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डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव
  • Male
  • Lucknow Uttar Pradesh
  • India
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डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's Discussions

अभिसार रति नहीं एक जोखिम या खतरा है //डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

भिसार का अर्थ लोग प्रायशः प्रणय या काम-क्रीडा समझते हैं I यह सही अर्थ नहीं है I सही अर्थ है अभिसरण करना अर्थत गमन करना /जाना I अर्थ रूढ़ि में कहेंगे किसी रमणी का प्रिय से मिलने संकेत स्थल पर जाना या…Continue

Started on Saturday

ओबीओ लखनऊ चैप्टर की साहित्यिक परिचर्चा माह मई 2020        ::          संकलनकर्ता - डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

दिनांक17.05.2020, रविवार को ओबीओ लखनऊ चैप्टर की साहित्यिक परिचर्चा माह मई  2020 का ऑन लाइन आयोजन हुआ I इसके प्रथम चरण में हास्य और व्यंग्य के कवि श्री मृगांक श्रीवास्तव के निम्नांकित प्रस्तुतियों पर…Continue

Started on Saturday

ओबीओ लखनऊ चैप्टर की साहित्य संध्या माह अप्रैल 2020

दिनांक 19.04.2020, रविवार को ओबीओ लखनऊ चैप्टर की साहित्य-संध्या माह अप्रैल 2020 का ऑन लाइन आयोजन हुआ I इसके प्रथम चरण में ओज और आवेश के युवा कवि श्री मनोज कुमार शुक्ल ‘मनुज’ के निम्नांकित गीत पर…Continue

Started May 20

ओबीओ लखनऊ चैप्टर की साहित्य-संध्या माह अप्रैल 2020 –एक प्रतिवेदन                 डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

सशक्त कोरोना (NOVEL CORONA) विषाणु ने पृथ्वी पर संपूर्ण मानव जीवन को संकट में डाल दिया है I वह न केवल मानव की शंका का मूलभूत कारण बना है अपितु उसकी रहन-सहन की शैली को भी बदलने में कामयाब हुआ है I…Continue

Started May 12

 

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Latest Activity

डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted discussions
Sunday
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव added a discussion to the group भारतीय छंद विधान
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फ़ारसी की बह्र बनाम हिन्दी के छंद                                    डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव

मेरे अग्रज कवि मित्र श्री मृगांक श्रीवास्तव ने मेरा आलेख  ‘फर्क है ग़ज़ल और छंद के मात्रिक विधान में” पढकर जिज्ञासा प्रकट की कि क्या उर्दू की ग़ज़लें हिंदी या संस्कृत के मूल छंदों पर आधारित हैं I इसका सीधा उत्तर है – नहीं I हमें समझना चाहिए कि उर्दू की ग़ज़ल फ़ारसी की बह्रों पर लिखी जाती हैं I उर्दू में ग़ज़ल का कोई पृथक व्याकरण नहीं है I संस्कृत भारत की प्राचीनतम आर्य भाषा है और फ़ारसी फारस की अन्यतम भाषा है I दोनों भाषाएँ अलग-अलग सभ्यता और संस्कति के बीच पनपीं, विकसित और पल्लवित हुईं I दोनों का एक…See More
Thursday
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a discussion

ओबीओ लखनऊ चैप्टर की साहित्य संध्या माह अप्रैल 2020

दिनांक 19.04.2020, रविवार को ओबीओ लखनऊ चैप्टर की साहित्य-संध्या माह अप्रैल 2020 का ऑन लाइन आयोजन हुआ I इसके प्रथम चरण में ओज और आवेश के युवा कवि श्री मनोज कुमार शुक्ल ‘मनुज’ के निम्नांकित गीत पर परिचर्चा हुयी Iबुद्धि के चातुर्य  से आपत्ति का  करती  दमन,आपके इस रूप का है अनुगमन शत-शत नमन।            बालपन  से हठ,  निराशा की  सुखद  संजीवनी,            घट अमिय यौवन ,भरा विश्वास,वाणी की धनी।            श्रेष्ठ , ज्ञान चिंतन की सलिला मनोहर कामिनी,            ओस की हो बूँद प्रिय नभ में कड़कती…See More
Thursday
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a discussion

