For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

All Blog Posts

'तुरंत' के दोहे (पुच्छल )

प्रस्तुत है कुछ पुच्छल दोहे 

=====================

प्रेम और उत्साह जब ,पैदा करें तरंग | 

छोड़ कुसुम के तीर तब , विहँसे तनिक अनंग || 

मिलन का क्षण ही ऐसा | 

***

देश प्रेम की हर समय ,उठती रहे हिलोर | 

उन्नति की फिर देश में ,निश्चित होगी भोर || 

यही हो लक्ष्य हमेशा | 

***

ह्रदय सभी के आ सकें ,थोड़े से भी पास | 

फिर निश्चित इस देश में ,छा जाये…

Continue

Added by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on January 6, 2019 at 2:30pm — 5 Comments

विलीन ...


विलीन ...

क्या
मिटते ही काया के
सब कुछ मिट जाता है
शायद नहीं
जीवित रहते हैं
सृष्टि में
चेतना के कण
काया के
मिट जाने के बाद भी
मेरी चेतना
तुम्हारी चेतना से
अवशय मिलेगी
इस सृष्टि में
विलीन हो कर भी
काया के मिट जाने के बाद

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Added by Sushil Sarna on January 6, 2019 at 2:09pm — 2 Comments

राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ९०

२१२२ ११२२ ११२२ ११२/२२



अस्ल के बाद तो जीना है निशानी के लिए

ज़िंदगी लंबी है दो रोज़ा जवानी के लिए //१



यूँ ज़बां ख़ूब है ये तुर्रा बयानी के लिए

उर्दू मशहूर हुई शीरीं ज़बानी के लिए //२



लोग क्यों दीनी तशद्दुद के लिए मरते हैं

जबकि जीना था उन्हें जज़्बे रुहानी के लिए //३



नफ़्स के झगड़े हैं ने'मत से भरी दुन्या में

चंद रोटी के लिए तो, कभी पानी…

Continue

Added by राज़ नवादवी on January 6, 2019 at 1:18pm — 12 Comments

वन्दना (दुर्मिल सवैया)

कर जोड़ प्रभो विनती अपनी, तुम ध्यान रखो हम दीनन का।

हम बालक बृंद अबोध अभी, कुछ ज्ञान नहीं जड़ चेतन का

चहुओर निशा तम की दिखती, मुख ह्रास हुआ सच वाचन का

अब नाथ बसों हिय में सबके, प्रभु लाभ मिले तव दर्शन का ।।

मौलिक व अप्रकाशित

Added by नाथ सोनांचली on January 6, 2019 at 1:06pm — 2 Comments

दुर्मिल सवैया

उस देश धरा पर जन्म लिया, मकरंद सुप्रीति जहाँ छलके।

वन पेड़ पहाड़ व फूल कली, हर वक़्त जहाँ चमके दमके।

वसुधा यह एक कुटुम्ब, जहाँ, सबके मन भाव यही झलके

सतरंग भरा नभ है जिसका, उड़ते खग खूब जहाँ खुलके।।1।।

अरि से न कभी हम हैं डरते, डरते जयचंद विभीषण से।

मुख से हम जो कहते करते, डिगते न कभी अपने प्रण से

गर लाल विलोचन को कर दें, तब दुश्मन भाग पड़े रण से

यदि आँख तरेर दिया अरि ने, हम नष्ट करें उनको गण से।।2।।

हम काल बनें विकराल बनें, निकलें जब…

Continue

Added by नाथ सोनांचली on January 6, 2019 at 1:03pm — 6 Comments

हुस्न कोई नूरानी है



22 22 22 2



शायद    वह    दीवानी   है ।

लड़की   जो  अनजानी  है ।।

दिलवर से मिलना है क्या ।

चाल   बड़ी   मस्तानी  है ।।

इश्क़  हुआ है क्या  उसको ।

आँखों    में   तो   पानी  है ।।

खोए    खोए    रहते    हो ।

यह   भी   इक  नादानी  है ।।…

Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on January 6, 2019 at 11:55am — 3 Comments

