भक्त ने भगवान से कहा, "भगवन! आपके पास जितना ज्ञान है वो सारा का सारा मुझे भी प्रदान कर दीजिए।"
भगवान बोले, "तथास्तु।"
भक्त को दुनिया की सारी कविताएँ, कहानियाँ, उपन्यास, नाटक और धर्मग्रन्थ इत्यादि याद हो गए। उसे हर तरह की कला एवं संगीत का पूर्ण ज्ञान प्राप्त हो गया। उसे दर्शन एवं विज्ञान के सभी सिद्धान्त याद हो गए। इस तरह वह परमज्ञानी हो गया।
उसने अपनी कलम उठाई और एक कविता लिखने का प्रयास करने लगा। कुछ पंक्तियाँ लिखने के बाद उसे लगा कि इस तरह की कविता तो अमुक भाषा में…
ContinueAdded by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on July 12, 2015 at 10:30pm — 13 Comments
एक व्यक्ति का नौकर उसके रुपये चोरी करके चला गया|
दूसरे व्यक्ति ने कहा "जो बेईमानी और चोरी के रूपए से अपना घर बनाता है वो कभी सुखी नहीं रह सकता"
पहले ने चौंक कर दूसरे की तरफ देखा और व्याकुल होकर कहा, "नहीं, आजकल ऐसा तो नहीं होता"
(मौलिक और अप्रकाशित)
Added by Dr. Chandresh Kumar Chhatlani on July 12, 2015 at 10:00pm — 6 Comments
"मैंने अपना लंच बॉक्स खुद पैक कर लिया है, निकल रहा हूँ मै।"
"आज इतनी जल्दी क्या है निखिल को' रचना सोचने लगी I
उसने बाहर कमरे में आकर समय देखा, दस बज गए थेI आज उसे हर हाल में दो बजे से पहले पोस्ट ऑफिस जाकर अपनी कविता पोस्ट कर देनी है I लगभग एक महीने पहले अपने बेटे को हिंदी कविता पढ़ाते समय उसके दिमाग़ में एक बहुत पुराना दबा हुआ कीड़ा फिर रेंगने लगा थाI कॉलेज के दिनों में वो कविता लिखती थी और तारीफ भी पाती थीI फिर सब छूट गयाI कुछ दिन पहले एक अखबार में उसने कविता भेजने का आमंत्रण पढ़ कर…
Added by pratibha pande on July 12, 2015 at 4:00pm — 7 Comments
Added by kanta roy on July 12, 2015 at 1:33pm — 10 Comments
कवि सम्मेलन
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ट्रिन-ट्रिन
''हेलो '' लेखक मंडी
''दो दर्जन कवि , दोपहर ११ बजे , राम नाथ हाल, बेहाल मंडी भेज दीजिए''
''दहाड़ी कितनी ?
फिर दिमाग खराब हो गया तुम्हारा , दूसरे जिले से मंगवा लूँ ?मारे -मारे घूम रहे हैं। न इन्हें कोई सुनता , न छापता और न ही पढता।
'' फिर भी , कुछ तों देना ही होगा ''
'' २ टाइम चाय, बिस्कुट., ''
''बस, और कुछ नही भूखे मर जायेंगे बेचारे ''
''अभी कौन जिन्दा है ''
''कुछ तों बढाइये , बाल बच्चे दार…
Added by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on July 12, 2015 at 12:30pm — No Comments
‘अरे बहू ! चाय नहीं लाई अभी तक, और अखबार कहाँ है, मेरा शेव का सामान भी नज़र नहीं आ रहा।’
‘बाबू जी, पहले बच्चों को तैयार करके स्कूल भेज दूँ फिर आपके लिए चाय बनाती हूँ। अखबार तो अभी मुन्नी के पापा पढ़ रहें है आप बाद में आराम से पढ़ लेना। और अब आपको हर रोज़ दाढ़ी बनाने की क्या ज़रूरत ही ? आपको अब कौन सा दफ्तर जाना है।’…
ContinueAdded by Ravi Prabhakar on July 12, 2015 at 11:00am — 11 Comments
२१२२-२१२२-२१२२-२१२
आपका आना हमारी ज़िन्दगी में यूँ हुआ
दिन बड़े ख़ुशहाल रातें भी सुहानी हो गई
जो सुनी थी या पढ़ी हमने किताबों में फ़क़त
आज बातें वो सभी मेरी कहानी हो गई
चाहतें कोई नहीं , बन्धन न था कोई यहाँ
आपकी मेरी ये' यारी बस रुहानी हो गई
आज दुनिया कर रही अपनी वफ़ाओं काे बयाँ
देखकर मेरी वफ़ा देखो सयानी हो गई
इस क़दर था पुर असर उनका वो* अन्दाज़े बयाँ
सुन कहानी कान्त ये दुनिया दिवानी हो गई ।।
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मौलिक…
Added by K K Dwivedi on July 12, 2015 at 10:00am — 6 Comments
२२१२ २२१२ २२
फ़रियाद ये मेरी सुनो कोई
दो इश्क में मुझको डबो कोई
..