ओबीओ लखनऊ चैप्टर की साहित्य-संध्या माह अप्रैल 2020 –एक प्रतिवेदन                 डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

सशक्त कोरोना (NOVEL CORONA) विषाणु ने पृथ्वी पर संपूर्ण मानव जीवन को संकट में डाल दिया है I वह न केवल मानव की शंका का मूलभूत कारण बना है अपितु उसकी रहन-सहन की शैली को भी बदलने में कामयाब हुआ है I स्थिति की भयावहता इतनी है कि मनुष्य आपस में मिलने से कतरा रहा है I आज अन्य सारे जीव आजाद घूम रहे है और मनुष्य अपने घर की गुफा में शंकित होकर बैठा है I बावजूद इसके उसकी फितरत नहीं बदली I तकनीक का सहारा लेकर वह परस्पर न केवल बतिया रहा है अपितु कांफ्रेंसिंग और परिचर्चायें भी कर रहा है I ऐसे गर्हित समय में…See More
May 12
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post मसीहा
"आद0 गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी सादर अभिवादन। बहुत बेहतरीन भाव पूर्ण और सोचने को विवश करती उत्तम रचना पर आपको बधाई"
Apr 26
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post मसीहा
"आ. भाई गोपाल नारायण जी, सादर अभिवादन । अच्छी समसामयिक रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Apr 22
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a blog post

मसीहा

अधूरा थामेरा ज्ञानसर्वभक्षी के बारे मेंमै जानता थाकेवल अग्नि है सर्व भक्षी मगरसब कुछ खाते थे वेसांप, झींगुर,कीट –पतंगयहाँ तक कि चमगादड़ भीअसली सर्वभक्षी तो ये थेइन्हें पता थाप्रकृति लेती है बदलापर उन्हें भरोसा थाकि वे बदल देंगेअपने ज्ञान-विज्ञान सेविनाश की दशा और गतिपर जब हुआविनाश का तांडव्फिर कोई न बचा पायाऔर न कोइ बचासारा विश्व कर उठा त्राहिमामसांपऔर चूहों की तरहलोग दुबकने लगेअपनी साँसे रोकउस घरनुमा बिल मेंजहां वे समझ सकते थेखुद को महफूजतब मसीहाघूम रहे थे बेख़ौफ़हर सड़क पर हर गली मेंदेख रहे…See More
Apr 22
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a discussion

ओबीओ, लखनऊ-चैप्टर की साहित्य-संध्या माह मार्च 2020 :: एक प्रतिवेदन डॉ.गोपाल नारायन श्रीवास्तव

कोविड-19 की दस्तक माह फरवरी 2020 में ही सुनाई देने लगी थी I पर हमारा देश होली के उल्लास के बाद ही इस दिशा में सक्रिय हो पाया I इस बार मासिक साहित्य संध्या 22 मार्च 2020 को प्रस्तावित थी, किन्तु शासन के द्वारा उठाये गए कदमों से किसी स्थान विशेष पर आयोजन संभव नहीं था i अतः अति उत्साही सदस्यों के आह्वान और सहयोग से यह कार्यक्रम ऑनलाइन संचालित हुआ और बेहद सफल रहा I कार्यक्रम के प्रथम चरण में लोकप्रिय ग़ज़लकार आलोक रावत ‘आहत लखनवी’ की दो ग़ज़लों पर चर्चा हुयी, जिसमें लगभग सभी प्रतिभागियों ने बढ़-चढ़ कर…See More
Apr 22
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a discussion

ओपन बुक्स ऑनलाइन की मासिक गोष्ठी माह मार्च 2010 में आलोक रावत ‘आहत लखनवी ‘ की दो गजलों पर परिचर्चा :: प्रस्तुति- डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

