मफ़ऊल फ़ाइलातुन मफ़ऊल फ़ाइलातुन
ख़ुशियों का इस जहाँ में फ़ुक़दान हो न जाये
ग़म अपनी ज़िन्दगी का उन्वान हो न जाये
नफ़रत का आज कंकर जो तेरी आँख में है
इक रोज़ बढ़ते बढ़ते चट्टान हो न जाये
मज़लूम की कहानी सुनकर तू हँस रहा है
तेरा भी हाल ऐसा नादान हो न जाये
सारे अदू लगे हैं,यारो इसी जतन में
पूरा हमारे दिल का अरमान हो न जाये
दोनों तरफ़ की फ़ौजें होने लगीं…
ContinueAdded by Samar kabeer on February 20, 2018 at 5:55pm — 17 Comments
Added by Kumar Gourav on February 20, 2018 at 3:35pm — 8 Comments
-हेलो सर।
-हाँ, बोलो रवि',समाचार-संपादक ने खबर की बावत तफ्तीश की।
-जोरदार खबर है सर।
-बताओ भी जल्दी।जान मत खाओ।
-सर,शहर-कोतवाल की बीबी भाग गई।पहले बेटी,अब....।
-धत्त ससुरे!ये भी कोई खबर है?
-तहलका मच जायेगा सर,इस खबर से।
-नहीं रे,कुछ नहीं होगा।अभी घोटालों की खबर चाहिए, ....बस घोटालों की।
-वो भी है साहिब।
-तो बोल ना रे....।
-आज कलम वाली कंपनी के यहाँ छापे पड़ रहे हैं।
-कहाँ?
-यू पी में।हजारों करोड़ की बात…
Added by Manan Kumar singh on February 20, 2018 at 8:30am — 6 Comments
फागुन
अलसाई हुई भोर को
फागुनी दस्तक की
गंध ने महका दिया
मेरे अंदर भी
बीज अंकुरित होने लगे
तुम्हारे अहसासों के
शायद तुम भी
गुनगुना रही होगी
होली का गीत
प्रेम की मादल पर
कुछ पुरानी यादें भी
थाप दे रही होंगी
हृदय के आँगन में
मौलिक एवं अप्रकाशित ।
Added by Mohammed Arif on February 20, 2018 at 12:30am — 10 Comments
रत्नाकर जंगलों में भटकता, और आने-जाने वालों को लूटता | यही तो उसका पेशा था| नारद-मुनी भेस बदलकर उसके सामने खड़े थे, बहुत दिनों बाद एक बड़ा आसामी हाथ लगा है: सोचकर रत्नाकर ने धमकाया ,"तुम्हारे पास जो कुछ भी हो ,सब मेरे हवाले कर दो वरना जान से हाथ धोना पड़ेगा|"
"ठीक है, सब तुमको दे दूंगा,पर यह पाप है,तुम जो भी कुछ कर रहे हो पाप है|"
"यह मेरा पेशा है,पाप और पुण्य को मैं नहीं जानता! तुम मुझे अपना सब कुछ देते हो कि नहीं? वरना यह लो....|"
नारद जी ने निडर होकर कहा," मुझे मारने के…
Added by KALPANA BHATT ('रौनक़') on February 19, 2018 at 10:43pm — 17 Comments
दबे पाप ऊपर जो आने लगे हैं
सियासत में सब तिलमिलाने लगे हैं।१।
घोटाले वो सबके गिनाने लगे हैं
मगर दोष अपना छिपाने लगे हैं।२।
वतन डूबता है तो अब डूब जाये
सभी खाल अपनी बचाने लगे हैं।३।
रहे कोयले की दलाली में खुद जो
गजब वो भी उँगलीउठाने लगे हैं।४।
दिया था भरोसा कि लुटने न देंगे
वही बेबसी अब …
Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 19, 2018 at 4:00pm — 20 Comments
11-02-2018 "मधुर" जी के स्मृति में भावभीनी श्रद्धाञ्जलि
छन्द विधा : शक्ति छंद
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कहां प्यार ऐसा मिलेगा कहीं,
हमारे सखा सा जहां में नहीं।
दिया प्यार इतना कि कर्जित हुए,
हुई आंख नम जो थे गर्वित हुए।
हमारा सभी का बड़ा भाग था,
अकल्पित उन्हीं पे झुका राग था।
"मधुर" जी में किंचित नहीं द्वेष था,
अकिंचन हुआ आज जो शेष था।
कहीं राग बिखरे कहीं…
ContinueAdded by SHARAD SINGH "VINOD" on February 19, 2018 at 3:30pm — 5 Comments
"सबको इस रिक्शे पर बैठना है और मन किया तो घूमना भी है", एक तरफ से आती आवाज सुनकर रवि ने उधर देखा. शादी के उस मंडप में वह विशिष्ट दर्जा प्राप्त व्यकि था, आखिर दामाद जो ठहरा. सामने कुछ दूर पर खड़ा रिक्शा दिख गया, वही सामान्य रिक्शा था, बस उसको खूब सजा दिया गया था. साफा बांधे एक आदमी भी वहां खड़ा था जिसे लोगों को घुमाने की जिम्मेदारी दी गयी थी. रवि ने वहां से जाने की कोशिश की लेकिन पत्नी ने हाथ पकड़ लिया "अरे सब बैठ रहे हैं तो हमको भी बैठना पड़ेगा".
