For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

All Blog Posts

इक अजनबी दिल चुरा रहा था।

12122/12122

इक अजनबी दिल चुरा रहा था।
करीब मुझ को' बुला रहा था।

वो' कह रहा था बुझाए'गा शम्स,
मगर दिये भी जला रहा था।

वो' ज़ख़्म दिल के छुपा के दिल में,
न जाने' क्यों मुस्करा रहा था।

सबक़ मुहब्बत का' हम से' पढ़ कर,
हमें मुहब्बत सिखा रहा था।

बुरा है' टाइम तो' चुप है' "रोहित"।
नहीं तो' ये आईना रहा था।

रोहिताश्व मिश्रा, फ़र्रुखाबाद

मौलिक एवम अप्रकाशित

Added by रोहिताश्व मिश्रा on April 18, 2017 at 1:30pm — 15 Comments

ग़ज़ल (12122-12122-12122-12122)

न बैठो इतने करीब मेरे कहीं मेरा दिल मचल न जाए

अब इतनी भी दूर तो न जाओ ये जान मेरी निकल न जाए ।।

 

जो बर्फ़ अरमानों पर जमी है तेरी तपिश से पिघल न जाए

पिघल गई गर तो मेरी आँखों की झील भर के उछल न जाए ।।

 

बड़ा ही शातिर ये वक़्त है फिर नई कोई चाल चल न जाए

मिलन से पहले घड़ी विरह की मिलन का लम्हा निगल न जाए ।।

 

तेरी छुअन से हुई वो जुम्बिश की दिल की धड़कन बिखर गई है

 न छूना मुझ को सनम दुबारा ये साँस जब तक सँभल न जाए…

Continue

Added by Gurpreet Singh jammu on April 18, 2017 at 10:50am — 14 Comments

शाइरी भी यार अब हम क्या करें

बह्र 2122 2122 212



हर जगह नफरत का आलम, क्या करें

ज़ह्र होता ही नही कम क्या करें ||



मौत का सामान ख़ुद इंसाँ हुआ

और जुबाँ उसकी हुई बम क्या करें ||



जो सहारे भाग्य के बैठा रहे

ऐसे का फिर राम गौतम क्या करें ||



कुछ नही अपना यहाँ यह जानकर

*जाने वाले चीज का ग़म क्या करें*



वक़्त से कोई बड़ा जब है नही

सर किसी के सामने ख़म क्या करें ||



इस हुनर पर हावी हैं मजबूरियाँ

शाइरी भी यार अब हम क्या करें… Continue

Added by नाथ सोनांचली on April 18, 2017 at 4:30am — 11 Comments

आँखों का दीवाना

तेरी आँखों ने

दीवाना बना दिया मुझको

में क्या था और

ये क्या बना दिया मुझको

क्या पता है हाल-ए-खबर तुझे

जो दे गयी है बेचैनी मुझे

क्यों समझते नही ख़ामोशी मेरी

क्या पता नहीं तुम्हें कहानी मेरी

कहते हैं सब ये शराफत है तेरी

पर कैसे बताऊँ तू ही तो मंज़िल है मेरी

सुनो ना जिसे सब लोग जिंदगी कहते हैं

तुम बिन उसे मैं अब क्या कहूँ

ये इश्क क्या है मालूम नहीं

पर इक दर्द सा सीने में है

दीवाना हूँ सादगी का तेरी

सुन ले आरजू इस दिल…

Continue

Added by रोहित डोबरियाल "मल्हार" on April 17, 2017 at 8:17pm — 6 Comments

मीत बन जाइए....मनहरण घनाक्षरी...समीक्षार्थ..//अलका ललित

समीक्षार्थ

मनहरण घनाक्षरी ....(एक प्रयास)

***

 

आशा का प्रकाश कर

बांस को तराश कर

बांसुरी के सुर संग

गीत बन जाइए

.

हौसले पकड़ कर

आँधियाँ पछाड़ कर

बहती नदी सी इक

रीत बन जाइए

. 

मछली पे आँख रहे

धरती पे पाँव रहे

आसमान छू के जरा

जीत बन जाइए

. 

