For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

All Blog Posts

दो मन

एक चंचल 

दूजा शांत 

करे युद्ध 

दो मन |

उड़ान भरता 

ख्वाब बुनता 

चंचल चितवन 

एक मन |

सोचता रहता 

कार्य करता 

शांत बैठा 

दूजा मन |

कैसा युद्ध 

कौन जाने 

कई माने 

कई अनजाने |

कभी सावन 

कभी ग्रीष्म 

कभी बसंत 

कभी शरद |

बदलता रहता 

आक्रोश करता 

खामोश बैठता 

कैसा मन !

मौलिक एवं…

Continue

Added by KALPANA BHATT ('रौनक़') on July 1, 2016 at 7:23pm — 2 Comments

कुछ कमाल तो आये

फ़ाइलुन मुफ़ाईलुन फ़ाइलुन मुफ़ाईलुन

212 1222  212 1222 

जिन्दगी में कुछ लम्हे बेमिसाल तो आये

ख्वाब में खयालों में कुछ सवाल तो आये

बेखुदी में हैं अब भी, काश होश आ  जाता    

माँ को अपने बच्चे का कुछ खयाल तो आये

 

रूप में उधर चांदी , इश्क में इधर सोना

रोशनी बहुत होगी कुछ उछाल  तो आये

 

फूल खूबसूरत है,  है नहीं मगर खुशबू

हुस्न तो नुमायाँ है  बोल-चाल तो  आये

 

यूँ तो खून बहता है आदमी की धमनी…

Continue

Added by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on July 1, 2016 at 4:00pm — 13 Comments

मक्खियाँ (लघुकथा) राहिला

सौम्या की खास सहेली काफ़ी जतन के बाद भी लन्दन से शादी के एक दो दिन पहले ना पहुँच, ठीक उसी दिन पहुँच पायी।अपनी प्रिय सखी की पसंद को लेकर उसके मन में काफ़ी सवाल थे,जो मौका पाते ही निकल पड़े।

"तू बस एक वजह बता दे इस कोयले की खान से शादी करने की?"उसने एक नज़र स्टेज पर खड़े उसके दूल्हे डाल कर कहा।

"तमीज से बोल रमा!इतना तो याद रख ,तू मेरे पति के बारे में बात कर रही है।"

"अच्छा!!खूब ,जरा देख..,अपने पूरे कुटुंब को एक नज़र।इतनी हेठी शख्सियत तो तेरे ड्राइवर की भी नहीं।"

"शक्ल…

Continue

Added by Rahila on July 1, 2016 at 3:00pm — 18 Comments


सदस्य कार्यकारिणी
पुत्र प्राप्ति मन्त्र (लघु कथा 'राज ')

 “अरे..अरे रे रे ....  ये क्या कर रहे हो दिमाग तो खराब नहीं हो गया आप लोगों का... किराए दार  होकर बिना बताये मेरे ही घर में ये तोड़ फोड़ क्यूँ?” घर के मुख्य द्वार जिसपर उसके स्वर्गीय पति का नाम लिखा था मजदूरों द्वारा हथौड़े से तोड़ते हुए देखकर आपा खो बैठी सावित्री|

“अरे कोई कुछ बोलता क्यूँ नहीं बंद करो ये सब वरना अभी पुलिस को बुलाती हूँ”

“हाँ बुला लीजिये आंटी जी ताकि आज आपको भी पता लगे किरायेदार कौन है वो तो मेरे सास ससुर ने अब तक मेरा व् मेरे पति का मुँह बंद कर रखा था आज कल…

Continue

Added by rajesh kumari on July 1, 2016 at 10:00am — 10 Comments

गजल(आहटों से डर रहा....)

