For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

All Blog Posts (19,120)

हमारी सोच को लाचार कर देगा - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)

१२२२ १२२२ १२२२ १२२२



रवैया  हाकिमों  का  देश  को  बीमार  कर देगा

यहाँ मिलजुल के रहना और भी दुश्वार कर देगा।१।



फँसाया जा रहा है यूँ  अविश्वासों में हमको अब

न जाने कब सखा ही झट पलटके वार कर देगा।२।



सियासत तेल छिड़केगी हमारी बस्तियों में फिर

जलाने का बचा जो काम वो अखबार कर देगा।3।



परोसे झूठ सच जैसा बनाकर मीडिया जो नित

किसी दिन ये हमारी सोच को लाचार कर देगा ।४।



अबोला  शक  बढ़ाता है  रखो  सम्वाद  भाई से…

Continue

Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 1, 2018 at 8:30pm — 18 Comments

नये साल का स्वागत नये अंदाज में - अवधी के अरधान (बरवें छंद में )

 

जाड़ा है,   हहराती    ठंढी रात

साल आय गा फिर से बन नवजात

 

सोहर गावौ बहिनी   जन्मा लाल

जग के आँगन जगमग उतरा साल

अब तो बजै बधइया   नाचैं नारि

नए साल पर डारैं   दुनियाँ वारि

 

अँगनइया माँ थरिया मधुर बजाव

पानी भरी गगरिया   भौजी लाव

 

नाउन है बिरझानी    माँगे नेग

पायल मातु धरित्री   देहु सवेग

 

वारिन बोलै मैया   जाइ न देब  

नया साल है जन्मा बिछिया लेब

 

तुम काहे…

Continue

Added by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on January 1, 2018 at 8:21pm — 4 Comments