बहुत जीया है इस

दुनिया की सोच कर

अब अपने भी जरा

मीत बन…

Continue

Added by अलका 'कृष्णांशी' on April 17, 2017 at 6:30pm — 14 Comments

मेरे भीतर की कविता

मेरे भीतर की कविता

अक्सर छटपटाती है

शब्दों के अंकुर

भावों की विनीत ज़मीन पर

अंकुरित होना चाहते हैं

ना जाने क्यों वे

अर्थ नहीं उपजा पाते हैं

मेरे भीतर की कविता फिर भी

जाकर संवाद करती है

सड़क किनारे बैठे

उस मोची पर जो

फटे जूते सी रहा है

बंगले की उस मेम साहिबा पर

जो अपना बचा फास्ट फुड

डस्टबिन में फेंककर

ज़ोर से गेट बंद करके

अंदर चली जाती है

लेकिन

अनुभूतियाँ ज़ोर मारती है

पछाड़े खाकर गिर जाती है

हृदय…

Continue

Added by Mohammed Arif on April 17, 2017 at 5:30pm — 12 Comments

आज की प्रेम कहानी

         प्रेम कहानी

मेरी भी है प्रेम कहानी,जिसमे राजा और है रानी|

मिल कर खोला दिल का राज ,नदी किनारे की है बात|

कहा तुम्हारा साथ चाहिए ,प्यार भरे ज़ज्बात चाहिए|

दिल की बाते देना बोल ,नीम नहीं मिश्री के घोल|

मृग नैनी सु अधरों वाली ,तेरे बिना मै खाली खाली|

मेरी भी है प्रेम  कहानी ,जिसमे राजा और है रानी|

लड़की का जवाब

यही बात तो सब है कहते ,साथ हमारे कभी न रहते\

कभी यहाँ है कभी वहाँ है ,रब ही जाने कहा कहा है|

कभी है राधा कभी…

Continue

Added by Pankaj sagar on April 17, 2017 at 12:53pm — 5 Comments

तरही गजल/सतविन्द्र राणा

तरही गजल

2122 2122 212



काफ़िया हमको मिला *अम* क्या करें

लाज़िमी कहनी ग़ज़ल हम क्या करें



सब दिवाने हैं दिखावे के यहाँ

और' हुनर के दाम हैं कम क्या करें?



रौशनी ने दी है दस्तक देख लो

पर खड़ा है फिर भी ये तम क्या करें



बुलबुलों ने छोड़े जब से घोंसले

टहनियों की आँख हैं नम क्या करें



पास है जो वो भी तो अपना नहीं

*जाने वाली चीज का गम क्या करें



बैठकर सब साथ गम थे बाँटते

सिलसिला वो अब गया थम क्या… Continue

Added by सतविन्द्र कुमार राणा on April 16, 2017 at 10:00pm — 16 Comments

"चिरनिद्रा- चिर-विश्रांति "/कविता - अर्पणा शर्मा

नदी के भँवर में घूमते पत्ते से,

जो खिंचता-जाता समाने उसमें,

जीवन है ड़ूबता- उतराता,

काल के नित गहराते भँवर में,

धवल आकाशगंगा के,

गहन काले गह्वर की मानिंद,

हमें आलिंगन में लेने को आतुर,

ओह ये मृत्यु ...!!

 

शनैः-शनैः सब समाता उसमें,

धीरे-धीरे खिंचते जारहे,

हम भी नित उसी ओर,

जन्म के साथ ही,

है शुरू होजाती,

यह गणना पलछिन,

यह माटी का पुतला ,

जीवित रहेगा ,

आखिर कितने दिन,



उलझते जीवन के व्यापार में… Continue

Added by Arpana Sharma on April 16, 2017 at 7:41pm — 11 Comments

ठहराव ..?

आदतन हर रोज़ सवेरे-सवेरे

बुझते विश्वास की गहरी पीर

मौन विवशता के आवेशों में

बहता मन में निर्झर अधीर

आस-पास लौट आता है उदास

अकस्मात अनजाने तीखा गहरा

गहरे विक्षोभों का सांवला

देहहीन दर्दीला उभार

ज़िन्दगी के अब ढहे हुए बुर्जों में

विद्रोही भावों के अवशेष धुओं में

है फिर वही, फिर वही असहनीय

अजीब बदनसीब अनथक तलाश

नियति के नियामक चक्रव्यूहों में

पुरानी पड़ गई बिखरती लकीरों…

Continue

Added by vijay nikore on April 16, 2017 at 5:28pm — 9 Comments

सलमान खान मर चुका है !

