" अरे ,रे , ये क्या कर दिया तूने | काट दिया उस पौधे को भी घाँस के साथ "| शर्माजी एकदम से चिल्ला पड़े उस छोटी लड़की पर जिसने उनसे उनकी लॉन में से घाँस काटने के लिए पूछा था |
पेपर को किनारे रखते हुए वो उठे और लगभग धक्का देते हुए उसे लॉन से बाहर निकाल दिया | " पता नहीं फिर ये अंकुरित होगा या नहीं , कितने प्यार से लगाया था "|
छोटी लड़की उदास बाहर निकल गयी | पेपर उड़ कर घाँस पर आ गिरा , उसमे हेडलाइंस चमक रही थीं " इस साल फिर एक लड़की ने टॉप किया सिविल सर्विसेज में "|
मौलिक एवम…
ContinueAdded by विनय कुमार on July 7, 2015 at 2:28am — 12 Comments
बेटियाँ कभी उदास नहीं होतीं !!
वो तो होती हैं-
सृष्टि की अद्भुत कल्पना
आनंददायक भावना।
वो रहती हैं-
आँगन की हवाओं में
पिता की दुआओं में ।
तभी तो खिल जाती है
एक स्नेहिल मुस्कान
हर लेती जो कितनी थकान।
बांटती है हमेशा-
खुशियों की सत्त्व-दीप्ति
मधुर जीवन संस्कृति।
वैसी कोई दूजी सुवास नहीं होती ।
क्योकिं बेटियाँ कभी उदास नहीं होतीं !!
वो तो दूर करती हैं-
उदासी, दोनों ही घरों…
ContinueAdded by विनय कुमार on July 6, 2015 at 8:00pm — 16 Comments
लैपटाप बेटी के हाथों में देख माता -पिता प्रसन्न थे हो भी क्यों न आखिर चीफ़ मिनिस्टर साहब से जो मिला था | उनकी बेटी पुरे गाँव में अकेली प्रतिभाशाली छात्रों में चुनी गयी थी |
पूरा कुनबा लैपटाप के डिब्बों में कैद तस्वीरें देखने बैठ गया |
"बिट्टी इ सब का हैं ? लाल-पीला |" माँ पहली बार रंगबिरंगे भोजन को देख पूछ बैठी |
"अम्मा, ये लजीज पकवान हैं | बड़े बड़े होटलों में ऐसे ही पकवान परोसे जाते हैं और घरो में भी ऐसे ही तरह तरह का भोजन करते हैं लोग |"
"और दाल रोटी ?"
"अम्मा, दाल…
Added by savitamishra on July 6, 2015 at 7:30pm — 19 Comments
1.
फैलुन फैलुन फैलुन फैलुन फाइलुन
२२ २२ २२ २२ २१२
बहरे मुतदारिक कि मुजाहिफ सूरत
************************************************************************************************************************
जब से वो मेरी दीवानी हो गई
पूरी अपनी राम कहानी हो गई
काटों ने फूलों से कर लीं यारियां
गुलचीं को थोड़ी आसानी हो गई
थोड़ा थोड़ा देकर इस दिल को सुकूं
याद पुरानी आँख का पानी हो गई
सारे बादल…
ContinueAdded by Rana Pratap Singh on July 6, 2015 at 7:00pm — 28 Comments
बह्र : २२ २२ २२ २२ २२ २
हुस्न का दरिया जब आया पेशानी पर
सीख लिया हमने भी चलना पानी पर
राह यही जाती रूहानी मंजिल तक
दुनिया क्यूँ रुक जाती है जिस्मानी पर
नहीं रुकेगा निर्मोही, मालूम उसे
फिर भी दीपक रखती बहते पानी पर
दुनिया तो शैतान इन्हें भी कहती है
सोच रहा हूँ बच्चों की शैतानी पर
जब देखो तब अपनी उम्र लगा देती
गुस्सा आता है माँ की मनमानी पर
----------
(मौलिक एवं…
