For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

All Blog Posts

पहाड़ अब भी सरल है --

मित्रों! आज पहाड़ मे आई इस भीषण त्रासदी के वक्त कुछ बाहरी असमाजिक तत्व (जो कि पल्लेदारी और मजदूरी के लिए यहाँ आयें हैं) अपनी लोभ लिप्सा के लिए बेहद आमानवीय हो गए है. उनका मकसद पैसा जुटाना और फिर यहाँ से भाग कर अपने देश/ गाँव जाना है. ये लोग गिरोह के रूप मे सक्रिय हैं. इनकी वजह से अपने पहाड़ के सीधे साधे लोग बदनाम हो रहे हैं. अभी कुछ नेपाली मजदूर भी पकडे जा जुके हैं जिनके पास सोने की माला और लाखों रूपये मिले. यहाँ तक कि सुना है करोड से ऊपर रुपये भी मिले अब चूँकि हर…

Continue

Added by डॉ नूतन डिमरी गैरोला on June 23, 2013 at 12:00pm — 15 Comments

नदी और पखेरू

उड़ गए पखेरू  

अब उजाड़ वीराने में

खुद को बहलाती हूँ

सूख गया है नीर

फ़िर भी

नदी तो कहलाती हूँ।





लहरों की चंचलता

थिरकन, चपलता

अब भी है चस्पा

इस दमकती रेत पर

उन अवशेषों को देख

जी उठती हूँ।





कुछ स्वार्थी, समर्थ हाथ

बढ़ चले हैं रेत की ओर

देख रही हूँ, तड़प रही हूँ

मेरी स्मृतियों से

चिन रहे अपने मकान

और मैं निस्सहाय

देख रही हूँ लाचार

निशब्द, निष्‍प्राण।





कूल…

Continue

Added by sushila shivran on June 23, 2013 at 11:22am — 13 Comments

बैठे-ठाले ~~

हेलीकाप्टर से उड़ान हुई ,

संवेदना उनकी महान हुई !



घूमे ,फिरे ,खेले ,खाए ,

किस कदर थकान हुई !



ये जो मौत के मंज़र देखे,

कुदरत है ,मेहरबान हुई…

Continue

Added by प्रो. विश्वम्भर शुक्ल on June 22, 2013 at 11:00pm — 9 Comments

व्यथा … !

व्यथा!

तुम

मन के किबाड़े

खोलना मत 

खोलना मत 

सौ तरह के 

व्यंग होगे 

धूल धूसर 

संग होंगे 

भाव कोई गैर 

अपनी 

भावना में 

घोलना मत 

घोलना मत 

व्यथा!

खुद से कहना 

खुद ही सहना 

तेरी

अंतर यातना 

पर किसी से 

बोलना मत 

बोलना मत 

व्यथा!  

गीतिका 'वेदिका'

मौलिक एवम अप्रकाशित  

Added by वेदिका on June 22, 2013 at 10:06pm — 32 Comments

बूँद बूँद से सागर भरता | विनय - अतुकांत |

आगे आओ हाथ बढाओ , साथी फँसे मुसीबत में |
बूँद  बूँद से सागर भरता , हाथ बँटाओ आफत में |  
एक चना भाड़ नहीं फोड़े , मदद चाहिए विपदा में |   
हर देशवाशी दें सहारा , आगे आयें…
Continue

Added by Shyam Narain Verma on June 22, 2013 at 11:22am — 4 Comments

मैं नदी

मैं नदी –

पहाड़ों से उतरी,

उन्मुक्त बहती

कल कल करती मतवाली

मैं नदी -

गाँव खलिहानों से होती

बच्चों की किलकारियों सी,

खेतों में ठुमकती

मैं नदी -

सरदी की धूप,

षोडसी की चोटी सम लम्बी

लहराती इठलाती बलखाती

मैं नदी जो कभी थी.

2

समय का बदलता रूप -

हाइटेक का ज़माना,

तरक्की की चरमसीमा,

बलिदान स्वरूपा

मैं नदी अधुना.

झुलसती गरमी

बीच शहर,

कूड़े का ढेर

अछूत सी पड़ी,

मैं नदी…

Continue

Added by coontee mukerji on June 22, 2013 at 3:05am — 15 Comments


सदस्य टीम प्रबंधन
पाँच दोहे.. // --सौरभ

तू  मुझमें  बहती  रही, लिये धरा-नभ-रंग

मैं    उन्मादी   मूढ़वत,   रहा  ढूँढता  संग



सहज हुआ अद्वैत पल,  लहर  पाट  आबद्ध

एकाकीपन साँझ का, नभ-तन-घन पर मुग्ध



होंठ पुलक जब छू रहे,   रतनारे  …

Continue

Added by Saurabh Pandey on June 22, 2013 at 2:00am — 51 Comments

एक नवगीत ~~

एक निर्झर नदी सी बहो 

खिलखिलाती हुई कुछ कहो 

फासले अब नहीं दरमियां 

आंच है,उम्र है,गरमियां

अब तो सम्बन्ध हैं इस तरह 

जैसे हों झील में मछलियां 



थाम लेंगे…

Continue

Added by प्रो. विश्वम्भर शुक्ल on June 22, 2013 at 12:23am — 7 Comments

कविता : हथियार

कुंद चाकू पर धार लगाकर

हम चाकू से छीन लेते हैं उसके हिस्से का लोहा

और लोहे का एक सीदा सादा टुकड़ा

हथियार बन जाता है

 