सात आसमां पार उनका गर है शह्र
कू-ए-सनम ही ले चलो कोई
..
है दोजखो जन्नत मुहब्बत में
आशिक हो पर शायर न हो कोई
..
जाने गज़ल तुम मुझको दो थपकी
बरसों न पाया मुझमें सो कोई
..
‘जान’ आखिरी वख्त अपना जाने कौन?
लो प्रीत के मनके पिरो कोई
.
जीने की ख्वाहिश फिर न जाग उट्ठे
मरता हूँ नाम उस का न लो…
ContinueAdded by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on July 12, 2015 at 9:30am — 11 Comments
मुरली तो मन मोहनी, हरे जगत की पीर.
उसे चुरा कर राधिका, स्वयं हुई गम्भीर.
मुरली हर मन मोहती, लिये फकीरी रूप.
सरस कण्ठ निष्काम रख,…
ContinueAdded by केवल प्रसाद 'सत्यम' on July 11, 2015 at 8:30pm — 4 Comments
“अरे बाबा ! आप किधर जा रहे है ?,” जोर से चींखते हुए बच्चे ने बाबा को खींच लिया.
बाबा खुद को सम्हाल नहीं पाए. जमीन पर गिर गए. बोले ,” बेटा ! आखिर इस अंधे को गिरा दिया.”
“नहीं बाबा, ऐसा मत बोलिए ,”बच्चे ने बाबा को हाथ पकड़ कर उठाया ,” मगर , आप उधर क्या लेने जा रहे थे ?”
“मुझे मेरे बेटे ने बताया था, उधर खुदा का घर है. आप उधर इबादत करने चले जाइए .”
“बाबा ! आप को दिखाई नहीं देता है. उधर खुदा का घर नहीं, गहरी खाई है…
ContinueAdded by Omprakash Kshatriya on July 11, 2015 at 6:00pm — 18 Comments
" पिताजी , मुझे प्रोन्नत कर आप ही के दफ़्तर में स्थानांतरित कर दिया गया है ।निर्णय नहीं कर पा रहा हूँ , बेटे या बॉस की भूमिका में किसे चुनूँ ? "
" 'अफकोर्स !' बॉस की ।रहा तुम्हारे अधीन काम करना , तो बेटा.. , पिता भले ही संतान को ऊँगली पकड़कर चलना सिखाये परंतु , उसे पिता होने का वास्तविक अहसास तभी होता है , जब संतान के कदम , आगे हों और हाथ लाठी बन पीछे ।
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मौलिक व अप्रकाशित ।
Added by shashi bansal goyal on July 11, 2015 at 5:00pm — 10 Comments
प्यार करना न अब तुम सिखाना मुझे
पास फिर से बुला मत जलाना मुझे
जिन्दगी बेवफाई करे भी तो क्या
मौत को रूठने से मनाना मुझे।
चार कन्धे चढ़े वो चले जा रहे।
कुछ नहीं पास उनके दिखाना मुझे।
वो नहीं है किया प्यार जिससे कभी
याद उसकी न यारो दिलाना मुझे
मैं मनाता नही कोई उत्सव मगर
दीप दिल से जले तो बताना मुझे
हर तरफ जो अँधेरा जमीं पे अभी
जान दे भी उसे है मिटाना मुझे
रात भर अश्क गम में बहे क्यों सनम
दोस्त को…
ContinueAdded by Akhand Gahmari on July 11, 2015 at 10:30am — 4 Comments
Added by kanta roy on July 11, 2015 at 9:00am — 4 Comments
1222 1222 1222 122
क़रीब आ ज़िन्दगी, तुझको समझना चाहता हूँ
मैं ज़र्रा हूँ , तेरी बाहों में फिरना चाहता हूँ
समेटा खूब , खुद को, पर बिखरता ही गया मैं
ग़ुबारों की तरह अब मैं बिखरना चाहता हूँ
जमा हर दर्द मेरा एक पत्थर हो गया है
ज़रा सी आँच दे , अब मैं पिघलना चाहता हूँ
तेरी आँखों मे देखी थी कभी तस्वीर खुद की
जमाना हो गया , मै फिर सँवरना चाहता हूँ
लगा के बातियाँ उम्मीद की ,दिल के दिये…
ContinueAdded by गिरिराज भंडारी on July 11, 2015 at 9:00am — 12 Comments
"चलो पापा, आज मैँ आप को शाम की सैर करवा लाती हूँ।" नन्ही तनु की बात सुनकर कई दिन से बिस्तर पर पड़े बीमार राज के चेहरे पर मुस्कान आ गयी।