ContinueAdded by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on July 6, 2015 at 6:30pm — 24 Comments
अम्मा फ़ैल कर जमीन पर बैठी आवाज़ करके चाय सुड़क रही थी I मैं अपने दोनों बच्चों के चेहरों पर, अम्मा को लेकर चिढ साफ़ देख पा रही थी I
" सविता , तू डब्बा भर के मट्ठियाँ क्यों नहीं बना के रख लेती ,I सुबह शाम पकड़ा दिया कर इनके हाथों में I दिन भर तंग करते हैं ये बना वो बना I"
" माँ , इन्हें पसंद नहीं है मट्ठियाँ I"
" पसंद नहीं हैं ? अरे तुम्हारी मम्मा की बुआ , गर्मी की छुट्टियों में आती थी , दो महीने के लिए अपने…
ContinueAdded by pratibha pande on July 6, 2015 at 6:16pm — 12 Comments
1222 / 1222 /1222 / 1222
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जमाना बाज कब आता है हमको आजमाने से
न हो जाना कहीं जख्मी कभी इसके निशाने से
हमेशा जंग वो जीता किये हों सर कलम जिसने
कभी जीता नही कोई भी अपना सर कटाने से
करे जो बात दुनिया की उसी की लोग सुनते हैं
किसी को वास्ता कैसा भला तेरे फसाने से
कभी धेला तलक बांटा नहीं जिसने कमाई का
लगा है बांटने सिक्के वो सरकारी खजाने…
ContinueAdded by Sachin Dev on July 6, 2015 at 3:00pm — 22 Comments
एक दिन वह अपने जर्मन शेफर्ड को सुबह घुमाने ले गई तो गलती से एक व्यक्ति के घर पर बंधा पामेरियन भी था , पामेरियन भौंका तो टाइगर ने जंजीर को तेजी से छुड़ाते हुए पास में बंधे एक पामेरियन को दबोच लिया ।
"टाइगर इधर आओ छोड़ो उसको " बिटिया चिल्लाई
वहां खड़े और लोग भी पामेरियन को बचाने में जुट गये। और उस लड़की को भला बुरा कहने लगे:
"जब आप से कुत्ता नहीं सम्भलता तो इसे पालते क्यों हो ?
तभी किसी ने टाइगर के सर पर तेजी से लोहे की रॉड से…
Added by Pankaj Joshi on July 6, 2015 at 3:00pm — 4 Comments
वो मुझे साथ लेकर गया, उसे चुपचाप इंसान ढूंढना था|
सबसे पहले उसने मिलाया एक नामी शिक्षक से, जो बात करने में तेज़ था, लेकिन खुद नकल कर के उत्तीर्ण होता था|
फिर उसने मिलाया एक बड़े चिकित्सक से, जो अपनी चिकित्सा की पद्धति को सबसे अच्छा कहता और बाकी को बुरा|
फिर मिलाया तीन भिखारीयों से, जो अपने धर्म…
Added by Dr. Chandresh Kumar Chhatlani on July 5, 2015 at 10:28pm — 8 Comments
Added by kanta roy on July 5, 2015 at 9:35pm — 13 Comments
बाबूजी जी के श्राद्ध कर्म में वे सारी वस्तुएं ब्राह्मण को दान में दी गयी जो बाबूजी को पसंद थे. शय्या-दान में भी पलंग चादर बिछावन आदि दिए गए. ऐसी मान्यता है कि स्वर्ग में बाबूजी इन वस्तुओं का उपभोग करेंगे. लोगों ने महेश की प्रशंशा के पुल बांधे।
"बहुत लायक बेटा है महेश. अपने पिता की सारी अधूरी इच्छाएं पूरी कर दी."
"पर दादाजी को इन सभी चीजों से जीते जी क्यों तरसाया गया?"- महेश का बेटा पप्पू बोल उठा.
.