बारी बारी से लोग रिक्शे पर बैठते, कोई थोड़ा…
Added by विनय कुमार on February 19, 2018 at 3:14pm — 10 Comments
1222 1222 1222 1222
अभी ये आँखें बोझिल है निहाँ कुछ बेक़रारी है
न जाने कैसे गुजरेगी क़यामत रात भारी है
सितारो क्यों परेशां हो अगर है चाँद पोशीदा
तुम्हारी जाँ-फ़िशानी से उदासी हर सू तारी है
चरागों सा जले फिर भी अँधेरा कम नहीं होता
धुआँ बनके बिखर जाएं यही किस्मत हमारी है
ये अक्सर नाक पर लेकर अना जो घूमते हो तुम
कहीं से मांग कर लाये हो या सच में तुम्हारी है
गुजारी ज़िन्दगी कैसे बताएं किस तरह अय…
ContinueAdded by बृजेश कुमार 'ब्रज' on February 18, 2018 at 11:30pm — 12 Comments
गीत - ऐतबार
ना करना तू ऐतबार प्यार मे,
बस धोखे ही धोखे हैं इस प्यार मे,
मैने दिया था तुमको ये दिल, करना चाहूँ तुम्हे हासिल,
बदला तूने जो अपना इरादा, तोड़ा तूने क्यूँ अपना ये वादा.
1} जबसे रूठ के मुझसे तुम…
ContinueAdded by M Vijish kumar on February 18, 2018 at 2:00pm — No Comments
तुम्हारे इश्क ने मुझको,
क्या क्या बना दिया...
कभी आशिक,कभी पागल-
कभी शायर बना दिया।।
अब इतने नाम हैं मेरे,
कि मैं खुद भूल जाता हूँ...
कोई कुछ भी पुकारे मुझको-
मैं बस मुस्कुराता हूँ।।
मेरी माँ कहती है मुझसे,
दिवाना हो गया है तू....
मगर इक तू ही न समझे-
कि मैं तेरा दिवाना हूँ।।
अगर तुझको भी है चाहत,
तो क्यों इनकार करती है?
तेरी आँखों से लगता है-
कि तू भी प्यार करती है।।
खुदा…
ContinueAdded by रक्षिता सिंह on February 18, 2018 at 12:00pm — 8 Comments
कितनी पारदर्शिता है
इस सदी में
किसानों की बर्बाद फसल का
तगड़ा मुआवज़ा देने की
सरकार खुलेआम घोषणा कर रही है
मगर मुआवज़ा
आत्महत्या में बदल रहा है
मीडिया सुबह की पहली किरण के साथ
दिखला रहा है
भूख-ग़रीबी , बेरोज़गारी , आँसू , सिसकी
मगर सरकार कहती है
हमने करोड़ों का बजट में
प्रावधान बढ़ा दिया है
आँकड़ों में
मृत्यु दर लगातार घट रही है
सरकारी अस्पतालों में
मौत सस्ती बिक रही है
हीरा और हवाला कारोबारी
करोड़ों की चपत लगा रहे…
Added by Mohammed Arif on February 18, 2018 at 7:56am — 4 Comments
महफिलों से एक दिन जाना ही है ।
आख़िरश अंजामे दिल तनहा ही है ।
क्या हुआ जो आज मै तड़पा बहुत,
मुद्दतों से दिल मेरा तड़पा ही है ।
मै तुम्हे अपनी हकीकत क्या कहूँ,
तुमने जो सोचा तुम्हे करना ही है ।
प्यार के सपने बिखर कर चूर हैं,
प्यार भी शायद कोई सपना ही है ।
प्यार में दिल टूटना क्यों आम है,
सब ये कहते हैं कि ये…
Added by Neeraj Nishchal on February 18, 2018 at 1:56am — 3 Comments
2122 1122 22
छू के साहिल को लहर जाती है ।
रेत नम अश्क़ से कर जाती है ।।
सोचता हूँ कि बयाँ कर दूं कुछ ।
बात दिल में ही ठहर जाती है ।।
याद आने लगे हो जब से तुम ।
बेखुदी हद से गुजर जाती है ।।
कुछ तो खुशबू फिजां में लाएगी ।
जो सबा आपके घर जाती है ।।
कितनी ज़ालिम है तेरी पाबन्दी ।
यह जुबाँ रोज क़तर जाती है ।।
हुस्न को देख लिया है जब से ।
तिश्नगी और…
Added by Naveen Mani Tripathi on February 17, 2018 at 10:52pm — 5 Comments
गीत
भावना में प्रेम का रस घोल प्यारे।
प्रेम जीवन में बड़ा अनमोल प्यारे।
भावना में.........
