For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

All Blog Posts (19,174)

रिश्ते हैं , बन जाते हैं -- डा० विजय शंकर

लोग मिलते हैं ,

जीवन में आते हैं ,

रिश्ते हैं , बन जाते हैं |

कभी छाँव में दो पल साथ बिताते हैं ,

कभी तपती दोपहरी भी सह जाते हैं ,

कभी चट्टान से बन जाते हैं ,

कभी बरगद की तरह हो जाते हैं,

कभी फूलों की तरह आते हैं ,

सब महका , महका जाते हैं ,

रिश्ते हैं , बन जाते हैं |



रिश्ते बनते हैं ,

बनते जाते हैं ,

कभी छूट भी जाते हैं ,

कभी कहीं बिखर जाते हैं ,

कभी बिखरने की वजह से छूट जाते हैं।

कभी कांच से भी नाज़ुक रह जाते हैं… Continue

Added by Dr. Vijai Shanker on December 21, 2014 at 9:40am — 20 Comments


सदस्य कार्यकारिणी
सूरजमुखी के पास जा / ग़ज़ल (मिथिलेश वामनकर)

   2212   -    2212

हो  वार  अब  के  दूसरा

बेजार दिल दामन बचा

मेरे  मुकाबिल  तू  खड़ा

कितना मगर तू लापता …

Continue

Added by मिथिलेश वामनकर on December 21, 2014 at 2:00am — 21 Comments

गजल-ये नहीं शायरी के पन्नें है!

2122 1222 22

ये मेरी जिन्दगी के पन्ने हैं!
ये नहीं शायरी के पन्ने हैं!!

ये नशेमन है मेरी आहों के!
ये तेरी बेरुखी के पन्ने हैं!!

मुफलिसी बेबसी की ये चींखे!
तीरगी इस गली के पन्नें हैं!!
ंंंंंं
ये तो बच्चों की लाशे है या रब!
ये तेरी खामुशी के पन्ने हैं!!

ना समझ हो अभी क्या समझोगे!
मेरे कागज सभी के पन्ने हैं!!

देखनी हो जिसे दुनिया 'राहुल'!
मुझको पढ़ ले इसी के पन्ने हैं!!

मौलिक व अप्रकाशित

Added by Rahul Dangi Panchal on December 20, 2014 at 7:30pm — 25 Comments

सज़ा दो मुझे

चोट दिल पे लगी है दवा दो मुझे
याद आये न उसकी दुआ दो मुझे

प्‍यार जिससे किया छुप गया वो कहीं
ऐ हवा तुम ही उसका पता दो मुझे

मर न जायें कहीं प्‍यार के दर्द से
दर्द कैसे सहें तुम सिखा दो मुझे

हर खुशी आपको तो दिया हूँ मगर
दिल दुखाया कभी तो सज़ा दो मुझे

अब जुदाई न मुझसे सही जाती है
मौत की नींद आकर सुला दो मुझे

मौलिक एवं अप्रकाशित अखंड गहमरी

Added by Akhand Gahmari on December 20, 2014 at 2:08pm — 28 Comments

मत लिखना आने की बात

मत लिखना आने की बात

मत लिखना आने की बात

 आने से पहले

 जो ना आए, नियत वक्त पे

 झल्लाएगा मन

 उठेंगे सौ-सौ प्रश्न

 तुम्हारे बारे में

 लपटें उठ जाएंगी

 राख ढके अंगारे में

 अच्छा है बिन बतलाए आओ

 बिना कोई उम्मीद जगाए

 आ जाओ जो ऐसे एक दिन

 दिल होली, दिवाली, ईद मनाए |

  सोमेश कुमार(08/08/2014) (मौलिक एवं अप्रकाशित )

Added by somesh kumar on December 20, 2014 at 11:54am — 19 Comments


सदस्य कार्यकारिणी
प्यासा

उसने सागर से कहा “पानी दो बहुत प्यासा हूँ”

सागर बोला -“रोज पीते हो खाली हो गया हूँ”|

नदिया से कहा “पानी दो बहुत प्यासा हूँ” नदिया ने कहा “आगे जा रही हूँ पसीना बहाने वाले प्यासों के पास;

 पीछे लौटना मेरी नियति नहीं है”|

 कुए से कहा “पानी दो प्यासा हूँ गला सूख रहा है मर जाऊँगा ”

कुँए ने कहा “मैं स्वाभिमानी हूँ  प्यासे के पास नहीं जाता प्यासा मेरे पास आता है”|

पास बहते नाले से कहा "तू ही पिला दे यार" उसने कहा “पहले ही तू मुझे  बहुत गन्दा कर चुका…