नव वर्ष पर कुछ कुण्डलिया

कहकर सबको अलविदा, चला गया वो साल

छोड़ गया यादें बहुत, अरु जीवन जंजाल

अरु जीवन जंजाल, रहेंगे उलझे जिसमें

जारी है संघर्ष, मिलेगा सद्फल इसमें

जीवन में सुख हाथ, लगेगा दुख को सहकर

लें हम नव संकल्प, गया गत संवत् कहकर।1।



मन से मन जोड़ें सभी, उत्तम हो सब काज

मंगलमय नव वर्ष की, करूँ कामना आज

करूँ कामना आज, सत्य का उगे सवेरा

हो नित नव निर्माण, मिटे घनघोर अँधेरा

देश प्रेम हो भाव, जुटें सब तन मन धन से

रहे न कोई क्लेश, जुड़ें हम सबसे मन… Continue

Added by नाथ सोनांचली on January 1, 2018 at 2:31pm — 11 Comments

दोहे--नव वर्षाभिनंदन

ख़ुशियों से हो ये भरा,नया हमारा साल ।
मेल जोल सबसे बढ़े, बदले सबकी चाल ।।

घर आँगन में हो ख़ुशी,चले हास-परिहास ।
पीड़ाओं की आँधियाँ, फटकें कभी न पास ।।

साल नया ख़ुश हाल हो,सब हों माला माल ।
जीवन में दुख का कभी,आये नहीं सवाल ।।

नये साल में हम करें,कोई अच्छा काम ।
युग -युग तक जपते रहें,लोग हमारा नाम ।।

माँगूँ रब से ये दुआ,रहें सभी आबाद ।
बीते दिन कोई यहाँ, करे न'आरिफ़' याद ।।

मौलिक एवं अप्रकाशित ।।

Added by Mohammed Arif on January 1, 2018 at 12:27am — 25 Comments

"नूतन-वर्ष "-कविता /अर्पणा शर्मा

उँगलियों पर रहे थिरकती,  

लेखा-जोखा समय का रखती,  

देखो वो चली, विदा ले चली,  

हाथ हिलाते, हँसते-मुस्काते,  

ये बारह माहों की गिनती,

तीन सौ पैंसठ दिनों का सफर,

खत्म कर पकड़ेगी, इक कोरी-नई ड़गर,

इसके नए पन्नों पर होगी ,

अब लिखी इक इबारत नई,

छोड़ अनेकों पीछे, अनेकों साथ जोड़ते,

देखो वो आई, आ ही चली,

इक नूतन बारह माहों की गिनती,

समय-प्रवाह थपेड़े में ,

जीवनयात्रा के रेले में,

इक वर्ष और…

Continue

Added by Arpana Sharma on December 31, 2017 at 10:22pm — 7 Comments

ग़ज़ल( उठ न जाए क़ियामत नये साल में )

ग़ज़ल( उठ न जाए क़ियामत नये साल में )

------------------------------------------------------

( फाइलुन--फाइलुन--फाइलुन--फाइलुन)

उन पे आई बुलूगत नये साल में |

उठ न जाए क़ियामत नये साल में |

भूल बैठे पुरानी अदावत को वो

देख कर मेरी मिन्नत नये साल में |

बाग़बाने चमन ज़ुल्म से बाज़ आ

वरना होगी बग़ावत नये साल में |

दिल में घर कर नहीं पाएँ शिकवे कभी

डालिए एसी आदत नये साल में |

राह तकता हूँ मुद्दत से…

Continue

Added by Tasdiq Ahmed Khan on December 31, 2017 at 10:10pm — 22 Comments

ओ बो परिवार को नए साल की मंगल कामना - 'बरवै' छंद में

नया साल है आवा अस संजोग

ओ बी ओ मदिरायित हर्षित लोग

 

हवा भई है ‘बागी’ मन मुस्काय

‘योगराज’ शिव बैठे भस्म रमाय

 

‘प्राची’ ने दिखलाया आज कमाल

नए साल का सूरज निकसा लाल

 

ठहरा सा है मारुत ‘सौरभ’-भार

नवा ओज भरि लाये ‘अरुण कुमार’

‘राणा’–राव महीपति अरु ‘राजेश’

बदले बदले दिखते हैं ‘मिथिलेश’    

 

तना खड़ा है अकडा अब ‘गिरिराज’

हर्ष न देह समाये इसके आज

 

कुहरे में है सूरज अरुणिम…

Continue

Added by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 31, 2017 at 2:30pm — 7 Comments

ग़ज़ल --- असर होता है // दिनेश कुमार

2122--1122--1122--22

.

एक पत्थर पे भी उल्फ़त का असर होता है

दिल मे जज़्बा हो तो दीवार में दर होता है

.

घुप अँधेरे में उजाले की किरण सा जीवन

जो भी जी जाए, वो दुनिया में अमर होता है

.

उसको हालात की गर्मी की भला क्या चिन्ता

जिसकी दहलीज़ पे अनुभव का शजर होता है

.

आपसी प्यार मकीनों में हो, घर तब होगा

दरो-दीवार का ढांचा तो खँडर होता है

.

वो न सह पायेगा इक पल भी हक़ीक़त की तपिश

जिसके ख़्वाबों का महल मोम का घर होता…

Continue

Added by दिनेश कुमार on December 31, 2017 at 1:33pm — 20 Comments

खुद को भी समझाना होगा (गीत)

नये वर्ष में लगता है अब

खुद को भी समझाना होगा

कर जय पराजय की समीक्षा

क्या कमीं क्या क्या प्रबल है

तूने जो खोया या पाया

तेरे कर्मों का ही फल है

पूर्व की उनसब गलतियों को

फिर से ना दुहराना होगा

खुद को भी समझाना होगा।

अपने मन की करता है बस

क्या तूने सोचा है क्षण भर

अनायास ही भाग रहा है

अब यहाँ वहाँ किस ओर किधर

पहले यह निश्चय करना है

तुमको जिस पथ जाना होगा

खुद को भी…

Continue

Added by ram shiromani pathak on December 31, 2017 at 1:30pm — 8 Comments

" फ़िर ग़ज़ल प्रेम की निशानी की "