जमीन से पत्थर उठाकर

हम छीन लेते हैं पत्थर के हिस्से की जमीन

और इस तरह पत्थर का एक भोला भाला टुकड़ा

हथियार बन जाता है

 

लकड़ी का एक निर्दोष टुकड़ा

हथियार तब बनता है जब उसे छीला जाता है

और इस तरह छीन ली जाती है उसके हिस्से की लकड़ी

 

बारूद हथियार तब बनता है

जब उसे किसी कड़ी…

Continue

Added by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on June 21, 2013 at 9:00pm — 12 Comments

साम्प्रदायिक भावना व राष्ट्रीय एकता

साम्प्रदायिक भावना व राष्ट्रीय एकता 

बड़े गर्व की बात है …

Continue

Added by SAURABH SRIVASTAVA on June 21, 2013 at 8:30pm — 1 Comment

दोहे

फुटकर दोहे ....
** *** *** **

आज पुरस्कृत हो रहे ,प्राय: वो पाखण्ड।

जिन  देहों  से लुप्त हैं ,उनके  मेरुदण्ड।।
--
झांसा जग को दे रहे, कर ऊर्जा का ह़ास।
सरल राह पर जो चले,सुखद मिले अहसास 
--
छद्म एकता का सदा ,रचते हम पाखण्ड।
क्यूँ हम जग को तोड़ते,आओ रहे अखण्ड।।
--
नाम धर्म का हो रहा ,पकता खूब अधर्म।
भोली जनता नासमझ,नहीं जानती…
Continue

Added by AVINASH S BAGDE on June 21, 2013 at 8:15pm — 5 Comments

सरस्वती वंदना

वंदना हम कर रहे

माँ शारदे माँ शारदे

अज्ञान के अंधेरों से

तू हमें तार दे

हम तो अज्ञानी  हैं

ज्ञान से संवार दे

माँ शारदे------------

.

श्वेत वस्त्र धारणी

कमल पे विराजती

वीणा के तार की

झंकार दे झंकार दे

माँ  शारदे----------

.

चरणों में तेरे हम

शीश को झुका रहे

ज्ञान की ज्योति

हमको उपहार दे

माँ शारदे------------

 

 

मौलिक व अप्रकाशित------

Added by Pragya Srivastava on June 21, 2013 at 11:00am — 9 Comments

’’वेगवती छन्द’’

’’वेगवती छन्द’’

इसमें विषम चरण में तीन सगण-(112) तथा एक गुरू-(2) तथा

सम चरण में तीन भगण-(211) तथा दो गुरू-(22) होते हैं।

.1.

कण कारक ज्यों मन कृष्णा। कारण कृष्ण कमाल सुतृष्णा।

जन.लोक अतीव नसाना। घोर. विरोध सजाय मसाना।।

जगती तल-अम्बर-वर्षा। बाढ़-हुताशन ज्यों यम हर्षा।

अब तो मन सोच सुकर्मा। कार्य सुहाय अघोर.विकर्मा।।



.2.

मन राम सुनाम विचारो। मानव से नित प्यार सॅवारो।

वन-बाग-सुभाष सुधारो। कर्म-सुधर्म  सदा मन धारो।।

रख हाथ…

Continue

Added by केवल प्रसाद 'सत्यम' on June 21, 2013 at 9:56am — 14 Comments

गीतिका : आह पानी ,वाह पानी !

ये आह पानी ,वो वाह पानी ,

कर गया आखिर तबाह पानी !



कभी बादलों से रही शिकायत ,

जिधर डालिए अब निगाह पानी !



दिखे ऐसे मंजर,उतराती लाशें

उठे दर्द,चीखें,कराह पानी !



जहां ज़िंदगी मांगने को गए थे,

कर के गया सब सियाह पानी !



रहम करनेवाला खुद ही परीशां

माँगी है तुझसे पनाह पानी !