Continue

Added by rajesh kumari on December 20, 2014 at 11:00am — 25 Comments


सदस्य कार्यकारिणी
समंदर पार वालों ने हमारा फन नहीं देखा - ग़ज़ल (मिथिलेश वामनकर)

1222-1222-1222-1222

----------------------------------------------

समंदर  पार  वालों  ने   हमारा  फ़न  नहीं  देखा

जवाँ अहले वतन ने आज तक बचपन नहीं देखा

 

जुरूरी  था, वही  देखा, ज़माने  की  ज़ुबानों  में

कि मीठी  बात देखी है  कसैलापन  नहीं  देखा

   

तबस्सुम देख के  मेरी, तसल्ली  हो गई उनको

हमारी आँख  में  सोया  हुआ सावन नहीं  देखा

  

निजामत का भला अपना वतन कैसा…

Continue

Added by मिथिलेश वामनकर on December 20, 2014 at 4:56am — 28 Comments

नवगीत : नवल वर्ष है आया.

*नवल वर्ष है आया.

बीता वर्ष पुरातन छोडो,

क्या खोया क्या पाया.

नवल वर्ष है आया.

 

तन्द्रा भंग सुहाना कलरव,

मुर्गा बांग लगाता.

किरण धो रही कालिख सारी,

दिनकर द्वार बजाता.

सागर जल में नहा रश्मियाँ,

दुति चन्दन लेपेंगीं.

पौ फटते ही तिलक सिंदूरी,

सूरज भाल लगाया.

नवल वर्ष है आया.

 

भोर उठी आगी सुलगाती,

धुंध धुंआ संग जाती.

पीली धूप पकौड़ी तलती,

श्यामा दूध दुहाती.

किया…

Continue

Added by harivallabh sharma on December 19, 2014 at 11:30pm — 12 Comments

बाबू जी मेरी माँ -लघु कथा

                  

     वह चालीस वर्ष का हट्टा –कट्टा जवान था I बस में मेरी खिड़की के करीब आया I डबडबायी आँखों से मेरी ओर देखा –‘बाबू जी मेरी माँ अस्पताल में दम तोड़ रही है, उसकी दवा लेने गया था, फकत इक्कीस रुपये कम पड़ गए है I बाबू जी आप मेहरबानी कर दे तो मेरा माँ शायद बच जाय I अल्लाह आपको नेमते देगा I’

      उसकी आँखों से आंसू  छलक पड़े I मुझे तरस आ गया I मैंने उसे रुपये दे दिए I वह दुआ देता आँखों से ओझल हो गया I  

      किसी कारण से मेरी बस वही रुकी रही I इतने में…

Continue

Added by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 19, 2014 at 7:04pm — 16 Comments

नव वर्ष पर ...हों सृजन अब कुछ नये से..

नव वर्ष पर....



हों सृजन अब कुछ नये से.....

कुछ नई सी कल्पनाएं।

फिर नया यह वर्ष आओ

हम सभी मिलकर मनाएं।



छोड़ दें हम पंगु सब

परिपाटियों को।

दें नये स्वर से गुँजा

इन वादियों को।

जो सुखद सी सीख गत से

है मिली थाती हमें

साथ ले बढ़ते चले हम

तोड़ कर सब वर्जनाएं।



फिर नया यह वर्ष आओ

हम सभी मिलकर मनाएं।



मुफलिसी सीलन भरे

कोनों पसरती।

जिन्दगी भय लूट के

सायों सिसकती

घूप पर हक है सभी… Continue

Added by seemahari sharma on December 19, 2014 at 5:38pm — 12 Comments

गजल -- देखकर मासूम बच्चों की हँसी

ग़ैर तरही गजल



देखकर मासूम बच्चों की हँसी

आज कुछ मन की उदासी कम हुई



गीत गजलें छन्द मुक्तक फिर कभी

तुझसे मन उकता गया है शायरी



मुझमें शायद कुछ न कुछ तो है कमी

हर किसी को मुझ से जो नाराज़गी



कल मेरे दिल को बहुत सदमा लगा

मेरी गजलें उसने बेगानी कही



गुजरा बचपन जैसे कल की बात हो

तेज़ है रफ़्तार कितनी वक़्त की



रेत पर लिक्खी इबारत की तरह

कुछ ही पल टिकतें हैं मेरे ख़्वाब भी



आप इसको जो भी चाहे नाम… Continue

Added by दिनेश कुमार on December 19, 2014 at 4:18pm — 18 Comments

ग़ज़ल ................... गुमनाम पिथौरागढ़ी

१२२२  १२२२ १२

है उसकी याद बादल की तरह

भटकता हूँ मैं पागल की तरह

हवास व्यापार के नाले हैं यहाँ

मुहब्बत थी गंगाजल की तरह

ये जीवन हादसों का मलवा है

किसी बेवा के आँचल की तरह

हुई नाकाम कोशिश भूलने की

थी तेरी याद दल दल की तरह

है चुप का रूप गोया ताज हो

है उसकी बात कोयल की तरह

मौलिक व अप्रकाशित

गुमनाम पिथौरागढ़ी

Added by gumnaam pithoragarhi on December 19, 2014 at 2:51pm — 8 Comments

ख़ामोश जुबां, ख़ामोश नज़र ....