बहर - 2122 1212 22 

अपने दुश्मन पे गुलफिशानी की l

आबरू उसकी पानी पानी की ।।

वार मैंने निहत्थों पर न किया

यूँ ...अदा रस्म खानदानी की l

ख़त्म उस ने ही कर दी ऐ - यारो

जिसने शुरू प्यार की कहानी की l

होंठ उनके जब न कह सके सच

फ़िर निग़ाहों ने सच बयानी की l

शख्स वो दोस्तों था पत्थर दिल

खामखाँ उस पे गुलफिशानी की l

सोचा  बेहद  के  क्या रखूँ ता - उम्र

फ़िर ग़ज़ल " प्रेम " की निशानी की…

Continue

Added by पंकजोम " प्रेम " on December 31, 2017 at 1:12pm — 4 Comments

विश्वसनीयता(लघु कथा)

मैं ,मैं हूँ।समझी ,कि नहीं?

-और मैं क्या हूँ,पता है?

-जरूर,पर हवाला मेरा ही दिया जाता है,तेरा नहीं।

-वो बात दीगर है।

-सच है।

-है,पर दिखने और होने में फर्क होता है।

-मतलब?

-तू समझता है।

-अरी, मेरे बिना तो सरकारें तक नहीं चलतीं, हिल जाती हैं।

-वही तो।तू पाला बदलता रहता है,मैं तिलमिलाती रहती हूँ।

-तो तुझे क्यों मलाल होता है?

-क्योंकि तू भौतिकता का कायल हो सकता है,हो भी जाता है।

-और तू?

-मैं तो भाव निरूपित करती हूँ।भाववाचक हूँ',विश्वसनीयता…

Continue

Added by Manan Kumar singh on December 31, 2017 at 12:42pm — 8 Comments

ग़ज़ल इस्लाह के लिए :मनोज अहसास

2122  2122  2122  212

मेरे जीने का भी कोई फलसफा लिख जाइये

आप मेरी चाहतों को हादसा लिख जाइये

आपका जाना ज़रूरी है मुझे मालूम है

हो सके तो मेरी खातिर रास्ता लिख जाइये

नींद मेरी धड़कनों के शोर से बेचैन है

मेरे जीवन मे विरह का रतजगा लिख जाइये

आप अपना नाम लिख लीजै मसीहाओं के बीच

बस हमारे नाम के आगे वफ़ा लिख जाइये

गर जुदा होकर ही खुश हैं आप तो अच्छा ही है

पर हमारी चाहतों को ही खरा लिख…

Continue

Added by मनोज अहसास on December 30, 2017 at 9:09pm — 13 Comments

गत-आगत साल ‘बरवै’ छंद मे [अवधी की अरघान(महक)]

पार हुयी नहिं आसों, बीता साल          

बिटिया अबहूँ क्वांरी. माँ बेहाल  

      

विदा भई जनु बिटिया बीता साल

जैसे–तैसे कटिगा   जिव जंजाल

 

बेसह न पायो कम्बर बीता साल

जाड़ु सेराई कैसे   नटवरलाल ?

 

मिली न रोजी-रोटी, बेटवा पस्त

गए साल का अंतिम सूरज अस्त

 

बारह माह तपस्या, जमे न पाँव

आखिर में मुँह मोड़ा हारा दाँव

 

शीतल, सुरभित, नूतन आया साल

बधू चांद सी आयी जनु…

Continue

Added by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 30, 2017 at 2:33pm — 3 Comments

मैं कौन हूँ ?

मैं कौन हूँ ?

