Added by shashi bansal goyal on July 14, 2015 at 7:29pm — 10 Comments
मैं हूँ एक आवारा बादल
और मुझे एहसासों से
तरबतर करता पानी हो तुम
अपने आगोश में ले तुम्हें
मस्त हवाओं से हठखेलियाँ करता
दूर तक निकल जाता हूँ
अपार उर्जा से दमकता
गर्जन करता
इस मिलन का उद्घोष करता हूँ
मगर फिर ना जाने क्यूँ
तुम बिछुड़ जाती हो मुझसे
बरस जाती हो अपने बादल को छोड़
और देखो ...मैं बिखर जाता हूँ
मेरा अस्तित्व ही मिट जाता है
जानता हूँ
इस बंज़र ज़मीन को भी
तुम्हारी प्यास रहती है
अगर तुम न बरसो
तो नया सृजन कैसे…
Added by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on July 14, 2015 at 4:06pm — 6 Comments
घर से बाहर जिसे मैं ,
दर दर ढूँढता फिरा
वो बच्चा,
मेरे ही घर में छिपकर
मेरी बौखलाहट पे ,
हँसता रहा I
मै रहा देहरियाँ चूमता ,
मज्जिद बुतखाने की
मेरे दर पे बैठा वो ,
राह तकता रहा
मेरे घर लौट आने की I
ढली शाम , खाली हाथ
अब मैं हूँ लौट आया ,
किया ढूँढने में जिसे
सारा दिन जाया
हाय , घर के अन्दर उसे
मुस्कुराते पाया…
ContinueAdded by pratibha pande on July 14, 2015 at 11:30am — 14 Comments
Added by jyotsna Kapil on July 14, 2015 at 11:27am — 11 Comments
ईन्सान के रूप
है एक रूप पर कितने अलग, ईनसान जगत में होते हैं
कुछ जीने ना दें अपनों को, अपनों के लिये कुछ जीते हैं
बस सोचते किसने कितना दिया, अन्याय किया या न्याय किया
ऐसे ही उलझी बातों में कुछ व्यर्थ लगाते गोते हैं
कुछ संतोषि और तृप्त सदा, कुछ लाभ लोभ में लिप्त सदा
ज्यादा पाने की लालच में जो पास है अपने खोते हैं
अपनी मस्ती में जीते कुछ, नहीं कोई शिकायत दुनिया से
हर पल वो मौज मनाते हैं, खाते पीते और सोते…
ContinueAdded by K K Dwivedi on July 14, 2015 at 10:30am — 1 Comment
2 2 2 1 / 2 2 2 2 / 2 1 222
दिल में शायरी का जब भी दोर उट्ठेगा
सबसे पहले तेरे नाम का शोर उट्ठेगा !!
पहली बारिश की रिमझिम शुरू क्या हुई
देख आज बगिया में नाच मोर उट्ठेगा !!
तेज हवाएँ तेरे इश्क़ में कुछ चलीं ऐसी
दिल में एहसासों का बबंडर जोर उट्ठेगा !!
जब आयेगा धुवाँ पड़ोस के घर के चुल्हे से
तभी मेरे हाथ से ये खाने का कोर उट्ठेगा !!
बचा कर रखना ये दिल मेरी तीरंदाजी से
वर्ना लूटने 'इंतज़ार' के दिल का…
Added by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on July 14, 2015 at 9:34am — 21 Comments
लगातार हो रही वर्षा के पश्चात पुनः विद्यालय सुचारू रूप से चलना शुरू ही हुआ था कि चीख-पुकार मच गयी सभी अपनी -अपनी जान बचाकर भाग रहे थे।नया विवादित भवन पहली ही बरसात में विद्यार्थी और शिक्षकों की कब्र में परिवर्तित हो गया ।अधिकारीयों का तांता लगा रहा तत्काल प्रभाव से भेजी गयी रिपोर्ट में भवन का खण्डहर होने का कारण -
" अत्यधिक वर्षा से भूस्खलन " था।
और ठेकेदार की बहुमंजिली कोठी बरसते सावन में घी के दीयों से जगमगा रही थी।
मौलिक एवं अप्रकाशित
Added by Archana Tripathi on July 13, 2015 at 11:30pm — 13 Comments
बड़े से मंदिर की बड़ी सी मूर्ति के सामने हाथ जोड़कर खड़े एक बड़े आदमी ने कहा, "भगवन, हम सब जानते हैं कि प्रकृति उसी का चुनाव करती है जो सबसे शक्तिशाली होता है। जो प्रजाति कमजोर होती है और अपनी रक्षा नहीं कर पाती वो मिट जाती है। इस तरह सीमित संसाधनों का सबसे शक्तिशाली प्रजातियों द्वारा उपयोग किया जाता है और उसी से ये दुनिया विकसित होती है। तो भगवन मैंने जो मज़दूरों, गरीबों, कमजोरों और लाचारों का अपने फ़ायदे के लिए इस्तेमाल किया है वो मैंने एक तरह से प्रकृति की मदद ही की है। ऊपर से मैंने आपका ये…
ContinueAdded by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on July 13, 2015 at 9:30pm — 10 Comments
नास्तिक बाबूजी को देर रात ,चुपके से पूजाघर से निकलते देख मानस की उत्सुकता जाग गई,और पुलिसिया मन शंकित हो उठा।वो चुपके से उनके पीछे चल पड़ा।
उन्होंने हाथ में पकड़ा लड्डू माँ की ओर बढ़ा दिया
" लो खा लो "
" ये कहाँ से लाए आप ?"