ग़ज़ल

1222 1222 1222 1222

तरन्नुम बन ज़ुबाँ से जब कभी निकली ग़ज़ल कोई ।

सुनाता ही रहा मुझको मुहब्बत की ग़ज़ल कोई ।।

बहुत चर्चे में है वो आजकल मफ़हूम को लेकर ।

जवां होने लगी फिर से पुरानी सी ग़ज़ल कोई ।।

कभी यूँ मुस्कुरा देना कभी ग़मगीन हो जाना ।

वो छुप छुप कर तुम्हारी जब कभी पढ़ती…

Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on January 6, 2019 at 11:21am — 3 Comments

'बढ़ते क़दम' (संस्मरण/संवादात्मक शैली में)

"क्या कर रहे हो, गुड्डू अब तुम यहां? तुमने नई डिक्शनरी की पैकिंग आज भी नहीं खोली! कब से पढ़ना शुरू करोगे, बेटे?"

"नहीं पापा, मैं नहीं पढ़ूंगा! मैंने दिल्ली में ही पिछले विश्व पुस्तक मेले में कह दिया था कि ख़रीदो, तो मेरे पक्के दोस्त के लिए भी ख़रीदो!"

"बेटे, मैंने वैसे भी पांच हज़ार रुपए की पुस्तकें ख़रीद लीं थीं, इसलिए केवल तुम भाई-बहन के लिए ही दो डिक्शनरियां ख़रीदीं थीं। वहां तुम्हारे लिए भी तो कुछ ख़रीदना था दिल्ली के बाज़ार से!"

"कुछ भी हो, मेरे दोस्त को बहुत बुरा लगा है।…

Continue

Added by Sheikh Shahzad Usmani on January 6, 2019 at 8:52am — 3 Comments

हज़ारों बार क़ुदरत ने इशारा तो किया होगा  ........(११)

++ग़ज़ल ++(1222 1222 1222 1222 )

हज़ारों बार क़ुदरत ने इशारा तो किया होगा 

कभी नाहक कोई तूफ़ान शायद ही उठा होगा 

***

जुनूनी है जिसे मंज़िल नज़र भी साफ़ आती है 

वही अक़्सर अचानक नींद से उठकर खड़ा होगा 

***

समझ रक्खे कोई तो इश्क़ की गलियाँ नहीं देखे 

क़दम पहला उठाया वो यक़ीनन सरफिरा होगा 

***

नफ़ा-नुक़्सान उल्फ़त में लगाए कौन छोडो…

Continue

Added by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on January 5, 2019 at 4:30pm — 4 Comments

ग़ज़ल

२१२२,२१२२,२१२२,२१२

दिल मुहब्बत,लब ख़ुशी,चेह्रा हसीं,क्या शान है

लग रहा है मुझको तेरा नाम हिंदुस्तान है |

छत टपकती ,फर्श मिट्टी का ,मकाँ कच्चा सही

आज़मा ले तू ,बहुत पक्का मेरा ईमान है |

चाँद कल गुमसुम खड़ा था ,देख कर…

Continue

Added by Md. Anis arman on January 5, 2019 at 4:30pm — 8 Comments

ग़ज़ल: यही सवाल मेरे ज़ेह्न में उभरता है

1212,1122, 1212, 22/112

यही सवाल मेरे ज़ेह्न में उभरता है

वो ज़िंदगी के लिए कैसे रोज़ मरता है//१

चली है सर्द हवा पूस के महीने में

किसान खेत में रातों को आह भरता है//२

वो धीरे धीरे मेरे दिल मे यूँ उतर आया

कि जैसे चाँद किसी झील में उतरता है//३

अक़ीदा जोड़ के देखो किसी की उल्फ़त से

जहान सारा नई शक्ल में निखरता है//४

नया ज़माना है फ़ैशन का दौर है यारों

चमन में भौंर भी तितली सा अब सँवरता…

Continue

Added by क़मर जौनपुरी on January 5, 2019 at 1:00pm — 2 Comments

ग़ज़ल (यूँ ही धुआँ न अचानक उठा है गुलशन में)

