दिन भर ही जलता रहता है

कितना बे-खुशबू है…

Continue

Added by Aazi Tamaam on January 21, 2021 at 11:00pm — No Comments

Monthly Archives

2026

2025

2024

2023

2022

2021

2020

2019

2018

2017

2016

2015

2014

2013

2012

2011

2010

1999

1970

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा एकादश. . . . . पतंग

मकर संक्रांति के अवसर परदोहा एकादश   . . . . पतंगआवारा मदमस्त सी, नभ में उड़े पतंग । बीच पतंगों के…See More
10 hours ago
Admin posted discussions
yesterday
Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 175

 आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey posted a blog post

नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ

   जिस-जिस की सामर्थ्य रही है धौंस उसी की एक सदा से  एक कहावत रही चलन में भैंस उसीकी जिसकी लाठी…See More
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आपने कहे को सस्वर किया इस हेतु धन्यवाद, आदरणीय  //*फिर को क्यों करने से "क्यों "…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"रचना को आपने अनुमोदित कर मेरा उत्साहवर्धन किया, आदरणीय विजत निकोर जी हार्दिक आभार .. "
yesterday
Sushil Sarna commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"आदरणीय जी सादर प्रणाम -  अद्भुत सृजन - हृदय तटों को छूती गहन भावों की अभिव्यक्ति ने अहसासों की…"
yesterday
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"प्रिय अशोक कुमार जी,रचना को मान देने के लिए हार्दिक आभार। -- विजय"
Monday
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"नमस्ते, सौरभ जी। आपने सही कहा.. मेरा यहाँ आना कठिन हो गया था।       …"
Monday
vijay nikore commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"प्रिय सौरभ भाई, नमस्ते।आपका यह नवगीत अनोल्हा है। कई बार पढ़ा, निहित भावना को मन में गहरे उतारा।…"
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और विस्तृत टिप्पणी से मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार।…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
Saturday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service