____________प्रो.विश्वम्भर शुक्ल ,लखनऊ



(मौलिक और अप्रकाशित…

Continue

Added by प्रो. विश्वम्भर शुक्ल on June 20, 2013 at 11:00pm — 10 Comments

कविता में प्रेम



उसने मुझसे कहा



ये क्या लिखते रहते हो



गरीबी के बारे में



अभावों, असुविधाओं,



तन और मन पर लगे घावों के बारे में



रईसों, सुविधा-भोगियों के खिलाफ



उगलते रहते हो ज़हर



निश-दिन, चारों पहर



तुम्हे अपने आस-पास



क्या सिर्फ दिखलाई…

Continue

Added by anwar suhail on June 20, 2013 at 10:28pm — 4 Comments

प्राकृतिक आपदा के मध्य जीवन मूल्यों का अवमूल्यन

उत्तराखंड में आई प्राकृतिक आपदा ने जहाँ एक ओर जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है,वहीं दूसरी और पूरे देश को हिला कर रख दिया है।यह विषम परिस्थिति हम सभी के धैर्य की परीक्षा है और परस्पर एक-दूसरे के सहयोग की,सहायता की आवश्यकता का ये परम अवसर है।यही समय मानवता रुपी धर्म के पालन का उचित समय है, परन्तु कुछ लोग इस समय मानवता को लज्जित कर रहे हैं।वे प्रकृति की मार से त्रस्त भूखे-प्यासे लोगों से ५ रूपये के बिस्किट के स्थान पर एक सौ रूपये,तीस-चालीस रुपये के दूध के स्थान पर दो सौ रुपये, किसी को अपने…

Continue

Added by Savitri Rathore on June 20, 2013 at 9:21pm — 8 Comments


सदस्य कार्यकारिणी
मेरे द्वारा हल्द्वानी आयोजन में प्रस्तुत की हुई नज्म/गीत

जख्म कांटो से खायें  हैं हमें फूलों को सताना नहीं आता 

इश्क़े सफीने  बचाए हैं हमे तूफाँ में डुबाना नहीं आता 

 

तुम   बुजदिली कहलो या समझो शाइस्तगी मेरी  

 हुए सब अपने पराये हैं हमे  सच्चाई  छुपाना नहीं आता 

 

किसी ने दिल से निकाला ,  किसी ने राह में फेंका 

सर पे हमने बिठाए हैं हमे ठोकर से हटाना नहीं आता    

 

 कभी  ना  बेरुखी भायी   कभी ना नफरतें पाली 

दिलों में ही घर …

Continue

Added by rajesh kumari on June 20, 2013 at 7:30pm — 18 Comments

वो हँसी गुल संवर रही होगी

वो हँसी गुल संवर रही होगी

चांदनी सी बिखर रही होगी

सारी दुनिया हो बेखबर चाहे…

Continue

Added by Dr Ashutosh Mishra on June 20, 2013 at 12:00pm — 13 Comments

वक्त जो हम पर भारी है - वीनस

छोटी बहर पर ग़ज़ल का एक प्रयास  .....

वक्त जो हम पर भारी है 

अपनी भी तय्यारी है 



पूरा कारोबारी है 

ये अमला सरकारी है 

.…

Continue

Added by वीनस केसरी on June 20, 2013 at 11:00am — 36 Comments

खुदा से मिला के चला गया

वो आया था और सच्चाई बता के चला गया,

बुरा ना कहो उसे जो हाथ छुडा के चला गया|

वो भी भला था फ़क्त इक दुआ देके देख लो,

जो मेरी रूह को खुदा से मिला के चला गया|

मैं बादल था बरसना था कहीं खेतों की ज़मीं पे,

वो हवाओं को ही सागर में छुपा के चला गया|

सुना था कहीं इंसान बसते हैं यहीं ज़मीन पे,

वो आईने में मेरा चेहरा दिखा के चला गया|

दम आख़िरी था, मुस्कान चेहरे पे आ ही गयी,

हँसते हुए वो दुनिया को रुला के चला…

Continue

Added by Dr. Chandresh Kumar Chhatlani on June 20, 2013 at 9:30am — 14 Comments

Monthly Archives

2026

2025

2024

2023

2022

2021

2020

2019

2018

2017

2016

2015

2014

2013

2012

2011

2010

1999

1970

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

रोहित डोबरियाल "मल्हार" replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"1 लाख मासिक चाहिए ही क्यों भाई, वर्डप्रेस CRM में वेबसाइट को ट्रांसफर कर दिया जाए, तो सालाना खर्च…"
yesterday
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"दुःखद"
Sep 29
Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
Sep 24
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Sep 22
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Sep 19
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Sep 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Sep 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Sep 17
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11
जगदानन्द झा 'मनु' replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय, प्रणाम संगहि संग हार्दिक धन्यवाद। अपनेक मार्गदर्शन पाबि बहुत बेसी मोटिवेशन आ सीखक मिलैए…"
Sep 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
Aug 18
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Aug 15

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service