(मफा इलुन _फ़ इ ला तुन _मफा इलुन _फ़े लुन)

यूँ ही धुआँ न अचानक उठा है गुलशन में l

लगी है आग यक़ी नन किसी नशे मन में l

मुझे है ग़म यही उन पर शबाब आते ही

मिलें न वैसे वो मिलते थे जैसे बचपन में l

न मैं सुकून से हूँ और न चैन से हो तुम

ये कैसी खींच ली दीवार हम ने आँगन में l

सितम भी ढाए तो वो मुस्कुरा के ही ढाए

यही तो ख़ास है फितरत हमारे दुश्मन में l

रखें या तोड़ दें बोलें ही सच हमेशा ये

मिले ये…

Continue

Added by Tasdiq Ahmed Khan on January 5, 2019 at 1:00pm — 12 Comments

गज़ल : जाम का मौजज़ा दिखा साक़ी

2122 1212 22

ग़ज़ल

*****

जाम आंखों से अब पिला साक़ी

होश मेरे तू अब उड़ा साक़ी//१

ज़िन्दगी भर रहा हूँ मैं काफ़िर

अपना कलमा तू अब पढ़ा साक़ी//२

इल्म के बोझ से परेशां हूँ

इल्म सारे मेरे भुला साक़ी//३

रंग मेरा उतर गया अब तो

रंग अपना तू अब चढ़ा साक़ी//४

बेख़ुदी ज़ीस्त में समा जाए

जाम ऐसा कोई पिला साक़ी//५

ख़्वाब आएं तो सिर्फ तेरे हों

ख़्वाब से ख़्वाब तू मिला साक़ी//६

हो गया मैं फ़ना…

Continue

Added by क़मर जौनपुरी on January 4, 2019 at 9:30pm — 6 Comments

ग़ज़ल : वो ज़हर का प्याला है, उठाना ही नहीं था

बह्र : 221   1221   1221   122

वो ज़हर का प्याला है, उठाना ही नहीं था

दुनिया की तरफ़ आपको जाना ही नहीं था

कानों में यहाँ रूई सभी बैठे हैं रख के

ऐसे में तुम्हें शोर मचाना ही नहीं था

खेतों में लहू देख के करते हो शिकायत

हथियार ज़मीनों में उगाना ही नहीं था

ये कौन जगह है कि जहाँ होश में सब हैं

हम रिन्द हैं हमको यहाँ लाना ही नहीं था

ताउम्र उसी शहर में ही भटका किया मैं

रहने को जहाँ कोई ठिकाना ही नहीं…

Continue

Added by Mahendra Kumar on January 4, 2019 at 8:00pm — 12 Comments

नए वर्ष की भोर ....

नए वर्ष की भोर  ....

क्षण

दिन, महीने

सब को बांधे

चल दिया

पुराना वर्ष

तम के गहन सागर को पार कर

दूर क्षितिज पर

नव वर्ष के गर्भ से

अंकुरित होते

सूरज की अगवानी करने



अच्छा बीता

बुरा बीता

जैसा भी बीता बीत गया

एक स्वप्न

स्वप्न रहा

एक यथार्थ जीत गया

नए वर्ष की भोर हुई

वर्ष पुराना बीत गया

जीती ख़ुशी

या दर्द जीता

जो भी जीता जीत गया

दर्द पुराना रीत गया

नए वर्ष की…

Continue

Added by Sushil Sarna on January 4, 2019 at 7:49pm — 7 Comments

ग़ज़ल: लगता है इस साल सनम कटनी तन्हाई मुश्किल है  ... (१० )

( २२ २२ २२ २२ २२ २२ २२ २ )

.