2122 2122 212

आहटों से डर रहा वह अाजकल

चाहतों का बस हुआ वह आजकल।1



फूल को समझा रहा है असलियत

सुरभियों को डँस रहा वह अाजकल।2



शब्द मय चुभते नुकीले दुर्ग में

राह भूला,है फँसा वह अाजकल।3



बात की गहराइयाँ समझे बिना

तंज बेढब कस खड़ा वह आजकल।4



रोशनी की चाह में खुद को भुला

हो गया है अलबला वह अाजकल।5



आदमी लगता कभी सुलझा हुआ

फिर लगा खुद ही ठगा वह अाजकल।6



चादरें हैं श्वेत सबको क्या पता

काजलों में है रँगा… Continue

Added by Manan Kumar singh on July 1, 2016 at 6:30am — 8 Comments


सदस्य टीम प्रबंधन
ग़ज़ल - भूल जा संवेदना के बोल प्यारे // --सौरभ

२१२२ २१२२ २१२२



फ़र्क करना है ज़रूरी इक नज़र में

बदतमीज़ों में तथा सुलझे मुखर में



शांति की वो बात करते घूमते हैं

किन्तु कुछ कहते नहीं अपने नगर में



शाम होते ही सदा वो सोचता है-

क्यों बदल जाता है सूरज दोपहर में



भूल जा संवेदना के बोल प्यारे

दौर अपना है तरक्की की लहर में



हो गया बाज़ार का ज्वर अब मियादी

और देहाती दवा है गाँव-घर में



आदमी तो हाशिये पर हाँफता है

वेलफेयर-योजनाएँ हैं…

Continue

Added by Saurabh Pandey on July 1, 2016 at 12:30am — 30 Comments

ज़िंदगी को छलने लगी .....

ज़िंदगी को छलने लगी .....

गज़ब हुआ

एक चराग़ सहर से

शब की चुगली कर बैठा

एक लिबास

अपने ग़म की

तारीकियों से दरयाफ़्त कर बैठा

कोई करीबियों से

फासलों की बात कर बैठा

मैंने तो

तमाम रातों के चांद

उस पर कुर्बान कर दिए थे

अपने ग़मग़ीन पैरहन पर

हंसी के पैबंद सिल दिए थे

अपनी आंखों के हमबिस्तर को

मैं चश्मे साहिल पे ढूंढती रहा

नसीमे सहर से

उसका पता पूछती रही

उम्मीदों की दहलीज़

नाउम्मीदी की…

Continue

Added by Sushil Sarna on June 30, 2016 at 8:35pm — 4 Comments

कहाँ तक ज़िन्दगी से भागियेगा (ग़ज़ल)

1222 1222 122

हर इक चेहरे पे था चेहरों का पर्दा
तभी तो खा गया आईना धोखा

तुम्हारी मौत मेरी ज़िन्दगी है,
अँधेरा रौशनी से कह रहा था

नहीं छोड़ेगी पीछा मरते दम तक,
कहाँ तक ज़िन्दगी से भागियेगा।

निहत्था आफ़ताब आया फ़लक पर,
अभी हमला भी होगा बादलों का।

वफ़ा की बात फिर करने लगा मैं,
रिएक्शन ये दवा का हो गया क्या?

"जय" अब तो छोड़ करना सौदा-ए-दिल
हुआ कंगाल तू सह-सह के घाटा

(मौलिक व अप्रकाशित)

Added by जयनित कुमार मेहता on June 30, 2016 at 6:42pm — 13 Comments

मानवता के लिये जियो-पंकज

बहुत प्रताप था सम्राट अशोक

अब कहाँ है तुम्हारा सिंहासन?



बहुत जलवा था ज़िल्ले इलाही

कहाँ हैं अब मुग़लिया वंशज ?



जो महल जो हीरे जवाहरात

तूने खून से जुटाए थे न !

कोह-ए-नूर तो शो पीस ही रह गया

बादशाह सलामत?



तेरी खून पीने वाली तलवार

टीपू सुल्तान

बिक गयी- नीलाम हो गयी।

लेकिन तेरी वंशावली के

बूते की बात नहीं रही।।



गफ़लत में जीते हुए मौत से हारकर

सारी हेकड़ी और कौशल यहीं छोड़कर

जाना पड़ा तुमको भी महाराज… Continue

Added by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on June 30, 2016 at 3:36pm — 4 Comments

अहसास

अजब मंजर था वो..

अथाह सागर,हाथ हिलाते साहिल पर खड़े कुछ अपने

आँखों में बिछोह का दर्द लिये,

और एक चोटी सी कश्ती पर स्वआर वो

ह्रदय पीड़ा युक्त रोरो धाराओं की हलचल से व्याप्त



आँखे अश्रु रोकने के असमंजस में

धीरे धीरे दूर होती कश्ती देख

मुड़ने लगे वे सब अपने



अचानक आया सागर में तूफ़ान

कश्ती लगी डगमगाने

उसे अहसास हुआ जब तक

फिर भी पुकारा उसने उन अपनों को

पर उसकी आवाज़ लहरों से टकराकर लौट आई

"एक हाथ भी आगे न आया ज़िन्दगी… Continue

Added by Dr. Arpita.c.raj on June 30, 2016 at 2:51pm — 1 Comment

जो हुआ जैसा हुआ अच्छा हुआ

जो हुआ जैसा हुआ अच्छा हुआ

कब हुआ है पर मेरा सोचा हुआ

ले रहा हूँ साँस तो मैं हर घड़ी

सच तो ये मुझको मरे अरसा हुआ

कौन सुलझाता ये मेरी मुश्किलें

हर कोई अपने में जब उलझा हुआ

मैंने सबको अपना ही माना मग़र

दिल से कोई कब मेरा अपना हुआ

कोशिशें नाकाम ही होंगी सभी

वक़्त कब लौटा भला बीता…

Continue

Added by deepak kumar shukla on June 30, 2016 at 1:00pm — 3 Comments

गजल(आ गये फिर ...)