"पूजा घर से "उन्होंने निगाह चुराते हुए कहा।
उसकी आँखें भर आयीं अपनी लापरवाही पर। घर में सौगात में आये मिठाई के डिब्बों का ढेर मानो उसे मुँह चिढ़ा रहा था।
( मौलिक एवम अप्रकाशित )
Added by jyotsna Kapil on July 13, 2015 at 7:00pm — 17 Comments
कवि
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आत्मावलोकन
-----------------
सभागार
खचा खच था भरा
कुछ सहमा सा
कुछ डरा डरा
खड़ा मैं किनारे धरे मौन
उसने
पूछा परिचय
मैं हूँ कौन ?
सकपकाया थर्राया
फिर तोडा मौन
तुम कौन ?
कभी अपने को जाना
नही समझोगे
व्यर्थ समझाना
मैं कवि हूँ अदना सा
नही हूँ डॉन
हकीकत
---------
भीतर घुसा
ढाढ़स कुछ पाया
अंधियारे में कुछ
समझ न आवा…
Added by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on July 13, 2015 at 5:07pm — 4 Comments
बस इतनी सी मेहर रखना
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(लक्ष्य “अंदाज़”)
हम फकीरों से घर की उम्मीद न इधर करना !
ढल जाये शाम तो दरख्त तले भी बसर करना !!
राहे-उल्फत में तुम हवा के परों पर सवार हो ,
अहले-ज़मीं हैं हम ,बस सड़क पे सफ़र करना !!
फूल मुहब्बत के तारीखे-शुआओं से जल गए ,
कोंपलों की आस में अब भी क्यूँ शज़र रखना !!
तुम्हारी हर दुआ कुबूल है उस इलाही के दर ,
दुआओं में याद रखना बस इतनी…
ContinueAdded by डॉ.लक्ष्मी कान्त शर्मा on July 13, 2015 at 2:30pm — 4 Comments
Added by kanta roy on July 13, 2015 at 1:30pm — 18 Comments
पेड़ के बगल ही खड़ी हो पेड़ से प्रगट हुई स्त्री ने पूछा , “अब बताओ इस रूप में ज्यादा काम की चीज और खूबसूरत हूँ या पेड़ रूप में |
पेड़ बोला , “खूबसूरत तो मैं तुम्हारे रूप में ही हूँ , पर मेरी खूबसूरती भी कम नहीं | काम का तो मैं तुमसे ज्यादा ही हूँ |”
” न ‘मैं’ हूँ |”
पेड़ ने कहा, ” न न ‘मैं’ ”
पेड़ ने धोंस देते हुए कहा , “मुझे देखते ही लोग सुस्ताने आ जाते हैं |जब कभी गर्मी से बेकल होते हैं |”
“मुझे भी तो |” रहस्यमयी हंसी हंसकर बोली स्त्री
“मुझसे तो छाया और सुख मिलता हैं…
Added by savitamishra on July 13, 2015 at 12:00pm — 13 Comments
२२ २२ २२ २२ २२ २२ २२ २
.