------------------------------

कलम हूँ, इसलिए लिखता हूँ ,

कागज हूँ, इसलिए पढ़ा जाता हूँ |

कथा हूँ, इसलिए कहा जाता हूँ,

व्यथा हूँ, इसलिए सुना जाता हूँ |

काव्य हूँ, इसलिए भव्य हूँ

शांत हूँ, इसलिए द्रव्य हूँ |

हार हूँ, इसलिए प्रहार हूँ ,

जीत हूँ, इसलिए त्यौहार हूँ |

मृत हूँ, इसलिए अमृत हूँ,

जीवन हूँ, इसलिए सृष्ट हूँ |

शौर्य हूँ, इसलिए प्रकाश हूँ,

चंद्र हूँ, इसलिए…

Continue

Added by K.Kumar on December 30, 2017 at 1:30pm — 2 Comments

हाइकू

1

इंसानी भूल

लापरवाह लोग

धूल ही धूल

2

प्यारी सी धुन

सुबह का मौसम

प्यार से सुन 

3…

Continue

Added by नादिर ख़ान on December 29, 2017 at 10:30pm — 4 Comments

प्रिय सुनो तुम्हारी भूल नहीं

प्रिय सुनो तुम्हारी भूल नहीं

अवसाद नहीं रखना मन में

यह मौसम ही अनुकूल नहीं

 

चुप चुप रहना कुछ न कहना कैसे होगा

जब चीख रहीं होगीं लाखों जिज्ञासाएं

क्यूँ है? कैसे है? और रहेगा कब तक यूँ ?

बस बुरे ख्यालों के बादल घिर घिर छाएँ

अब ऐसा भी तो नहीं

के मेरे दिल में चुभता शूल नहीं

 

मैं कहीं रहूँ इस दुनिया में रहता तो हूँ

पर सच कहता हूँ मन का रहता ध्यान वहीँ

क्या हुई भूल आखिर क्या ऐसा बोल दिया

करता रहता…

Continue

Added by SANDEEP KUMAR PATEL on December 29, 2017 at 6:17pm — 3 Comments

भयभीत परम्परा -लघुकथा

भयभीत परम्परा

-----------

"वो कांप रहे हैं।"

एक उड़ती खबर उनके कानों में पहुँची है ।यहाँ अब एक बड़ा मॉल बनेगा ।

बड़े बड़े शॉपिग…

Continue

Added by डॉ संगीता गांधी on December 28, 2017 at 9:11pm — 7 Comments

ग़ज़ल -जिंदगी में है विरल मेरे निराले न्यारे’ दोस्त -कालीपद 'प्रसाद'

काफिया :आरे , रदीफ़ दोस्त

२१२२   २१२२  २१२२  २१२ (+१)

जिंदगी में है विरल मेरे निराले न्यारे’ दोस्त

हो गए नाराज़ देखो जो है’ मेरे प्यारे’ दोस्त |

एक जैसे सब नहीं बे-पीर सारी दोस्ती

किन्तु जिसने खाया’ धोखा किसको’ माने प्यारे’ दोस्त |

दोस्ती है नाम के, मैत्री निभाने में नहीं

वक्त मिलते ही शिकायत, और ताने मारे’ दोस्त |

कृष्ण अच्छा था सुदामा से निभाई दोस्ती

ऐसे’ इक आदित्य ज्यो हमको मिले दीदारे’…

Continue

Added by Kalipad Prasad Mandal on December 28, 2017 at 4:49pm — 2 Comments

ग़ज़ल - इस उम्र में निगाह बहकती ज़रूर है

221 2121 1221 212

छुपती कहाँ है आग दहकती जरूर है ।।

यादों में उनकी आंख फड़कती जरूर है ।।

खुशबू तमाम आई है उनके दयार से ।

गुलशन की वो हवा भी महकती जरूर है ।।

बुलबुल की शोखियों की बुलन्दी तो देखिए ।

बुलबुल बहार में तो चहकती जरूर है ।।

हसरत है देखने की तो आशिक मिजाज रख ।

चहरे से हर नकाब सरकती जरूर है ।।

रहना जरा सँभल के मुहब्बत की वस्ल में ।

अक्सर हया नज़र…

Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on December 28, 2017 at 3:30pm — 7 Comments