2122 22 2

आ गये फिर गिरगिट जी
शुरू हुई अब गिट-पिट जी।1

रंग बदले कितने सब
हो गये हैं अब हिट जी।2

माप कोई जूते की
पाँव इनके हैं फिट जी।3

ढ़ाल लिया सबको शीशे
इस कला के डी.लिट. जी।4

राह इनकी रूकती कब
पास पड़े सब परमिट जी।5

रोशनी के ठेके हैं
बन गये हैं सर्किट जी।6

पास होते हरदम ही
काम आती बस चिट जी।7
मौलिक व अप्रकाशित@मनन

Added by Manan Kumar singh on June 30, 2016 at 7:10am — 2 Comments

ग़ज़ल

फ़ैलुन,फ़ैलुन,फ़ैलुन,फ़ैलुन,फ़ैलुन,फ़ा

.

इक तरफा यारी यार निभाऊँ क्यूँ कर ।।

फोकट में डेली चाय पिलाऊँ क्यूँ कर ।।(1)



रोज सुबह तू दूध जलेबी ठसक रहा,

ऊपर से नामी ग़ज़ल सुनाऊँ क्यूँ कर ।।(2)



बन हीरो भटक रहा खुर्राट निठल्ला,

तेरा खरचा अब और चलाऊँ क्यूँ कर ।।(3)



बनिया भी अपना पैसा माँग रहा है,

तेरी खातिर मैं नाक छुपाऊँ क्यूँ कर ।।(4)



सारे लफड़े-झगड़े तू देख सलट खुद,

तेरे लफड़ों में टाँग अड़ाऊँ क्यूँ कर ।।(5)



उस लड़की के…

Continue

Added by कवि - राज बुन्दॆली on June 30, 2016 at 2:30am — 8 Comments

ग़ज़ल : न मुश्किल बढ़ा आजमाने से पहले

                 

122 – 122 – 122 - 122

               

न मुश्किल बढ़ा आजमाने से पहले

नजर को मिला दिल लगाने से पहले

 

सफ़र ज़िन्दगी का रहा फिर अधूरा

खुदा याद आया न जाने से पहले

 

वो दिन रात हलकान पैसे में देखो

करे मोल बाज़ार आने से पहले

 

तुम्हे भी तो आखिर यही सब मिलेगा

जरा सोच लो तुम सताने से पहले

 

मुहब्बत में शर्तें तो होती नहीं हैं

सही पाठ पढ़ लो ज़माने से पहले   

.

गयी…

Continue

Added by munish tanha on June 29, 2016 at 5:30pm — 4 Comments

आक्रोश

क्या हुआ जो मौनी बाबा को आज क्रोध आ गया ? यह चर्चा चारों तरफ हो रही थी। सुबह से गली और चबूतरों पर बैठे लोग आश्चर्य प्रकट कर रहे थे। कि उनके जैसा संत क्यों क्रोधित हो गया। यह चर्चा करते हुए श्री बेनी बाबू ने कहा कि आखिर कोई तो बात ह ोगी िकवे इतने तैश में दिख रहे थे। जनार्दन जी का कहना था कि अरे भाई हो सकता है कि उन्हें या उनको समझाने वाले को कोई गलतफहमी हो गयी हो। इस रविन्द्र नाथ ने अपने जबड़े कसते हुए कहा कि क्या कहा जाय इस तरह से होना गांव की बदनामी का ही सबब हो सकता है । यदि बाबा गांव से जा…

Continue

Added by indravidyavachaspatitiwari on June 29, 2016 at 2:00pm — No Comments

राम-रावण कथा (पूर्व-पीठिका) - 9 (1)

.............. कल से आगे



‘‘उठो वत्स रावण !

‘‘तुम दोनो भी उठो कुंभकर्ण और विभीषण !’’

आवाज सुन कर तीनों अचंभित हुये, यह किसकी आवाज थी। यह तो पहले कभी नहीं सुनी थी। कितनी गंभीर फिर भी कितनी मृदु।

‘‘आँखें खोलो वत्स ! अपने प्रतितामह से साक्षात नहीं करोगे ?’’

