दिल में कसक है तेरी यादों का हक है तेरी,
जिसको मैं दिन रात पढ़ूँ वो पुस्तक है मेरी|
दिल में ............
तू ही मेरा सांध्य-गीत है, और भोर वंदन है,
जिसमें मैं निज को निज देखूं नैन तेरे दर्पण है|
तेरी खातिर खुले हमेशा सब दिल के दरवाजे,
चाहे जिससे तू आ जाए तेरा अभिनंदन है||
दिल तो तेरा है पर उसकी धक-धक है तेरी,
दिल में ......
.
गंगा-सा मन पावन तेरा, यमुना सा निर्मल हो,
सरस्वती-सी बुद्धि तुम्हारी, चंडी-सा सम्बल…
ContinueAdded by ARUNESH KUMAR 'Arun' on September 25, 2017 at 7:00pm — 4 Comments
तेरे इंतज़ार में ...
गज़ब करता रहा
तेर हर वादे पे
यकीं करता रहा
हर लम्हा
तेरी मोहब्बत में
कई कई सदियाँ
जीता रहा
और हर बार
सौ सौ बार
मरता रहा
पर अफ़सोस
तू
मुझे न जी सकी
मैं
तुझे न जी सका
पी लिया
सब कुछ मगर
इक अश्क न पी सका
मेरी ख़ामोशी को तूने
मेरी नींद का
बहाना समझा
तू
ग़फ़लत में रही
और
मैं
अजल का हो गया
तिश्नागर आँखों के …
Added by Sushil Sarna on September 25, 2017 at 2:00pm — 19 Comments
2122 1212 22
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दिल को फिर बेकरार कौन करे
आपका ऐतबार कौन करे
कत्ल का दिन अगर मुकर्रर है ज़िन्दगानी से प्यार कौन करे … |
Added by rajesh kumari on September 25, 2017 at 12:30pm — 39 Comments
Added by रामबली गुप्ता on September 25, 2017 at 5:00am — 49 Comments
Added by बासुदेव अग्रवाल 'नमन' on September 24, 2017 at 3:30pm — 8 Comments
Added by Manan Kumar singh on September 24, 2017 at 11:00am — 10 Comments
Added by Sheikh Shahzad Usmani on September 24, 2017 at 10:44am — 9 Comments
22 22 22 22 22 22 22 2
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आएं न आएं वो लेकिन हम आस लगाए .बैठे हैं
दिन ढलते ही शमए मुहब्बत घर में जलाए बैठे हैं
..
अपनी ख़ामोशी में वो सब राज़ छुपाये बैठे हैं
..
हैरत है जो प्यार मुहब्बत से ना वाकिफ़ हैं यारो
वह इल्ज़ाम दग़ाबाज़ी का मुझ पे लगाए बैठे हैं
..
कौन है अपना कौन…
ContinueAdded by SALIM RAZA REWA on September 24, 2017 at 10:00am — 25 Comments
(फाइलातुन -फइलातुन -फइलातुन -फइलुन /फेलुन)
आ गया हूँ वहाँ जिस जा से मैं जा भी न सकूँ |
मा सिवा उनके कहीं दिल को लगा भी न सकूँ |
इस तरह बैठे हैं वो फेर के आँखें मुझ से
उनके सोए हुए जज़्बात जगा भी न सकूँ |
मेरी महफ़िल में किसी ग़ैर को लाने वाले
दिल से मजबूर हूँ मैं तुझको जला भी न सकूँ |
फितरते तर्के महब्बत है तेरी यार मगर
तेरी इस राय को मैं अपना बना भी न सकूँ |
इतना मजबूर भी मुझको न खुदा कर देना…
ContinueAdded by Tasdiq Ahmed Khan on September 24, 2017 at 9:00am — 16 Comments
Added by दिनेश कुमार on September 24, 2017 at 6:57am — 22 Comments
Added by सतविन्द्र कुमार राणा on September 24, 2017 at 6:46am — 8 Comments
Added by Sheikh Shahzad Usmani on September 23, 2017 at 11:50pm — 15 Comments
*जीवन
उलझन ।
* सूने
आँगन ।
* घर-घर
अनबन ।
* उजड़े
गुलशन ।
* खोया
बचपन ।
*भटका
यौवन ।
* झूठे
अनशन ।
* ख़ाली
बरतन ।
* सहमी
धड़कन ।
.