आत्महत्या

के कई ख्याल,

मेरे दिमाग में आते है

उस तरह

जैसे बच्चों को को अपने खिलौनों के आते है।

खुद को

बौना महसूस करता हूँ

हर उस सेकण्ड

जब भी जीवन-मृत्यु के चक्र के

बीच

देखता हूँ इतिहास में मरे हुए लोग।

बना रहा था

एक चित्र,

मोनालिसा की बहन का/

और

मेरी होने वाली बेटी को पीले रंग के ब्रश से प्यार है।

इस वक़्त

हमारे घर के एकमात्र टीवी में

बना हुआ था माहौल/ इटली के भूकंप का।

टीवी की धारारेखीय शक्ल ने… Continue

Added by बृजमोहन स्वामी 'बैरागी' on April 16, 2017 at 8:45am — 5 Comments

जब नज़र से उतर गया कोई

2122/1212/22

.

जब नज़र से उतर गया कोई,

यूँ लगा मुझ में मर गया कोई.

.

इल्म वालों की छाँव जब भी मिली

मेरे अंदर सँवर गया कोई.

.

उन के हाथों रची हिना का रँग

मेरी आँखों में भर गया कोई.

.

बेवफ़ाई!! ये लफ्ज़ ठीक नहीं,

यूँ कहें!!! बस,…

Continue

Added by Nilesh Shevgaonkar on April 16, 2017 at 8:00am — 16 Comments

उसके आँचल उड़ा नही करते

2122 1212 22



बेसबब वह वफ़ा नहीं करते । खत मुझे यूँ लिखा नहीं करते ।।



है मुहब्बत से वास्ता कोई । उस के आँचल उड़ा नहीँ करते ।।



लूट जाते हैं जो मेरे घर को। गैर वह भी हुआ नहीं करते ।।



बात कुछ तो जरूर है वर्ना । तुम हक़ीक़त कहा नही करते ।।



न्याय बिकता है इस ज़माने में । बिन लिए फैसला नही करते ।।



वह गवाही भी बिक गई कब की ।

अब भरोसा किया नही करते ।।



जश्न लिखता हयात को बन्दा ।

जिंदगी से डरा नहीँ करते ।।



है… Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on April 15, 2017 at 11:56pm — 5 Comments

गलती

माना ये गलती मेरी थी पर

थोड़ी थोड़ी तेरी थी

ये दिल जो तेरा हो बैठा

कल तक ये जो मेरा था

तेरी वो बातूनी बातें

जैसे हो बरसात बिना छाते

होगा पश्चाताप तुम्हें तब

जिस दिन सोचे गलती तेरी थी

तुझसे महोब्बत कर बैठे

यही तो गलती मेरी थी

मेरी बातें तुम समझ ना पायी

यही तो गलती तेरी थी

यही तो गलती मेरी थी

मौलिक व अप्रकाशित

Added by रोहित डोबरियाल "मल्हार" on April 15, 2017 at 8:49pm — No Comments

बस चला जा रहा हूँ...

बस चला जा रहा हूँ ...

मैं

समय के हाथ पर

चलता हुआ

गहन और निस्पंद एकांत में

तुम्हारे संकेत को

हृदय की

गहन कंदराओं में

अपने अंतर् के

चक्षुओं में समेटे

बस चला जा रहा हूँ

मैं

समय के हाथ पर

मधुरतम क्षणों का आभास

स्वयं का

अबोले संकेत में

विलय का विशवास

अपने अंतर् के

चक्षुओं में समेटे

बस चला जा रहा हूँ

मैं

समय के हाथ पर

वाह्य जगत के

कल ,आज और कल के

भेद…

Continue

Added by Sushil Sarna on April 15, 2017 at 7:16pm — 12 Comments

हो सके मुस्कुरा दीजिये

212 212 212

चाहतों का सिला दीजिये ।

हो सके मुस्कुरा दीजिये ।।



टूट जाए न् ये जिंदगी।

हौसला कुछ बढा दीजिये।।



गफलतें हो चुकी हैं बहुत ।

रुख़ से पर्दा हटा दीजिये ।।



देखिए हाल बेहाल क्यूँ ।

आप ही कुछ दवा दीजिये ।।



बेवफा कह दिया क्यो उसे ।

राज है क्या बता दीजिये ।।



लूट कर ले गई सब नजर ।

यह रपट भी लिखा दीजिये ।।



टूटकर वह बिखर ही गई ।

जाइये घर बसा दीजिये ।।



है जरूरी मुलाकात भी… Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on April 15, 2017 at 1:00pm — 8 Comments

