Added by Manan Kumar singh on January 25, 2016 at 8:18am — 6 Comments
Added by Rahul Dangi Panchal on January 24, 2016 at 10:30pm — 14 Comments
विद्या दान – ( लघुकथा ) –
सारे शहर में इश्तिहार लगे थे कि शास्त्रीय संगीत की प्रख्यात गायिका पदमश्री सुमित्रा देवी गंधर्व की सोलह वर्षीय सुपुत्री एवम शिष्या संगीतिका गंधर्व के जीवन का प्रथम गायकी कार्य क्रम शाम को सात बजे टैगोर भवन में होगा!
इस क्षेत्र के जाने माने एवम मशहूर लोग स्तब्ध थे क्योंकि सुमित्रा देवी ने संगीत के प्रति अपनी अटूट आस्था के चलते शपथ ली थी कि ना तो वह कभी विवाह करेंगी और ना कभी किसी को शिष्य बनायेंगी!
नियत समय पर कार्य क्रम शुरु हुआ!सर्व प्रथम…
ContinueAdded by TEJ VEER SINGH on January 24, 2016 at 8:02pm — 12 Comments
बेवजह बात जिरह करके बढाता क्यूँ है एक मासूम पे इल्जाम लगाता क्यूँ है
खोल देती हैं सभी राज पनीली आँखें फिर जमाने से बशर दर्द छुपाता क्यूँ है
…
Added by rajesh kumari on January 24, 2016 at 6:03pm — 7 Comments
मिन्दो बस्ती की अकेली लडकी, जिस ने सिलाई कड़ाई के काम में सिखलाई प्राप्त कर घर में काम शुरू किया, मगर उतना काम न मिलता कि गुजरा हो सके, तभी उसने रविन्द्र की फैक्टरी में काम पर रखने के लिए विनती की, तो रविन्द्र ने उस से कुछ बातें की और उसे सिलाई के काम पर रख लिया I बाप तो बचपन में ही उन्हें छोड़ कर कहीं चला गया था I शुरू में तो उसे उनके मुताबिक काम करने व् समझने में समस्या आई, मगर जल्दी ही उसने खुद को बाकी लोगों के साथ अडजस्ट कर लिया और धीरे धीरे उसकी काम में दिलचस्पी बढने लगी तो उस ने…
ContinueAdded by मोहन बेगोवाल on January 24, 2016 at 2:00pm — 4 Comments
Added by रमेश कुमार चौहान on January 24, 2016 at 10:14am — 4 Comments
Added by Sheikh Shahzad Usmani on January 23, 2016 at 12:29pm — 7 Comments
Added by kanta roy on January 23, 2016 at 10:34am — 7 Comments
देखो कानून की परिभाषा कैसे बदल जाती है,
नेताओं को बेल और गरीब को जेल हो जाती है ।
यहाँ धनवानों का सारा ऋण माफ हो जाता है,
किसान की ज़िंदगी ऋण में ही साफ हो जाती है ।
किसी बात पर यूं ही कभी इतबार मत करना,
घट जाए कोई घटना तो तकरार मत करना ।
विश्वास और धोखा एक ही सिक्के दो पहलू है,
एक जीने का मकसद और दूसरा छीन लेता है ।
चंदा और रोशनी एक दूजे के संग में घूम रहे ,
पर दिन में एक दूसरे के विरुद्ध जंग लड़ रहे ।
गरीब का आरक्षण कुछ…
ContinueAdded by Ram Ashery on January 22, 2016 at 10:30pm — 1 Comment
Added by kanta roy on January 22, 2016 at 9:51pm — 5 Comments
Added by शिज्जु "शकूर" on January 21, 2016 at 11:13pm — 13 Comments
(आदरणीय सौरभ पाण्डेय के पितृ-शोक पर एक हार्दिक संवेदना )
पहले संदर्भ प्रसंग सहित इस जगती में परिभाषित कर
फिर हो जाते हैं हाथ दूर जीवन का दीप प्रकाशित कर
.
देते हैं वे सन्देश हमें
हर दीपक को बुझ जाना है
पर ज्योति-शेष रहते-रहते
शत-शत नव दीप जलाना है
फैलायी जो रेशमी रश्मि उसको अब रंग-विलासित कर
पहले संदर्भ प्रसंग सहित......