दूर अस्त होते सूर्य की बिखरती लालिमा और शांत सुहानी शाम के साथ, बेटी के चेहरे पर बड़ो जैसा विश्वास राज को बहुत भला लग रहा था। अनायास तनु उसे लगभग खींचते हुये एक जगह ले गयी और अपनी प्यारी आवाज में बोली। "पापा पापा देखो, यही पर छोड़ गयी थी ना मुझको एक 'ऐंजल'! 'ममा' ने बताया है मुझे।"
और अचानक ही अतीत को याद कर राज की आँखे भीग गयी। "क्या हुआ पापा?"…
Added by VIRENDER VEER MEHTA on July 11, 2015 at 7:30am — 7 Comments
माँ पढ़ लेती है
अपनी मोतियाबिंदी आखों
और मोटे फ्रेम के चश्मे से
रामायण की चौपाइयां
हिंदी अखबार की
मुख्य मुख्य ख़बरें
यहाँ तक कि,
मोबाइल में
अंग्रेज़ी में लिखे नाम भी
पढ़ लेती हैं
कि यह छोटके का फ़ोन है
कि यह बड़के का फ़ोन है
कि बिटिया ने फ़ोन किया है
भले ही बड़ी बड़ी किताबें न पढ़ पाती हों
पर आज भी पढ़ लेती हैं
हमारा चेहरा
हमारा मन
हमारा दुःख
हमारी तकलीफ…
Added by MUKESH SRIVASTAVA on July 10, 2015 at 11:29am — 4 Comments
एक
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मेरा नाम बिट्टो है,
कल मेरे गाँव का मेला है
सब खुश हैं
मेरी सहेली चुनिया
कह रही थी वह अब की
कान के बुँदे और कंगन लेगी
गुड्डू कह रहा था
वह इस बार बाबू से कह के
मेले में नुमाइश देखेगा
मेरा छुटका भाई
बैट बाल लेगा
अम्मा अपना टूटा तवा बदलेंगी
बाबू कुछ नहीं लेंगे
और मै भी कुछ नहीं लूंगी
क्यों कि हमें मालूम है
उनके पास बहुत ज़्यादा पैसे नही हैं
मै सिर्फ चुपचाप मेला देख के आ जाऊँगी…
Added by MUKESH SRIVASTAVA on July 10, 2015 at 11:00am — 3 Comments
शंभू सिंह्जी पत्नी के देहांत के बाद, बेटे ब्रिगेडियर बाबू सिंह के साथ रहने लगे थे! ब्रिगेडियर साहब के बंगले पर रात को पार्टी चल रही थी!
आउट हाउस में शंभू सिंह जी रात के खाने का इंतज़ार कर रहे थे! पार्टी के कारण किसी को शंभू सिंह को खाना देने की याद ही नहीं रही !
शंभू सिंह जी की, लेटे लेटे , कब आंख लग गयी ,पता ही नहीं चला!
सुबह ब्रिगेडियर साहब का अर्दली चाय लेकर आया तो शंभू सिंह जी पूछ बैठे,"रात को किस बात की पार्टी थी"!
"जन्म दिन की"!
शंभू सिंह जी…
ContinueAdded by TEJ VEER SINGH on July 10, 2015 at 10:30am — 13 Comments
झरना फूटा
संगीत फ़ैल गया
हुआ बावरा
यात्रा अनंत
लक्ष्य का पता नहीं
चलाचल रे
नदी की धारा
रोके नही रूकती
हारीं चट्टानें
मानव मन
उड़ने को आतुर
पंख फैलाये
कोलाहल में
गहराया एकांत
भागी उदासी
.
यह मेरी अप्रकाशित और मौलिक रचना है
डॉ.बृजेश कुमार त्रिपाठी
Added by Dr.Brijesh Kumar Tripathi on July 10, 2015 at 8:30am — 4 Comments
अचानक उसकी नज़र सड़क पर धीमी बत्तियों में खड़ी एक लड़की पर पड़ी | हाड़ कंपा देने वाली ढंड में भी , जब वो सूट पहने अपने कार में ब्लोअर चला के बैठा था , लड़की अत्यंत अल्प वस्त्रों में खड़ी थी | फिर समझ में आ गया उसे , ये कॉलगर्ल होगी |
उसने कार उसके पास रोकी , लड़की की आँखों में चमक आ गयी | आगे का दरवाज़ा खोलकर उसने अंदर आने को बोला और उसके बैठते ही बोला " देखो , मैं तुम्हे पैसे दे दूंगा , मुझे अपना ग्राहक मत समझना | इस तरह खड़ी थी , क्या तुम्हें ठण्ड नहीं लगती "|
लड़की ने एक बार उसकी ओर देखा और…
Added by विनय कुमार on July 9, 2015 at 8:53pm — 10 Comments
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