मौलिक और अप्रकाशित ।
Added by Mohammed Arif on September 23, 2017 at 11:30pm — 66 Comments
Added by Sweet Panday on September 23, 2017 at 7:08pm — 4 Comments
विश्वास के सतूने जब कमज़ोर होते हैं तो आस्था का शामियाना गिर ही जाता
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हमारे घर का एक कोना फिर से पूजा स्थल के रूप में तब्दील हो गया और मेरी पत्नी ने एक निस्सहाय धर्म-केन्द्रित याचिका का रूप ले लिया. घर की मुश्किलात जैसे जैसे बढ़ती गईं, वैसे वैसे पत्नी की आध्यात्मिकता ने धार्मिक आचरणों, अर्चनाओं, उपवासों इत्यादि का रुख कर लिया. भविष्य वाचकों की भविष्यवानियाँ सुनी जाने लगीं और ग्रह…
ContinueAdded by राज़ नवादवी on September 23, 2017 at 5:30pm — 4 Comments
गुफा
से निकले हुए लोगों ने
'कुर्सी' बनाई,
अपने राजा के लिए
ज़मीन पर बैठे - बैठे
राजा कुर्सी पर बैठा है शान से
कुर्सी बनाने वाले ज़मीन पर
सबसे पहली कुर्सी 'पत्थर' की थी
फिर इंसान ने लकड़ी की कुर्सी बनाई
बाद में सोने ,चाँदी ,हीरे, जवाहरात की भी....
इतिहास में तो कई बार नरमुंडों की भी कुर्सियां बनाई गयी
और फिर उस पर बैठ के 'राजा' बहुत खुश हुआ...
कुर्सी बनाई गयी थी
इस उम्मीद में कि इस पर बैठा हुआ
राजा राज्य में
सुख शांति…
Added by MUKESH SRIVASTAVA on September 23, 2017 at 3:06pm — 5 Comments
Added by Janki wahie on September 23, 2017 at 1:19pm — 18 Comments
काफिया : आएँ , रदीफ़: क्या
२१२२ २१२२ २१२
पाक आतंकी कभी बाज़ आएँ क्या
बारहा दुश्मन से’ धोखा खाएँ क्या ?
गोलियाँ खाते ज़माने हो गये
राइफल बन्दुक से’ हम घबराएँ क्या ?
जान न्योछावर शहीदों ने की’ जब
सरहदों को हम मिटाते जाएँ क्या ?
सर्जिकल तो फिल्म की झलकी ही’ थी
फिल्म पूरा अब मियाँ दिखलाएँ क्या ?
आपका विश्वास अब मुझ पर नहीं
अनकही बातें जो’ हैं बतलाएँ क्या ?
खो दिया…
ContinueAdded by Kalipad Prasad Mandal on September 23, 2017 at 9:53am — 7 Comments
२२ २२ २२ २२ २२ २
आओगे जब भी तुम मेरे ख्वाबों में
उन लम्हो को रख लूँगी मैं यादों में
और नही कुछ चाहूँ तुमसे मेरी जां
दम टूटे मेरा बस तेरी बाहों में
मेरा जीवन इस गुलशन के फूलों जैसा
घिरा हुआ है मगर बहुत से काँटों में
तुमको में रूदाद सुनाऊं क्या अपनी
मेरा हर लम्हा बीता है आहों में
देख रही हो मुझको तुम जैसे "रौनक"
जी चाहे मैं डूब मरूँ इन आँखों में
मौलिक एवं…
Added by KALPANA BHATT ('रौनक़') on September 23, 2017 at 9:30am — 24 Comments
Added by Naveen Mani Tripathi on September 23, 2017 at 2:00am — 4 Comments
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