ख़ामोश जुबां, ख़ामोश नज़र ....

ख़ामोश जुबां, ख़ामोश नज़र

ख़ामोश वो सारे नज़ारे थे

ख़ामोश थी खून की चीखें सभी

ख़ामोश वो अश्कों के धारे थे

ख़ामोश जुबां, ख़ामोश नज़र

ख़ामोश वो सारे नज़ारे थे …….

खूनी चेहरों के मंजर ने

हर धर्म का फर्क मिटा डाला

क्या अपना और बेगाना क्या

हर दुःख को अपना बना डाला

हर चेहरे पे इक दहशत थी

और सपनें सहमे सारे थे

ख़ामोश जुबां, ख़ामोश नज़र

ख़ामोश वो सारे नज़ारे थे ….

बिखरे चूडी के टुकडों…

Continue

Added by Sushil Sarna on December 19, 2014 at 12:02pm — 12 Comments

पछतावा (लघुकथा)

"सीमा, अपनी बारहवीं से आगे की पढ़ाई पूरी कर लो। कुछ बन जाओगी तो कामयाब हो जाओगी।"

"मुझे कामयाब होकर क्या करना है भगवान का दिया सबकुछ तो है हमारे पास।"- सीमा ने सौरभ को यही जवाब दिया था।

काल का ऐसा चक्र चला सौरभ इस दुनिया को अलविदा कह गया। पार्टनर भाई ने सारे बिजनेस पर धीरे-धीरे कब्जा कर लिया।

"निशा, अब हमारा क्या होगा? मेरे तो बच्चे भी छोटे-छोटे हैं उनका पालन-पोषण कैसे करूँगी? जेठ जी से कहकर थोड़ा काम दिलवा दो ना।"

"देख सीमा, तुमको तो पता ही है अब मुझसे घर का काम बनता नहीं… Continue

Added by विनोद खनगवाल on December 19, 2014 at 8:10am — 7 Comments


सदस्य कार्यकारिणी
सूर्य तो बस सुधा कूप है/ नवगीत (मिथिलेश वामनकर)

प्रेम की गुनगुनी धूप है

सूर्य तो बस सुधा कूप है

 

हंस रहा रश्मियाँ भेजकर

तीर्थ के दीप सा बल रहा

कष्ट में पुष्प सा खिल गया

अनगिनत विश्व का छंद है

कांति का शांति का रूप है

सूर्य तो बस सुधा कूप है

 

ब्रह्म के कण विचरते हुए

बल तेरा मिल गया हर दिशा

शून्य में रूप तू इष्ट का

अस्त पर व्यस्त तू फिर कहीं

कर्म का धर्म का यूप है

सूर्य तो बस सुधा कूप है

 

सृष्टि के पुत्र का…

Continue

Added by मिथिलेश वामनकर on December 19, 2014 at 3:50am — 20 Comments


सदस्य टीम प्रबंधन
नये साल का मौसम आया (नवगीत) // --सौरभ

नये साल के नये माह का

मौसम आया..

लेकिन सूरज भौंचक

कितना घबराया है !



चटख रंग की हवा चली है

चलन सीख कर..

खेल खेलती, बंदूकों के राग सुनाती

उनियाये कमरों में बच्चे रट्टा…

Continue

Added by Saurabh Pandey on December 19, 2014 at 3:31am — 20 Comments


मुख्य प्रबंधक
अतुकांत कविता : केसर के फूल (गणेश जी बागी)

अतुकांत कविता : केसर के फूल

चौक गया

यह देखकर 

स्कूल के फर्श पर

फैला गाढ़ा रंग

बिलकुल वैसा ही था

जैसा

कुछ वर्ष पहले था

मुंबई के प्लेटफॉर्म पर  

कोई अंतर नहीं

एकदम सुर्ख़ लाल रंग

उपजाऊ भूमि

बो दिया बारूद

इस उम्मीद में

कि .........

केसर फूलेंगे ।

(मौलिक व अप्रकाशित)

पिछला पोस्ट…

Continue

Added by Er. Ganesh Jee "Bagi" on December 19, 2014 at 12:00am — 24 Comments

कली तुझसे पूछूँ एक बात

कली तुझसे पूछूँ एक बात,

की जब होती है आधी रात,

कौन  भवंरा बनके चुपचाप,

तेरी  गलियों में आता है !!