लगता है इस साल सनम कटनी तन्हाई मुश्किल है 

बीते लम्हों के सहरा से हैफ़* ! रिहाई मुश्किल है (*हाय-हाय ,अफ़सोस  )

***

ख्वाब तसव्वुर ख़त मौसम ये चाँद बहाने कितने हैं 

तेरी यादों के लश्कर से यार जुदाई मुश्किल है 

***

माना ग़म की मार पड़ी है चारों खाने चित्त हुआ 

कैसे भी हों मेरे अब हालात गदाई* मुश्किल…

Continue

Added by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on January 4, 2019 at 3:30pm — 7 Comments

"अज़ीम शख़्स की दास्तां"

जब वो कहता है तो वो कहता है 

रोक पाता नहीं उसे कोई , 

उसके आगे ना रंक, राजा है , 

कंठ में कोयल सा उसके वासा है ॥ 

जब भी कहता है सच ही कहता है 

जैसे बच्चा हृदय में रहता है , 

उसके…

Continue

Added by प्रदीप देवीशरण भट्ट on January 4, 2019 at 1:00pm — 8 Comments

प्रिय

तेरी मीठी बातों से ही

भरता मेरा पेट प्रिय,

जिस दिन तू गुमसुम रहती है-

भूखा मैं सो जाता हूँ !!

मैखाना, ये आँखें तेरी

पीने दे मत रोक प्रिय,

जब जब ये छलका करती हैं-

और बहक मैं जाता हूँ !!

रहता हूँ तेरे दिल में मैं

बनकर तेरा दास प्रिय,

जब भी टूटा है दिल तेरा-

तब मैं बेघर हो जाता हूँ !!

मदहोश सा कुछ हो जाता हूँ

जब होती हो तुम साथ प्रिय,

छू कर निकलूँ जो लव तेरे तो-

ज़ुल्फ़ों में खो जाता हूँ…

Continue

Added by रक्षिता सिंह on January 3, 2019 at 6:41pm — 4 Comments

एक वीर, ऐसा जन्मा था

इस भारत माँ की, धरती पर,

एक वीर, ऐसा जन्मा था, सोचा था तब, किसी ने

“ऐसा” कारनामा, उसे करना था

इस भारत माँ की, धरती पर,

एक वीर, ऐसा जन्मा था ||

 

जीवन के संघर्षो से, ना उसे कभी

डरना था, रूढ़िवादी धारा को भी,

उसे, आगे जा बदलना था

इस भारत माँ की, धरती पर,

एक वीर, ऐसा जन्मा था ||

 

सती हो जाती थी, जो नारी,

सुहाग गंवाने पर, “पुर्नविवाह”,

का अधिकार, उसे दिलाना था

महिलाओं के उत्पीड़न की…

Continue

Added by PHOOL SINGH on January 3, 2019 at 4:34pm — 2 Comments

गज़ल: चले भीआओ मेरे यार दिल बुलाता है

1212, 1122, 1212,22/112

*****

चले भी आओ मेरे यार दिल बुलाता है

यूँ रूठकर भी भला अपना कोई जाता है//1

सज़ा भी दे दो मुझे अब मेरे गुनाहों की

उदास चेहरा तुम्हारा नहीं सुहाता है//२

उदास तुम जो हुए ज़िंदगी उदास हुई

कोई भी जश्न मुझे अब नहीं हंसाता है//३

तुम्हारे दम से ही हर सुब्ह मेरी ज़िंदा थी

हर एक शाम का मंज़र मुझे रुलाता है//४

नज़र फिराई जो तुमने वो एक लम्हे में

हर एक लम्हा ही ठोकर लगा के जाता…

Continue

Added by क़मर जौनपुरी on January 3, 2019 at 2:30pm — 3 Comments

Monthly Archives

2026

2025

2024

2023

2022

2021

2020

2019

2018

2017

2016

2015

2014

2013

2012

2011

2010

1999

1970

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
14 hours ago
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Tuesday
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Sep 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Sep 17
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11
जगदानन्द झा 'मनु' replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय, प्रणाम संगहि संग हार्दिक धन्यवाद। अपनेक मार्गदर्शन पाबि बहुत बेसी मोटिवेशन आ सीखक मिलैए…"
Sep 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
Aug 18
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Aug 15
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
Aug 15
जगदानन्द झा 'मनु' added 2 discussions to the group मैथिली साहित्य
Aug 10

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service