गजल-एकदर्द मेरा हम क़दम औ हमसफ़र हो जाये तो,क्या करूं मॉं की दुआ भी बे असर हो जाये तो? II1IIक्या गिले-शिक़वे करूं तुझसे मेरे मालिक़ बताबस ज़रा मुझ पर भी तेरी इक नज़र हो जाये तो?II2IIबोझ अरमानों का लादे फिर रही है ज़िन्दगी,बीच में ही ख़त्म लेकिन ये सफ़र हो जाये तो?   II3IIघूमता फिरता हॅूं मैं बेफ़िक्र जिससे बेख़बर,सोचता हूँ वो भी मुझसे बेख़बर हो जाये तो?    II4IIमुफलिसी, नफ़रत, अदावत और क़त्ले-आम से,सोचकर देखो कि तन्हा ये शहर हो जाये तो?   II5IIआदमी जीकर भी आखि़र क्या करेगा सौ बरस,ज़िन्दगी अमृत सही लेकिन…See More
Apr 15
narendrasinh chauhan commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post दूरियां
"खूब सुंदर रचना सर"
Apr 11
vijay nikore commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post दूरियां
"आपकी रचना में पाठक को पास रखे रखने का दम है। इस अच्छी रचना के लिए हार्दिक बधाई,आ० गोपाल नारायन जी।"
Apr 10
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a blog post

दूरियां

जब नहीं थासमयतब तुम घूमती थीऔर मंडराती थीहमारे इर्द-गिर्दकरती थी परिक्रमाऔर मैं देता था झिडक   अब मैंहूँ घर पर मुसलसलसाथ तुम भी होव्यस्तता भी अब नहीं कोई   कितु मेरे पास तुम आती नहींपरिक्रमा तो दूर की है बातढंग से मुसक्याती नहीं      नहीं होतायकीं इस बदलाव पर  नहीं आ सकतींकिसी बहकावे में तुमऔर फिर अफवाह की भी बात क्या  कब यकीं करती थीं तुमइन पर प्रिये    आजपीना चाहता हूँ जबमैं अभी परिरंभ-घट मदिराऔर खोना चाहता हूँमरमरी बाहों में तुम्हारीहौसले के साथकि यह चतुर्दिक गश्त करतीमौत की खामोशी भयावहनहीं…See More
Apr 10
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a discussion

ओ लखनऊ-चैप्टर की साहित्य संध्या माह फरवरी 2020– एक प्रतिवेदन      -डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव

 ”मुझे वह लड़की कुछ असामान्य सी दिखी I मेरे सामने ही अकेली गुमसुम बैठी थी I मैं कुछ पूछना चाहती थी कि अचानक उसने उदास आँखों से मुझे देखते हुए कहा, ‘आज के दिन ही लगभग इसी समय मेरे पिता ने हमेशा के लिए आँखें बंद कर ली थीं I मैं अवाक् रह गयी I तो यह था उसकी बेचैनी का रहस्य I एक बेटी की संवेदना पिता के लिए I मैंने बहुतेरा सोचा कि इससे क्या कहूँ ? पर कुछ कह न पाई I बाद में मेरी वह संवेदना इस कविता में अभिव्यक्त हुयी –‘रहते हैं वे यहीं आस-पास / दिखाई न दें भले ही / पर देते हैं आभास / दर्पण के दूसरी ओर…See More
Mar 18
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted an event

ओपन बुक्स ऑन-लाइन.लखनऊ-चैप्टर at 37, रोह्तास एन्क्लेव

March 22, 2020 from 3pm to 7pm
नियमित मासिक गतिविधि - साहित्य-संध्या माह मार्च 2020 See More
Mar 16
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted an event