 

कली  से काहे पूछे  बात,

की जब होती है आधी रात,

मैं महकती रहती हूँ चुपचाप,

बिचारा खिंच-खिंच आता है !!

 

कभी करता है मिलन की बात ,

सह काटों के आघात वो आधी रात,

नैन से नैन मिला कर चुपचाप,

वो  भवंरा खुद शरमा जाता है !!

 

सखी क्या कह दूँ दिल की बात ,

की अब तो ढलती जाए रात,

नैनों के…

Continue

Added by Hari Prakash Dubey on December 19, 2014 at 12:00am — 6 Comments

गज़ल ~ पेशावर के आँसू

1222 1222 1222 1222



खबर ऐसी करे हैरान पेशावर से आयी है ।

कि बू हैवानियत की फिर पडोसी घर से आयी है ।



धर्म के नाम पर मासूम बच्चे भी नहीँ बख्शे ,

ये बरबरता तुम्हारे कौन से जौहर से आयी है ।



कत्ल इंसानियत का कर जिहादी पायेँगे जन्नत ,

भला तालीम ऐसी कौन पैगम्बर से आयी है ।



जो बोता था हमेशा से किसी के वास्ते काँटे ,

उसे ये चोट अपने ही उगाये खर से आयी है ।



संभल जा दूसरोँ पर नफरतोँ के वार करने से ,

कि अब तो दर्द की आवाज तेरे… Continue

Added by Neeraj Nishchal on December 18, 2014 at 11:32am — 8 Comments

जिंदगी जिंदगी

तुझे पा लिया है जग पा लिया है
अब दिल में समाने लगी जिंदगी है

कभी गर्दिशों की कहानी लगी थी
मगर आज भाने लगी जिंदगी है

समय कैसे जाता समझ मैं ना पाता
अब समय को चुराने लगी जिंदगी है

कभी ख्बाब में तू हमारे थी आती
अब सपने सजाने लगी जिंदगी है

तेरे प्यार का ये असर हो गया है
अब मिलने मिलाने लगी जिंदगी है

मैं खुद को भुलाता, तू खुद को भुलाती
अब खुद को भुलाने लगी जिंदगी है

"मौलिक व अप्रकाशित"

मदन मोहन सक्सेना

Added by Madan Mohan saxena on December 18, 2014 at 11:10am — 6 Comments

Monthly Archives

2026

2025

2024

2023

2022

2021

2020

2019

2018

2017

2016

2015

2014

2013

2012

2011

2010

1999

1970

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

amita tiwari posted a blog post

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें बेगुनाही और इन्साफ की बात क्यों सोचती हैं ये औरतें चुपचाप अहिल्या बन…See More
Friday
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post गर्भनाल कब कट पाती है किसी की
" मान्य,सौरभ पांडे जीआशीष यादव जी , , ह्रदय से आभारी हूँ. स्नेह बनाए रखियगा | सौरभ जी ने एक…"
Thursday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on amita tiwari's blog post बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें
"आदरणीया अमिताजी, तार्किकता को शाब्दिक कर तटस्थ सवालों की तर्ज में बाँधा जाना प्रस्तुति को रुचिकर…"
Thursday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, आपकी प्रस्तुति निखर कर सामने आयी है. सभी शेर के कथ्य सशक्त हैं और बरबस…"
Thursday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय नीलेश भाई, आपका स्वागत है.     करेला हो अथवा नीम, लाख कड़वे सही, लेकिन रुधिर…"
Thursday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय बाग़ी जी एवं कार्यकारिणी के सभी सदस्यगण !बहुत दुखद है कि स्थिथि बंद करने तक आ गयी है. आगे…"
Wednesday

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय अजय गुप्ता जी, आपकी भावनाओं और मंच के प्रति आपके जुड़ाव को शब्द-शब्द में महसूस किया जा सकता…"
Tuesday
amita tiwari and आशीष यादव are now friends
Monday
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
"मान्यवर  सौरभ पांडे जी , सार्थक और विस्तृत टिप्पणी के लिए आभार."
Monday
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"आशीष यादव जी , मेरा संदेश आप तक पहुंचा ,प्रयास सफल हो गया .धन्यवाद.पर्यावरण को जितनी चुनौतियां आज…"
Monday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय धामी जी सारगर्भित ग़ज़ल कही है...बहुत बहुत बधाई "
May 11
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार
"आदरणीय सुशील जी बड़े सुन्दर दोहे सृजित हुए...हार्दिक बधाई "
May 11

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service