(मौलिक व अप्रकाशित )
Added by JAWAHAR LAL SINGH on July 5, 2015 at 8:30pm — 22 Comments
कम्पनी में गबन के आरोप में वह आज पांच साल की कैद काट कर वह जेल से छूटा तो सीधे दिव्या के घर पहुँचा । दिव्या नहीं मिली । वह काम पर गई थी । उसने उसके मोबाइल पर उसी जगह मिलने का समय दिया जहाँ वह अक्सर मिला करते थे ।
"मुझे भूल जाओ तुम । अब मेरी जिंदगी में तुम्हारे लिये कोई जगह नहीं है ।" सिगरेट सुलगाते ही उसकी आवाज सुनाई दी ।
"पर यह सब तो मैंने तुम्हारी ख़ुशी के लिये किया था ? " सुनते ही उसका दिल रो पडा जैसे ।
"मेरी ख़ुशी या अपने स्वार्थों की पूर्ति के लिये ....! मेरी ख़ुशी तो…
ContinueAdded by Pankaj Joshi on July 5, 2015 at 5:30pm — 6 Comments
Added by shree suneel on July 5, 2015 at 5:00pm — 38 Comments
एक नदी पर एक पुल था , जिसमे सात पाये थे। एक बार सबसे बीच वाले पाए ने सबसे किनारे वाले पाए से कहा “जानते हो यह पुल मेरी वजह से ही है। नदी की जलधारा का सबसे ज्यादा प्रवाह मैं ही झेलता हूँ। मैं हमेशा पानी में डूबा रहता हूँ, तुमलोगों का क्या किनारे खड़े रहते हो, बरसात में कभी कभी नदी की जलधारा तुम तक पहुँचती है वरना सालो भर ऐसे ही खड़े रहते हो, तुम्हारी उपयोगिता ही क्या है। मेरे कारण ही लाखों लोग इस पुल का प्रयोग कर नदी के आर पार जा पाते हैं । “
किनारे वाले पाये ने कोई जवाब नहीं दिया। कुछ…
Added by Neeraj Neer on July 5, 2015 at 3:00pm — 12 Comments
Added by umesh katara on July 5, 2015 at 12:26pm — 5 Comments
मजहब जिसने इंसानों को आपस में जोड़ा है
आज उसी मजहब ने क्यूँ दिल इंसा का तोडा है
कितनी सुंदर धरती है ये कितने सुंदर मंजर
पर राहों में उल्फत की क्यूँ नफरत का रोड़ा है
जिन की ख्वाइश धन दौलत दुनिया भर की हथिया लें
गर समझें तो आज समझ लें ये जीवन थोडा है
राम नाम जिस पाहन पर वो सागर में उतराए
डूब गया वो राम नाम के बिन जिसको छोड़ा है
तब तक चैन कहाँ पाया है इस इंसा ने जग में
जब…
ContinueAdded by Dr Ashutosh Mishra on July 5, 2015 at 10:34am — 15 Comments
Added by सुनील प्रसाद(शाहाबादी) on July 4, 2015 at 8:21pm — 9 Comments
“तुम लोग बहू से ही ठीक रहती हो. बात-बात पे वो डांटा करती है न, तभी तुम लोगों का दिमाग ठंढा रहता है ! आ रही है न, गर्मी छुट्टी के बाद.. कल-परसों में.... ,” - तमतमाती हुई सुभद्रा महरी पर बरसती जा रही थी.
“माँजी, साफ तो मैं कर ही रही थी.. ” - महरी ने बात सम्भालना चाहा.
“चुप रहो ! महीने भर का लेना-देना सब बेकार कर दिया. जरा सा कुछ कहा नहीं कि टालना शुरु.. ”
अखबार पर से आँखे उठा कर रमेश ने पत्नी की ओर देखा. इधर तीन-चार दिनों से…
Added by Shubhranshu Pandey on July 4, 2015 at 8:00pm — 10 Comments
Added by Pari M Shlok on July 4, 2015 at 4:19pm — 24 Comments
हर्षिता क्लास की सबसे खुबसूरत लड़की थी, अधम, रंजित और उसकी मित्र मंडली, सभी उससे दोस्ती के लिए लालायित रहते थे किन्तु वह तो बस अपने काम से काम रखती थी. एक दिन हर्षिता को अकेला देख रंजित उससे बोला,
“हर्षिता मैं तुम्हे अपनी बहन बनाना चाहता हूँ क्या तुम मुझे अपना भाई होने का अधिकार दोगी ?”
माँ बाप की इकलौती बेटी हर्षिता रंजित को भाई के रूप में पाकर बहुत ख़ुश हो गयी. अब उसका उठना बैठना रंजित के साथ-साथ उसके दोस्तों के साथ भी होने…
Added by Er. Ganesh Jee "Bagi" on July 4, 2015 at 4:04pm — 30 Comments
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