तरही ग़ज़ल नम्बर 2,कुछ नये क़वाफ़ी के साथ ।

फाइलातून फ़ाइलातुन फाइलुन

दुश्मन-ए-जाँ लरज़ह  बर अंदाम है

जब तलक ज़िन्दा हमारा नाम है

सोचने की क़ुव्वतें मफ़लूज हैं

मुल्क में सबको हुआ सरसाम है

चूस लेती है बदन का ये लहू

शाइरी भी कितनी ख़ूँँ  आशाम है

उसको छूने से भी मुझको डर लगे

इस क़दर नाज़ुक वो गुल अंदाम है

ये तो दीवानों की बस्ती है "समर"

तुम यहां क्यों आ गए क्या काम…

Continue

Added by Samar kabeer on December 28, 2017 at 11:12am — 27 Comments

Monthly Archives

2025

2024

2023

2022

2021

2020

2019

2018

2017

2016

2015

2014

2013

2012

2011

2010

1999

1970

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Sushil Sarna commented on Saurabh Pandey's blog post कापुरुष है, जता रही गाली// सौरभ
"वाह आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी एक अलग विषय पर बेहतरीन सार्थक ग़ज़ल का सृजन हुआ है । हार्दिक बधाई…"
9 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey posted a blog post

कापुरुष है, जता रही गाली// सौरभ

२१२२ १२१२ २२/११२तमतमा कर बकी हुई गालीकापुरुष है, जता रही गाली मार कर माँ-बहन व रिश्तों को कोई देता…See More
12 hours ago
Chetan Prakash commented on सुरेश कुमार 'कल्याण''s blog post भादों की बारिश
"यह लघु कविता नहींहै। हाँ, क्षणिका हो सकती थी, जो नहीं हो पाई !"
Tuesday
सुरेश कुमार 'कल्याण' posted a blog post

भादों की बारिश

भादों की बारिश(लघु कविता)***************लाँघ कर पर्वतमालाएं पार करसागर की सर्पीली लहरेंमैदानों में…See More
Monday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . . . विविध

मंजिल हर सोपान की, केवल है  अवसान ।मुश्किल है पहचानना, जीवन के सोपान ।। छोटी-छोटी बात पर, होने लगे…See More
Monday

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल - चली आयी है मिलने फिर किधर से ( गिरिराज भंडारी )
"आदरणीय चेतन प्रकाश भाई ग़ज़ल पर उपस्थित हो उत्साह वर्धन करने के लिए आपका हार्दिक …"
Monday

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल - चली आयी है मिलने फिर किधर से ( गिरिराज भंडारी )
"आदरणीय सुशील भाई  गज़ल की सराहना कर उत्साह वर्धन करने के लिए आपका आभार "
Monday

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल - चली आयी है मिलने फिर किधर से ( गिरिराज भंडारी )
"आदरणीय लक्ष्मण भाई , उत्साह वर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार "
Monday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-182
"विगत दो माह से डबलिन में हूं जहां समय साढ़े चार घंटा पीछे है। अन्यत्र व्यस्तताओं के कारण अभी अभी…"
Sunday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-182
"प्रयास  अच्छा रहा, और बेहतर हो सकता था, ऐसा आदरणीय श्री तिलक  राज कपूर साहब  बता ही…"
Sunday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-182
"अच्छा  प्रयास रहा आप का किन्तु कपूर साहब के विस्तृत इस्लाह के बाद  कुछ  कहने योग्य…"
Sunday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-182
"सराहनीय प्रयास रहा आपका, मुझे ग़ज़ल अच्छी लगी, स्वाभाविक है, कपूर साहब की इस्लाह के बाद  और…"
Sunday

© 2025   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service