.
है सहज रोप देना पादप
तप है उसको जीवित रखना
करना…
ContinueAdded by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on January 21, 2016 at 10:00pm — 4 Comments
किस लिए वो हसीं बेवफा हो गयी (एक ग़ज़ल एक प्रयास )
२१२ x ४
रदीफ़=हो गयी
काफ़िया=आ
किस लिए वो हसीं बेवफा हो गयी
जान हम से हमारी जुदा हो गयी !!१!!
अब गिला आसमां से नहीं है हमें
बे-असर अब हमारी दुआ हो गयी !!२!!
हाल अपना सुनायें किसे हम भला
लो मुहब्बत हमारी खता हो गयी !!३!!
रात भर करवटों में वो लिपटी रही
याद उनकी हमारी क़ज़ा हो गयी !!४!!
दिल भला या बुरा समझता है कहाँ
ये मुहब्बत सुल्ह की रज़ा हो गयी…
Added by Sushil Sarna on January 21, 2016 at 8:57pm — 6 Comments
एक फ़ौज़ी की मौत – ( लघुकथा ) –
"क्या हुआ नत्थी राम, किस बात पर कर ली आत्म हत्या तुम्हारे लडके ने,कोई चिट्ठी छोडी क्या"!
"थानेदार साब,वह आत्म हत्या नहीं कर सकता,वह तो एक फ़ौज़ी था,उसे मारा गया है"!
"पर उसका शरीर तो गॉव के बाहर पेड पर लटका मिला था"!
"यह सब साज़िश है,उसे मार कर लटका दिया गया"!
" ऐसा कैसे कह रहे हो, क्या तुम्हारी दुश्मनी थी किसी से "!
"दरोगा जी, मैं तो सीधा सादा आदमी हूं! मेरा बेटा शादी के लिये तीस दिन की छुट्टी ले कर आया था!जिस दिन वह…
ContinueAdded by TEJ VEER SINGH on January 21, 2016 at 6:39pm — 10 Comments
Added by Dr T R Sukul on January 21, 2016 at 5:36pm — 2 Comments
Added by Dr. Vijai Shanker on January 21, 2016 at 9:51am — 8 Comments
Added by दिनेश कुमार on January 21, 2016 at 7:27am — 8 Comments
2122—1122—1122—22 |
|
दिल तो है पास, तेरा सिर्फ़ है आना बाक़ी |
और ये बात जमाने से छुपाना बाक़ी |
|
ज़िंदगी इतनी-सी मुहलत की गुज़ारिश सुन लो… |
Added by मिथिलेश वामनकर on January 20, 2016 at 8:41pm — 30 Comments
एक कुआं था
बहुत बड़ा कुआं
शीतल जल से पूर्ण
वहाँ रहते थे अनेकों मेढक
कुएं के मालिक ने कुएं में
डाल दिये कुछेक साँप
एवं फूंका मंत्र
जिससे उस कुएं में कायम हो गया लोकतन्त्र
एक मोटा मेढक बना उसका प्रधान
उसने कराया कुएं में सर्वे
और पाया कि साँपों की संख्या वहाँ है कम
मोटा मेढक और उसके चमचे हुए बहुत हैरान
उन्होने बनाया एक नियम
जिससे हो सके साँपो का उत्थान
सभी साँपो को मिले एक मेढक खाने को रोज
ऐसा हुआ प्रावधान
कहा गया बहुत…
Added by Neeraj Neer on January 20, 2016 at 8:13pm — 10 Comments
इश्क़ करता है कोन दुनिया में
दिल से मरता है कोन दुनिया में
मुफ़्त शेखी बगारने वाले
तुझसे डरता है कोन दुनिया में
महवे हैरत है आसमां मुझ पर
आहें भरता है कोन दुनिया में
आईना बन गए हैं हम लेकिन
अब संवरता है कौन दुनिया में
सबको करना है कूच दुनिया से
कब ठहरता है कौन दुनिया में
अब न मुंसिफ़ कोई उमर जैसा
अद्ल करता है कौन दुनिया में
दिल की गहराई से तुझे हसरत
याद करता है कौन…
Added by SHARIF AHMED QADRI "HASRAT" on January 20, 2016 at 5:00pm — 5 Comments
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