शब्द-शर मुख से निकल कर लौटते कब?
घाव ये गहरे करें हिय में लगें जब।
कर न दें आहत किसी को शब्द तेरे,
मृृदु मधुुुर मकरन्द वाणी बोल प्यारे।
भावना में ........
मत बड़ा छोटा किसी को मान जग में।
काम आ जाए भला कब कौन मग में?
स्नेह का सम्बन्ध ही सबसे उचित है,
तथ्य यह मन की तुला में तोल प्यारे।
भावना…
Added by रामबली गुप्ता on February 17, 2018 at 9:00pm — 8 Comments
रात गहरी, घोर तम छाया हुआ !
हार कर बैठा हूँ --- पथराया हुआ !
यूँ पड़ा हूँ, लोकपथ के तीर पर
जैसे प्रस्तर-खण्ड ठुकराया हुआ !
दूर जुगनूँ एक दिपता आस का
शेष सब सुनसान, थर्राया हुआ !…
ContinueAdded by नन्दकिशोर दुबे on February 17, 2018 at 5:08pm — 4 Comments
2122 2122 122
दिल में नफ़रत होठों पे मुस्कुराहट
सबके वश में है क्या ऐसी बनावट?
कान मेरी ओर मत कीजिएगा
दिल जो टूटे तो नहीं होती आहट
आसमाँ में रंग बिखरेगा फिर से,
कह रहा था स्वप्न, मैंने कहा; हट
मान जा मन छोड़ उद्दंडता अब
दौड़ना अच्छा नहीं, ऐसे सरपट?
कोई जादू तेरी आँखों में तो है
वर्ना खुलता ही कहाँ ये मनस-पट
मौलिक अप्रकाशित
Added by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on February 17, 2018 at 1:28pm — 3 Comments
यकीन
यही सोच कर रुठीं हूँ मना लेगा वो
गलतफहमियाँ जो हैं मिटा देगा वो
प्यार से खींचकर भींच लेगा मुझे
गलतियाँ जो की हैं भुला देगा वो |
पहली गुफ्तगू
पहला जाम पी लिया खोलकर ये दिल
जाम की आरज़ू है तू रोज़ यूँ ही मिल
मझधार में भटकी सफीना दूर है साहिल
बन जा पतवार मेरी ले चल मुझे मंजिल
बुढ़ा
वो जो एक शख्स झुका-झुका सा बैठा है
उसकी पीठ पर यह घर टिका बैठा है
छातियाँ…
ContinueAdded by somesh kumar on February 16, 2018 at 11:31pm — 5 Comments
सुखविंदर जी को सोचमग्न अवस्था में देख उनकी पत्नी ने उनसे पूछा," क्या सोच रहे हो जी?"
"ख़ास कुछ नही...... बस कल अपने खेत पर जो सिपाही आया था उसी के बारे में सोच रहा हूँ.......।"
"सिपाही..... और अपने खेत में.........! कब और क्यों....?"
"कह रहा था कि अपना खेत उसको बेच दूँ.... ।"
"हैं.........! ये क्यों भला......?"
"वह सिपाही न था पर ......सिपाही के खाल में भेड़िया था........ उसका चेहरा ढका हुआ था... पर उसकी आवाज़ कुछ जानी... इतना ही कह पाये कि बाहर से चिल्लाने की आवाज़ आयी।…
Added by KALPANA BHATT ('रौनक़') on February 16, 2018 at 5:52pm — 3 Comments
2122 1212 22
बोल देती है बेज़ुबानी भी,
ख़ामशी के कई म'आनी भी,
वो मरासिम बढ़ा के छोड़ गया,
दर्द होता है जाविदानी भी
वक़्त - बेवक़्त ही निकल आये
है अजब आँख का ये पानी भी,
वो सबब है मेरी उदासी का,
उससे है दोस्ती पुरानी भी,
जन्म देकर क़ज़ा तलक लायी,
ज़िन्दगी तेरी मेज़बानी भी,
आज फिर क़ैस को ही मरना पड़ा,
हो गयी ख़त्म ये कहानी भी। .. ...
मौलिक व् अप्रकाशित
Added by Anita Maurya on February 16, 2018 at 4:00pm — 4 Comments
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