OBO LUCKNOW-CHAPTER at D 1/34, SECTOR-F, JANKIPURAM NEAR ENGG.. COLLEGE

February 23, 2020 from 4pm to 7pm
MONTHLY ACTIVITY 1- DISCUSSION ON TWO POEMS OF POETESS NAMITA SUNDAR 2-POEM RECITING See More
Feb 15
Samar kabeer commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post बिसासी सुजान(उपन्यास का एक अंश ) :: डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव
"जनाब गोपाल नारायण जी आदाब, सुंदर प्रस्तुति हेतु बधाई स्वीकार करें ।"
Feb 12

Profile Information

Gender
Male
City State
LUCKNOW (UTTAR PRADESH)
Native Place
LUCKNOW
Profession
RETD. GOVT. SERVANT
About me
Ph.D. in Hindi Lit. AND ACTIVE IN CREATIVE HINDI LITERATURE

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डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's Blog

मसीहा

अधूरा था

मेरा ज्ञान

सर्वभक्षी के बारे में

मै जानता था

केवल अग्नि है सर्व भक्षी



मगर

सब कुछ खाते थे वे

सांप, झींगुर,कीट –पतंग

यहाँ तक कि चमगादड़ भी

असली सर्वभक्षी तो ये थे

इन्हें पता था

प्रकृति लेती है बदला

पर उन्हें भरोसा था

कि वे बदल देंगे

अपने ज्ञान-विज्ञान से

विनाश की दशा और गति

पर जब हुआ

विनाश का तांडव्

फिर कोई न बचा पाया

और न कोइ…

Continue

Posted on April 22, 2020 at 1:30pm — 2 Comments

दूरियां

जब नहीं था

समय

तब तुम घूमती थी

और मंडराती थी

हमारे इर्द-गिर्द

करती थी परिक्रमा

और मैं देता था झिडक  

 

अब मैं

हूँ घर पर मुसलसल

साथ तुम भी हो

व्यस्तता भी अब नहीं कोई   

कितु मेरे पास तुम आती नहीं

परिक्रमा तो दूर की है बात

ढंग से मुसक्याती नहीं    

 

 

नहीं होता

यकीं इस बदलाव पर  

नहीं आ सकतीं

किसी बहकावे में तुम

और फिर अफवाह की भी बात क्या…

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Posted on April 10, 2020 at 1:51pm — 2 Comments

बिसासी सुजान(उपन्यास का एक अंश ) :: डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

हिन्दी की रीतिमुक्त धारा के शीर्षस्थ  कवि थे i उनकी प्रेमिका थी सुजान. जो दिल्ली के बादशाह मुहम्मदशाह 'रंगीले' के दरबार में तवायफ थी i इनके मार्मिक प्रेम की अनूठी दास्तान पर आधारित है-उपन्यास 'बिसासी सुजान ' i पेश है उसका एक अंश ----घनानन्द

[48]

          

       जून का महीना I शुक्ल पक्ष की नवमी I दिन का अंतिम प्रहर I सूर्यास्त का समय I  यमुना नदी का काली घाट I घाट पर सन्नाटा I चंद्रमा की किरणें यमुना की लहरों से खेलती हुयी I हल्की आनंददायक हवा I आनंद…

Continue

Posted on February 10, 2020 at 11:43am — 1 Comment

देश की संस्कृति

संस्कृति देश की है प्राचीनतम,

यह कथा गल्प अथवा कहानी नहीं

है ये अविराम थोड़ा लचीली भी है

पर पयस है महज स्वच्छ पानी नहीं

यह पली है सहनशीलता धैर्य में 

ऐसी उद्दाम कोइ रवानी नहीं

हैं उदात्त हम तो ग्रहणशील भी

और अध्यात्म की कोई सानी नही  

    

दूर भौतिक चमक से रहे हम सदा

ऐसी धरती कहीं और धानी नही

दे  गए पूर्वज जो हमें सौंपकर

वैसी अन्यत्र जग में निशानी नहीं

वन्दे मातरम् I     {मौलिक व…

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Posted on February 9, 2020 at 8:30am — 2 Comments