तीनों ने आँखें खोल दीं। सामने सच में ब्रह्मा खड़े हुये उन्हें आवाज दे रहे थे। ठीक वही छवि जैसी मातामह ने बताई थी। कमर में गेरुआ अधोवस्त, कंधे पर यज्ञोवपीत अत्यंत गौरवर्ण, लंबा कद, लंबी सी धवल दाढ़ी और सुदीर्घ…

Continue

Added by Sulabh Agnihotri on June 29, 2016 at 9:39am — 1 Comment


सदस्य कार्यकारिणी
ग़ज़ल -है फर्क बहुत मेरे तेरे गुलज़ारों में -( गिरिराज भंडारी

22   22   22   22   22   2   ( बहरे मीर )

है फर्क बहुत मेरे तेरे गुलज़ारों में

महज़ साम्य है विज्ञापित दीवारों में

 

तुम अच्छाई खोजो इन हत्यारों में

हम भी खुशियाँ खोजेंगे इन हारों में

 

कहीं खून से होली खेली जाती है

कहीं दूध है प्रतिबंधित त्यौहारों में

 

पत्थर होगा वो तुमने जो घर लाया  

मोम कहाँ मिलते हैं इन बाज़ारों में

 

फुट पाथों को तुम भी रौंदोगे इक दिन

हो जाती है यही तेवरी कारों…

Continue

Added by गिरिराज भंडारी on June 29, 2016 at 8:30am — 6 Comments

एक सिपाही की इच्छा

मेरी मौत पर आंसू न बहाना तुम,

मैं शहीद हूँगा इस देश की खातिर,

मेरी मौत पर एक जश्न मनाना तुम।



जिस मिट्टी में जन्म लिया,

इसकी रेत में खेलकर बड़े हुए,

पैरों से रौंदा जिसको मैंने,

अन्न खाया है जिस मिट्टी का,

मर जाऊं गर इस मिट्टी की खातिर,

मेरी मौत पर एक जश्न मनाना तुम ।



गर गिरें तुम्हारी आंखों से आंसू उस घड़ी,

मेरी तमन्ना है वो खुशी के आंसू हों,

इस पवित्र मिट्टी में समाते हुए,

मेरा कफन हरी वर्दी या तिरंगे का हो,

प्राण जाएं… Continue

Added by सुरेश कुमार 'कल्याण' on June 28, 2016 at 6:41pm — No Comments

हाल-ए-दिल पूछने चले आये (ग़ज़ल)

2122 1212 22



हाल-ए-दिल पूछने चले आये।

जाइए, जाइए.....बड़े आये।



उनके नज़दीक हम गये जितने,

दरमियाँ उतने फ़ासले आये।



आपके शह्र, आपके दर पर,

आपका नाम पूछते....आये।



राह-ए-मंज़िल में करने को गुमराह,

जाने कितने ही रास्ते आये।



हुए रावण के अनगिनत मुखड़े,

राम-राज अब तो कोई ले आये।



ज़ीस्त का मस्अला नहीं सुलझा,

जाने कितने चले गए, आये।



ढूँढे मिलता नहीं हमारा दिल,

हाथ किसके न जाने दे… Continue

Added by जयनित कुमार मेहता on June 28, 2016 at 4:02pm — 22 Comments

आकलन सरकार का तो खूब करते आप हैं

२१२२ २१२२ २१२२ २१२ 

आकलन सरकार का तो खूब करते आप हैं

पर न सोचा आपने कितने किये खुद पाप हैं

 

हुक्मरानों को किया पैदा भी खुद है आपने

इस तरह रिश्ते से उनके आप माई बाप हैं

 

इक मसीहा तो सफाई के लिए चिल्ला रहा

रोज क्या ये भी कहे बीमारियाँ अभिशाप हैं

 

गंगा तू  पावन करेगी पापी को वरदान ये

खुद सड़ेगी  कोढियों सी  कब मिले ये शाप हैं

 

बाँध सडकें पुल हुए कमजोर महलों वास्ते

लूट के ही माल से करते लुटेरे…

Continue

Added by Dr Ashutosh Mishra on June 28, 2016 at 2:30pm — 4 Comments

Monthly Archives

2026

2025

2024

2023

2022

2021

2020

2019

2018

2017

2016

2015

2014

2013

2012

2011

2010

1999

1970

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"दुःखद"
Tuesday
Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
Sep 24
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Sep 22
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Sep 19
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Sep 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Sep 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Sep 17
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11
जगदानन्द झा 'मनु' replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय, प्रणाम संगहि संग हार्दिक धन्यवाद। अपनेक मार्गदर्शन पाबि बहुत बेसी मोटिवेशन आ सीखक मिलैए…"
Sep 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
Aug 18
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Aug 15
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
Aug 15

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service