दूजे में हमको जो अक्सर दोष दिखाई देता है
अपने में तो वो खूबी का कोष दिखाई देता है
उथला पथली हो लहरों की, चाहे समझो अँगडाई
हम को तो सागर का लेकिन रोष दिखाई देता है
कितना टूटा होगा बादल खुद की हस्ती को खोकर
लेकिन नभ के मुख दर्पण में तोष दिखाई देता है
जिसके मन में खोट नहीं है उसको लगता सब अच्छा
पतझड़ में भी जीवन का उद्धोष दिखाई देता है
खुशियाँ हो तो…
ContinueAdded by rajesh kumari on July 13, 2015 at 11:30am — 17 Comments
“सुन बेटा!! बारिश तो ठीक हुई और खेतों में नमी पर्याप्त है, बस बीज को सही नमी और शुष्कता के बीच में ही बोना, अंकुरण का प्रतिशत अच्छा रहेगा. ज्यादा गहरी नमी में मत उतार देना, वरना सड जायगा..” रमेश ने अपने बेटे को खेत में बोनी करने से पहले समझाते हुए कहा
“ जी पिताजी.. मैं आपकी बात समझ गया, सब संभाल लूँगा. आप घर जा रहे हो, अगर हो सके तो छोटू के खाते में कुछ पैसे जमा कर आना. कल उसका फोन आया था. वहां शहर में गर्मी बहुत है पंखे से काम नहीं चलता, तो कूलर का कह रहा था..” बेटे ने काम…
ContinueAdded by जितेन्द्र पस्टारिया on July 13, 2015 at 11:02am — 5 Comments
इधर गॉव से ताई जी अपने परिवार के साथ, पूरे बीस दिन के लिये आ गयीं थी! उधर पिछले तीन दिन से काम वाली बाई नहीं आरही थी!
आखिरकार पांच दिन बाद बाई जी आईं!जैसे ही बाई रसोई की तरफ़ बढी, ताई जी ने कडकती आवाज़ में उसे रोक दिया"ए रुको, पहले बताओ तुम कौन जाति की हो"!
"किसलिये, कोई रिश्ता करना है क्या"!
"अरे यह तो बडी मुंहफ़ट है"!
“क्यों बुरा लगा ना"!
"तुमको जाति बताने में क्या परेशानी है"!
"हमने तो कभी आपसे आप की जाति नहीं पूछी"!
"अरे वाह,तुम किसलिये…
ContinueAdded by TEJ VEER SINGH on July 13, 2015 at 11:00am — 7 Comments
1222 1222 122
बहारों पर् चलो चरचा करेंगे
ख़िजाँ का ग़म ज़रा हलका करेंगे
कभी सोचा नहीं, हम क्या बतायें
न होंगे ख़्वाब तो हम क्या करेंगे
सजा दे , हक़ तेरा है हर खता की
उमीदें रख न हम तौबा करेंगे
अगर जुगनू सभी मिल जायें, इक दिन
यही सर चाँद का नीचा करेंगे
सँभल जा ! हम इरादों के हैं पक्के
कि, मर के भी तेरा पीछा करेंगे
जिया अन्दर का बाहर आ तो जाये
सर इब्ने सुब्ह को नीचा…
ContinueAdded by गिरिराज भंडारी on July 13, 2015 at 8:30am — 18 Comments
2122 2122 2122 212
या तो चाहत इश्क़ में थी या खुदा पाने में थी
एक समंदर की सी तमन्ना आँख के दाने में थी
बेगुनाही एक जिद इक़बाल जब तेरी ख़ुशी
और मेरी हर सजा तेरे बिछड़ जाने में थी
होश के इस फैसले से क्या मुझे हासिल हुआ
ज़िन्दगी की हर ख़ुशी छोटे से पैमाने में थी
सांस लेता है ये जाने कौन किसका जिस्म है
ज़िन्दगी तो अपनी तेरे गम के वीराने में थी
ये नहीं हासिल हुआ या वो नहीं मुमकिन हुआ
कशमकश ये हर घडी इस दिल को थर्राने में…
Added by मनोज अहसास on July 13, 2015 at 8:30am — 14 Comments
हाइकू
१
मित्र हैं वही
जो न तोड़े विश्वास
शेष तो साथी
२
दूसरों पर
न करो दोषारोपण
यही बहुत
३
परोपकार
खुशबू चन्दन
करुना बसी
४
निराश न हों
असफलता देती
प्रेरणा नई
५
धन प्राप्ति से
दरिद्रता न मिटे
वित्तेष्णा छोडो
६
खरीददारी में
खुश होने का भ्रम
पाले रईस
७
जुंबा पर आये
पुरानी कई यादें
प्यार बढाए
८
कह के बात
खुले मन…
Added by Manisha Saxena on July 13, 2015 at 12:12am — 4 Comments
चाँद मेरा आया है....
क्यों अपने रूप पे
ऐ चाँद तूं इतराया है
आसमां के चाँद सुन
मेरे चाँद का तू साया है
अक्स पानी में तेरा तो
इक हसीँ छलावा है
अक्स नहीं हकीकत है वो
जो इन बाहों में समाया है
वो ख़्वाब है मेरी नींदों का
हकीकत में हमसाया है
अपने हाथों से ख़ुदा ने
महबूब को बनाया है
एक शबनम की तरह
वो हसीं अहसास है
देख उसके रूप ने
तेरे रूप को हराया है
किसकी ख़ातिर बेवज़ह
देख तू शरमाया है
मुझसे मिलने चांदनी…
Added by Sushil Sarna on July 12, 2015 at 10:43pm — 4 Comments
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