Comment Wall (53 comments)

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At 7:06pm on October 30, 2017, Alok Rawat said…

आदरणीय डॉक्टर साहेब
आपके द्वारा रचित खंडकाव्य मेघदूत का कथानक पढ़ा .बड़ा साहसिक कदम उठाया है आपने .आपने मेरी जिज्ञासा बहुत बढ़ा दी है .पूरा मेघदूत पढ़ने के लिए मन लालायित हो उठा है . आशा करता हूँ की बहुत जल्दी आपका खंडकाव्य पढ़ने को मिलेगा .महाकवि कालिदास की रचना का हिंदी काव्यानुवाद कितना बड़ा कार्य है और इसके लिए कितनी हिम्मत चाहिए मैं समझ सकता हूँ .किन्तु आपने इस कार्य को पूर्ण करके सामान्य जनमानस को भी मेघदूत की जो सौगात भेंट की है उसके लिए हिंदी साहित्य सदैव आपका ऋणी रहेगा . आप ऐसे ही पुनीत कार्य करते रहें .हमारी शुभकामनाएं सदैव आपके साथ हैं .

At 9:17pm on June 27, 2016, Sulabh Agnihotri said…

स्वागत है आदरणीय !

At 7:02pm on January 3, 2016, Sushil Sarna said…

नूतन वर्ष 2016 आपको सपरिवार मंगलमय हो। मैं प्रभु से आपकी हर मनोकामना पूर्ण करने की कामना करता हूँ।

सुशील सरना

At 12:44pm on September 23, 2015, gaurav bhargava said…

वह अगले साल आएगा - इस वाक्य में कौन सा कारक है?
1)  कर्म कारक
2) अपादान कारक
3) अधिकरण कारक
4) सम्बन्ध कारक

At 6:35pm on August 6, 2015, Harash Mahajan said…

आदरणीय डा. गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी कृतज्ञ हूँ सर !!

At 8:06pm on August 1, 2015, Prashant Priyadarshi said…

आ. गोपाल नारायन सर, ये घटना मेरे सामने की है(मेरे परम मित्र के साथ घटी हुई) इसीलिए मैंने इस पर लिखने का प्रयास किया है. एक प्रयास थी इस संवेदनशील मुद्दे पर लिखने की, काफ़ी कमियाँ रह गई हैं. सुधरा हुआ रूप निकट भविष्य में पुनः आप सभी श्रेष्ठ एवं गुणीजनों के समक्ष प्रस्तुत करूँगा. कहानी पर समय देकर मार्गदर्शन के लिए आपको कोटिशः धन्यवाद. आपके द्वारा इंगित किए गए बिन्दुओं  पर काम करके यह कहानी पुनः पोस्ट करूँगा.

At 12:16am on July 19, 2015, kanta roy said…
नतमस्तक हुई मै पाकर यह सम्मान , आदर में श्री माननीय डा. गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी आपके साथ ही ओबीओ की भी करती हूँ गुणगान ।
At 9:23am on June 5, 2015, Manan Kumar singh said…

'

यही है कविता का मर्म

नियम नहीं, धर्म नहीं

बस केवल कर्म'.....आदरणीय गोपाल भाईजी, बहुत बढ़िया, कविता कर्म प्रधान हो यह लक्ष्य होना चाहिए, सादर। 

At 2:07pm on April 16, 2015, jaan' gorakhpuri said…

बहुत बहुत आभार! आदरणीय डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव सर! स्नेह बनाये रक्खे!

At 5:37pm on February 28, 2015, maharshi tripathi said…

आ. डॉ गोपाल नारायण जी ,,,कविता के इस मंच पर ,,अपना मित्र बनाकर  आपने  मुझे पुरस्कार  दिया ,,आपका हार्दिक आभार और आशा है ,यूँ ही हम छोटों को आशीष देते रहेंगे |

 
 
 

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