भीख और हक (लघुकथा)

कारपोरेशन की गाड़ी का हूटर बजा और लड़के ने गाड़ी से उतर कर डोर बैल बजाईं, जब मैं घर से बाहर आया तो मल्होत्रा ​​साहिब अपने घर में रखा कूड़ेदान लेकर बाहर आ उस लड़के की तरफ  बढ़ रहे थे ।

"हमारा कूड़ा सुबह सुबह पुराना रेहड़ी वाला ही उठा कि ही ले जाता है" ।

क्योंकि आप तो बहुत देर से आते हैं ।

जब आते हैं तब कोई भी घर नहीं होता "मैने कहा, बच्चे स्कूल व् हम दोनों ड्यूटी जा चुके होते हैं ।

पर वह लड़का अभी भी गेट के पास ही…

Continue

Added by मोहन बेगोवाल on April 15, 2017 at 11:00am — 3 Comments

ग़ज़ल...प्रीत का मौसम सुहाना आ गया

2122 2122 212
प्रीत का मौसम सुहाना आ गया
चोट खा के मुस्कुराना आ गया

चल रही पुरवा बसन्ती झूम के
टेसुओं को खिलखिलाना आ गया

खिल उठे मधुवन तुम्हारे नाम से
हर कली को गीत गाना आ गया

याद आई फिर तुम्हारी साँझ में
आँसुओं को गुनगुनाना आ गया

दीप ये किसने जलाये बाम पे
याद फिर गुजरा ज़माना आ गया

खिल उठी विस्तृत गगन में चाँदनी
रात को लोरी सुनाना आ गया
(मौलिक एवं अप्रकाशित)
बृजेश कुमार 'ब्रज'

Added by बृजेश कुमार 'ब्रज' on April 14, 2017 at 5:17pm — 12 Comments

अभिलाषाओं के ...

अभिलाषाओं के   ... 

थक जाते हैं

कदम

ग्रीष्म ऋतु की ऊषणता से

मगर

तप्ती राहें

कहाँ थकती हैं



अभिलाषाओं की तृषा

पल पल

हर पल

ग्रीष्म की ऊषणता को

धत्ता देती

अपने पूर्ण वेग से

बढ़ती रहती है

ज़िंदगी

सिर्फ़ छाँव की

अमानत नहीं

उस पर

धूप का भी अधिकार है

जाने क्यूँ

धूप का यथार्थ

जीव को स्वीकार्य नहीं



भ्रम की छाया में

यथार्थ के निवाले

भूल जाता है…

Continue

Added by Sushil Sarna on April 14, 2017 at 3:44pm — 4 Comments

कहीं ये नीयत फिसल न् जाए

121 22 121 2 2 121 22 121 22



नई जवानी नई अदाएं

कहीं ये नीयत फिसल न् जाए ।।

जरा सँभालो अदब में पल्लू

कोई इरादा बदल न् जाए ।।



कबूल कर ले सलाम मेरा

ऐ हुस्न वाले तुझे है सज़दा ।

मेरी मुहब्बत का दौर यूं ही

तेरी ख़ता से निकल न् जाए ।।



बड़ी तमन्ना थी महफ़िलो की

ग़ज़ल में उसके पयाम होगा ।

उधर है दरिया में बेरुखी तो

इधर समंदर मचल न् जाए ।।



है क़त्ल का गर तेरा इरादा

तो दर्द देकर गुनाह मत कर ।

हराम होगा ये इश्क़… Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on April 13, 2017 at 10:13pm — 11 Comments

Monthly Archives

2026

2025

2024

2023

2022

2021

2020

2019

2018

2017

2016

2015

2014

2013

2012

2011

2010

1999

1970

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"दुःखद"
yesterday
Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
Sep 24
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Sep 22
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Sep 19
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Sep 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Sep 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Sep 17
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11
जगदानन्द झा 'मनु' replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय, प्रणाम संगहि संग हार्दिक धन्यवाद। अपनेक मार्गदर्शन पाबि बहुत बेसी मोटिवेशन आ सीखक मिलैए…"
Sep 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
Aug 18
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Aug 15
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
Aug 15

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service